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पुरी जगन्नाथ मंदिर में अनुष्ठानों में देरी पर सख्ती, खुंटिया सेवक 3 माह के लिए निलंबित

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 15
  • 2 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम (Bharatarth.com)

पुरी (ओडिशा)। श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु के दैनिक अनुष्ठानों (नीतियों) में देरी और अव्यवस्थित व्यवहार के मामले में मंदिर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक खुंटिया सेवक को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है। इस घटना के कारण श्रद्धालुओं को निर्धारित समय पर महाप्रसाद नहीं मिल सका, जिससे मंदिर परिसर में काफी असुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई।


मंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी ने खुंटिया सेवक रामकृष्ण खुंटिया को तीन माह के लिए सेवा से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। वहीं इस मामले में शामिल अन्य दो सेवक—माधव खुंटिया और मधुसूदन खुंटिया—को सख्त चेतावनी देते हुए शर्तों के साथ माफ कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा होने पर उनके खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


चार घंटे तक देर से हुई मंदिर की नीतियां

मंदिर प्रशासन के अनुसार 28 फरवरी 2026 को कुछ सेवकों के अनुचित व्यवहार और गतिविधियों के कारण भगवान जगन्नाथ की दैनिक नीतियां लगभग चार घंटे तक विलंबित हो गई थीं। इसके चलते मंदिर में दर्शन के लिए आए हजारों श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई भक्तों को निर्धारित समय पर महाप्रसाद भी नहीं मिल पाया।


घटना के दौरान ड्यूटी पर मौजूद मंदिर प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भी अपमानजनक व्यवहार किए जाने की शिकायत सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर संबंधित सेवकों से स्पष्टीकरण मांगा था।


स्पष्टीकरण के बाद लिया गया निर्णय

जांच के दौरान प्रशासन ने छामु खुंटिया सेवक रामकृष्ण खुंटिया सहित अन्य दो सेवकों—माधव खुंटिया (हाती) और मधुसूदन खुंटिया (सांढ़ी)—से लिखित जवाब तलब किया। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद मुख्य प्रशासक ने रामकृष्ण खुंटिया को तीन महीने के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया।


आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान रामकृष्ण खुंटिया मंदिर की किसी भी सेवा, पूजा या अनुष्ठान में भाग नहीं ले सकेंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इस दौरान वे किसी सेवक या अन्य व्यक्ति को प्रभावित करने, धमकी देने या मंदिर की सेवा-पूजा और नीतियों में बाधा डालने जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी और निलंबन अवधि बढ़ाई जा सकती है।


प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

मुख्य प्रशासक डॉ. पाढ़ी ने कहा कि अधिकांश सेवकों के सहयोग और बेहतर समन्वय से मंदिर की नीतियां नियमित रूप से संपन्न होती हैं, लेकिन कुछ सेवकों के अनुशासनहीन व्यवहार के कारण व्यवस्था प्रभावित होना बेहद दुखद है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंदिर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


मंदिर प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सेवा व्यवस्था और समन्वय को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

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