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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • डार्क वेब के सहारे 1100 ठिकानों को बम से उड़ाने की धमकी, आरोपी लुईस श्रीनिवास गिरफ्तार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली/मैसूर। देश की सुरक्षा एजेंसियों को उस समय बड़ी सफलता मिली जब सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, पुलिस थानों और अन्य संवेदनशील संस्थानों सहित 1100 से अधिक स्थानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी लुईस श्रीनिवास को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल आरोपी दिल्ली पुलिस की छह दिन की रिमांड पर है और उससे गहन पूछताछ जारी है। जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने देशभर में दहशत फैलाने के उद्देश्य से 50 से अधिक फर्जी ईमेल आईडी बनाईं और इनके माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी डार्क वेब का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने में माहिर था और IP एड्रेस ट्रैकिंग से बचने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग करता था। न्याय व्यवस्था से नाराजगी बनी वजह प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी निजी कारणों से न्याय व्यवस्था से असंतुष्ट था। मैसूर में जमीन विवाद के चलते उसके परिवार को कथित रूप से न्याय नहीं मिल पाया, जिससे वह मानसिक रूप से आक्रोशित हो गया। इसी वजह से उसने कानून की पढ़ाई करने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन बाद में न्यायिक प्रक्रिया से निराश होकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया। उच्च शिक्षित है आरोपी पुलिस के अनुसार, लुईस श्रीनिवास एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति है। वह NET क्वालिफाइड है और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुका है। उसने बीए, एमए और एमबीए जैसी डिग्रियां हासिल की हैं। इसके बावजूद उसने अपनी तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग कर इस तरह की आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया। मोबाइल फोन से भेजे गए अधिकांश ईमेल जांच एजेंसियों ने बताया कि आरोपी ने अधिकांश धमकी भरे ईमेल अपने मोबाइल फोन के जरिए भेजे। उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस टीम आरोपी को मैसूर भी लेकर गई, जहां से अहम डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। देश-विदेश तक फैला नेटवर्क आरोपी द्वारा भेजे गए ईमेल केवल भारत तक सीमित नहीं थे, बल्कि उसने पाकिस्तान में भी धमकी भरे संदेश भेजे थे। ये ईमेल कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा में लिखे गए थे और एक ही दिन में कई स्थानों पर भेजे जाते थे। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी दिल्ली पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के डिजिटल नेटवर्क, संपर्कों और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक का दुरुपयोग किस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अब ऐसे मामलों से निपटने के लिए और अधिक सतर्क और सशक्त रणनीति पर काम कर रही हैं।

  • चीनी मिल चालू नहीं हुई तो उग्र आंदोलन होगा: गन्ना उत्पादक संघ की चेतावनी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मैंसूरु। कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ ने चुंचनाकाट्टे स्थित श्रीराम सहकारी चीनी मिल को शीघ्र शुरू करने की मांग को लेकर सरकार को कड़ा संदेश दिया है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मिल को आगामी जून या जुलाई तक पुनः चालू नहीं किया गया, तो केआर नगर तालुका से लेकर जिला स्तर तक व्यापक और उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। सोमवार को आयोजित संघ की महिला शाखा के नवनियुक्त पदाधिकारियों के अभिनंदन समारोह में राज्य उपाध्यक्ष अंकनाहल्ली थिम्मप्पा ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि करीब चार वर्ष पहले निरानी समूह के साथ समझौता होने और एक वर्ष पूर्व पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो जाने के बावजूद मिल अब तक बंद पड़ी है, जो किसानों के साथ गंभीर अन्याय है। थिम्मप्पा ने बताया कि मिल बंद रहने के कारण क्षेत्र के गन्ना उत्पादकों को अपनी फसल 200 से 300 किलोमीटर दूर स्थित अन्य चीनी मिलों तक ले जानी पड़ रही है। इससे परिवहन लागत में भारी वृद्धि हो रही है और किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते खर्च के चलते कई किसान कर्ज के जाल में धकेले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद, उनके गृह जिले में इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। “यदि सरकार केवल गारंटी योजनाओं पर ही ध्यान केंद्रित करती रही, तो किसानों की स्थिति और बदतर हो जाएगी,” उन्होंने कहा। संघ ने स्थानीय विधायक डी. रविशंकर और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर मिल को जून-जुलाई तक पुनः शुरू करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समयसीमा के भीतर कोई कदम नहीं उठाया गया, तो मांड्या तक गन्ने के परिवहन को रोक दिया जाएगा और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। गन्ना उत्पादक संघ के इस अल्टीमेटम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

