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केरल कांग्रेस में नई हलचल: शशि थरूर की रणनीति से वेणुगोपाल की दावेदारी पर सवाल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 22
  • 2 min read

Updated: Mar 23

फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में इन दिनों अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एक नई रणनीतिक दिशा अपनाई है, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, थरूर अब सीधे टकराव से बचते हुए संगठन के भीतर संतुलन साधने और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करने में जुट गए हैं।


राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि थरूर को यह स्पष्ट आभास हो चुका है कि यदि केरल में कांग्रेस सत्ता में आती भी है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत नहीं मानी जा रही। ऐसे में उन्होंने अपने विकल्प खुले रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी की ओर उनके झुकाव की चर्चाएं भी सामने आई हैं, लेकिन फिलहाल इसे केवल संभावित राजनीतिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।


थरूर ने हाल ही में यह भी संकेत दिया है कि केरल में भाजपा अभी भी एक सीमित प्रभाव वाली पार्टी है। ऐसे में यदि आगामी चुनावों में भाजपा अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो प्रदेश नेतृत्व, खासकर राजीव चंद्रशेखर की स्थिति कमजोर हो सकती है। इस आकलन के साथ थरूर अपने राजनीतिक कदम सोच-समझकर बढ़ा रहे हैं।


वेणुगोपाल की बढ़ती ताकत और चुनौती

कांग्रेस संगठन में महासचिव के पद पर काबिज केसी वेणुगोपाल को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। यही कारण है कि केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। यदि कांग्रेस राज्य में सत्ता हासिल करती है, तो वेणुगोपाल का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल हो सकता है।


हालांकि, पार्टी के भीतर अन्य वरिष्ठ नेता भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं। रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और के. सुधाकरन जैसे नेता भी मुख्यमंत्री पद की रेस में सक्रिय माने जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान की स्थिति बनती नजर आ रही है।


थरूर की नई चाल: समीकरण बदलने की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक, शशि थरूर ने अब पार्टी के भीतर उन नेताओं के साथ सामंजस्य बनाना शुरू कर दिया है, जो केसी वेणुगोपाल की बढ़ती दावेदारी को सीमित करना चाहते हैं। इस रणनीति के तहत थरूर ने यह सुझाव भी दिया है कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो मुख्यमंत्री किसी विधायक को बनाया जाए, न कि सांसद को।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव दोहरे उद्देश्य को साधता है। एक ओर इससे थरूर खुद को सीधे प्रतिस्पर्धा से अलग रखते हुए भविष्य के लिए जगह बना सकते हैं, वहीं दूसरी ओर वेणुगोपाल की संभावित दावेदारी को भी कमजोर किया जा सकता है।


आगे क्या?

केरल कांग्रेस में चल रही यह अंदरूनी राजनीति आगामी विधानसभा चुनावों से पहले और तेज होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुटबाजी को नियंत्रित करते हुए एकजुटता बनाए रखने की होगी। वहीं, शशि थरूर की नई रणनीति ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में केरल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

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