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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • जहरीले दूध का कहर: आंध्र प्रदेश में 16 मौतें, मिलावट से किडनी फेल होने के चौंकाने वाले मामले

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) राजामहेंद्रवरम (आंध्र प्रदेश)। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध पीने से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है, जहां अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। यह घटना जिले के लालाचेरुवु क्षेत्र की है, जहां सप्लाई किए गए दूध के सेवन के बाद लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी से 21 मार्च के बीच कुल 20 लोगों को उल्टी, पेट दर्द, दस्त, पेशाब न होना और अन्य गंभीर लक्षणों के चलते अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 मरीजों का अभी इलाज जारी है और एक व्यक्ति स्वस्थ होकर घर लौट चुका है। किडनी फेल होने से बढ़ी मौतों की संख्या चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि मिलावटी दूध में जहरीले तत्व मौजूद थे, जिसके कारण पीड़ितों की किडनी ने अचानक काम करना बंद कर दिया। किडनी फेल होने के बाद शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग भी प्रभावित हुए, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई और कई लोगों की जान चली गई। फरवरी में ही सामने आ गए थे संकेत स्थानीय अस्पतालों के अनुसार, फरवरी महीने में ही किडनी फेलियर के असामान्य मामले सामने आने लगे थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बरतते हुए जांच शुरू की। लैब रिपोर्ट में दूध में जहरीली मिलावट की पुष्टि होने के बाद मामला गंभीर हो गया। बच्चे और बुजुर्ग भी चपेट में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में बच्चे और बुजुर्ग भी प्रभावित हुए हैं। कुछ मरीजों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। चिकित्सा टीमें लगातार मरीजों की निगरानी कर रही हैं। पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संदिग्ध दूध विक्रेता को हिरासत में ले लिया है। इस संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 (अप्राकृतिक मृत्यु) के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध के साथ-साथ दही, घी और पनीर के नमूने भी एकत्र कर जांच के लिए भेज दिए हैं, ताकि मिलावट के स्रोत और प्रकार का पता लगाया जा सके। इलाके में दहशत, प्रशासन अलर्ट घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और सुरक्षित स्रोतों से ही दूध एवं दुग्ध उत्पादों का सेवन करें। साथ ही, संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने को कहा गया है। यह घटना न केवल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मिलावटखोरी के खतरनाक परिणामों की भी गंभीर चेतावनी देती है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि दोषियों को सख्त सजा दिलाते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जाए।

  • केरल कांग्रेस में नई हलचल: शशि थरूर की रणनीति से वेणुगोपाल की दावेदारी पर सवाल

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में इन दिनों अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एक नई रणनीतिक दिशा अपनाई है, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, थरूर अब सीधे टकराव से बचते हुए संगठन के भीतर संतुलन साधने और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करने में जुट गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि थरूर को यह स्पष्ट आभास हो चुका है कि यदि केरल में कांग्रेस सत्ता में आती भी है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत नहीं मानी जा रही। ऐसे में उन्होंने अपने विकल्प खुले रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी की ओर उनके झुकाव की चर्चाएं भी सामने आई हैं, लेकिन फिलहाल इसे केवल संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। थरूर ने हाल ही में यह भी संकेत दिया है कि केरल में भाजपा अभी भी एक सीमित प्रभाव वाली पार्टी है। ऐसे में यदि आगामी चुनावों में भाजपा अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो प्रदेश नेतृत्व, खासकर राजीव चंद्रशेखर की स्थिति कमजोर हो सकती है। इस आकलन के साथ थरूर अपने राजनीतिक कदम सोच-समझकर बढ़ा रहे हैं। वेणुगोपाल की बढ़ती ताकत और चुनौती कांग्रेस संगठन में महासचिव के पद पर काबिज केसी वेणुगोपाल को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। यही कारण है कि केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। यदि कांग्रेस राज्य में सत्ता हासिल करती है, तो वेणुगोपाल का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल हो सकता है। हालांकि, पार्टी के भीतर अन्य वरिष्ठ नेता भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं। रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और के. सुधाकरन जैसे नेता भी मुख्यमंत्री पद की रेस में सक्रिय माने जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान की स्थिति बनती नजर आ रही है। थरूर की नई चाल: समीकरण बदलने की कोशिश सूत्रों के मुताबिक, शशि थरूर ने अब पार्टी के भीतर उन नेताओं के साथ सामंजस्य बनाना शुरू कर दिया है, जो केसी वेणुगोपाल की बढ़ती दावेदारी को सीमित करना चाहते हैं। इस रणनीति के तहत थरूर ने यह सुझाव भी दिया है कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो मुख्यमंत्री किसी विधायक को बनाया जाए, न कि सांसद को। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव दोहरे उद्देश्य को साधता है। एक ओर इससे थरूर खुद को सीधे प्रतिस्पर्धा से अलग रखते हुए भविष्य के लिए जगह बना सकते हैं, वहीं दूसरी ओर वेणुगोपाल की संभावित दावेदारी को भी कमजोर किया जा सकता है। आगे क्या? केरल कांग्रेस में चल रही यह अंदरूनी राजनीति आगामी विधानसभा चुनावों से पहले और तेज होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुटबाजी को नियंत्रित करते हुए एकजुटता बनाए रखने की होगी। वहीं, शशि थरूर की नई रणनीति ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में केरल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