  • कोलकाता में चुनावी संग्राम: निर्वाचन कार्यालय के बाहर बीजेपी–टीएमसी भिड़ंत, वाहनों में तोड़फोड़

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी कोलकाता में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया, जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना मंगलवार दोपहर की है, जब मतदाता सूची में कथित हेरफेर के विरोध में दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कड़ा हस्तक्षेप करना पड़ा। मतदाता सूची विवाद बना टकराव की वजह जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ मतदाता सूची में फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग को लेकर है। टीएमसी समर्थकों का आरोप है कि बीजेपी द्वारा अन्य राज्यों के लोगों को अवैध रूप से पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। शुभेंदु अधिकारी का दौरा, बढ़ा तनाव घटना से पहले राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए उन पर राज्य में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उनके जाने के कुछ ही समय बाद प्रदर्शन उग्र हो गया। अभिषेक बनर्जी का बड़ा आरोप टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि केवल एक दिन में करीब 30,000 फॉर्म-6 जमा किए गए, जो संदिग्ध हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करार दिया। मुख्यमंत्री की चुनाव आयोग से शिकायत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की जांच कराने पर जोर दिया। हिंसा और तोड़फोड़ से दहशत झड़प के दौरान गुस्साए कार्यकर्ताओं ने मौके पर खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की। पुलिस के साथ भी प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की हुई। हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी टीएमसी का आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमला किया, जबकि बीजेपी ने इसे टीएमसी का “चुनावी ड्रामा” बताते हुए सभी आरोपों को निराधार बताया है। इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ती कटुता और चुनावी हिंसा को उजागर कर दिया है, जिससे निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की चुनौती और बड़ी हो गई है।

  • टेनिस स्टार लिएंडर पेस बीजेपी में शामिल, बंगाल चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय टेनिस के दिग्गज लिएंडर पेस ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता मौजूद रहे। पेस के भाजपा में शामिल होने को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। खेल जगत में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले पेस का राजनीतिक रुख बदलना चुनावी माहौल को और भी रोचक बना सकता है। खेल से राजनीति तक का सफर लिएंडर पेस भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने डेविस कप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कई यादगार जीत दर्ज कीं और ओलंपिक में भी पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया। साल 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जॉइन कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था, जहां वे ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे। हालांकि अब भाजपा में शामिल होकर उन्होंने नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया है। भाजपा को मिल सकती है बढ़त राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेस जैसे लोकप्रिय और सम्मानित खेल व्यक्तित्व का भाजपा से जुड़ना पार्टी के लिए सकारात्मक संदेश दे सकता है, खासकर शहरी और युवा मतदाताओं के बीच। पश्चिम बंगाल में पहले से ही भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है, ऐसे में यह घटनाक्रम चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला उधर, केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। कन्नूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वाम लोकतांत्रिक मोर्चा को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट इस चुनाव में भाजपा और वाम मोर्चे की “मिली-जुली ताकतों” से मुकाबला कर रहा है। असम में भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी इसी दिन निर्मला सीतारमण ने असम विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। इसमें बांग्लादेशी घुसपैठ से अतिक्रमित भूमि वापस लेने, समान नागरिक संहिता लागू करने, स्थानीय संस्कृति और विरासत की रक्षा करने तथा राज्य में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निवेश जैसे प्रमुख वादे शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी असम में भाजपा-एनडीए की लगातार तीसरी जीत का भरोसा जताया। चुनावी माहौल हुआ और गर्म पश्चिम बंगाल, केरल और असम—तीनों राज्यों में चुनावी सरगर्मी तेज हो चुकी है। लिएंडर पेस का भाजपा में शामिल होना जहां बंगाल में राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है, वहीं अन्य राज्यों में भी आरोप-प्रत्यारोप और घोषणाओं के बीच चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है।

