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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • विश्व महिला दिवस पर बसवेश्वर भवन में महिलाओं का सम्मान, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को मिला पुरस्कार

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। अंतरराष्ट्रीय विश्व महिला दिवस के उपलक्ष में विनूताना सांस्कृतिक, सामाजिक एवं क्रीड़ा संगठन द्वारा 14 मार्च को बसवेश्वर भवन, लगेरे में सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाली महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति में महिलाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं को सदैव सम्मान और प्राथमिकता दी गई है। हमारे समाज में महिला को देवी, मां, पत्नी और बहन जैसे पवित्र रूपों में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि आज की महिला घर-परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ शिक्षा, प्रशासन, व्यापार, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है, जो अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। महेंद्र मुणोत ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं की जागरूकता और आत्मविश्वास समाज के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश देते हुए कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी समान रूप से स्मरण रखना आवश्यक है। जब अधिकार और कर्तव्य दोनों का संतुलन बना रहेगा, तभी समाज में वास्तविक प्रगति और समरसता संभव हो सकेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन की ओर से विभिन्न क्षेत्रों—सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कला, खेल और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली चयनित महिलाओं को सम्मानित कर स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। सम्मान प्राप्त करने वाली महिलाओं ने इस सम्मान को अपने कार्यों के प्रति समाज के विश्वास और प्रोत्साहन का प्रतीक बताया। इस अवसर पर आयोजकों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का भी साफा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक, महिला प्रतिभागी एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।

  • पीएनजी कनेक्शन वालों को नहीं मिलेगा एलपीजी सिलेंडर: गैस संकट के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध है, उन्हें अब घरेलू एलपीजी कनेक्शन रखने या सब्सिडी वाले सिलेंडर लेने की अनुमति नहीं होगी। केंद्र सरकार ने शनिवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) अमेंडमेंट ऑर्डर, 2026 लागू किया है। यह संशोधन एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए किया गया है। इसके जरिए एलपीजी (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) ऑर्डर, 2000 के नियमों में बदलाव किया गया है। पीएनजी और एलपीजी दोनों रखने की अनुमति नहीं नए नियमों के अनुसार जिन उपभोक्ताओं के पास पहले से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन है, वे अब घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं रख सकेंगे। साथ ही सरकारी तेल विपणन कंपनियां और उनके वितरक ऐसे उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर रिफिल भी नहीं दे सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के पास वर्तमान में पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन हैं, उन्हें जल्द ही अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। नए एलपीजी कनेक्शन पर भी रोक सरकार के इस आदेश के बाद पीएनजी कनेक्शन रखने वाले किसी भी व्यक्ति को भविष्य में घरेलू एलपीजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही सरकारी तेल कंपनियों के लिए भी यह स्पष्ट निर्देश जारी किया गया है कि वे ऐसे उपभोक्ताओं को न तो नया एलपीजी कनेक्शन जारी करें और न ही सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराएं। इस प्रावधान को एलपीजी सप्लाई रेगुलेशन के शेड्यूल-1 में प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची में शामिल कर दिया गया है। गैस वितरण को बेहतर बनाने का प्रयास सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस फैसले का मुख्य उद्देश्य एलपीजी गैस के वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाली रसोई गैस उन परिवारों तक पहुंचे जिनके पास पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकार का मानना है कि जिन शहरी इलाकों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है, वहां एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता कम हो जाती है। ऐसे में एलपीजी की उपलब्धता ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लिए सुनिश्चित करना जरूरी है। वैश्विक संकट का असर सरकार का यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव के बीच उठाया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित अवरोध की आशंका ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत की एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। वित्तीय वर्ष 2025 में देश में लगभग 33 मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई, जिसमें से करीब 20.67 मिलियन टन आयात करना पड़ा। आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और इनमें से अधिकांश आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई अतिरिक्त कदम भी उठाए हैं। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और तैयार गैस केवल सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (पीएसयू ओएमसीएस) को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से संभावित गैस संकट की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।

  • पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान: बंगाल में दो चरण, 9 और 23 अप्रैल को वोटिंग; 4 मई को आएंगे नतीजे

