नरेंद्र मोदी का आह्वान: ‘सर्वजन हिताय’ की भावना से आगे बढ़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारत बनेगा वैश्विक एआई नेतृत्व का केंद्र
- धन्ना राम चौधरी

- 26 फ़र॰
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भारतार्थ संवाददाता, धन्नाराम चौधरी।
नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि इसकी दिशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई केवल तकनीकी प्रगति का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण, समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत एआई को केवल डिजिटल नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शक्ति के रूप में देखता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज विश्व एक नई तकनीकी क्रांति के दौर से गुजर रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे समय में आवश्यक है कि एआई का विकास मानवीय मूल्यों, नैतिक मानकों और पारदर्शिता के साथ हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में व्यापक जनहित के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत एआई में अपार संभावनाएं देखता है और इसे भविष्य की प्रगति, नवाचार तथा वैश्विक नेतृत्व के अवसर के रूप में ग्रहण कर रहा है। भारत के युवाओं की प्रतिभा, स्टार्टअप संस्कृति और डिजिटल अवसंरचना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि देश एआई के क्षेत्र में विश्व को दिशा देने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री ने एआई के जिम्मेदार उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए, न कि असमानता को बढ़ावा देना। उन्होंने नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और शोध संस्थानों से आह्वान किया कि वे मिलकर एक ऐसा एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करें जो सुरक्षित, समावेशी और विश्वसनीय हो।
सम्मेलन में देश-विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया तथा एआई के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के दौरान भारत की डिजिटल उपलब्धियों और भविष्य की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री के संबोधन ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत तकनीकी नवाचार के साथ-साथ नैतिक नेतृत्व की दिशा में भी अग्रसर है, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवता की भलाई के लिए समर्पित करने का संकल्प रखता है।
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