बंगाल में कांग्रेस का ‘एकला चलो’ दांव: मास्टरस्ट्रोक या टीएमसी को परोक्ष लाभ?
- धन्ना राम चौधरी

- 31 मार्च
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की सियासत में नया मोड़ आ गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे दिया है। पार्टी ने अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है।
कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की बहारामपुर सीट से वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारा है। उन्हें मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे अहम जिलों में संगठन को मजबूत करने और अधिकतम सीटें जीतने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन क्षेत्रों में कांग्रेस का परंपरागत जनाधार विशेषकर मुस्लिम समुदाय में मजबूत रहा है, जबकि अन्य इलाकों में भी पार्टी को विभिन्न वर्गों से समर्थन मिलने की उम्मीद है।
भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की ‘एकला चलो’ रणनीति भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है। राज्य में कई ऐसी सीटें हैं, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा है। ऐसे में 2-3 प्रतिशत वोटों का झुकाव भी परिणाम बदल सकता है। कांग्रेस की सक्रियता से भाजपा के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी वोटों का एक हिस्सा उसकी ओर शिफ्ट हो सकता है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बनने की संभावना है।
टीएमसी को अप्रत्यक्ष फायदा?
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की यह रणनीति सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए अपनाई गई है। उनका दावा है कि कांग्रेस के अलग लड़ने से विपक्षी वोटों का बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ टीएमसी को मिल सकता है।
विश्लेषकों का एक वर्ग भी मानता है कि यह रणनीति राज्य में ममता बनर्जी की पार्टी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल सकती है। इससे चुनावी समीकरण और जटिल हो सकते हैं।
दो चरणों में मतदान, 4 मई को नतीजे
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत राज्य की 294 सीटों पर मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होगा। मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। चुनावी मैदान में मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, जबकि कांग्रेस की ‘एकला चलो’ रणनीति ने इस मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह दांव उसे पुनर्जीवित करता है या फिर विपक्षी वोटों के बंटवारे से सत्तारूढ़ दल को ही फायदा पहुंचाता है।
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