  • केरल चुनाव 2026: एलडीएफ की हैट्रिक की दावेदारी पर अंदरूनी बगावत की छाया, यूडीएफ ने बढ़ाया सियासी दबाव

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की रणनीति के साथ मैदान में उतरा है। राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं के दम पर एलडीएफ अपनी हैट्रिक को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है, लेकिन टिकट वितरण के बाद उभरी अंदरूनी नाराजगी और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की आक्रामक रणनीति ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। इस चुनाव में जहां एलडीएफ अपने पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन को मुद्दा बना रहा है, वहीं एक दशक से सत्ता से बाहर यूडीएफ सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। विकास और कल्याण के दम पर एलडीएफ का भरोसा एलडीएफ नेतृत्व का दावा है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया है, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में हर गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, स्कूलों का स्मार्ट रूपांतरण और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन योजनाएं शामिल हैं। साथ ही, राज्य में आधारभूत ढांचे—सड़क, पुल और औद्योगिक परियोजनाओं—में निवेश को भी विकास का प्रमुख आधार बताया जा रहा है। वाम नेताओं का कहना है कि सामाजिक सौहार्द, कल्याणकारी योजनाएं और निवेश आधारित विकास—इन तीन स्तंभों पर एलडीएफ चुनाव लड़ रहा है और इन्हीं के आधार पर जनता का समर्थन मिलने की उम्मीद है। अंदरूनी असंतोष बना चुनौती हालांकि, चुनाव से ठीक पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और सहयोगी दलों में असंतोष उभरकर सामने आया है। टिकट वितरण से नाराज कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, जबकि कुछ ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे एलडीएफ की चुनावी गणित पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पार्टी छोड़ने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे नेताओं ने अपनी राजनीतिक विरासत को खुद नुकसान पहुंचाया है। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह असंतोष कई सीटों पर परिणाम प्रभावित कर सकता है। यूडीएफ का आक्रामक रुख, थरूर के तीखे बयान दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ इस बार सत्ता में वापसी को लेकर बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एलडीएफ सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य की अर्थव्यवस्था को रेमिटेंस, लॉटरी और शराब पर निर्भर बना दिया गया है। थरूर ने कहा कि ऐसी आर्थिक संरचना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि यूडीएफ को इस बार 85 से 100 सीटें मिल सकती हैं। साथ ही उन्होंने चुनाव कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कम समय मिलने पर चिंता जताई। बीजेपी भी बढ़ा रही सक्रियता इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी को उम्मीद है कि वह इस बार पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो रही है। कड़ा मुकाबला तय केरल की राजनीति में परंपरागत रूप से सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड रहा है, लेकिन 2016 और 2021 में एलडीएफ ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दो बार जीत दर्ज की। अब 2026 में एलडीएफ जहां इतिहास रचने की कोशिश में है, वहीं यूडीएफ इस सिलसिले को तोड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर मतदाताओं का रुझान थोड़ा भी बदला, तो इसका सीधा फायदा यूडीएफ को मिल सकता है। ऐसे में केरल का चुनाव इस बार बेहद कांटे का और दिलचस्प होने जा रहा है।

  • आसाम में तृणमूल का बड़ा दांव: शेरमन अली अहमद को टिकट, विपक्षी गठबंधन में बढ़ी दरार

