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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • बंगाल में सियासी संग्राम तेज, भाजपा-टीएमसी आमने-सामने; दिलीप घोष बोले—“इस बार होगा बदलाव”

    फ़ाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) खड़गपुर। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। सत्तारूढ़ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं। दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। खड़गपुर से भाजपा प्रत्याशी एवं वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि इस बार राज्य की जनता बदलाव के मूड में है। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और टीएमसी के बीच सिमट गया है और जनता भाजपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रही है। दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि इस बार टीएमसी के लिए जीत आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और साजिशों के कारण कार्यकर्ताओं में असहजता है, जिसके चलते लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां पहले टीएमसी कार्यकर्ताओं का दबदबा और कथित उपद्रव देखने को मिलता था, वहीं अब वे बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस बार हर संवेदनशील क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और चुनाव आयोग कड़ी निगरानी रखेगा। घोष ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीसीटीवी व्यवस्था की जरूरत क्यों महसूस हो रही है, क्या यह पार्टी के अंदरूनी हालात को दर्शाता है। बयानबाजी के दौरान घोष ने ‘बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय’ मुद्दे पर भी टीएमसी को घेरा। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी को बाहरी कहा जाता है, तो अन्य राज्यों से आने वाले नेताओं पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते। उन्होंने उदाहरण देते हुए यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा का उल्लेख किया। गौरतलब है कि दिलीप घोष अपने तीखे बयानों को लेकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। हाल ही में 17 मार्च 2026 को टीएमसी ने उनके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि घोष ने सार्वजनिक मंचों से टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपत्तिजनक और उकसाने वाले बयान दिए, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। इस संबंध में वीडियो साक्ष्य भी आयोग को सौंपे गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल चुनाव में मुकाबला पहले से अधिक कड़ा और दिलचस्प होने वाला है। एक ओर जहां टीएमसी अपने विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में परिवर्तन का नारा लेकर पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • असम चुनाव में सीधी टक्कर: हिमंत बिस्वा सरमा बनाम गौरव गोगोई, सत्ता बचाने और वापसी की जंग तेज

    फ़ाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। इस बार चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां एक ओर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के युवा नेता गौरव गोगोई पार्टी की दशकभर बाद वापसी का सपना लेकर मैदान में उतरे हैं। राज्य की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। गठबंधन और सीटों का गणित बीजेपी ने अपने पुराने सहयोगियों असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ गठबंधन कायम रखा है। सीट बंटवारे के तहत बीजेपी 89, एजीपी 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) इस बार अलग होकर 15 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने ‘महाजोत’ के तहत असम जातीय परिषद (एजेपी), रायजोर दल, वाम दलों और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन किया है। कांग्रेस ने 87 उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए सहयोगियों को भी हिस्सेदारी दी है। हालांकि कुछ सीटों पर सहयोगी दलों के बीच दोस्ताना मुकाबला भी देखने को मिलेगा। इस चुनाव में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) भी 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिससे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका बढ़ गई है। टिकट वितरण से बीजेपी में असंतोष बीजेपी ने एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए 21 उम्मीदवारों के टिकट काट दिए हैं और कई पूर्व कांग्रेसी नेताओं को मौका दिया है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष उभरकर सामने आया है। नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी ने पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर ‘बाहरी’ नेताओं को प्राथमिकता दी है। परिसीमन से बदले राजनीतिक समीकरण 2023 में हुए परिसीमन के बाद राज्य की कई सीटों के सामाजिक और जातीय समीकरण बदल गए हैं। मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 30 से घटकर 22 रह गई है। राज्य में लगभग 34 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जो परंपरागत रूप से कांग्रेस और एआईयूडीएफ का समर्थन करती रही है। इस बार असम गण परिषद द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने से मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जिससे कांग्रेस को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। चुनावी मुद्दे: विकास बनाम ध्रुवीकरण मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव से पहले कई लोकलुभावन घोषणाएं की हैं। चाय बागान श्रमिकों की मजदूरी में 30 रुपये की वृद्धि कर दी गई है, जिससे ब्रह्मपुत्र घाटी में मजदूरी 280 रुपये और बराक घाटी में 258 रुपये हो गई है। राज्य में करीब 10 लाख चाय श्रमिक इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे। इसके अलावा ‘अरुणोदय 3.0’ योजना के तहत 40 लाख लाभार्थियों को 9,000 रुपये की सहायता दी गई है। बीजेपी ने वादा किया है कि सत्ता में वापसी होने पर योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा मुफ्त राशन के साथ अन्य जरूरी वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं, बीजेपी ने घुसपैठ और अस्मिता के मुद्दे को प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाया है। पार्टी का दावा है कि सरकार ने अवैध कब्जों से 1.5 लाख बीघा जमीन मुक्त कराई है। दूसरी ओर कांग्रेस ने सरकार पर भ्रष्टाचार और केवल ‘लाभार्थी राजनीति’ करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में वास्तविक विकास के मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। निर्णायक होगा चाय बागान और अल्पसंख्यक वोट राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चाय बागान श्रमिकों और अल्पसंख्यक वोटरों की भूमिका इस चुनाव में बेहद अहम रहने वाली है। करीब 30-35 सीटों पर चाय श्रमिक निर्णायक माने जा रहे हैं, जबकि मुस्लिम वोट बैंक के बंटवारे से परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। नतीजों पर टिकी नजर 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के बाद 4 मई को यह साफ हो जाएगा कि असम की जनता सत्ता की निरंतरता चाहती है या बदलाव। फिलहाल राज्य की राजनीति में मुख्य मुकाबला हिमंत बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई के बीच सिमटता नजर आ रहा है, जिसने इस चुनाव को और भी रोमांचक बना दिया है।

