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तमिलनाडु में डीएमके की ‘सुनामी’ के संकेत, 223 सीटों का गणित बता रहा—विपक्ष मीलों पीछे

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 days ago
  • 3 min read

लोकसभा 2024 और विधानसभा 2021 के आंकड़ों से स्पष्ट बढ़त; विजय की टीवीके से मुकाबला रोचक, लेकिन फिलहाल डीएमके गठबंधन मजबूत


फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य की सत्ता पर काबिज द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) एक बार फिर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन फिलहाल विपक्षी दलों से काफी आगे चल रहा है।


हालांकि इस बार चुनावी मुकाबले में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की एंट्री ने राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।


लोकसभा 2024: डीएमके गठबंधन की ऐतिहासिक बढ़त

2024 के लोकसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए तमिलनाडु की 39 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की। यह प्रदर्शन न सिर्फ 2019 से बेहतर रहा, बल्कि राज्य में सत्ताधारी गठबंधन की मजबूत पकड़ को भी दर्शाता है।


इस जीत का असर विधानसभा स्तर पर भी देखने को मिला। विश्लेषण बताता है कि लोकसभा परिणामों के आधार पर डीएमके गठबंधन को 234 में से 223 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली—जो बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से कहीं अधिक है।


223 सीटों का गणित: विपक्ष के लिए खतरे की घंटी

लोकसभा 2024 के आंकड़ों का विधानसभा क्षेत्रों में विश्लेषण करने पर तस्वीर और साफ हो जाती है—


डीएमके गठबंधन: 223 सीटों पर बढ़त


अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके): सिर्फ 8 सीटें


पट्टाली मक्कल काची (पीएमके): 3 सीटें


यह आंकड़ा बताता है कि विपक्षी दल फिलहाल मुकाबले में काफी पीछे हैं।


विधानसभा 2021: सत्ता में वापसी की मजबूत नींव

2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने 234 में से 153 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी और एआईएडीएमके को बाहर कर दिया था। यह जीत राज्य में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन का संकेत बनी थी।


वोट शेयर बनाम सीटों का अंतर


हालांकि वोट शेयर के आंकड़े मुकाबले को थोड़ा कड़ा दिखाते हैं—


डीएमके: 26.93 प्रतिशत वोट


एआईएडीएमके: 20.46 प्रतिशत वोट


लेकिन सीटों और विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त का अंतर बताता है कि जमीन पर डीएमके की पकड़ कहीं ज्यादा मजबूत है।


50 प्रतिशत वोट वाले क्षेत्र: डीएमके की पकड़ मजबूत

राज्य के 234 विधानसभा क्षेत्रों में से 82 क्षेत्रों में पार्टियों को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले—


डीएमके: 52 क्षेत्र


एआईएडीएमके: सिर्फ 1 क्षेत्र


कांग्रेस व सहयोगी दल: शेष क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन


यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि कई इलाकों में डीएमके को निर्णायक जनसमर्थन हासिल है।


करीबी मुकाबलों में भी डीएमके का पलड़ा भारी

जिन लोकसभा सीटों पर जीत का अंतर 10,000 वोट से कम रहा, वहां भी डीएमके गठबंधन ने 26 में से 19 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि एआईएडीएमके केवल 7 सीटों पर आगे रही। इससे साफ है कि करीबी मुकाबलों में भी सत्ताधारी गठबंधन की रणनीति प्रभावी रही।


एआईएडीएमके और सहयोगियों का कमजोर प्रदर्शन

2024 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके का प्रदर्शन 2021 के मुकाबले काफी कमजोर रहा। जहां उसने 2021 में 66 सीटें जीती थीं, वहीं 2024 में वह कई सीटों पर डीएमके, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों से पीछे रही।


इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी और पीएमके जैसे सहयोगियों का प्रदर्शन भी अपेक्षाकृत फीका रहा, जिससे विपक्ष की स्थिति और कमजोर हुई।


विजय की एंट्री: समीकरण बदलेंगे या नहीं?

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात विजय की पार्टी टीवीके की एंट्री है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके कुछ हद तक वोट शेयर में सेंध लगा सकती है, खासकर युवा और शहरी मतदाताओं में।


हालांकि, यह देखना बाकी है कि टीवीके किस दल के वोट बैंक को ज्यादा प्रभावित करेगी और क्या वह अपने पहले चुनाव में कोई बड़ा असर छोड़ पाएगी।


फिलहाल डीएमके सबसे आगे

वर्तमान आंकड़ों और चुनावी रुझानों को देखें तो डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन तमिलनाडु में सबसे मजबूत स्थिति में है। विपक्षी दलों को अगर मुकाबले में बने रहना है, तो उन्हें न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती दिखानी होगी, बल्कि एक प्रभावी रणनीति भी तैयार करनी होगी।


तमिलनाडु की राजनीति में 2026 का चुनाव दिलचस्प जरूर होगा, लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है—डीएमके की बढ़त मजबूत है और विपक्ष को लंबी दूरी तय करनी बाकी है।

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