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com) नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों— पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का रविवार को औपचारिक ऐलान कर दिया गया। भारतीय निर्वाचन आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए बताया कि सभी राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में मतदान अप्रैल माह में संपन्न होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को एक साथ कराई जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि इन पांचों क्षेत्रों में कुल लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। इन सभी क्षेत्रों में कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे। चुनाव आयोग के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 20B के तहत केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की है, जो चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण में 23 अप्रैल 2026 को 152 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल 2026 को शेष 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। राज्य में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी वर्ष 2011 से राज्य की सत्ता में है। असम में एक चरण में मतदान असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के बीच होने की संभावना है। मतगणना 4 मई 2026 को होगी। केरल में भी 9 अप्रैल को वोटिंग केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए भी 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। राज्य में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला एनडीए भी चुनावी मैदान में है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को एक चरण में मतदान होगा। राज्य में चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपने-अपने गठबंधनों और सीट बंटवारे को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। यहां कांग्रेस, डीएमके और सीपीआई गठबंधन चुनाव लड़ रहा है, जबकि विपक्ष में एनआर कांग्रेस, भाजपा और एआईएडीएमके का गठबंधन मैदान में है। चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए चुनाव केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान कराया जाएगा। छह राज्यों में उपचुनाव भी चुनाव आयोग ने इसके साथ ही गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा की कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की भी घोषणा की है। इनमें से गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल 2026 , जबकि महाराष्ट्र और गुजरात में 23 अप्रैल 2026 को मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा कि सभी राज्यों में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था सहित चुनावी प्रबंधन के सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

  • राम मंदिर परिसर में सुरक्षा के नए नियम लागू: मोबाइल और हथियार प्रतिबंधित, श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com) अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नए सुरक्षा नियम जारी किए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कुछ वस्तुओं को परिसर में ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर परिसर में व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। चंपत राय ने बताया कि अब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को मोबाइल फोन लेकर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही किसी भी प्रकार के हथियार, चाहे वे लाइसेंसी ही क्यों न हों, मंदिर परिसर में ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइसेंसी रिवॉल्वर, तलवार या बंदूक जैसे हथियारों को परिसर में लाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि धार्मिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए सिख समुदाय के लिए विशेष छूट दी गई है। ट्रस्ट के अनुसार सिख श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार गले में धारण की जाने वाली छोटी किरपान के साथ मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे। सुरक्षा कर्मियों के प्रवेश पर भी रोक ट्रस्ट के महासचिव ने यह भी बताया कि यदि कोई श्रद्धालु अपने साथ निजी सुरक्षा कर्मियों के साथ आता है तो उन सुरक्षा कर्मियों को भी मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही निर्धारित सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से संचालित की जा रही है। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था इस बीच ट्रस्ट ने आगामी चैत्र नवरात्रि को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसके चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर दर्शन करते हैं और व्रत भी रखते हैं। ट्रस्ट ने बताया कि व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में व्रत से जुड़ी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें फल, मखाना, मूंगफली और आलू के चिप्स जैसी सामग्री शामिल होगी, जो व्रत के नियमों के अनुरूप होगी। पेयजल और शौचालय की भी व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही सभा स्थल के पास शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ट्रस्ट के अनुसार मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए निर्धारित द्वारों और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी अगले एक-दो दिनों में जारी कर दी जाएगी। रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर नियमों में बदलाव किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में दर्शन का अवसर मिल सके।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा माह में बेंगलूरु में लगा नि:शुल्क मेगा हेल्थ चेकअप कैंप, सैकड़ों लोगों ने उठाया लाभ