  • असम चुनाव में कांग्रेस की अंदरूनी कलह उजागर: कार्यकर्ताओं का दफ्तर में हंगामा, जुबीन गर्ग की तस्वीर का अपमान, आरोपी निलंबित

    फ़ाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी/बिजनी। विधानसभा चुनाव के बीच असम के बिजनी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी द्वारा कथित तौर पर पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट न दिए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कार्यालय में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। इस दौरान असम के सुप्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की तस्वीर के साथ भी अभद्रता की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाराज कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कार्यालय पहुंचे और नारेबाजी करते हुए अंदर घुस गए। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और कार्यकर्ताओं ने कुर्सियां, टेबल सहित कार्यालय के फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया। वायरल वीडियो में एक कार्यकर्ता को गुस्से में जुबीन गर्ग की तस्वीर को लात मारते और उस पर कुर्सियों से हमला करते हुए साफ देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि टिकट वितरण को लेकर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जो आखिरकार हिंसक विरोध के रूप में सामने आया। स्थानीय नेताओं के समझाने के बावजूद कार्यकर्ता शांत नहीं हुए और काफी देर तक बवाल चलता रहा। भाजपा ने साधा निशाना घटना के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। असम सरकार के मंत्री पीयूष हजारिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोपी की पहचान सार्वजनिक की और कांग्रेस नेतृत्व पर संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे असम की सांस्कृतिक विरासत का अपमान बताया। कांग्रेस की कार्रवाई वहीं, मामले के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित कार्यकर्ता को निलंबित कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मामले की आंतरिक जांच भी की जा रही है। जुबीन गर्ग की विरासत पर चोट गौरतलब है कि जुबीन गर्ग असम के सबसे लोकप्रिय सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक रहे हैं। उनकी तस्वीर के साथ हुई इस घटना को लेकर आम जनता में भी नाराजगी देखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में सिंगापुर के सेंट जॉन्स आइलैंड के पास समुद्र में डूबने से उनका निधन हो गया था। उनकी मौत को लेकर बाद में कई तरह के सवाल भी उठे और जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। चुनावी असर पर नजर चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस की इस अंदरूनी कलह को विपक्षी दल मुद्दा बना सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं और चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकती हैं। फिलहाल, प्रशासन और पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने में जुटे हैं, लेकिन यह घटना असम में चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

  • तमिलनाडु में डीएमके की ‘सुनामी’ के संकेत, 223 सीटों का गणित बता रहा—विपक्ष मीलों पीछे