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। आसाम की राजनीति में चुनावी सरगर्मी के बीच ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) ने अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी कर नया राजनीतिक संदेश दिया है। इस सूची में पूर्व कांग्रेस विधायक शेरमन अली अहमद को मंडिया विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने एक बड़ा दांव खेला है। वहीं, चामरिया सीट से वरिष्ठ उपाध्यक्ष दुलू अहमद की उम्मीदवारी वापस लेकर पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत भी दिए हैं। रविवार को जारी सूची में कुल सात उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जिसके साथ ही एआईटीसी के कुल उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। हालांकि, इस घोषणा के साथ ही विपक्षी खेमे में असंतोष और दरारें खुलकर सामने आने लगी हैं। गठबंधन में बढ़ा तनाव, विरोध के स्वर तेज शेरमन अली अहमद की उम्मीदवारी को लेकर विपक्षी दलों में नाराजगी देखी जा रही है। कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया ने कथित रूप से पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि अली को “मित्रवत मुकाबले” के तहत टिकट दिया गया, तो वे इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं, आसाम जातीय परिषद (एजेपी) के प्रमुख नेता लुरिंज्योति गोगोई ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए साफ कहा है कि वे ऐसे किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जो शेरमन अली की उम्मीदवारी को स्वीकार करता हो। शेरमन अली का भावुक बयान उम्मीदवारी को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शेरमन अली अहमद ने गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिश की गई और उन्हें टिकट से दूर रखने के लिए भारी धन खर्च किया गया। अली ने कहा, “मैं आसाम का निवासी हूं, फिर भी कोई पार्टी मुझे स्वीकार नहीं करती। मेरी गलती क्या थी? दुखी मन से मैंने एआईटीसी में शामिल होने का निर्णय लिया।” राजनीतिक सफर में तेज मोड़ तीन बार विधायक रह चुके शेरमन अली अहमद का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन अधिकांश समय निलंबन की स्थिति में रहे। हाल ही में उन्होंने रायजोर दल का दामन थामा था, लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। दूसरी सूची के अन्य उम्मीदवार तृणमूल कांग्रेस की दूसरी सूची में मंडिया के अलावा हाजो-सुआलकुची से रोजी अहमद, गुवाहाटी केंद्रीय से अविजीत मजूमदार, चाबुआ-लहवाल से इनुस कुमार कंदन, मारियानी से परेश बोरा, करिमगंज उत्तर से परिमल रंजन रॉय और करिमगंज दक्षिण से अजीज अहमद खान को उम्मीदवार बनाया गया है। चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल नामांकन की समय सीमा नजदीक आते ही आसाम में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस का यह कदम जहां पार्टी के विस्तार की रणनीति को दर्शाता है, वहीं विपक्षी एकता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक समीकरण चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित करता है।

  • तमिलनाडु में गठबंधन की सियासत में भूचाल: टीवीके ने द्रमुक का साथ छोड़ा, सीट बंटवारे पर टूटा रिश्ता

