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तमिलनाडु चुनाव 2026: एनडीए में सीटों पर लगभग सहमति, डीएमके गठबंधन में बढ़ी खींचतान से सियासत गरमाई

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 23
  • 2 min read

फाइल फोटो


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर प्रदेश की राजनीति अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। राज्य के दोनों प्रमुख गठबंधनों—एक ओर एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए और दूसरी ओर डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए)—के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही उठापटक ने चुनावी माहौल को और अधिक रोचक बना दिया है।


जहां एनडीए खेमे में सीटों के तालमेल को लेकर सहमति लगभग अंतिम चरण में बताई जा रही है, वहीं डीएमके गठबंधन में सहयोगी दलों के बीच असंतोष के स्वर उभरकर सामने आ रहे हैं।


एनडीए में सीटों का फॉर्मूला लगभग तय


सूत्रों के अनुसार, एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में सीटों के बंटवारे का खाका लगभग तैयार हो चुका है। प्रस्तावित फार्मूले के तहत एआईएडीएमके करीब 170 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 25 से 29 सीटें मिलने की संभावना है।


इसके अलावा, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) को लगभग 18 सीटें और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) को 10 सीटें दिए जाने पर सहमति बनती दिख रही है। अन्य छोटे दलों को एक से तीन सीटें मिलने की संभावना है।


एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरण ने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संकेत दिए कि गठबंधन एक मजबूत और संगठित रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रहा है। उन्होंने विपक्षी खेमे पर हमला बोलते हुए एनडीए गठबंधन की तुलना महाभारत के पांडवों से की और जीत का दावा किया।


बताया जा रहा है कि अगले दो से तीन दिनों में चेन्नई में प्रस्तावित बैठक के बाद सीट बंटवारे पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है।


डीएमके गठबंधन में असंतोष और खींचतान


दूसरी ओर, डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों को लेकर असहमति गहराती जा रही है। गठबंधन के सहयोगी दल तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने सीट आवंटन से नाराज होकर गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है।


सूत्रों के मुताबिक, टीवीके दो सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन डीएमके की ओर से केवल एक सीट का प्रस्ताव दिया गया, जिससे नाराजगी बढ़ गई।


वहीं, वामपंथी दल सीपीएम भी अपनी सीटों की मांग पर अड़ा हुआ है। पार्टी के भीतर इस बात पर मंथन जारी है कि डीएमके के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा जाए।


अब तक डीएमके अपने सहयोगियों को कुल 43 सीटें आवंटित कर चुकी है। इसमें कांग्रेस को 28, सीपीआई को 5 और एमडीएमके को 4 सीटें दी गई हैं। विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के साथ बातचीत जारी है, जहां पार्टी 7 से 8 सीटों पर समझौता कर सकती है।


चुनावी तस्वीर पर असर


तमिलनाडु की राजनीति इस समय पूरी तरह से गठबंधनों के जोड़-तोड़ और सीटों के समीकरणों के इर्द-गिर्द घूम रही है। जहां एनडीए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है, वहीं डीएमके के लिए अपने सहयोगियों को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में होने वाले फैसले चुनावी समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अब सबकी नजर चेन्नई में होने वाली बैठकों और अंतिम सीट बंटवारे की घोषणा पर टिकी है, जो तय करेगी कि चुनावी मुकाबले में किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा।

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