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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • आधी रात खुला विधानसभा सचिवालय, सियासी बवाल: पटवारी का भाजपा पर आरोप, राजेंद्र भारती की सदस्यता पर संकट

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार देर रात विधानसभा सचिवालय खुलने की खबर ने सियासी हलचल तेज कर दी। आधी रात को हुए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। देर रात करीब 11 बजे जीतू पटवारी अपने समर्थकों और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के साथ अचानक विधानसभा पहुंच गए। वे सीधे विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा के कक्ष में पहुंचे और आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में देर रात सचिवालय खोला गया है। पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है और सरकार विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस नेताओं के पहुंचते ही सचिव के कार्यालय से बाहर निकलने की घटना ने संदेह को और गहरा दिया। तीन साल की सजा से बढ़ा संकट दतिया से विधायक राजेंद्र भारती को हाल ही में एमपी-एमएलए कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई है। यह मामला भूमि विकास सहकारी बैंक से जुड़ा है, जहां उनके ऊपर 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर लगभग 18.5 लाख रुपये अवैध ब्याज प्राप्त करने का आरोप सिद्ध हुआ। अदालत ने इस मामले में एक पूर्व बैंक कर्मचारी को भी दोषी ठहराते हुए दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि सजा सुनाए जाने के साथ ही अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है, जिससे उन्हें तत्काल जेल नहीं जाना पड़ा। सदस्यता पर कानूनी तलवार कानून के अनुसार, यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में राजेंद्र भारती की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। उन्हें अपनी सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सीमित समय मिला है। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी अहम गौरतलब है कि राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था। ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है। बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव आधी रात को सचिवालय खुलने की घटना और उस पर लगे आरोपों ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे सत्ता पक्ष की साजिश बता रही है, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर और तूल पकड़ सकता है।

  • मालदा कांड पर सियासत तेज: ममता ने बीजेपी-चुनाव आयोग पर लगाया साजिश का आरोप

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी और भारत का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि मालदा की घटना भाजपा और चुनाव आयोग की “संयुक्त साजिश” का परिणाम है। उनका आरोप है कि इस तरह की घटनाओं के जरिए राज्य में संवैधानिक संकट पैदा कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की भूमिका तैयार की जा रही है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर भी तंज कसते हुए कहा कि “बंगाल में टूरिस्ट का हमेशा स्वागत है”, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इधर, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने अमित शाह की मौजूदगी में भबानीपुर सीट से नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। वहीं, ममता बनर्जी के 8 अप्रैल 2026 को नामांकन दाखिल करने की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने आशंका जताई कि हाल ही में तैनात किए गए कुछ अधिकारी नामांकन रद्द करने जैसी कार्रवाई कर सकते हैं। मालदा घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण राज्य प्रशासन पर उनका सीधा नियंत्रण नहीं है, लेकिन उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे में न आने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “यदि आप नहीं चाहते कि भाजपा सत्ता में आए, तो शांति और संयम बनाए रखें। कानून को अपने हाथ में न लें।” उन्होंने यह भी माना कि मालदा की घटना से राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा है और नए मुख्य सचिव स्थिति को संभालने में विफल रहे हैं। मालदा कांड को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे आगामी चुनाव और अधिक दिलचस्प एवं संवेदनशील होते नजर आ रहे हैं।

  • दहेज और दबाव ने ली जान: हैदराबाद में बिहार की इंजीनियर की संदिग्ध मौत, पति हिरासत में