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तमिलगा वाझ्वुरिमै काची (टीवीके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी प्रमुख टी. वेलमुरुगन ने रविवार को चेन्नई में आयोजित प्रेस वार्ता में यह ऐलान किया। वेलमुरुगन ने बताया कि उनकी पार्टी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से द्रमुक गठबंधन का हिस्सा रही है और विभिन्न चुनावों में मिलकर काम किया है। हालांकि, इस बार विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि टीवीके ने दो सीटों की मांग रखी थी, लेकिन द्रमुक की ओर से केवल एक सीट का प्रस्ताव दिया गया, जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक दौर की वार्ताओं से ही टीवीके ने अपनी सीटों की मांग और 10 प्रमुख मुद्दों को सामने रखा था। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी यह स्पष्ट कर दिया गया था कि मांगें पूरी नहीं होने पर पार्टी गठबंधन से अलग हो जाएगी, लेकिन द्रमुक की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। द्रमुक पर आरोप लगाते हुए वेलमुरुगन ने कहा, “हमारी 10 प्रमुख मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। हमने विधानसभा के भीतर और बाहर कई जनहित मुद्दों पर संघर्ष किया, लेकिन हमारी आवाज को महत्व नहीं दिया गया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर अधिकारियों का प्रभाव बढ़ गया है और “तमिलनाडु में अब अधिकारियों का ही शासन चल रहा है।” टीवीके प्रमुख ने यह भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी अब न तो द्रमुक गठबंधन का हिस्सा रहेगी और न ही अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में शामिल होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी स्वतंत्र रूप से या समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाएगी। द्रमुक की नीतियों पर सवाल उठाते हुए वेलमुरुगन ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पूछा कि सामाजिक न्याय की बात करने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जाति-आधारित जनगणना कराने से क्यों पीछे हट रही है। साथ ही वन्नियार समुदाय को 10.5 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आखिर किन कारणों से यह निर्णय लागू नहीं किया गया। इसके अलावा, उन्होंने ‘तमिलनाडु जॉब्स ओनली एक्ट’ को लागू न करने पर भी राज्य सरकार की आलोचना की और मांग की कि तमिल युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता देने के लिए जल्द कानून बनाया जाए। वेलमुरुगन ने जोर देते हुए कहा कि उनकी पार्टी के लिए सीटों की संख्या से अधिक उनके सिद्धांत और 10 मांगें महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जो भी दल उनकी मांगों को स्वीकार करेगा, उसके साथ बातचीत की जा सकती है। सहयोगी संगठनों से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन समीकरण बदलने की संभावना तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके के इस फैसले से आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला और अधिक दिलचस्प तथा बहुकोणीय हो सकता है।

  • तमिलनाडु चुनाव 2026: एनडीए में सीटों पर लगभग सहमति, डीएमके गठबंधन में बढ़ी खींचतान से सियासत गरमाई

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर प्रदेश की राजनीति अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। राज्य के दोनों प्रमुख गठबंधनों—एक ओर एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए और दूसरी ओर डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए)—के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही उठापटक ने चुनावी माहौल को और अधिक रोचक बना दिया है। जहां एनडीए खेमे में सीटों के तालमेल को लेकर सहमति लगभग अंतिम चरण में बताई जा रही है, वहीं डीएमके गठबंधन में सहयोगी दलों के बीच असंतोष के स्वर उभरकर सामने आ रहे हैं। एनडीए में सीटों का फॉर्मूला लगभग तय सूत्रों के अनुसार, एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में सीटों के बंटवारे का खाका लगभग तैयार हो चुका है। प्रस्तावित फार्मूले के तहत एआईएडीएमके करीब 170 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 25 से 29 सीटें मिलने की संभावना है। इसके अलावा, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) को लगभग 18 सीटें और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) को 10 सीटें दिए जाने पर सहमति बनती दिख रही है। अन्य छोटे दलों को एक से तीन सीटें मिलने की संभावना है। एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरण ने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संकेत दिए कि गठबंधन एक मजबूत और संगठित रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रहा है। उन्होंने विपक्षी खेमे पर हमला बोलते हुए एनडीए गठबंधन की तुलना महाभारत के पांडवों से की और जीत का दावा किया। बताया जा रहा है कि अगले दो से तीन दिनों में चेन्नई में प्रस्तावित बैठक के बाद सीट बंटवारे पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। डीएमके गठबंधन में असंतोष और खींचतान दूसरी ओर, डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों को लेकर असहमति गहराती जा रही है। गठबंधन के सहयोगी दल तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने सीट आवंटन से नाराज होकर गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, टीवीके दो सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन डीएमके की ओर से केवल एक सीट का प्रस्ताव दिया गया, जिससे नाराजगी बढ़ गई। वहीं, वामपंथी दल सीपीएम भी अपनी सीटों की मांग पर अड़ा हुआ है। पार्टी के भीतर इस बात पर मंथन जारी है कि डीएमके के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा जाए। अब तक डीएमके अपने सहयोगियों को कुल 43 सीटें आवंटित कर चुकी है। इसमें कांग्रेस को 28, सीपीआई को 5 और एमडीएमके को 4 सीटें दी गई हैं। विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के साथ बातचीत जारी है, जहां पार्टी 7 से 8 सीटों पर समझौता कर सकती है। चुनावी तस्वीर पर असर तमिलनाडु की राजनीति इस समय पूरी तरह से गठबंधनों के जोड़-तोड़ और सीटों के समीकरणों के इर्द-गिर्द घूम रही है। जहां एनडीए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है, वहीं डीएमके के लिए अपने सहयोगियों को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में होने वाले फैसले चुनावी समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अब सबकी नजर चेन्नई में होने वाली बैठकों और अंतिम सीट बंटवारे की घोषणा पर टिकी है, जो तय करेगी कि चुनावी मुकाबले में किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा।