    लोकसभा 2024 और विधानसभा 2021 के आंकड़ों से स्पष्ट बढ़त; विजय की टीवीके से मुकाबला रोचक, लेकिन फिलहाल डीएमके गठबंधन मजबूत फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य की सत्ता पर काबिज द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) एक बार फिर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन फिलहाल विपक्षी दलों से काफी आगे चल रहा है। हालांकि इस बार चुनावी मुकाबले में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की एंट्री ने राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है। लोकसभा 2024: डीएमके गठबंधन की ऐतिहासिक बढ़त 2024 के लोकसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए तमिलनाडु की 39 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की। यह प्रदर्शन न सिर्फ 2019 से बेहतर रहा, बल्कि राज्य में सत्ताधारी गठबंधन की मजबूत पकड़ को भी दर्शाता है। इस जीत का असर विधानसभा स्तर पर भी देखने को मिला। विश्लेषण बताता है कि लोकसभा परिणामों के आधार पर डीएमके गठबंधन को 234 में से 223 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली—जो बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से कहीं अधिक है। 223 सीटों का गणित: विपक्ष के लिए खतरे की घंटी लोकसभा 2024 के आंकड़ों का विधानसभा क्षेत्रों में विश्लेषण करने पर तस्वीर और साफ हो जाती है— डीएमके गठबंधन: 223 सीटों पर बढ़त अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके): सिर्फ 8 सीटें पट्टाली मक्कल काची (पीएमके): 3 सीटें यह आंकड़ा बताता है कि विपक्षी दल फिलहाल मुकाबले में काफी पीछे हैं। विधानसभा 2021: सत्ता में वापसी की मजबूत नींव 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने 234 में से 153 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी और एआईएडीएमके को बाहर कर दिया था। यह जीत राज्य में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन का संकेत बनी थी। वोट शेयर बनाम सीटों का अंतर हालांकि वोट शेयर के आंकड़े मुकाबले को थोड़ा कड़ा दिखाते हैं— डीएमके: 26.93 प्रतिशत वोट एआईएडीएमके: 20.46 प्रतिशत वोट लेकिन सीटों और विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त का अंतर बताता है कि जमीन पर डीएमके की पकड़ कहीं ज्यादा मजबूत है। 50 प्रतिशत वोट वाले क्षेत्र: डीएमके की पकड़ मजबूत राज्य के 234 विधानसभा क्षेत्रों में से 82 क्षेत्रों में पार्टियों को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले— डीएमके: 52 क्षेत्र एआईएडीएमके: सिर्फ 1 क्षेत्र कांग्रेस व सहयोगी दल: शेष क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि कई इलाकों में डीएमके को निर्णायक जनसमर्थन हासिल है। करीबी मुकाबलों में भी डीएमके का पलड़ा भारी जिन लोकसभा सीटों पर जीत का अंतर 10,000 वोट से कम रहा, वहां भी डीएमके गठबंधन ने 26 में से 19 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि एआईएडीएमके केवल 7 सीटों पर आगे रही। इससे साफ है कि करीबी मुकाबलों में भी सत्ताधारी गठबंधन की रणनीति प्रभावी रही। एआईएडीएमके और सहयोगियों का कमजोर प्रदर्शन 2024 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके का प्रदर्शन 2021 के मुकाबले काफी कमजोर रहा। जहां उसने 2021 में 66 सीटें जीती थीं, वहीं 2024 में वह कई सीटों पर डीएमके, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों से पीछे रही। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी और पीएमके जैसे सहयोगियों का प्रदर्शन भी अपेक्षाकृत फीका रहा, जिससे विपक्ष की स्थिति और कमजोर हुई। विजय की एंट्री: समीकरण बदलेंगे या नहीं? इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात विजय की पार्टी टीवीके की एंट्री है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके कुछ हद तक वोट शेयर में सेंध लगा सकती है, खासकर युवा और शहरी मतदाताओं में। हालांकि, यह देखना बाकी है कि टीवीके किस दल के वोट बैंक को ज्यादा प्रभावित करेगी और क्या वह अपने पहले चुनाव में कोई बड़ा असर छोड़ पाएगी। फिलहाल डीएमके सबसे आगे वर्तमान आंकड़ों और चुनावी रुझानों को देखें तो डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन तमिलनाडु में सबसे मजबूत स्थिति में है। विपक्षी दलों को अगर मुकाबले में बने रहना है, तो उन्हें न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती दिखानी होगी, बल्कि एक प्रभावी रणनीति भी तैयार करनी होगी। तमिलनाडु की राजनीति में 2026 का चुनाव दिलचस्प जरूर होगा, लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है—डीएमके की बढ़त मजबूत है और विपक्ष को लंबी दूरी तय करनी बाकी है।

