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असम चुनाव 2026: यूसीसी बनाम ‘5 गारंटी’—संकल्प और वादों की सियासी जंग तेज

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 3 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र राज्य की सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच घोषणापत्रों का सीधा मुकाबला शुरू हो गया है। जहां एक ओर हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने ‘संकल्प पत्र’ जारी कर सांस्कृतिक पहचान, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को केंद्र में रखा है, वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे और गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस ने ‘5 गारंटी’ के जरिए सामाजिक-आर्थिक राहत का बड़ा दांव खेला है।


भाजपा का फोकस: पहचान, सुरक्षा और कड़े कानून

भाजपा के संकल्प पत्र में सबसे बड़ा और चर्चित वादा ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी)’ लागू करने का है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि सत्ता में वापसी के बाद राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा, हालांकि जनजातीय क्षेत्रों और छठी अनुसूची के दायरे को इससे बाहर रखा जाएगा।


इसके साथ ही भाजपा ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसे मुद्दों पर सख्त कानून बनाने का वादा किया है। पार्टी का दावा है कि सत्रों और नामघरों की जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, जिससे स्वदेशी समुदायों के हितों की रक्षा होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति असम की ‘स्थानीय अस्मिता’ को केंद्र में रखकर वोटरों को साधने की कोशिश है।


कांग्रेस का दांव: ‘न्याय’ और आर्थिक राहत

दूसरी ओर कांग्रेस ने अपनी ‘5 गारंटी’ के माध्यम से आम जनता, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देने पर जोर दिया है। पार्टी ने महिलाओं को मासिक नकद सहायता, प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा,10 लाख स्वदेशी लोगों को जमीन का पट्टा, बुजुर्गों को पेंशन और चर्चित मामलों में समयबद्ध न्याय का वादा किया है। कांग्रेस का कहना है कि उसकी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों तक पहुंचेंगी, जबकि भाजपा की योजनाएं सीमित दायरे में सिमटी हुई हैं।


महिला वोट बैंक पर सीधी टक्कर

असम चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने विशेष रणनीति अपनाई है। भाजपा ने ‘अरुणोदय’ योजना के तहत आर्थिक सहायता को 3,000 रुपये तक बढ़ाने और 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले कांग्रेस ने महिलाओं को 50,000 रुपये तक की आर्थिक मदद देकर स्वरोजगार को बढ़ावा देने का वादा किया है। इस मुकाबले ने महिला वोट बैंक को चुनाव का प्रमुख केंद्र बना दिया है।


विकास बनाम वादे: किसका पलड़ा भारी?

भाजपा ने ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ के तहत 18,000 करोड़ रुपये खर्च करने और 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है। वहीं कांग्रेस ने भ्रष्टाचार, पेपर लीक और बेरोजगारी को मुद्दा बनाते हुए पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करने का भरोसा दिया है।


चुनावी तस्वीर और आगे का रास्ता

126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है, जबकि नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में भाजपा जहां पहचान और सुरक्षा के मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस आर्थिक राहत और सामाजिक न्याय के एजेंडे के साथ मैदान में है। अब देखना यह होगा कि असम की जनता भारतीय जनता पार्टी के ‘संकल्प’ पर भरोसा जताती है या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ‘गारंटी’ को तरजीह देती है। चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि इस सियासी मुकाबले का असली ‘महायोद्धा’ कौन बनता है।

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