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com) बेंगलूरु। राष्ट्रीय सुरक्षा माह के 55वें वर्ष के अवसर पर समाज सेवा और जनस्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेंगलूरु में एक नि:शुल्क मेगा हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया गया। यह स्वास्थ्य शिविर सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन और के.ई.सी. इंटरनेशनल लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वास्थ्य जांच का लाभ उठाया। यह शिविर 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक सत्वा सॉन्गबर्ड, बुडिगेरे क्रॉस रोड स्थित के.ई.सी. इंटरनेशनल लिमिटेड परिसर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मणिपाल हॉस्पिटल व्हाइटफील्ड, श्री नारायण आई केयर और रेडिक्स डेंटल की विशेषज्ञ टीम ने सहयोग प्रदान किया। सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा माह के उपलक्ष्य में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य कर्मचारियों और आम नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के अध्यक्ष राजमणि सिन्हा ने जानकारी दी कि शिविर में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें ब्लड प्रेशर जांच, डायबिटीज जांच, सामान्य चिकित्सक परामर्श, नेत्र जांच, दंत जांच, ईसीजी एवं कार्डियोलॉजी जांच के साथ-साथ ऊंचाई और वजन की जांच भी शामिल थी। विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों की जांच कर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया। फाउंडेशन के उपाध्यक्ष धनंजय कुमार ने बताया कि इस स्वास्थ्य शिविर का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और बीमारियों का समय रहते पता लगाकर उचित उपचार की दिशा में प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच करवाई और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श प्राप्त किया। आयोजकों के अनुसार ऐसे स्वास्थ्य शिविर कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि एक ही स्थान पर उन्हें नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह प्राप्त हो जाती है। कार्यक्रम के दौरान सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण पांडेय, अध्यक्ष राजमणि सिन्हा, सीआईओ नीरज शर्मा तथा के.ई.सी. इंटरनेशनल के रवि एल्ड्रिन और प्रणय मिश्रा ने सहयोग के लिए मणिपाल हॉस्पिटल के दीपक, श्री नारायण आई केयर के चला तथा रेडिक्स डेंटल के डॉ. नवीन नायर का आभार व्यक्त किया। शिविर के सफल आयोजन में सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के प्रवीण पांडेय, राजमणि सिन्हा, नीरज शर्मा, राहुल, अविनाश, धनंजय और राजेश सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय सहयोग दिया। इस अवसर पर संस्थापक प्रवीण पांडेय ने कहा कि भविष्य में भी सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन समाज के विभिन्न वर्गों के लिए इस प्रकार के जनहितकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। स्वास्थ्य शिविर समाज सेवा और जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसकी सभी ने सराहना की।

  • पुरी जगन्नाथ मंदिर में अनुष्ठानों में देरी पर सख्ती, खुंटिया सेवक 3 माह के लिए निलंबित

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com) पुरी (ओडिशा)। श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु के दैनिक अनुष्ठानों (नीतियों) में देरी और अव्यवस्थित व्यवहार के मामले में मंदिर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक खुंटिया सेवक को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है। इस घटना के कारण श्रद्धालुओं को निर्धारित समय पर महाप्रसाद नहीं मिल सका, जिससे मंदिर परिसर में काफी असुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई। मंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी ने खुंटिया सेवक रामकृष्ण खुंटिया को तीन माह के लिए सेवा से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। वहीं इस मामले में शामिल अन्य दो सेवक—माधव खुंटिया और मधुसूदन खुंटिया—को सख्त चेतावनी देते हुए शर्तों के साथ माफ कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा होने पर उनके खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। चार घंटे तक देर से हुई मंदिर की नीतियां मंदिर प्रशासन के अनुसार 28 फरवरी 2026 को कुछ सेवकों के अनुचित व्यवहार और गतिविधियों के कारण भगवान जगन्नाथ की दैनिक नीतियां लगभग चार घंटे तक विलंबित हो गई थीं। इसके चलते मंदिर में दर्शन के लिए आए हजारों श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई भक्तों को निर्धारित समय पर महाप्रसाद भी नहीं मिल पाया। घटना के दौरान ड्यूटी पर मौजूद मंदिर प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भी अपमानजनक व्यवहार किए जाने की शिकायत सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर संबंधित सेवकों से स्पष्टीकरण मांगा था। स्पष्टीकरण के बाद लिया गया निर्णय जांच के दौरान प्रशासन ने छामु खुंटिया सेवक रामकृष्ण खुंटिया सहित अन्य दो सेवकों—माधव खुंटिया (हाती) और मधुसूदन खुंटिया (सांढ़ी)—से लिखित जवाब तलब किया। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद मुख्य प्रशासक ने रामकृष्ण खुंटिया को तीन महीने के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया। आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान रामकृष्ण खुंटिया मंदिर की किसी भी सेवा, पूजा या अनुष्ठान में भाग नहीं ले सकेंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इस दौरान वे किसी सेवक या अन्य व्यक्ति को प्रभावित करने, धमकी देने या मंदिर की सेवा-पूजा और नीतियों में बाधा डालने जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी और निलंबन अवधि बढ़ाई जा सकती है। प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी मुख्य प्रशासक डॉ. पाढ़ी ने कहा कि अधिकांश सेवकों के सहयोग और बेहतर समन्वय से मंदिर की नीतियां नियमित रूप से संपन्न होती हैं, लेकिन कुछ सेवकों के अनुशासनहीन व्यवहार के कारण व्यवस्था प्रभावित होना बेहद दुखद है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंदिर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंदिर प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सेवा व्यवस्था और समन्वय को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