  • हसीरू भूमि रिजॉर्ट में कांठा प्रांत विजयनगर मंडल का तृतीय होली स्नेह मिलन सम्पन्न, सांस्कृतिक रंगों में सराबोर हुआ आयोजन

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) विजयनगर। कांठा प्रांत विजयनगर मंडल द्वारा 22 मार्च 2026 को हसीरू भूमि इको फ्रेंडली रिजॉर्ट में तृतीय होली स्नेह मिलन समारोह हर्षोल्लास और पारंपरिक रंगों के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को यादगार बना दिया। समारोह के दौरान राजस्थानी संस्कृति की झलक विशेष रूप से देखने को मिली। राजस्थानी गैर नृत्य एवं लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक गीतों और नृत्यों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंगों और संगीत के इस संगम ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम में बच्चों एवं महिलाओं के लिए विभिन्न मनोरंजक एवं प्रतिभा आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर मुख्य प्रायोजक महेंद्र कुमार हंसराज मुणोत सहित सह-प्रायोजक अनराज सुरेश चंद, महावीर चंद भंडारी, ललित कुमार गांधी, राजेश कुमार गांधी, शांता देवी भंडारी, डॉ. प्रकाश मुणोत एवं अन्य सहयोगियों का मंडल के पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने अपने संबोधन में कहा कि कांठा प्रांत विजयनगर मंडल अपने सृजनात्मक एवं सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में विशेष पहचान बना चुका है। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा गुरु भगवंतों की विहार सेवा, मानव सेवा, जीव दया, तीर्थ यात्रा एवं नवकार मंत्र साधना जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि खेलकूद प्रतियोगिताएं और स्नेह मिलन जैसे आयोजन समाज में आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समन्वय और आत्मीयता बढ़ती है। समारोह के अंत में मंडल के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।

  • आंजणा प्रीमियर लीग सीजन-6: आहोर फाइटर्स बनी चैंपियन, राजेश्वर क्रिकेट क्लब रहा उपविजेता

    आंजणा प्रीमियर लीग चेन्नई सीजन 6 की विजेता टीम आहोर फाइटर्स भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। कलबी युवा स्पोर्ट्स क्लब, चेन्नई के तत्वावधान में आयोजित आंजणा प्रीमियर लीग (एपीएल) क्रिकेट सीजन-6 का भव्य समापन 22 मार्च को मेघना कॉलेज ग्राउंड, रेडहिल्स में हुआ। दो दिवसीय इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट (21-22 मार्च) में आंजणा समाज, चेन्नई की कुल 9 टीमों ने हिस्सा लिया और दर्शकों को रोमांचक मुकाबलों का शानदार अनुभव कराया। टूर्नामेंट में राजेश्वर क्रिकेट क्लब, आंजणा स्टार इलेवन, माताजी वारियर्स, आहोर फाइटर्स, श्री चरणनाथ क्रिकेट क्लब, श्री चौधरी टाइटंस कोवुर, किशनारामजी क्रिकेट क्लब, श्री रामदेव क्रिकेट क्लब और आपेश्वर किंग इलेवन जैसी टीमों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सभी टीमों ने पिछले एक महीने से कड़ी मेहनत और अभ्यास के दम पर खिताब जीतने के लिए जोरदार संघर्ष किया। आंजणा प्रीमियर लीग चेन्नई सीजन 6 की उपविजेता टीम राजेश्वर किकेट क्लब रोमांचक रहा फाइनल मुकाबला फाइनल मैच आहोर फाइटर्स और राजेश्वर क्रिकेट क्लब के बीच खेला गया। आहोर फाइटर्स के कप्तान लुंबाराम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। राजेश्वर क्रिकेट क्लब ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 91 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी आहोर फाइटर्स की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन टीम के खिलाड़ियों ने साहस और संयम का परिचय देते हुए शानदार वापसी की। अंततः आहोर फाइटर्स ने दो गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर रोमांचक जीत दर्ज करते हुए चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। पुरस्कार विजेता खिलाड़ी फाइनल मैच के हीरो रमेश पटेल सियाणा रहे, जिन्होंने निर्णायक प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी के लिए रवि पटेल को “बेस्ट बॉलर” चुना गया, जबकि गोविन्द पटेल को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए “मैन ऑफ द टूर्नामेंट” का खिताब प्रदान किया गया। दर्शक लोग मैच का आनन्द लेते हुए समाजजनों की रही सराहनीय उपस्थिति समाज के वरिष्ठ नरिगाराम ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने अनुशासन और खेल भावना का उत्कृष्ट परिचय दिया। उन्होंने समाज के युवाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की और सभी भामाशाहों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अध्यक्ष तगाराम, संरक्षक जोगाराम, कोषाध्यक्ष हनुमानराम सहित कई गणमान्य सदस्य मैदान में उपस्थित रहे और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। टूर्नामेंट की संपूर्ण व्यवस्था कलबी युवा स्पोर्ट्स क्लब द्वारा संभाली गई, जबकि मंच संचालन भारताराम ने किया। इस सफल आयोजन ने समाज में खेल भावना को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को एकजुट करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। आयोजन से संबंधित जानकारी दिनेश जी करड़ द्वारा दी गई।

