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मालदा में वोटर लिस्ट विवाद उग्र: 7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे बंधक, सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी चिंता

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 3
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली/मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। कालियाचक क्षेत्र में गुस्साए लोगों की भीड़ ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस घटना ने चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा दिया है, वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने इसे बेहद निंदनीय बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब न्यायिक अधिकारी मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में जुटे हुए थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिसके चलते इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने अधिकारियों को घेर लिया। बंधक बनाए गए अधिकारियों में तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं।


सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों को दोपहर से देर रात तक मौके पर ही रोके रखा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर रात करीब एक बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।


हालांकि, अधिकारियों को सुरक्षित निकालने के दौरान भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम नहीं हुआ। भीड़ ने पुलिस वाहनों को निशाना बनाने की कोशिश की और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ वाहनों के शीशे टूटने की खबर है। पुलिस ने संयम बरतते हुए हालात को काबू में किया और अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।


घटना के बाद चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने घटना के लिए राज्य की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बयानों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है, लेकिन इस प्रकार की हिंसक प्रतिक्रिया केवल पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रही है।


वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कानून को हाथ में लेने में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध कर रही है तथा इस स्थिति के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है।


गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आगामी 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान प्रस्तावित है। ऐसे में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य तेज गति से चल रहा है। इस बीच मालदा की यह घटना चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

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