  • मणिशंकर अय्यर के बयान पर जयपुर में भाजपा का उग्र विरोध, गांधी सर्किल पर पुतला दहन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com) जयपुर। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए कथित बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। रविवार को जयपुर के कनोडिया कॉलेज के सामने स्थित गांधी सर्किल पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मणिशंकर अय्यर का पुतला दहन किया और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर करीब 3:30 बजे बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता गांधी सर्किल पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने “कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद”, “राहुल गांधी मुर्दाबाद” और “मणिशंकर अय्यर मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाते हुए कांग्रेस के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, युवा मोर्चा के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना पूरे देश का अपमान है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मणिशंकर अय्यर ने देश के प्रधानमंत्री का अपमान किया है और देशवासी इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। बगड़ी ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का मान-सम्मान वैश्विक स्तर पर निरंतर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता ओछी मानसिकता के साथ राजनीति कर रहे हैं, जो बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाना है, बल्कि यह देश के 140 करोड़ नागरिकों का भी अपमान है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं की भाषा की मर्यादा समाप्त हो चुकी है और वे अपने पद की गरिमा तक भूल चुके हैं। लगातार चुनावी हार से बौखलाई कांग्रेस अब इस प्रकार की अमर्यादित बयानबाजी कर रही है। बगड़ी ने कहा कि जिस पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी जैसे नेता कर रहे हों, वहां से इस तरह की बयानबाजी होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने मांग की कि मणिशंकर अय्यर सार्वजनिक रूप से देश के प्रधानमंत्री और देशवासियों से माफी मांगें। इस दौरान भाजपा के महामंत्री भूपेंद्र सैनी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान पूरे देश का अपमान है। प्रधानमंत्री केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के जनादेश का प्रतीक होते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। सैनी ने कहा कि भाजपा इस प्रकार की भाषा और मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने मांग की कि मणिशंकर अय्यर तुरंत अपने बयान पर माफी मांगें और कांग्रेस पार्टी भी इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस नेताओं की इस प्रकार की बयानबाजी जारी रहती है तो भाजपा कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में इसी तरह विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब इस प्रकार की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी और देश की गरिमा के खिलाफ किसी भी टिप्पणी का सशक्त विरोध किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश पदाधिकारी, युवा मोर्चा कार्यकर्ता और जयपुर शहर भाजपा के कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

  • उपचुनाव में जीत के लिए महिला कांग्रेस कार्यकर्ता अहम: सीएम सिद्धरामय्या

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bharatarth.com) बेंगलूरु। सिद्धरामय्या ने कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं से बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री सोमवार को कर्नाटक प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी बैठक और प्रशिक्षण शिविर को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं से कहा कि वे आगामी उपचुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरें और पार्टी की नीतियों व सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं। प्रचार के लिए अलग-अलग टीमें बनाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के लिए महिला कार्यकर्ताओं की दो अलग-अलग टीमें बनाई जाएं, जो दोनों क्षेत्रों में जाकर सक्रिय रूप से प्रचार अभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी चन्नपटना, शिग्गाँव और संदूर के उपचुनाव जीत चुकी है और इस बार भी पार्टी दोनों सीटों पर जीत हासिल करेगी। महिलाओं के सशक्तिकरण पर सरकार का जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2013 से 2018 के अपने कार्यकाल के दौरान और 2023 में सत्ता में वापसी के बाद से महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं में शामिल शक्ति योजना के तहत महिलाओं ने अब तक लगभग 700 करोड़ बार मुफ्त बस यात्रा की है। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं को सुरक्षित और सुलभ परिवहन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में भी अहम भूमिका निभा रही है। गृह लक्ष्मी योजना से आर्थिक मजबूती मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की गारंटी योजनाओं से महिलाओं की खरीद क्षमता में भी वृद्धि हुई है। गृह लक्ष्मी योजना के तहत राज्य की करीब 1.26 करोड़ महिलाओं को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्वतंत्रता से महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे परिवार व समाज में अधिक सशक्त भूमिका निभाने लगती हैं। समानता के बिना आजादी अधूरी मुख्यमंत्री ने बी. आर. अम्बेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि असली आजादी तभी मानी जा सकती है, जब समाज से लैंगिक भेदभाव और असमानता पूरी तरह समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी है और जब सभी को समान अवसर मिलते हैं, तब समाज में वास्तविक बराबरी संभव हो पाती है। सदस्य संख्या बढ़ाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक प्रदेश महिला कांग्रेस में फिलहाल एक लाख से अधिक महिला सदस्य हैं और आने वाले समय में इस संख्या को बढ़ाकर दो लाख करने का लक्ष्य रखा गया है। 9 अप्रैल को होंगे उपचुनाव गौरतलब है कि पूर्व मंत्रियों शमनूर शिवशंकरप्पा और एच. वाई. मेती के निधन के बाद खाली हुई दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को उपचुनाव होंगे। ये दोनों सीटें पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पास थीं और पार्टी इन्हें बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि महिला कार्यकर्ताओं के सक्रिय सहयोग और संगठन की मजबूत रणनीति के बल पर कांग्रेस इन दोनों सीटों पर जीत हासिल करेगी।