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के मियापुर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां बिहार की रहने वाली 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने घर में मृत पाई गईं। प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि इसके पीछे घरेलू उत्पीड़न और दहेज मांग का गंभीर आरोप सामने आया है। पुलिस के अनुसार, घटना बुधवार की है जब महिला अपने अपार्टमेंट के हॉल में पंखे से लटकी मिलीं। सबसे पहले उनके पति ने ही उन्हें इस अवस्था में देखा और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही मियापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मृतका के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला की मुलाकात वर्ष 2020 में सोशल मीडिया के माध्यम से मध्य प्रदेश निवासी युवक से हुई थी। दोनों करीब पांच वर्षों तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे और इसी वर्ष फरवरी में पटना में पारिवारिक सहमति से विवाह किया था। शादी के बाद दंपति मियापुर स्थित एक अपार्टमेंट में रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, हाल के दिनों में दोनों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया था। आरोप है कि पति अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर महिला पर मानसिक दबाव बना रहा था। इतना ही नहीं, उसने अपने स्टार्टअप व्यवसाय में निवेश के लिए महिला के परिजनों पर भी दबाव डाला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में घरेलू कलह और कथित उत्पीड़न के कारण महिला द्वारा यह कदम उठाने की आशंका है। हालांकि, मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर दहेज प्रथा और वैवाहिक उत्पीड़न जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को उजागर कर दिया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • “15 दिन बंगाल में डेरा डालेंगे अमित शाह, ममता सरकार पर सीधा हमला”

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता/नंदीग्राम। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की सियासत गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुली चुनौती देते हुए ऐलान किया है कि वह आगामी 15 दिनों तक पश्चिम बंगाल में ही रहकर चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे। उनके इस बयान से राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। नंदीग्राम में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के नामांकन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि उनकी यह यात्रा केवल एक चुनावी दौरा नहीं, बल्कि “बंगाल में परिवर्तन का अभियान” है। उन्होंने कहा, “मैं अगले 15 दिनों तक बंगाल में रहूंगा और हर क्षेत्र में जाकर जनता से संवाद करूंगा। सुवेंदु अधिकारी की जीत बदलाव की शुरुआत होगी।” ममता पर सीधा हमला, ‘पूरे बंगाल में हार’ का दावा अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि इस बार उन्हें सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि पूरे राज्य में हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम की जनता एक बार फिर इतिहास दोहराने के लिए तैयार है और यह चुनाव राज्य की दिशा तय करेगा। ‘जनता बदलाव चाहती है’—शाह का दावा गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया है और हर जगह एक ही भावना दिखाई दे रही है—सरकार बदलने की। उनके अनुसार, “बंगाल की जनता अब तृणमूल कांग्रेस से छुटकारा चाहती है और विकास की नई राह पर चलना चाहती है।” कानून-व्यवस्था और बेरोज़गारी पर घेरा भाजपा नेता ने राज्य की कानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी और कथित वसूली तंत्र को लेकर भी ममता सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हिंसा, बम धमाके और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है, जिससे आम नागरिक परेशान हैं। शाह ने यह भी कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे और राज्य में विकास को गति दी जाएगी। घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया अपने भाषण में अमित शाह ने सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ के मुद्दे को भी उठाया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस पर कठोर कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा है। सीधा मुकाबला: टीएमसी बनाम बीजेपी राज्य में इस बार मुकाबला मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है। दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं और चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक चुके हैं। आगामी दिनों में अमित शाह का बंगाल में लगातार डेरा डालना चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि भाजपा इस चुनाव को लेकर कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं है, वहीं तृणमूल कांग्रेस भी अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत से मैदान में डटी हुई है।