  • सकराय पटना में भक्ति का महासंगम: 30 वर्षों की परंपरा में गूंजे हनुमान भजन, हजारों श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चिकमगलूर। सकराय पटना क्षेत्र में धार्मिक आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब “एक शाम उत्तर मुखी वीर हनुमान जी के नाम” भव्य भजन संध्या कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया और सामाजिक एकता का प्रेरणादायक संदेश भी दिया। आयोजन समिति के अनुसार, यह भजन संध्या पिछले लगभग 30 वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है और अब यह क्षेत्र की एक प्रमुख धार्मिक परंपरा के रूप में स्थापित हो चुकी है। इस वर्ष भी कार्यक्रम में करीब 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की। भक्ति संगीत, सुंदरकांड पाठ और संकीर्तन के माध्यम से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण राजस्थान की सुप्रसिद्ध भजन गायिका अनीता जागीड रहीं। उन्होंने अपने मधुर स्वर में हनुमान जी की महिमा का गुणगान कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया। इस अवसर पर उत्तर मुखी वीर हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। सुंदरकांड पाठ और सामूहिक संकीर्तन ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और श्रद्धा का संचार किया। आयोजन स्थल को आकर्षक सजावट, भव्य प्रकाश व्यवस्था और सुदृढ़ ध्वनि प्रणाली से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम की भव्यता कई गुना बढ़ गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था की गई थी तथा महाप्रसादी का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में स्थानीय प्रशासन का भी विशेष सहयोग रहा, जिससे सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रही। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना है। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे को भी सुदृढ़ किया। कार्यक्रम को लेकर पूरे क्षेत्र में विशेष उत्साह देखा गया। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। भजन संध्या के दौरान श्री कामधेनु गौशाला ट्रस्ट, चिकमगलूर के तत्वावधान में गौ सेवा हेतु श्रद्धालुओं द्वारा 1,51,000 रुपये की सहायता राशि गोदान के रूप में भेंट की गई।इस आयोजन में राजस्थान विष्णु समाज के अध्यक्ष कालू सिंह भाटी एवं समाजसेवी मोहनलाल भायल का विशेष सहयोग रहा। यह भव्य आयोजन क्षेत्र के लिए एक यादगार और प्रेरणादायक आध्यात्मिक उत्सव के रूप में स्थापित हुआ। कार्यक्रम संबंधी जानकारी मांगीलाल पटेल, चिकमगलूर द्वारा प्रदान की गई।

  • मणिपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई: तीन खूंखार उग्रवादी गिरफ्तार, एक महिला भी शामिल

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) इंफाल। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में सुरक्षा बलों ने उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला उग्रवादी भी शामिल है, जो लंबे समय से अवैध गतिविधियों में संलिप्त बताई जा रही है। पुलिस द्वारा गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ये सभी उग्रवादी जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में सक्रिय थे। सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई को राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को इंफाल पूर्व जिला के कोंगबा लैशराम लीकाई क्षेत्र से केसीपी (पीडब्ल्यूजी) के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन एक 43 वर्षीय महिला उग्रवादी को भी कोंगबा मखा उचेकोन स्थित उसके आवास से दबोचा गया। महिला पर भी संगठन के लिए काम करने और वसूली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। इसके अलावा, मंगलवार को थौबल जिला के थौदम लैशराम लीकाई इलाके से ‘पीआरईपीएके’ (पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक) से जुड़े 25 वर्षीय उग्रवादी को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए, जिससे उसके खतरनाक इरादों का अंदेशा जताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार उग्रवादियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मणिपुर में सक्रिय उग्रवादी संगठन लंबे समय से आम लोगों और व्यापारियों से जबरन वसूली जैसी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं, जिन पर अब सुरक्षा एजेंसियां लगातार शिकंजा कस रही हैं।