  • असम चुनाव 2026: यूसीसी बनाम ‘5 गारंटी’—संकल्प और वादों की सियासी जंग तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र राज्य की सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच घोषणापत्रों का सीधा मुकाबला शुरू हो गया है। जहां एक ओर हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने ‘संकल्प पत्र’ जारी कर सांस्कृतिक पहचान, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को केंद्र में रखा है, वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे और गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस ने ‘5 गारंटी’ के जरिए सामाजिक-आर्थिक राहत का बड़ा दांव खेला है। भाजपा का फोकस: पहचान, सुरक्षा और कड़े कानून भाजपा के संकल्प पत्र में सबसे बड़ा और चर्चित वादा ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी)’ लागू करने का है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि सत्ता में वापसी के बाद राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा, हालांकि जनजातीय क्षेत्रों और छठी अनुसूची के दायरे को इससे बाहर रखा जाएगा। इसके साथ ही भाजपा ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे मुद्दों पर सख्त कानून बनाने का वादा किया है। पार्टी का दावा है कि सत्रों और नामघरों की जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, जिससे स्वदेशी समुदायों के हितों की रक्षा होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति असम की ‘स्थानीय अस्मिता’ को केंद्र में रखकर वोटरों को साधने की कोशिश है। कांग्रेस का दांव: ‘न्याय’ और आर्थिक राहत दूसरी ओर कांग्रेस ने अपनी ‘5 गारंटी’ के माध्यम से आम जनता, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देने पर जोर दिया है। पार्टी ने महिलाओं को मासिक नकद सहायता, प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा,10 लाख स्वदेशी लोगों को जमीन का पट्टा, बुजुर्गों को पेंशन और चर्चित मामलों में समयबद्ध न्याय का वादा किया है। कांग्रेस का कहना है कि उसकी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों तक पहुंचेंगी, जबकि भाजपा की योजनाएं सीमित दायरे में सिमटी हुई हैं। महिला वोट बैंक पर सीधी टक्कर असम चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने विशेष रणनीति अपनाई है। भाजपा ने ‘अरुणोदय’ योजना के तहत आर्थिक सहायता को 3,000 रुपये तक बढ़ाने और 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले कांग्रेस ने महिलाओं को 50,000 रुपये तक की आर्थिक मदद देकर स्वरोजगार को बढ़ावा देने का वादा किया है। इस मुकाबले ने महिला वोट बैंक को चुनाव का प्रमुख केंद्र बना दिया है। विकास बनाम वादे: किसका पलड़ा भारी? भाजपा ने ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ के तहत 18,000 करोड़ रुपये खर्च करने और 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है। वहीं कांग्रेस ने भ्रष्टाचार, पेपर लीक और बेरोजगारी को मुद्दा बनाते हुए पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करने का भरोसा दिया है। चुनावी तस्वीर और आगे का रास्ता 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है, जबकि नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में भाजपा जहां पहचान और सुरक्षा के मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस आर्थिक राहत और सामाजिक न्याय के एजेंडे के साथ मैदान में है। अब देखना यह होगा कि असम की जनता भारतीय जनता पार्टी के ‘संकल्प’ पर भरोसा जताती है या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ‘गारंटी’ को तरजीह देती है। चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि इस सियासी मुकाबले का असली ‘महायोद्धा’ कौन बनता है।

  • भवानीपुर बना सियासी रणक्षेत्र: ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी की सीधी टक्कर

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल चरम पर पहुंच गया है। इस बार चुनावी मुकाबला केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई में बदल गया है। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन चुकी है भवानीपुर विधानसभा सीट, जहां दोनों नेताओं की राजनीतिक साख दांव पर लगी है। साल 2021 के विधानसभा चुनावों में इस राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने व्यक्तिगत रूप ले लिया था, जब ममता बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी को उनके गढ़ नंदीग्राम में चुनौती दी थी। हालांकि, यह रणनीति उनके लिए उलटी साबित हुई और वह करीब 2,000 वोटों से चुनाव हार गईं। इसके बावजूद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए 294 में से 215 सीटों पर जीत हासिल की और लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम आंदोलन (2007) को खड़ा करने में सुवेंदु अधिकारी की भूमिका बेहद अहम रही थी, जिसे नजरअंदाज करना ममता बनर्जी के लिए महंगा साबित हुआ। यह आंदोलन ही 2011 में वाम मोर्चा सरकार के पतन का प्रमुख कारण बना था। अधिकारी परिवार का पूर्वी मेदिनीपुर जिले में गहरा प्रभाव रहा है। सुवेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी कांथी लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2024 में स्वास्थ्य कारणों से चुनाव न लड़ने के बाद यह सीट उनके बेटे सौमेंदु अधिकारी के पास गई, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। इसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से चार पर 2021 में भाजपा की जीत ने अधिकारी परिवार की मजबूत पकड़ को और स्पष्ट किया। वहीं, तमलुक लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय की जीत ने पार्टी के मनोबल को और बढ़ाया है। दूसरी ओर, भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का पारंपरिक गढ़ रही है। 2021 में नंदीग्राम से हार के बाद उन्होंने इसी सीट से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा था। अब सुवेंदु अधिकारी ने इस गढ़ को चुनौती देकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, उन्होंने नंदीग्राम से भी नामांकन दाखिल कर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखी है। चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भवानीपुर में सक्रिय होकर प्रचार में जुट गए हैं, जबकि ममता बनर्जी पूरे राज्य में चुनावी रैलियां कर रही हैं। दूसरी तरफ, सुवेंदु अधिकारी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण होता है, तो तृणमूल कांग्रेस के कई कथित ‘फर्जी वोट’ हट सकते हैं। साथ ही, वह राज्य में बढ़ती कानून-व्यवस्था की समस्याओं, राजनीतिक हिंसा और विभिन्न घोटालों की जांच को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी को भी अपने पक्ष में मान रहे हैं। ऐसे में भवानीपुर का यह चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला निर्णायक संघर्ष बनता जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी जंग में जनता किसे अपना समर्थन देती है।