  • हवाई यात्रियों को झटका: 60 प्रतिशत मुफ्त सीट नियम पर रोक, एयरलाइंस के दबाव में सरकार पीछे हटी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश के हवाई यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से प्रस्तावित 60 प्रतिशत मुफ्त सीट चयन नियम फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। केंद्र सरकार ने विमानन कंपनियों के तीव्र विरोध के बाद इस निर्णय को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। नागर विमानन मंत्रालय द्वारा 18 मार्च 2026 को जारी निर्देश में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को कहा गया था कि सभी एयरलाइंस को हर उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध करानी होंगी। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को सीट चयन में अधिक सुविधा और पारदर्शिता प्रदान करना था। हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही विमानन कंपनियों और उद्योग संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका तर्क था कि सीट चयन शुल्क उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत है और इस व्यवस्था में बदलाव से परिचालन लागत पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही, किराया संरचना भी प्रभावित होगी, जिससे टिकट दरों में वृद्धि की संभावना बन सकती है। एयरलाइंस के विरोध के बाद सरकार ने स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस नियम के प्रभाव का व्यापक अध्ययन किए बिना इसे लागू नहीं किया जाएगा। ऐसे में फिलहाल यात्रियों को सीट चयन के लिए पहले की तरह अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। मौजूदा व्यवस्था जारी वर्तमान में एयरलाइंस लगभग 20 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराती हैं, जबकि बाकी सीटों के चयन के लिए यात्रियों को भुगतान करना पड़ता है। सीट के स्थान, लेगरूम और अन्य सुविधाओं के आधार पर यह शुल्क सामान्यतः 200 से 2,100 रुपये तक होता है। अन्य यात्री सुविधाएं रहेंगी लागू हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुविधा से जुड़े अन्य प्रावधान यथावत रहेंगे। इनमें सीट आवंटन में पारदर्शिता, एक ही पीएनआर वाले यात्रियों को साथ बैठाने की व्यवस्था, संगीत वाद्ययंत्र, खेल उपकरण और पालतू जानवरों के साथ यात्रा की सुविधा तथा सभी अतिरिक्त शुल्क की स्पष्ट जानकारी देना शामिल है। यात्रियों को था राहत का इंतजार देशभर के हवाई अड्डों से प्रतिदिन पांच लाख से अधिक यात्री यात्रा करते हैं। ऐसे में 60 प्रतिशत मुफ्त सीट चयन का प्रस्ताव आम यात्रियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा था। लेकिन फिलहाल इस पर रोक लगने से यात्रियों को निराशा हाथ लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता, तो यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ कम होता, लेकिन एयरलाइंस की आय पर असर पड़ने के चलते टिकट कीमतों में बढ़ोतरी भी संभव थी। अब सभी की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो इस मुद्दे पर संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।

  • जलपाईगुड़ी में 14 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार, चुनावी माहौल में गरमाई सियासत

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता/जलपाईगुड़ी। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर-पूर्व एक्सप्रेस ट्रेन से 14 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी बुधवार रात जलपाईगुड़ी रोड रेलवे स्टेशन पर की गई, जिससे राज्य में पहले से गर्म चुनावी माहौल और अधिक सियासी रंग लेने लगा है। गिरफ्तार किए गए लोगों में पांच महिलाएं और चार नाबालिग शामिल हैं। तलाशी के दौरान उनके पास से बड़ी संख्या में फर्जी भारतीय दस्तावेज बरामद किए गए, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, भारतीय मोबाइल सिम कार्ड के अलावा विदेशी मुद्रा मलेशियाई रिंगिट भी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि ये सभी लोग असम के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर पश्चिम बंगाल होते हुए नई दिल्ली जाने की योजना बना रहे थे। आरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में घुसने की बात स्वीकार की है। फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनके भारत आने का असली उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या नहीं। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा पहले से कड़ी बताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठियों का प्रवेश सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। इधर, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को बसाकर वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्र सरकार के अधीन है, ऐसे में राज्य सरकार को दोष देना अनुचित है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की घटनाएं राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती हैं और अवैध प्रवासन एक बार फिर प्रमुख चुनावी मुद्दा बन सकता है। फिलहाल आरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कौन लोग और कौन सा तंत्र सक्रिय है।

  • यूडीएफ का घोषणापत्र जारी: महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा, पेंशन ₹3000 और छात्राओं को मासिक सहायता का वादा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। केरल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने गुरुवार को अपना बहुप्रतीक्षित घोषणापत्र जारी कर दिया। नौ अप्रैल को प्रस्तावित चुनाव के मद्देनज़र जारी इस घोषणापत्र में सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास से जुड़े कई बड़े वादे किए गए हैं। घोषणापत्र का विवरण देते हुए कांग्रेस नेता वी डी सतीशन ने कहा कि यूडीएफ सरकार बनने पर राज्य परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, वर्तमान कल्याण पेंशन को बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह करने का भी वादा किया गया है। महिलाओं और छात्राओं को विशेष प्राथमिकता देते हुए गठबंधन ने कॉलेज जाने वाली छात्राओं को ₹1,000 प्रति माह वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, राज्य के प्रत्येक परिवार को ₹25 लाख तक की बीमा योजना उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया है, जिससे स्वास्थ्य और आपात स्थितियों में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आर्थिक क्षेत्र को मजबूती देने के लिए यूडीएफ ने छोटे कारोबारियों को ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की योजना पेश की है। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहित करने के लिए 100 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले उद्योगों को वित्तीय सहायता देने का भी आश्वासन दिया गया है। घोषणापत्र में विमानन क्षेत्र के विकास को गति देने, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में सुधार करने तथा जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। वायनाड में एक जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना का वादा भी इसमें शामिल है, जिससे क्षेत्रीय शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यूडीएफ का यह घोषणापत्र सीधे तौर पर महिलाओं, युवाओं और मध्यम वर्ग को साधने का प्रयास है। अब देखना होगा कि मतदाता इन वादों को कितना समर्थन देते हैं और इसका चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ता है।