  • ‘अमरजीवी’ पोट्टी श्रीरामुलु: 58 दिन के अनशन से झुकी नेहरू सरकार, बना भारत का पहला भाषाई राज्य

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अमरावती। आंध्र प्रदेश के महान स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता पोट्टी श्रीरामुलु भारतीय इतिहास के उन अमर व्यक्तित्वों में शामिल हैं, जिनके त्याग और संघर्ष ने देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा बदल दी। तेलुगु भाषी लोगों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर किए गए उनके ऐतिहासिक आमरण अनशन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भी झुकने पर मजबूर कर दिया था। आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में उनके सम्मान में 58 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे “स्टैच्यू ऑफ सैक्रिफाइस” नाम दिया गया है। इस प्रतिमा का अनावरण आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने किया। यह प्रतिमा शाखामुरु पार्क में स्थापित की गई है और इसे उनके 58 दिन के ऐतिहासिक अनशन की याद में बनाया गया है। जन्म और प्रारंभिक जीवन पोट्टी श्रीरामुलु का जन्म 16 मार्च 1901 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के शहर चेन्नई में एक साधारण हिंदू परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास में प्राप्त की और बाद में मुंबई से सैनिटरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कुछ समय तक उन्होंने रेलवे विभाग में नौकरी भी की, लेकिन उनके भीतर देश सेवा का जुनून था। 1928 में पत्नी और नवजात बच्चे की मृत्यु के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया और उन्होंने सांसारिक जीवन से विरक्ति लेकर खुद को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। गांधी के सच्चे अनुयायी पोट्टी श्रीरामुलु महात्मा गांधी के विचारों से गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर साबरमती आश्रम में रहना शुरू किया और सत्य व अहिंसा के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार लिया। उन्होंने 1930 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लिया और इसके लिए कई बार जेल भी गए। गांधी जी उनके समर्पण से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने एक बार कहा था कि यदि उनके पास श्रीरामुलु जैसे 11 अनुयायी हों तो भारत एक वर्ष में ही स्वतंत्र हो सकता है। दलित उत्थान के लिए संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ श्रीरामुलु ने सामाजिक सुधार के कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने दलितों को मंदिर प्रवेश दिलाने के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में हरिजनों को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए उन्होंने लंबे समय तक उपवास किया और अंततः सफलता प्राप्त की। अलग आंध्र राज्य की मांग स्वतंत्रता के बाद भी तेलुगु भाषी लोगों की समस्याएं खत्म नहीं हुईं। उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषी क्षेत्र शामिल थे। तेलुगु भाषी लोगों को लगता था कि प्रशासन और विकास के मामलों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है। इसलिए उन्होंने अलग तेलुगु राज्य की मांग उठाई, लेकिन केंद्र सरकार और कई समितियों ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। जब सभी राजनीतिक प्रयास विफल हो गए, तब पोट्टी श्रीरामुलु ने आंदोलन की कमान संभाली। 58 दिन का ऐतिहासिक आमरण अनशन 19 अक्टूबर 1952 को श्रीरामुलु ने मद्रास में अलग आंध्र राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया। शुरुआत में सरकार ने इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन श्रीरामुलु अपने संकल्प पर अडिग रहे। लगातार 58 दिनों तक बिना अन्न-जल के उपवास करने के बाद 15 दिसंबर 1952 की रात उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही तेलुगु क्षेत्रों में व्यापक विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क उठी। झुकनी पड़ी केंद्र सरकार स्थिति बिगड़ने के बाद केंद्र सरकार को निर्णय लेना पड़ा। श्रीरामुलु की मृत्यु के चार दिन बाद, 19 दिसंबर 1952 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में अलग आंध्र राज्य के गठन की घोषणा की। इसके बाद 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र राज्य अस्तित्व में आया, जो स्वतंत्र भारत का पहला भाषाई आधार पर बना राज्य था। बदला भारत का राजनीतिक नक्शा पोट्टी श्रीरामुलु के बलिदान का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। उनके आंदोलन की सफलता के बाद देशभर में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की मांग तेज हो गई। इसके परिणामस्वरूप 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना हुई और भारत के राज्यों का व्यापक पुनर्गठन किया गया। क्यों कहा जाता है ‘अमरजीवी’ ‘अमरजीवी’ पोट्टी श्रीरामुलु: 58 दिन के अनशन से झुकी नेहरू सरकार, बना भारत का पहला भाषाई राज्यतेलुगु समाज में पोट्टी श्रीरामुलु को अत्यंत सम्मान दिया जाता है। उनके अतुलनीय त्याग के कारण उन्हें ‘अमरजीवी’ यानी अमर आत्मा की उपाधि दी गई। अमरावती में स्थापित 58 फीट ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ सैक्रिफाइस’ उनकी इसी अमर गाथा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को त्याग, समर्पण और संकल्प की प्रेरणा देती रहेगी।

