असम चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका: पिता के भाजपा में जाने के बाद प्रतीक बोरदोलोई ने नामांकन लिया वापस
- धन्ना राम चौधरी

- 20 मार्च
- 2 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 23 मार्च

फाइल फोटो
भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार प्रतीक बोरदोलोई ने गुरुवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनके पिता और असम के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को ऊपरी असम में कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। पिता के भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद बेटे द्वारा चुनाव मैदान से हटना कई तरह के सवाल और अटकलें खड़ी कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने पत्र में प्रतीक बोरदोलोई ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय पार्टी के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने लिखा कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बने रहना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
प्रतीक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मार्गेरिटा के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पार्टी के उम्मीदवार के बारे में पूरी स्पष्टता और विश्वास मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि मेरी प्रतिबद्धता या पार्टी के रुख को लेकर कोई संदेह उत्पन्न होता है, तो यह उचित नहीं होगा।”
हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि पार्टी के सिद्धांतों में उनका विश्वास अटूट है और वे भविष्य में भी संगठन द्वारा सौंपी गई किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। बचपन से कांग्रेस से जुड़े रहे प्रतीक ने यह भी कहा कि पार्टी ने उनके राजनीतिक मूल्यों को आकार दिया है और उन्हें जनता की सेवा का मंच प्रदान किया है।
उन्होंने वर्षों से मिले समर्थन और विश्वास के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया।
इस बीच, कांग्रेस ने अभी तक मार्गेरिटा सीट के लिए नए उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर न केवल इस सीट बल्कि पूरे ऊपरी असम के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि 2026 का चुनावी वर्ष देशभर में कई महत्वपूर्ण चुनावों का साक्षी बनने जा रहा है, जिसमें विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव और उपचुनाव शामिल हैं। ऐसे में असम का यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
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