top of page

“भारतार्थ खबर – खबर नहीं, उसका अर्थ”“हर खबर का सही विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“सच्ची खबर, सही अर्थ – भारतार्थ खबर”“जहाँ खबरों का होता है असली विश्लेषण”“ताज़ा खबरें, सटीक विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“हर खबर की गहराई तक – भारतार्थ खबर”“Breaking News से लेकर विशेष रिपोर्ट तक”“देश-दुनिया की हर बड़ी खबर – भारतार्थ खबर”

नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन: क्या “हर दो मिनट में उड़ान” भारत के विकास मॉडल की नई पहचान है?

भवानीपुर बना सियासी रणक्षेत्र: ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी की सीधी टक्कर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 3 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल चरम पर पहुंच गया है। इस बार चुनावी मुकाबला केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई में बदल गया है। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन चुकी है भवानीपुर विधानसभा सीट, जहां दोनों नेताओं की राजनीतिक साख दांव पर लगी है।


साल 2021 के विधानसभा चुनावों में इस राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने व्यक्तिगत रूप ले लिया था, जब ममता बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी को उनके गढ़ नंदीग्राम में चुनौती दी थी। हालांकि, यह रणनीति उनके लिए उलटी साबित हुई और वह करीब 2,000 वोटों से चुनाव हार गईं। इसके बावजूद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए 294 में से 215 सीटों पर जीत हासिल की और लगातार तीसरी बार सरकार बनाई।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम आंदोलन (2007) को खड़ा करने में सुवेंदु अधिकारी की भूमिका बेहद अहम रही थी, जिसे नजरअंदाज करना ममता बनर्जी के लिए महंगा साबित हुआ। यह आंदोलन ही 2011 में वाम मोर्चा सरकार के पतन का प्रमुख कारण बना था।


अधिकारी परिवार का पूर्वी मेदिनीपुर जिले में गहरा प्रभाव रहा है। सुवेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी कांथी लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2024 में स्वास्थ्य कारणों से चुनाव न लड़ने के बाद यह सीट उनके बेटे सौमेंदु अधिकारी के पास गई, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की।


इसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से चार पर 2021 में भाजपा की जीत ने अधिकारी परिवार की मजबूत पकड़ को और स्पष्ट किया। वहीं, तमलुक लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय की जीत ने पार्टी के मनोबल को और बढ़ाया है।


दूसरी ओर, भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का पारंपरिक गढ़ रही है। 2021 में नंदीग्राम से हार के बाद उन्होंने इसी सीट से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा था। अब सुवेंदु अधिकारी ने इस गढ़ को चुनौती देकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, उन्होंने नंदीग्राम से भी नामांकन दाखिल कर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखी है।


चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भवानीपुर में सक्रिय होकर प्रचार में जुट गए हैं, जबकि ममता बनर्जी पूरे राज्य में चुनावी रैलियां कर रही हैं। दूसरी तरफ, सुवेंदु अधिकारी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण होता है, तो तृणमूल कांग्रेस के कई कथित ‘फर्जी वोट’ हट सकते हैं।


साथ ही, वह राज्य में बढ़ती कानून-व्यवस्था की समस्याओं, राजनीतिक हिंसा और विभिन्न घोटालों की जांच को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी को भी अपने पक्ष में मान रहे हैं।


ऐसे में भवानीपुर का यह चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला निर्णायक संघर्ष बनता जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी जंग में जनता किसे अपना समर्थन देती है।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page