  • पचपदरा विधायक डॉ. अरुण चौधरी की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात, बालोतरा-पचपदरा क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दे उठाए

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। पचपदरा विधायक डॉ. अरुण अमराराम चौधरी ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से शिष्टाचार भेंट कर बालोतरा-पचपदरा क्षेत्र के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान उन्होंने बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार, सैन्य संग्रहालय की स्थापना, रेल लाइन परियोजना तथा हवाई सेवा शुरू करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। विधायक डॉ. चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर बालोतरा जिले के ग्रामीण क्षेत्र थोब एवं बुडीवाड़ा में राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाएं खोलने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों, किसानों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक लेनदेन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि यहां बैंक शाखाएं स्थापित की जाती हैं तो स्थानीय लोगों को वित्तीय सेवाएं नजदीक ही उपलब्ध हो सकेंगी और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। इसके अलावा विधायक चौधरी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने बालोतरा में सैन्य संग्रहालय (मिलिट्री म्यूजियम) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। विधायक ने बताया कि बालोतरा-पचपदरा क्षेत्र के अनेक युवा भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं और देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में यहां सैन्य संग्रहालय स्थापित होने से युवाओं में देशभक्ति की भावना मजबूत होगी तथा नई पीढ़ी को वीर सैनिकों के इतिहास और उनके योगदान से प्रेरणा मिलेगी। साथ ही यह बालोतरा के लिए एक नया पर्यटन आकर्षण भी बन सकता है। वहीं विधायक ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर बालोतरा-पचपदरा रेल लाइन परियोजना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने अनुरोध किया कि रेल लाइन के प्रस्तावित मार्ग को इस प्रकार निर्धारित किया जाए जिससे स्थानीय नागरिकों के आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। विधायक ने सुझाव दिया कि रेल मार्ग को वैकल्पिक स्थान से निकाला जाए ताकि शहर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात बाधित न हो और आमजन को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके। इसके साथ ही विधायक डॉ. चौधरी ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से भी मुलाकात कर क्षेत्र के विभिन्न विकासात्मक विषयों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने प्रवासी राजस्थानी भाइयों की सुविधा के लिए क्षेत्र से प्रमुख शहरों तक नियमित हवाई सेवा शुरू करने तथा रेल संपर्क के विस्तार की मांग रखी। विधायक ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि बालोतरा-पचपदरा क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग रोजगार और व्यवसाय के लिए देश-विदेश के विभिन्न शहरों में निवास करते हैं। ऐसे में यहां से नियमित उड़ान सेवा शुरू होने पर प्रवासी राजस्थानी भाइयों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा आम लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अंत में विधायक डॉ. अरुण चौधरी ने केंद्रीय मंत्रियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से बालोतरा-पचपदरा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और क्षेत्रवासियों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी।