  • असम चुनाव में गरजे अमित शाह, कालियाबर में करेंगे विशाल जनसभा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह दोपहर करीब 3 बजे कालियाबर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी एवं राज्य सरकार के मंत्री केशव महंत के समर्थन में जनता से वोट देने की अपील करेंगे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, इस जनसभा में बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की उम्मीद है। सभा के माध्यम से पार्टी राज्य में किए गए विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे में सुधार, सामाजिक योजनाओं और केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखेगी। साथ ही विपक्षी दलों की नीतियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में चुनावी मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प हो गया है, जहां सत्तारूढ़ भाजपा अपनी उपलब्धियों के आधार पर जनता का समर्थन बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष भी आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरा है। गौरतलब है कि असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दलों के दिग्गज नेता लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है।

  • मालदा में वोटर लिस्ट विवाद उग्र: 7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे बंधक, सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी चिंता

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली/मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। कालियाचक क्षेत्र में गुस्साए लोगों की भीड़ ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस घटना ने चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा दिया है, वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने इसे बेहद निंदनीय बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब न्यायिक अधिकारी मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में जुटे हुए थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिसके चलते इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने अधिकारियों को घेर लिया। बंधक बनाए गए अधिकारियों में तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को दोपहर से देर रात तक मौके पर ही रोके रखा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर रात करीब एक बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, अधिकारियों को सुरक्षित निकालने के दौरान भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम नहीं हुआ। भीड़ ने पुलिस वाहनों को निशाना बनाने की कोशिश की और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ वाहनों के शीशे टूटने की खबर है। पुलिस ने संयम बरतते हुए हालात को काबू में किया और अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना के बाद चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने घटना के लिए राज्य की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बयानों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है, लेकिन इस प्रकार की हिंसक प्रतिक्रिया केवल पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कानून को हाथ में लेने में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध कर रही है तथा इस स्थिति के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आगामी 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान प्रस्तावित है। ऐसे में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य तेज गति से चल रहा है। इस बीच मालदा की यह घटना चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • केरल में तेजस्वी का ‘इंग्लिश अटैक’, कांग्रेस पर साधा निशाना; एलडीएफ के लिए मांगे वोट

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोच्चि/तिरुवनंतपुरम। तेजस्वी यादव इन दिनों केरल में चुनावी मैदान में सक्रिय नजर आ रहे हैं, जहां वे वामपंथी गठबंधन एलडीएफ के समर्थन में जोरदार प्रचार कर रहे हैं। अपने पांच दिवसीय दौरे के दौरान तेजस्वी यादव ने कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया, जिनमें उनके धाराप्रवाह अंग्रेजी भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। गठबंधन के तहत आरजेडी को तीन सीटें मिली हैं, जिन पर पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इन सीटों में वडाकारा, कुत्थुपरंबा और कालपेट्टा शामिल हैं। चुनावी सभाओं में तेजस्वी यादव ने पिनाराई विजयन सरकार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में केरल ने विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में केरल को देश के लिए मॉडल बताया। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर केरल के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। अपने भाषणों में तेजस्वी यादव ने बिहार की स्थिति का जिक्र करते हुए उसे देश के गरीब राज्यों में शामिल बताया और कहा कि वे वहां के लोगों को केरल जैसे विकास का उदाहरण देते हैं। इस बयान को लेकर बिहार में सियासी विवाद भी खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की पिछड़ी स्थिति के लिए उनके परिवार की पूर्व सरकारें जिम्मेदार रही हैं। इधर, कांग्रेस के खिलाफ भी तेजस्वी यादव ने अप्रत्यक्ष रूप से मोर्चा खोला है। बिहार में हालिया चुनावी हार के बाद कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए वे केरल में कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। खासतौर पर कालपेट्टा सीट, जो प्रियंका गांधी के संसदीय क्षेत्र वायनाड के अंतर्गत आती है, वहां मुकाबला रोचक बन गया है। इस बीच, एलडीएफ नेतृत्व ने तेजस्वी यादव के प्रचार अभियान का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उनके समर्थन को “धर्मनिरपेक्ष ताकतों के लिए मजबूती” बताया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केरल में तेजस्वी यादव की सक्रियता न केवल क्षेत्रीय राजनीति में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है, बल्कि विपक्षी खेमे में नए समीकरणों की ओर भी संकेत करती है।