  • मिजोरम विधानसभा में ऐतिहासिक फैसला: बहुविवाह पर रोक और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने सहित 10 विधेयक पारित

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) आइजोल। मिजोरम विधानसभा के 28 दिवसीय बजट सत्र के दौरान राज्य की राजनीति और सामाजिक ढांचे से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सत्र के समापन पर सदन ने सर्वसम्मति से 10 महत्वपूर्ण सरकारी विधेयकों को पारित किया, जिनमें बहुविवाह पर रोक लगाने और महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने वाला विधेयक प्रमुख रहा। विधानसभा अध्यक्ष लालबियाकजामा ने सोमवार देर रात सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने 17 फरवरी से शुरू हुए इस बजट सत्र की कार्यवाही का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि सत्र अत्यंत फलदायी और नीति निर्धारण के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। सत्र के दौरान पारित विधेयकों में ‘मिजो विवाह और संपत्ति का उत्तराधिकार (संशोधन) विधेयक, 2026’ विशेष चर्चा का केंद्र रहा। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही महिलाओं को संपत्ति में अधिक अधिकार प्रदान कर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इसके अतिरिक्त सदन ने ‘मिजोरम (सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण निवारण) विधेयक, 2026’ को मंजूरी देकर भूमि अतिक्रमण की समस्या से निपटने के लिए सख्त प्रावधान किए हैं। वहीं ‘मिजोरम राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ के जरिए उच्च शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है। सत्र की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मिजो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बजट सत्र में पारित विधेयक सामाजिक सुधार, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

  • ‘ऑपरेशन कामधेनु’ में बड़ी सफलता: जम्मू पुलिस ने 23 मवेशियों को तस्करों से छुड़ाया, तीन वाहन जब्त

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जम्मू। जम्मू-कश्मीर में मवेशी तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कामधेनु’ के तहत जम्मू (ग्रामीण) पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए मवेशी तस्करी की तीन कोशिशों को नाकाम कर कुल 23 मवेशियों को सुरक्षित बचाया है। इस दौरान तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे तीन वाहनों को भी जब्त किया गया, जबकि आरोपी चालक मौके से फरार हो गए। पुलिस के अनुसार, पहली कार्रवाई पुलिस थाना झज्जर कोटली क्षेत्र के पंजाल नाका प्वाइंट पर की गई। नियमित जांच के दौरान एक महिंद्रा बोलेरो लोड कैरियर (JK06B-2558) को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। तलाशी लेने पर वाहन में तीन मवेशी अवैध रूप से लदे पाए गए, जिन्हें तुरंत मुक्त कराया गया। इस संबंध में थाना झज्जर कोटली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act) की धारा 11 के तहत एफआईआर संख्या 32/2026 दर्ज की गई है। इसी नाका प्वाइंट पर दूसरी घटना में पुलिस ने एक अन्य महिंद्रा लोड कैरियर (JK02CN-0704) को रोका। पुलिस को देखते ही चालक फरार हो गया। वाहन की जांच में चार मवेशी अवैध रूप से लदे मिले। पुलिस ने मवेशियों को सुरक्षित छुड़ाकर वाहन जब्त कर लिया। इस मामले में भी थाना झज्जर कोटली में धारा 223 BNS और धारा 11 PCA अधिनियम के तहत एफआईआर संख्या 33/2026 दर्ज की गई है। तीसरी और सबसे बड़ी कार्रवाई पुलिस थाना नगरोटा के अंतर्गत पुलिस पोस्ट सिधरा क्षेत्र में की गई। देर रात गश्त के दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध ट्रक (JK19A-7806) को रोका। चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें 16 मवेशी ठूंस-ठूंसकर भरे हुए पाए गए। पुलिस ने सभी मवेशियों को सुरक्षित बचाते हुए ट्रक को जब्त कर लिया। इस मामले में थाना नगरोटा में धारा 223 BNS और धारा 11 PCA अधिनियम के तहत एफआईआर संख्या 75/2026 दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मवेशी तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी मामलों में फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और जांच जारी है। ‘ऑपरेशन कामधेनु’ के तहत जम्मू पुलिस की यह कार्रवाई न केवल तस्करी पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, बल्कि पशु संरक्षण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

