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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

24अक्टूबर /2026 /शनिवार

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट शुरू करते हुए अपनी आगामी पुस्तक Belonging: A Journey of Love की पहली झलक साझा की। यह पुस्तक 10 नवंबर को जारी होने वाली है। अपनी पहली पोस्ट के माध्यम से सोनिया गांधी ने पाठकों को अपने निजी जीवन, पारिवारिक अनुभवों और राजनीतिक यात्रा से जुड़े उन प्रसंगों की जानकारी दी है, जिन्हें उन्होंने इस पुस्तक में शामिल किया है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट शुरू करते हुए अपनी आगामी पुस्तक Belonging: A Journey of Love की पहली झलक साझा की। यह पुस्तक 10 नवंबर को जारी होने वाली है। अपनी पहली पोस्ट के माध्यम से सोनिया गांधी ने पाठकों को अपने निजी जीवन, पारिवारिक अनुभवों और राजनीतिक यात्रा से जुड़े उन प्रसंगों की जानकारी दी है, जिन्हें उन्होंने इस पुस्तक में शामिल किया है।

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केरल चुनाव 2026: एलडीएफ की हैट्रिक की दावेदारी पर अंदरूनी बगावत की छाया, यूडीएफ ने बढ़ाया सियासी दबाव

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
22 मार्च
3 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 23 मार्च

फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की रणनीति के साथ मैदान में उतरा है। राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं के दम पर एलडीएफ अपनी हैट्रिक को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है, लेकिन टिकट वितरण के बाद उभरी अंदरूनी नाराजगी और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की आक्रामक रणनीति ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।


राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। इस चुनाव में जहां एलडीएफ अपने पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन को मुद्दा बना रहा है, वहीं एक दशक से सत्ता से बाहर यूडीएफ सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।


विकास और कल्याण के दम पर एलडीएफ का भरोसा

एलडीएफ नेतृत्व का दावा है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया है, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।


सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में हर गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, स्कूलों का स्मार्ट रूपांतरण और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन योजनाएं शामिल हैं। साथ ही, राज्य में आधारभूत ढांचे—सड़क, पुल और औद्योगिक परियोजनाओं—में निवेश को भी विकास का प्रमुख आधार बताया जा रहा है।


वाम नेताओं का कहना है कि सामाजिक सौहार्द, कल्याणकारी योजनाएं और निवेश आधारित विकास—इन तीन स्तंभों पर एलडीएफ चुनाव लड़ रहा है और इन्हीं के आधार पर जनता का समर्थन मिलने की उम्मीद है।


अंदरूनी असंतोष बना चुनौती

हालांकि, चुनाव से ठीक पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और सहयोगी दलों में असंतोष उभरकर सामने आया है। टिकट वितरण से नाराज कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, जबकि कुछ ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे एलडीएफ की चुनावी गणित पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पार्टी छोड़ने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे नेताओं ने अपनी राजनीतिक विरासत को खुद नुकसान पहुंचाया है। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह असंतोष कई सीटों पर परिणाम प्रभावित कर सकता है।


यूडीएफ का आक्रामक रुख, थरूर के तीखे बयान

दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ इस बार सत्ता में वापसी को लेकर बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एलडीएफ सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य की अर्थव्यवस्था को रेमिटेंस, लॉटरी और शराब पर निर्भर बना दिया गया है।


थरूर ने कहा कि ऐसी आर्थिक संरचना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि यूडीएफ को इस बार 85 से 100 सीटें मिल सकती हैं। साथ ही उन्होंने चुनाव कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कम समय मिलने पर चिंता जताई।


बीजेपी भी बढ़ा रही सक्रियता

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी को उम्मीद है कि वह इस बार पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो रही है।


कड़ा मुकाबला तय

केरल की राजनीति में परंपरागत रूप से सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड रहा है, लेकिन 2016 और 2021 में एलडीएफ ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दो बार जीत दर्ज की। अब 2026 में एलडीएफ जहां इतिहास रचने की कोशिश में है, वहीं यूडीएफ इस सिलसिले को तोड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर मतदाताओं का रुझान थोड़ा भी बदला, तो इसका सीधा फायदा यूडीएफ को मिल सकता है। ऐसे में केरल का चुनाव इस बार बेहद कांटे का और दिलचस्प होने जा रहा है।

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