  • पल्लेकेले में आज ‘करो या मरो’ की जंग

    भारतार्थ बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। श्रीलंका। टी20 विश्व कप 2026 के रोमांचक ग्रुप चरण में आज क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच होने वाले महत्वपूर्ण मुकाबले पर टिकी हैं। यह हाई-वोल्टेज मैच श्रीलंका के कंडी स्थित पल्लेकेले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा है, क्योंकि परिणाम से सेमीफाइनल की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। अंक तालिका में रोमांच चरम पर ग्रुप चरण अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है और अंक तालिका बेहद प्रतिस्पर्धी स्थिति में है। पाकिस्तान ने अब तक अपने तेज गेंदबाजी आक्रमण के दम पर प्रभाव छोड़ा है, जबकि श्रीलंका ने घरेलू परिस्थितियों में संतुलित प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज जीत दर्ज करने वाली टीम को अंतिम चार में पहुंचने की दिशा में निर्णायक बढ़त मिल सकती है। गेंदबाजी बनाम घरेलू बढ़त पाकिस्तान की ताकत उसकी तेज गेंदबाजी मानी जा रही है। शाहीन अफरीदी और हारिस रऊफ जैसे गेंदबाज शुरुआती ओवरों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। वहीं श्रीलंका की टीम घरेलू पिच और दर्शकों के समर्थन का लाभ उठाने की कोशिश करेगी। वानिंदु हसरंगा की स्पिन और मध्यक्रम की स्थिरता मेजबान टीम के लिए अहम साबित हो सकती है। पिच और मौसम की भूमिका पल्लेकेले की पिच पारंपरिक रूप से बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है, लेकिन नई गेंद से तेज गेंदबाजों को स्विंग मिल सकती है। मध्य ओवरों में स्पिनर प्रभावी हो सकते हैं। शाम के समय ओस की संभावना को देखते हुए टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का विकल्प चुन सकती है, ताकि लक्ष्य का पीछा करते समय परिस्थितियों का लाभ मिल सके। प्लेइंग इलेवन पाकिस्तान (संभावित) : बाबर आजम (कप्तान), मोहम्मद रिजवान, फखर जमान, इफ्तिखार अहमद, शादाब खान, शाहीन अफरीदी, हारिस रऊफ। श्रीलंका (संभावित) दासुन शनाका (कप्तान), कुसल मेंडिस, पथुम निसांका, धनंजय डी सिल्वा, वानिंदु हसरंगा, मथीशा पथिराना। अंतिम एकादश टॉस के बाद घोषित होगी। हेड-टू-हेड रिकॉर्ड दोनों टीमों के बीच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कड़ा संघर्ष देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान का पलड़ा थोड़ा भारी रहा है, हालांकि श्रीलंका ने भी कई महत्वपूर्ण अवसरों पर पाकिस्तान को मात दी है। ऐसे में आज का मैच इतिहास से अधिक वर्तमान प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। लाइव प्रसारण मैच का सीधा प्रसारण प्रमुख खेल चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। दर्शक लाइव स्कोर और कमेंट्री के माध्यम से भी मैच का आनंद ले सकेंगे। निर्णायक क्षणों की प्रतीक्षा कुल मिलाकर, यह मुकाबला सिर्फ दो एशियाई दिग्गजों की भिड़ंत नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की राह तय करने वाला निर्णायक संघर्ष है। खिलाड़ियों पर दबाव रहेगा, रणनीतियों की परीक्षा होगी और दर्शकों को रोमांच से भरपूर मैच देखने को मिल सकता है। क्रिकेट जगत की नजरें अब पल्लेकेले पर टिकी हैं, जहां आज रात सेमीफाइनल की कहानी लिखी जाएगी।

  • केरल लॉटरी कारुण्या KR-744 परिणाम घोषित– ₹1 करोड़ का विजेता निकला!