  • बंगाल में कांग्रेस का ‘एकला चलो’ दांव: मास्टरस्ट्रोक या टीएमसी को परोक्ष लाभ?

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की सियासत में नया मोड़ आ गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे दिया है। पार्टी ने अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की बहारामपुर सीट से वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारा है। उन्हें मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे अहम जिलों में संगठन को मजबूत करने और अधिकतम सीटें जीतने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन क्षेत्रों में कांग्रेस का परंपरागत जनाधार विशेषकर मुस्लिम समुदाय में मजबूत रहा है, जबकि अन्य इलाकों में भी पार्टी को विभिन्न वर्गों से समर्थन मिलने की उम्मीद है। भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की ‘एकला चलो’ रणनीति भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है। राज्य में कई ऐसी सीटें हैं, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा है। ऐसे में 2-3 प्रतिशत वोटों का झुकाव भी परिणाम बदल सकता है। कांग्रेस की सक्रियता से भाजपा के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी वोटों का एक हिस्सा उसकी ओर शिफ्ट हो सकता है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बनने की संभावना है। टीएमसी को अप्रत्यक्ष फायदा? दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की यह रणनीति सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए अपनाई गई है। उनका दावा है कि कांग्रेस के अलग लड़ने से विपक्षी वोटों का बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ टीएमसी को मिल सकता है। विश्लेषकों का एक वर्ग भी मानता है कि यह रणनीति राज्य में ममता बनर्जी की पार्टी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल सकती है। इससे चुनावी समीकरण और जटिल हो सकते हैं। दो चरणों में मतदान, 4 मई को नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत राज्य की 294 सीटों पर मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होगा। मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। चुनावी मैदान में मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, जबकि कांग्रेस की ‘एकला चलो’ रणनीति ने इस मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह दांव उसे पुनर्जीवित करता है या फिर विपक्षी वोटों के बंटवारे से सत्तारूढ़ दल को ही फायदा पहुंचाता है।

  • केरल चुनाव 2026: भाजपा का ‘वेलफेयर प्लस’ दांव, महिलाओं-गरीबों पर खास फोकस

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए ने मंगलवार को केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपना बहुप्रतीक्षित घोषणा-पत्र जारी कर दिया। राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेतृत्व ने इसे ‘समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा’ पर आधारित दस्तावेज बताया, जिसमें गरीबों, महिलाओं, किसानों और आम नागरिकों के लिए कई अहम वादे किए गए हैं। घोषणा-पत्र का अनावरण भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने किया। इस मौके पर केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने दावा किया कि यह घोषणा-पत्र राज्य की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। महिलाओं और गरीबों पर विशेष फोकस घोषणा-पत्र में सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भाजपा ने गरीब परिवारों के मुखिया, विधवाओं और 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को प्रतिमाह 3,000 रुपये की पेंशन देने का वादा किया है। इसके साथ ही गरीब परिवारों की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये का ‘फूड हेल्थ सिक्योरिटी कार्ड’ देने की घोषणा की गई है, जिससे वे खाद्य सामग्री और दवाइयों की खरीद कर सकेंगी। इसके अलावा हर परिवार को प्रति माह 20,000 लीटर मुफ्त पेयजल उपलब्ध कराने और राज्यभर में पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार का भी आश्वासन दिया गया है। त्योहारों—ओणम और क्रिसमस—के अवसर पर गरीब परिवारों को एक-एक मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने का वादा भी किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े वादे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना का ऐलान किया गया है। साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत सभी नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थकेयर कवरेज देने की बात कही गई है। पार्टी का कहना है कि इससे केरल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार होगा। किसानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर किसानों के लिए भाजपा ने सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने का वादा किया है, ताकि उनकी आय सुरक्षित रह सके। वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के तहत सबरीमाला मंदिर और गुरुवायुर मंदिर जैसे प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा और प्रबंधन में सुधार की बात कही गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का वादा भी घोषणा-पत्र का प्रमुख आकर्षण रहा। चुनावी परिदृश्य केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी। राज्य में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ), लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। भाजपा का यह घोषणा-पत्र स्पष्ट रूप से कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे और धार्मिक मुद्दों के संतुलन पर आधारित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति पार्टी को केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने और तीसरी शक्ति के रूप में उभरने में मदद कर सकती है।

