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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • कर्ज में डूबे किसान की पुकार: “न्याय नहीं तो इच्छामृत्यु दे दो”

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चंद्रपुर (महाराष्ट्र)। साहूकारी कर्ज के जाल में फंसे एक किसान की दर्दनाक दास्तान ने एक बार फिर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागभीड़ तहसील के मिंथूर गांव निवासी किसान रोशन कुडे, जो कर्ज के बोझ से तंग आकर अपनी किडनी बेचने तक को मजबूर हुए, अब न्याय न मिलने से हताश होकर इच्छामृत्यु की मांग कर रहे हैं। “अगर न्याय नहीं मिल रहा तो जीकर क्या करूं?”—यह सवाल उन्होंने प्रशासन के सामने रखते हुए अपनी पीड़ा बयां की। उनकी यह पुकार न सिर्फ स्थानीय प्रशासन, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी बन गई है। कर्ज के जाल में फंसा जीवन रोशन कुडे की कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों की हकीकत है जो अवैध साहूकारों के शिकंजे में फंसकर अपना सब कुछ खो देते हैं। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि उन्हें विदेश जाकर अपनी किडनी बेचने का कठोर फैसला लेना पड़ा। यह मामला उजागर होने के बाद प्रदेशभर में हलचल मची, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं। सरकारी आदेश भी बेअसर विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने अवैध साहूकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित किसानों को राहत देने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसान का आरोप है कि उनकी जमीन अब भी उनके कब्जे से बाहर है और उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। न्याय की आस टूटी, उठी इच्छामृत्यु की मांग लगातार अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता से टूट चुके रोशन कुडे ने अब इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि जब जीवन जीने के सारे आधार छिन जाएं और न्याय की उम्मीद खत्म हो जाए, तो जीने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। उन्होंने कहा, “मैं पिछले चार महीनों से न्याय के लिए भटक रहा हूं। मेरी खेती चली गई, शरीर भी कमजोर हो चुका है। मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। अब या तो मुझे मेरी जमीन वापस दिलाई जाए या इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।” प्रशासन पर उठते सवाल इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या अवैध साहूकारों के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है? क्या एक किसान को न्याय पाने के लिए अपने जीवन की बलि देने की बात करनी पड़ेगी? किसान संगठनों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक किसान असंतोष का कारण बन सकता है। अब निगाहें प्रशासन पर हाल ही में पदभार संभालने वाली नई जिलाधिकारी वसुमना पंत के सामने यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पूरे जिले और राज्य की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में कितनी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाता है। रोशन कुडे की यह पुकार केवल एक व्यक्ति का दर्द नहीं, बल्कि उस तंत्र की विफलता का आईना है, जहां न्याय की उम्मीद टूटने पर जीवन ही बोझ बन जाता है।

  • कांग्रेस में मतभेद उजागर, विदेश नीति पर मोदी सरकार को मिली अंदरूनी सराहना

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ उस समय सामने आया जब कांग्रेस के भीतर ही विदेश नीति को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे। जहां एक ओर राहुल गांधी केंद्र सरकार की कूटनीति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता खुलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति की सराहना करते नजर आ रहे हैं। पूर्व विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने हाल ही में दिए अपने बयान में सरकार की कूटनीतिक रणनीति को “परिपक्व और संतुलित” बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौर में भारत का किसी एक पक्ष की ओर झुकाव दिखाना न केवल कूटनीतिक रूप से गलत होता, बल्कि देशहित के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता था। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है। आनंद शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के सामने चुनौती केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय भी है। खाड़ी देशों में कार्यरत लाखों भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में संतुलित और व्यावहारिक नीति ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने भारतीय राजनयिकों के प्रयासों की भी सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में देश की प्रतिष्ठा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की विदेश नीति को समर्थन दिया हो। इससे पहले शशि थरूर और मनीष तिवारी भी सार्वजनिक रूप से सरकार के संतुलित रुख की प्रशंसा कर चुके हैं। मनीष तिवारी ने तो स्पष्ट कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट “भारत का युद्ध नहीं” है और देश ने रणनीतिक स्वायत्तता का सही परिचय दिया है। हालांकि, पार्टी के भीतर एक अन्य धड़ा अब भी सरकार की आलोचना में मुखर है। पवन खेड़ा और जयराम रमेश जैसे नेता केंद्र की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन जब पार्टी के ही अनुभवी नेता सरकार के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं, तो यह मतभेद केवल राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर वैचारिक विभाजन का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित किया है। कच्चे तेल और गैस पर निर्भर देशों के लिए यह संकट गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में भारत का संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आनंद शर्मा ने अपने बयान में यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता का परिचय देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के मुद्दों का राजनीतिकरण देशहित के विरुद्ध हो सकता है। वर्तमान घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के भीतर विदेश नीति को लेकर एकरूपता का अभाव है। जहां एक ओर नेतृत्व स्तर पर सरकार की आलोचना जारी है, वहीं अनुभवी नेताओं का व्यावहारिक दृष्टिकोण अलग तस्वीर पेश कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस आंतरिक असहमति को किस प्रकार संतुलित करती है। कुल मिलाकर, विदेश नीति जैसे गंभीर मुद्दे पर उभरते ये मतभेद न केवल कांग्रेस की आंतरिक स्थिति को उजागर करते हैं, बल्कि भारतीय राजनीति में परिपक्व बहस की आवश्यकता को भी रेखांकित करते हैं।

  • निर्माणाधीन सालासर बालाजी मंदिर में उमड़ी आस्था, हनुमान जयंती पर भक्ति का भव्य संगम