    भारतार्थ संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। तिरुवनन्तपुरम। केरल राज्य लॉटरी विभाग ने आज कारुण्या KR-744 लॉटरी का परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे आयोजित इस सप्ताहांत की प्रमुख लॉटरी ड्रॉ में ₹1 करोड़ का पहला पुरस्कार विजेता को मिला है और सभी पुरस्कार श्रेणियों की सूची प्रकाशित कर दी गई है। प्रमुख विजेता अंक और पुरस्कार: पहला पुरस्कार (₹1,00,00,000): KC 333913 (पट्टाम्बी)–यह टिकट 50 रुपये की एक साधारण टिकट से करोड़पति बनने वाली किस्मत साबित हुई। दूसरा पुरस्कार (₹25,00,000): KL 868765 तीसरा पुरस्कार (₹10,00,000): KK 846428 अन्य श्रेणियों में चौथा से लेकर छठा पुरस्कार तक मान्य विजेता संख्या सूचीबद्ध है। कारुण्या लॉटरी को केरल राज्य लॉटरी विभाग द्वारा प्रत्येक शनिवार आयोजित किया जाता है और यह सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आय का एक स्थिर स्रोत भी है। विजेता संख्या सहित सभी श्रेणियों की विस्तृत सूची विभाग की वेबसाइट और सरकारी गज़ट में भी प्रकाशित की गई है। lotteryagent.kerala.gov.in दावा प्रक्रिया और सत्यापन: जीतने वाले टिकट धारकों को अपना विजेता टिकट लेकर निकटतम अधिकृत लॉटरी कार्यालय या निर्धारित बैंक (राष्ट्रीय/राज्य/ज़िला सहकारी बैंक) में जाना होगा। पहले और दूसरे पुरस्कार के लिए टिकट को स्वयं जमा करना आवश्यक है या बीमित रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से राज्य लॉटरी के निदेशक को भेजा जा सकता है। दावे के साथ पहचान (आधार, पैन कार्ड) और फोटो सुसज्जित दस्तावेज़ देना अनिवार्य है। पुरस्कार राशि पर लागू कर (टीडीएस) और एजेंट कमीशन काटे जाने के बाद शुद्ध राशि विजेताओं को दी जाएगी। समस्त दावे ड्रॉ की तारीख़ से 30 दिन के भीतर प्रस्तुत किए जाने चाहिए। इस सप्ताह कारुण्या KR-744 लॉटरी ड्रॉ ने एक भाग्यशाली टिकट धारक को ₹1 करोड़ का इनाम दिलाया है। विभाग ने विजेता सूची के साथ ही सभी पुरस्कार श्रेणियों और दावे से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से साझा किए हैं, जिससे विजेताओं को सरल एवं पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करना है।

  • शिवमोग्गा में तीन दिवसीय होली महोत्सव का भव्य आयोजन

    भारतार्थ बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। शिवमोग्गा (कर्नाटक)। राजस्थानी विष्णु समाज सेवा ट्रस्ट (रजि.), शिवमोग्गा द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली का पावन पर्व बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। तीन दिवसीय यह होली महोत्सव 02 मार्च 2026 से 04 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा। आयोजन स्थल बाबा रामदेवजी मंदिर परिसर, के.आर. पुरम रोड, शिवमोग्गा निर्धारित किया गया है। 02 मार्च: महिला लूर नृत्य व होली दहन कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार, 02 मार्च 2026 (फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा) को दोपहर 3.00 बजे से 6.00 बजे तक महिला लूर नृत्य से होगा। शाम 6.30 बजे से 8.30 बजे तक विधिवत होली दहन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें समाज के वरिष्ठजनों की उपस्थिति रहेगी। 03 मार्च: कलश यात्रा, आमसभा और गैर नृत्य मंगलवार, 03 मार्च को सुबह 7.30 बजे कलश यात्रा निकाली जाएगी, तत्पश्चात आमसभा का आयोजन होगा। दोपहर 3.00 बजे से 6.00 बजे तक पुनः महिला लूर नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। शाम 7.30 बजे से रात 10.30 बजे तक पारंपरिक गैर नृत्य का भव्य आयोजन होगा। आयोजन समिति द्वारा नाश्ते की विशेष व्यवस्था रखी गई है। 04 मार्च: रंगोत्सव और सांस्कृतिक समापन बुधवार, 04 मार्च को सुबह 8.00 बजे से 11.30 बजे तक रंग खेलने एवं बच्चों को ढूंढने का पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दोपहर 3.00 बजे से रात 10.00 बजे तक महिला लूर नृत्य एवं गैर नृत्य के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन होगा। इस दिन पानी, केसर ठंडाई एवं नाश्ते की विशेष व्यवस्था रहेगी। समाज में उत्साह का वातावरण आयोजन समिति के अनुसार यह होली महोत्सव समाज में एकता, संस्कृति और परंपराओं को सशक्त बनाने का माध्यम है। राजस्थानी लोकनृत्य ‘लूर’ और ‘गैर’ की प्रस्तुति से शिवमोग्गा में राजस्थान की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलेगी। समस्त विष्णु समाज, शिवमोग्गा इस आयोजन का कर्ता-धर्ता है। कार्यक्रम संबंधी अधिक जानकारी हेतु संपर्क सूत्र 9448681674 पर संपर्क किया जा सकता है। आयोजकों ने समस्त समाज बंधुओं से सहपरिवार पधारकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने की अपील की है। प्रेषक: शांतिलाल एच. साकरिया, शिवमोग्गा।

