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बंगाल में सियासी संग्राम तेज, भाजपा-टीएमसी आमने-सामने; दिलीप घोष बोले—“इस बार होगा बदलाव”

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 23 मार्च
  • 2 मिनट पठन

फ़ाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

खड़गपुर। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। सत्तारूढ़ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं। दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी का दौर लगातार जारी है।


खड़गपुर से भाजपा प्रत्याशी एवं वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि इस बार राज्य की जनता बदलाव के मूड में है। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और टीएमसी के बीच सिमट गया है और जनता भाजपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रही है।


दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि इस बार टीएमसी के लिए जीत आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और साजिशों के कारण कार्यकर्ताओं में असहजता है, जिसके चलते लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां पहले टीएमसी कार्यकर्ताओं का दबदबा और कथित उपद्रव देखने को मिलता था, वहीं अब वे बैकफुट पर नजर आ रहे हैं।


चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस बार हर संवेदनशील क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और चुनाव आयोग कड़ी निगरानी रखेगा। घोष ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीसीटीवी व्यवस्था की जरूरत क्यों महसूस हो रही है, क्या यह पार्टी के अंदरूनी हालात को दर्शाता है।


बयानबाजी के दौरान घोष ने ‘बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय’ मुद्दे पर भी टीएमसी को घेरा। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी को बाहरी कहा जाता है, तो अन्य राज्यों से आने वाले नेताओं पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते। उन्होंने उदाहरण देते हुए यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा का उल्लेख किया।


गौरतलब है कि दिलीप घोष अपने तीखे बयानों को लेकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। हाल ही में 17 मार्च 2026 को टीएमसी ने उनके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि घोष ने सार्वजनिक मंचों से टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपत्तिजनक और उकसाने वाले बयान दिए, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। इस संबंध में वीडियो साक्ष्य भी आयोग को सौंपे गए हैं।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल चुनाव में मुकाबला पहले से अधिक कड़ा और दिलचस्प होने वाला है। एक ओर जहां टीएमसी अपने विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में परिवर्तन का नारा लेकर पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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