top of page
भारतार्थ-logo

तमिलनाडु में गठबंधन की सियासत में भूचाल: टीवीके ने द्रमुक का साथ छोड़ा, सीट बंटवारे पर टूटा रिश्ता

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 22 मार्च
  • 2 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 23 मार्च

फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तमिलगा वाझ्वुरिमै काची (टीवीके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी प्रमुख टी. वेलमुरुगन ने रविवार को चेन्नई में आयोजित प्रेस वार्ता में यह ऐलान किया।


वेलमुरुगन ने बताया कि उनकी पार्टी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से द्रमुक गठबंधन का हिस्सा रही है और विभिन्न चुनावों में मिलकर काम किया है। हालांकि, इस बार विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि टीवीके ने दो सीटों की मांग रखी थी, लेकिन द्रमुक की ओर से केवल एक सीट का प्रस्ताव दिया गया, जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया।


उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक दौर की वार्ताओं से ही टीवीके ने अपनी सीटों की मांग और 10 प्रमुख मुद्दों को सामने रखा था। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी यह स्पष्ट कर दिया गया था कि मांगें पूरी नहीं होने पर पार्टी गठबंधन से अलग हो जाएगी, लेकिन द्रमुक की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला।


द्रमुक पर आरोप लगाते हुए वेलमुरुगन ने कहा, “हमारी 10 प्रमुख मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। हमने विधानसभा के भीतर और बाहर कई जनहित मुद्दों पर संघर्ष किया, लेकिन हमारी आवाज को महत्व नहीं दिया गया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर अधिकारियों का प्रभाव बढ़ गया है और “तमिलनाडु में अब अधिकारियों का ही शासन चल रहा है।”


टीवीके प्रमुख ने यह भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी अब न तो द्रमुक गठबंधन का हिस्सा रहेगी और न ही अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में शामिल होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी स्वतंत्र रूप से या समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाएगी।


द्रमुक की नीतियों पर सवाल उठाते हुए वेलमुरुगन ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पूछा कि सामाजिक न्याय की बात करने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जाति-आधारित जनगणना कराने से क्यों पीछे हट रही है। साथ ही वन्नियार समुदाय को 10.5 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आखिर किन कारणों से यह निर्णय लागू नहीं किया गया।


इसके अलावा, उन्होंने ‘तमिलनाडु जॉब्स ओनली एक्ट’ को लागू न करने पर भी राज्य सरकार की आलोचना की और मांग की कि तमिल युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता देने के लिए जल्द कानून बनाया जाए।


वेलमुरुगन ने जोर देते हुए कहा कि उनकी पार्टी के लिए सीटों की संख्या से अधिक उनके सिद्धांत और 10 मांगें महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जो भी दल उनकी मांगों को स्वीकार करेगा, उसके साथ बातचीत की जा सकती है। सहयोगी संगठनों से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।


इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन समीकरण बदलने की संभावना तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके के इस फैसले से आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला और अधिक दिलचस्प तथा बहुकोणीय हो सकता है।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page