  • कविका लेआउट में श्री मसाना कलिकांबा महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न

    भारतार्थ बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। कविका लेआउट क्षेत्र में आयोजित श्री मसाना कलिकांबा महोत्सव श्रद्धा, आस्था और उल्लास के वातावरण में भव्य रूप से संपन्न हुआ। क्षेत्र के नागरिकों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देवी मां के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति भाव और उत्साह का माहौल देखने को मिला। महोत्सव के दौरान विशेष पूजन, आरती एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। आयोजन स्थल को आकर्षक सजावट से सजाया गया था, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित समाजसेवी महेंद्र मुणोत ने देवी मां के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस प्रकार के महोत्सवों का आयोजन आवश्यक है। इस अवसर पर कुमार, विजय कृष्ण एवं क्षेत्र के नागरिकों ने महेंद्र मुणोत का शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में क्षेत्र के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय भूमिका रही। महोत्सव के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों को और भव्य रूप से आयोजित करने का संकल्प लिया।

  • नगर देवता अणम्मादेवी–बंडे महाकालम्मा देवी के 36वें वार्षिक उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब

    भारतार्थ बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। बैटरायनपूरा होसा बडावणे निवासी गला क्षेमाभिवृधि ट्रस्ट द्वारा नगर देवता अण्णम्मादेवी एवं बंडे महाकालम्मा देवी के 36वें वार्षिक उत्सव का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही और पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा। उत्सव की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना, अभिषेक और मंगल आरती से हुई। श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की उन्नति की कामना की। इस अवसर पर विशेष सजावट और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि ने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित समाजसेवी महेंद्र मुणोत ने देवी मां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने अन्नदान कार्यक्रम में स्वयं सेवा प्रदान करते हुए श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण में सहभागिता निभाई। अपने संबोधन में मुणोत ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और सेवा भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उत्सव के अंतर्गत आयोजित अन्नदान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि यह वार्षिक उत्सव पिछले 36 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें क्षेत्रवासियों का विशेष सहयोग रहता है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने महेंद्र मुणोत को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, दानदाताओं और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। धार्मिक आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए यह वार्षिक उत्सव क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना।

  • युवा प्रतिभाओं का संगम ‘चतुरार्थ 2026’ में दिखा उत्साह का रंग

    भारतार्थ बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। ( Bhaarataarth.com ) बेंगलूरु। एम ई एस महाविद्यालय राजाजीनगर द्वारा ‘चतुरार्थ 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 20 से अधिक महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक स्पर्धाओं का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी महेंद्र मुणोत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा व्यक्ति को निखारती है और ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता तथा टीम भावना का विकास करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें और लक्ष्य की ओर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। उनके प्रेरणादायी उद्बोधन से सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। महाविद्यालय की प्राचार्य शारदा ने स्वागत भाषण में कहा कि ‘चतुरार्थ 2026’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का आदान-प्रदान कर सकें। प्रोफेसर वज्रेश्वरी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य शारदा, प्रोफेसर वज्रेश्वरी एवं विद्यार्थियों द्वारा मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। ‘चतुरार्थ 2026’ का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और विद्यार्थियों ने इसे ज्ञान, प्रतिस्पर्धा एवं प्रेरणा का एक सशक्त मंच बताया।

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