  • बनशंकरी में अय्यप्पा स्वामी जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया, अन्नदान व भजन से गूंजा माहौल

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। श्री पन्दालदा कन्दा भजन मंडली बनशंकरी के तत्वावधान में भगवान अय्यप्पा स्वामी का जन्मोत्सव भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान अय्यप्पा स्वामी के पूजन-अर्चन एवं विशेष भजन संध्या के साथ हुई। भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरे आयोजन स्थल पर "स्वामीये शरणम अय्यप्पा" के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने भगवान अय्यप्पा स्वामी के दर्शन कर देश और विश्व में शांति, समृद्धि एवं सुख-शांति की कामना की। उन्होंने अन्नदान कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेकर श्रद्धालुओं को भोजन परोसते हुए सेवा कार्य भी किया। आयोजन के दौरान अन्नदान कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भजन मंडली एवं आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का सम्मान किया गया। इस दौरान मंडली के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन ने सामाजिक एकता, सेवा भावना और धार्मिक आस्था का संदेश दिया।

  • मदुरै में नवपद ओली तप पूर्ण: लाभार्थी परिवार का भव्य सम्मान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मदुरै (तमिलनाडु)। श्री साँचा सुमतिनाथ राजेंद्रसूरी जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट के तत्वावधान में स्थानीय यतीन्द्र भवन में आयोजित शाश्वत नवपद ओली आराधना तप का धार्मिक माहौल में समापन हुआ। इस अवसर पर तप के लाभार्थी परिवार का सम्मान कर श्रद्धा और भक्ति का भाव प्रकट किया गया। श्री संघ के प्रवक्ता दिनेश सालेचा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री संघ की आज्ञा से मेंगलवा (राजस्थान) निवासी मीठालालजी नेनमलजी संखलेचा परिवार को नौ दिवसीय आयंबिल की ओली आराधना तप करने का लाभ प्राप्त हुआ। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और धार्मिक आस्था देखने को मिली। ओली तप के समापन से पूर्व आयोजित कार्यक्रम में मदुराई प्रवासी संगठन संस्था द्वारा लाभार्थी परिवार के मुखिया एवं श्री साँचा सुमतिनाथ संघ के ट्रस्टी मीठालालजी संखलेचा का सम्मान किया गया। इस दौरान उपस्थित समाजजनों ने तपस्वी परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके त्याग, तपस्या और धार्मिक समर्पण की सराहना की। कार्यक्रम में रतनचंद संखलेचा, मदुरै राजस्थानी एसोसिएशन के मंत्री एवं तेरापंथ सभा के निवृत्तमान अध्यक्ष अशोक जीरावला, दिनेश संखलेचा, आईजा प्रदेशाध्यक्ष दिनेश सालेचा, महेंद्र बंदामुथा, भरत भंसाली, कांतिलाल जैन, गौतम जैन, प्रवीण जैन, चेतन जैन और आकाश जैन सहित श्री संघ के पदाधिकारी एवं अनेक सदस्य उपस्थित रहे। समारोह के अंत में सभी ने नवपद ओली तप के महत्व को आत्मसात करते हुए समाज में धार्मिक संस्कारों के प्रसार का संकल्प लिया।

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