  • केरल में राहुल का प्रहार: “वामपंथ सिद्धांतों से भटका, बीजेपी से सांठगांठ”

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कन्नूर (केरल)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केरल दौरे के दौरान सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य का वामपंथ अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ उसकी “अभूतपूर्व साझेदारी” बन गई है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को विचारधाराओं की सीधी लड़ाई करार दिया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के स्टार प्रचारक के रूप में कन्नूर पहुंचे गांधी ने दिन की शुरुआत स्थानीय नेताओं के साथ नाश्ते पर बैठक से की। इसके बाद उन्होंने जिले भर से आए उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान सीपीआई (एम) के पूर्व वरिष्ठ नेता टी.के. गोविंदन और वी. कुंजिकृष्णन, जो अब यूडीएफ समर्थित उम्मीदवार हैं, भी मंच पर मौजूद रहे। गांधी ने इसे वाम दलों के भीतर हो रहे बदलाव का संकेत बताया। रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “यह चुनाव परंपरागत रूप से लेफ्ट और यूडीएफ के बीच होता रहा है, लेकिन पहली बार हम लेफ्ट और भाजपा के बीच एक तरह की साझेदारी देख रहे हैं।” उन्होंने इसे “राजनीतिक पहेली” बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक रूप से दोनों की विचारधाराएं एक-दूसरे के विपरीत रही हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर निशाना साधते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान वाम नेतृत्व कॉरपोरेट हितों के प्रति नरम हो गया है और आम जनता के मुद्दों से दूर चला गया है। उन्होंने कहा, “आज का लेफ्ट अब लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुका है।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उल्लेख करते हुए गांधी ने सवाल उठाया कि जहां मोदी देशभर में धार्मिक मुद्दों को उठाते हैं, वहीं केरल में सबरीमाला जैसे संवेदनशील विषय पर अपेक्षाकृत चुप्पी क्यों साधी गई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ विभिन्न कानूनी कार्रवाइयों के बावजूद मुख्यमंत्री विजयन या उनके परिवार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि भाजपा चाहती है कि केरल में सीपीआई (एम) सत्ता में बनी रहे, क्योंकि उसे नियंत्रित करना आसान है। इसके उलट, उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार को भाजपा नियंत्रित नहीं कर सकती और कांग्रेस ही राष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार का प्रभावी मुकाबला करने में सक्षम है। राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलते हुए गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के व्यापारिक फैसलों से भारतीय किसानों—विशेषकर रबर, मक्का, सोया और फल उत्पादकों—को नुकसान हो सकता है। साथ ही उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और छोटे व्यवसायों पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। चुनाव को “मूल्यों की लड़ाई” बताते हुए गांधी ने कहा कि केरल की पहचान हमेशा एकता, अहिंसा और सामाजिक सौहार्द की रही है। उन्होंने कहा कि यूडीएफ प्रेम और भाईचारे की राजनीति करती है, जबकि लेफ्ट और भाजपा का कथित गठजोड़ समाज में विभाजन पैदा करता है। कन्नूर में सभा के बाद गांधी का कार्यक्रम कोझिकोड जिले के नाडापुरम में दो और जनसभाओं को संबोधित करने का है। उनके इस दौरे का उद्देश्य यूडीएफ के चुनावी संदेश को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जनसमर्थन जुटाना बताया गया।

