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मालदा कांड पर सियासत तेज: ममता ने बीजेपी-चुनाव आयोग पर लगाया साजिश का आरोप

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 3
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी और भारत का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।


गुरुवार को मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि मालदा की घटना भाजपा और चुनाव आयोग की “संयुक्त साजिश” का परिणाम है। उनका आरोप है कि इस तरह की घटनाओं के जरिए राज्य में संवैधानिक संकट पैदा कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की भूमिका तैयार की जा रही है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर भी तंज कसते हुए कहा कि “बंगाल में टूरिस्ट का हमेशा स्वागत है”, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


इधर, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने अमित शाह की मौजूदगी में भबानीपुर सीट से नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। वहीं, ममता बनर्जी के 8 अप्रैल 2026 को नामांकन दाखिल करने की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने आशंका जताई कि हाल ही में तैनात किए गए कुछ अधिकारी नामांकन रद्द करने जैसी कार्रवाई कर सकते हैं।


मालदा घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण राज्य प्रशासन पर उनका सीधा नियंत्रण नहीं है, लेकिन उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे में न आने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “यदि आप नहीं चाहते कि भाजपा सत्ता में आए, तो शांति और संयम बनाए रखें। कानून को अपने हाथ में न लें।” उन्होंने यह भी माना कि मालदा की घटना से राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा है और नए मुख्य सचिव स्थिति को संभालने में विफल रहे हैं। मालदा कांड को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे आगामी चुनाव और अधिक दिलचस्प एवं संवेदनशील होते नजर आ रहे हैं।

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