  • असम चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका: पिता के भाजपा में जाने के बाद प्रतीक बोरदोलोई ने नामांकन लिया वापस

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार प्रतीक बोरदोलोई ने गुरुवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनके पिता और असम के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को ऊपरी असम में कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। पिता के भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद बेटे द्वारा चुनाव मैदान से हटना कई तरह के सवाल और अटकलें खड़ी कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने पत्र में प्रतीक बोरदोलोई ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय पार्टी के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने लिखा कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बने रहना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। प्रतीक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मार्गेरिटा के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पार्टी के उम्मीदवार के बारे में पूरी स्पष्टता और विश्वास मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि मेरी प्रतिबद्धता या पार्टी के रुख को लेकर कोई संदेह उत्पन्न होता है, तो यह उचित नहीं होगा।” हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि पार्टी के सिद्धांतों में उनका विश्वास अटूट है और वे भविष्य में भी संगठन द्वारा सौंपी गई किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। बचपन से कांग्रेस से जुड़े रहे प्रतीक ने यह भी कहा कि पार्टी ने उनके राजनीतिक मूल्यों को आकार दिया है और उन्हें जनता की सेवा का मंच प्रदान किया है। उन्होंने वर्षों से मिले समर्थन और विश्वास के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया। इस बीच, कांग्रेस ने अभी तक मार्गेरिटा सीट के लिए नए उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर न केवल इस सीट बल्कि पूरे ऊपरी असम के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि 2026 का चुनावी वर्ष देशभर में कई महत्वपूर्ण चुनावों का साक्षी बनने जा रहा है, जिसमें विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव और उपचुनाव शामिल हैं। ऐसे में असम का यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • सिलचर में कांग्रेस का चुनावी बिगुल: भाजपा पर अधूरे वादों का आरोप, “विकास बनाम विभाजन” पर लड़ाई तेज

    फाइल फोटो भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) सिलचर। असम विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस ने बुधवार को सिलचर विधानसभा क्षेत्र में अपने चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत करते हुए भाजपा पर पिछले एक दशक में किए गए विकास वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। पार्टी ने इस मौके पर अपने उम्मीदवार अभिजीत पॉल के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन भी किया, जिसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, स्थानीय पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी ने बराक घाटी के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में पार्टी की सक्रियता को दर्शाया। यह सीट फिलहाल भाजपा के कब्जे में है और कांग्रेस इसे पुनः हासिल करने की रणनीति के तहत आक्रामक प्रचार में जुट गई है। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत पॉल ने चुनाव को “भ्रष्टाचार, कुशासन और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ निर्णायक संघर्ष” बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा बार-बार किए गए आश्वासनों के बावजूद सिलचर की बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा,“भाजपा वर्षों से सत्ता में है, लेकिन सिलचर के लोग आज भी मूलभूत नागरिक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह चुनाव जवाबदेही और वास्तविक विकास के मुद्दे पर लड़ा जाएगा।” पॉल ने आगे आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने जनता के विश्वास के साथ छल किया है और अब समय आ गया है कि मतदाता इसका जवाब दें। उन्होंने लोगों से जाति और धर्म के आधार पर होने वाली राजनीति को नकारने और समावेशी विकास के एजेंडे का समर्थन करने की अपील की। कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में भाजपा पर “जनता के विश्वास को धोखा देने” का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में विकास के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार मतदाता बदलाव के पक्ष में निर्णय लेंगे। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस का चुनाव अभियान घर-घर संपर्क, जनसभाओं और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। पार्टी विशेष रूप से उन समस्याओं को उजागर करने की रणनीति पर काम कर रही है, जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया गया है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उसने सिलचर क्षेत्र में कनेक्टिविटी, सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं और जनता उसके कार्यों से संतुष्ट है। चुनावी माहौल के गर्माते ही सिलचर में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीट इस बार कड़ी टक्कर का केंद्र बन सकती है। वर्ष 2026 देश और दुनिया में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है। भारत में विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव और उपचुनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका

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