  • असम, केरल और पुडुचेरी में ईवीएम का दूसरा रैंडमाइजेशन पूरा, 9 अप्रैल को मतदान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट के दूसरे चरण का रैंडमाइजेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आयोग ने इसे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। आयोग द्वारा 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में उपचुनावों का कार्यक्रम घोषित किया गया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इन चुनावों के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। चुनाव आयोग के अनुसार, ईवीएम-वीवीपैट के आवंटन के लिए एक सुव्यवस्थित दो-चरणीय रैंडमाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है। पहले चरण में जिला स्तरीय गोदामों से मशीनों को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से आवंटित किया जाता है। इसके बाद दूसरे चरण में इन्हीं मशीनों को विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित मतदान केंद्रों तक फिर से रैंडम आधार पर वितरित किया जाता है। आयोग ने जानकारी दी कि पहले चरण का रैंडमाइजेशन जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) द्वारा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पहले ही पूरा किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के तहत लगभग 8.85 लाख ईवीएम इकाइयों—जिनमें बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट शामिल हैं—का आवंटन किया गया था। दूसरे चरण का रैंडमाइजेशन अब असम, केरल और पुडुचेरी में संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) द्वारा चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों की मौजूदगी में ईवीएम प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से पूरा किया गया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित की गई ताकि किसी प्रकार की शंका या विवाद की गुंजाइश न रहे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि रैंडमाइजेशन प्रक्रिया में शामिल सभी ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की विस्तृत सूची चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के साथ साझा की जाएगी। इससे पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी तथा सभी राजनीतिक दलों का विश्वास कायम रहेगा। उधर, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों तथा शेष दो राज्यों के उपचुनावों के लिए दूसरे चरण का रैंडमाइजेशन उम्मीदवारों की नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद किया जाएगा। चुनाव आयोग का मानना है कि ईवीएम-वीवीपैट की यह दो-स्तरीय रैंडमाइजेशन प्रक्रिया किसी भी प्रकार की संभावित हेराफेरी की आशंका को समाप्त करती है और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करती है। आयोग ने संबंधित राज्यों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि 9 अप्रैल 2026 को होने वाला मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

  • विश्व शांति का संदेश लेकर निकली भव्य शोभा यात्रा, महावीर जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर शहर में भव्य ‘विश्व शांति शोभा यात्रा’ का आयोजन किया गया। जैन युवा संगठन एवं जैन युवा संगठन सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शोभायात्रा का शुभारंभ टाउन हॉल से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बेंगलूरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह, संजय वेद एवं विकास बोहरा ने ध्वज लहराकर किया। इस अवसर पर पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने उपस्थित श्रद्धालुओं को महावीर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए जैन युवा संगठन द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। समारोह को संबोधित करते हुए महेंद्र मुणोत ने कहा कि भगवान महावीर का अवतरण संपूर्ण जीव मात्र के कल्याण के लिए हुआ था। उन्होंने ‘अहिंसा परमो धर्म’ तथा ‘जियो और जीने दो’ का संदेश देकर मानवता को सही दिशा दिखाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व हिंसा, अशांति और असुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनका समाधान भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करने से ही संभव है। शोभा यात्रा में शहर के विभिन्न जैन संघों एवं सामाजिक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा के दौरान आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें भगवान महावीर के जीवन, उपदेशों एवं सिद्धांतों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। इन झांकियों के माध्यम से अहिंसा, सत्य, करुणा और विश्व शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और वातावरण भगवान महावीर के जयकारों से गूंज उठा। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का संदेश भी प्रसारित किया।

  • विजयनगर में भाजपा का संगठन मजबूत, बहादुर कुमावत बने उत्तर भारतीय प्रवासी प्रकोष्ठ अध्यक्ष

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। भारतीय जनता पार्टी के विजयनगर विधानसभा क्षेत्र में संगठन विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मंडल अध्यक्ष ए. रामाजिनी ने बहादुर कुमावत को उत्तर भारतीय प्रवासी प्रकोष्ठ, विजयनगर मंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस नियुक्ति से क्षेत्र में पार्टी संगठन को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नियुक्ति के पश्चात बहादुर कुमावत ने मंडल अध्यक्ष ए. रामाजिनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया कि वे पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि वे तन, मन और धन से पार्टी के साथ खड़े रहकर संगठन को मजबूत बनाने तथा प्रवासी समाज को पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर उपस्थित कार्यकर्ताओं और समाजजनों ने बहादुर कुमावत का स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से प्रकाश कुमावत, कालूराम कुमावत, राकेश गोयल, नेमाराम दय्या, दिनेश कुमार, राकेश मावर, मानकचंद नारानिया, भीखाराम, चेनाराम, सुरेश घोड़ावड़, खेताराम रेनवाल, सुगन रेनवाल, मिथुन सहित अन्य कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक शामिल रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विश्वास जताया कि बहादुर कुमावत के नेतृत्व में उत्तर भारतीय प्रवासी प्रकोष्ठ संगठन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा, जिससे पार्टी को आगामी चुनावों में लाभ मिलेगा।

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