  • विनम क्रिकेटर्स कप सीजन-2 का आयोजन, 32 टीमों ने दिखाया खेल का जज्बा

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। प्रकाश नगर स्थित बेट्टा खेल मैदान में विनम क्रिकेटर्स द्वारा आयोजित “विनम क्रिकेटर्स कप सीजन-2” क्रिकेट स्पर्धा उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुई। प्रतियोगिता में कुल 32 टीमों ने भाग लेकर अपने खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज के व्यस्त जीवन में स्वस्थ रहने के लिए खेलकूद और नियमित व्यायाम अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं बल्कि अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक सोच भी विकसित करते हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टूर्नामेंट के दौरान विभिन्न टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले खेले गए, जिनमें खिलाड़ियों ने बेहतरीन बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग का प्रदर्शन किया। मैदान पर खिलाड़ियों के जोश और खेल भावना ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों की ओर से मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर खेल प्रेमी, स्थानीय नागरिक और आयोजन समिति के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया, जिसकी खिलाड़ियों और दर्शकों ने सराहना की।

  • बेंगलूरु में श्री आंजणा पटेल कलबी समाज का होली स्नेह मिलन, गैर नृत्य के साथ झलकी राजस्थान की सांस्कृतिक छटा

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। श्री आंजणा पटेल कलबी समाज सिवांची पट्टी बेंगलूरु द्वारा भिक्षु धाम में होली स्नेह मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कर्नाटक राज्यपाल के ओएसडी शंकर गुर्जर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका संघ के महामंत्री एवं श्री मरुधरा जैन संघ के अध्यक्ष डॉ. जवरीलाल लूनावत ने की। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष दुर्गाराम पटेल, पूर्व अध्यक्ष सिमरथाराम पटेल तथा खेताराम मालवी भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा राजेश्वर भगवान की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद पटेल समाज के रणछोड़राम भूरिया ने सभी अतिथियों का पारंपरिक साफा पहनाकर स्वागत किया। समारोह में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली और समाज के महिला-पुरुषों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक गैर नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान लूणी के विधायक एवं कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने वीडियो संदेश के माध्यम से सभी को होली की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने सभी समाज बंधुओं से आग्रह किया कि 28 फरवरी 2026 को शिकारपुरा में रामनवमी के अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री, गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष तथा भारत सरकार के पर्यटन मंत्री विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। मुख्य अतिथि शंकर गुर्जर ने अपने संबोधन में कहा कि पटेल समाज द्वारा होली स्नेह मिलन में प्रस्तुत गैर नृत्य देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो बेंगलूरु में ही राजस्थान की संस्कृति जीवंत हो उठी हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि समाज के हित में जो भी संभव होगा, वह राज्यपाल महोदय से अनुरोध कर सहयोग प्रदान करने का प्रयास करेंगे। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. जवरीलाल लूनावत ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। उन्होंने दक्षिण भारत में रहकर भी राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने के लिए प्रवासी राजस्थानी समाजों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम सभी को संगठित होकर अपनी संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाना चाहिए। डॉ. लूनावत ने आंजणा पटेल समाज को अत्यंत संगठित समाज बताते हुए कहा कि श्री राजाराम आश्रम शिकारपुरा के गादीपति द्वारा समाज हित में दिए गए संदेशों का पूरा समाज एकजुट होकर पालन करता है। उन्होंने बेंगलूरु में प्रवासी राजस्थानी समाज द्वारा गौसेवा के कार्यों की भी सराहना की और “प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका गौ सेवा समिति” का गठन कर सरकार से गौशाला के लिए भूमि की मांग करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्यपाल से भी सहयोग लिया जाएगा। समाज के अध्यक्ष दुर्गाराम पटेल ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों और समाज बंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे सभी के सहयोग और मार्गदर्शन से पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से एकजुट होकर समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रवासी संघ के उपाध्यक्ष कांतीलाल गुलेच्छा सहित पटेल समाज के मोहनराम, हडमानराम, दूदाराम, नेमाराम, केवलराम, विष्णुलाल तथा सिवांची पट्टी के अनेक समाज बंधु एवं नारी शक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में होली के रंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आपसी मेल-मिलाप के साथ पूरे वातावरण में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

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