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर बी.टी.एम. लेआउट स्थित रांका कॉलोनी में निर्माणाधीन सालासर बालाजी मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। श्री सालासर बालाजी सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित ‘श्री हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम अत्यंत भव्यता, अनुशासन और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि समाज की एकजुटता और सेवा भावना को भी सुदृढ़ किया। प्रातःकालीन बेला से ही मंदिर परिसर में भक्तों का आगमन शुरू हो गया था। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6:30 बजे भव्य ध्वजा पदयात्रा से हुई। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में, हाथों में ध्वज लिए, गाजे-बाजे और जयकारों के साथ बालाजी महाराज की भक्ति में लीन होकर पदयात्रा में सम्मिलित हुए। “जय श्री राम” और “बालाजी महाराज की जय” के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा, जिससे क्षेत्र पूर्णतः भक्तिमय हो गया। इसके उपरांत प्रातः 9 बजे वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार 9 कुंडीय हवन का आयोजन किया गया। पंडित मुरारी दाधीच के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने विधिवत आहुति अर्पित की। हवन में परिवार सहित भाग लेने वाले भक्तों की संख्या उल्लेखनीय रही। पूरे वातावरण में यज्ञ की पवित्र सुगंध और मंत्रों की गूंज से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा था। दोपहर 2:30 बजे बालाजी महाराज के भव्य दरबार में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया। समिति के अध्यक्ष प्रमोद मुरारका, उपाध्यक्ष सतीश मित्तल, सचिव मानित माहेश्वरी सहित अन्य पदाधिकारी एवं ट्रस्टियों ने विधिपूर्वक पूजा कर अखंड ज्योत प्रज्वलित की। यह ज्योत श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बनकर पूरे आयोजन के दौरान भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इसके पश्चात भागवत आचार्य पंडित मुरारी दाधीच द्वारा सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में सुंदरकांड का पाठ करते हुए भगवान हनुमान की भक्ति में डूबकर अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। वातावरण में भक्ति और भावनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति को भावविभोर कर दिया। सायंकाल 5 बजे से आयोजित भव्य भजन संध्या कार्यक्रम ने आयोजन को चरम पर पहुंचा दिया। जयपुर के प्रसिद्ध भजन गायक राजीव विजयवर्गीय एंड पार्टी ने अपनी मधुर और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “वीर हनुमाना अति बलवाना”, “श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में” तथा “अनोखी थारी झांकी महरा सालासर हनुमान” जैसे लोकप्रिय भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। पूरा परिसर भक्ति संगीत और जयकारों से गुंजायमान हो गया। कार्यक्रम के दौरान दिनभर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने अनुशासित ढंग से बालाजी महाराज के दर्शन किए और अखंड ज्योत के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त किया। अनेक भक्तों द्वारा सवामणी का भोग अर्पित किया गया, जिससे प्रसाद वितरण का भी भव्य आयोजन हुआ। इस विशाल धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा। दादी धाम प्रचार समिति, स्वास्तिक सेवा संघ, मारवाड़ी युवा मंच, रुद्राक्ष फाउंडेशन, श्री श्याम मंदिर ट्रस्ट, गौड़ ब्राह्मण संघ, पारीक समाज सहित अनेक संगठनों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। समिति द्वारा इन सभी सहयोगी संस्थाओं एवं व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया, जिससे उनकी सेवा भावना को प्रोत्साहन मिला। मंदिर परिसर का आकर्षक श्रृंगार विशेष रूप से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। रानीगंज के किशन बगड़िया एवं उनकी टीम द्वारा किए गए साज-सज्जा कार्य ने मंदिर को दिव्य रूप प्रदान किया। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की सजावट और पारंपरिक कलात्मकता ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक आभा से भर दिया। इस अवसर पर चन्द्रप्रकाश रामसिसररिया, रतनलाल गोयल, मदन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष राजकमल गनेरीवाला एवं मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन संजय शाह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। समिति के अध्यक्ष प्रमोद मुरारका ने कार्यक्रम की सफलता पर सभी श्रद्धालुओं, सहयोगी संस्थाओं एवं कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “निर्माणाधीन मंदिर में इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में न केवल आस्था का विस्तार होता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है। यह आयोजन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।” कुल मिलाकर, यह आयोजन भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्वितीय उदाहरण बनकर उभरा, जिसने बेंगलूरु के धार्मिक परिदृश्य में एक विशेष स्थान स्थापित किया। उपरोक्त जानकारी मीडिया प्रभारी कनक भोजक ने दी।

  • “तीन साल में 2809 किसानों की मौत”: वी. सोमन्ना का सिद्धारमैया सरकार पर तीखा हमला

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बगलाकोट। केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में प्रशासनिक विफलता, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चरम पर है। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 2809 किसानों की मौत हुई है, जो सरकार की नीतियों की असफलता को दर्शाता है। मीडिया से बातचीत करते हुए सोमन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी सत्ता का उपयोग जनहित के बजाय निजी और राजनीतिक स्वार्थों के लिए कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की जनता को गुमराह कर “अंधेरे में रखा जा रहा है” और सरकार वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रही है। उन्होंने कहा कि बेंगलूरु के विकास में केंद्र और विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन वर्तमान सरकार विकास कार्यों का श्रेय लेने में लगी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में न केवल विपक्ष, बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों में भी नैतिकता का अभाव दिखाई दे रहा है। भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप सोमन्ना ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद में डूबी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की अनदेखी की जा रही है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि “यह एक बेपरवाह सरकार है, जो लगातार आलोचना के बावजूद सुधरने को तैयार नहीं है।” किसानों और बेरोजगारी पर चिंता केंद्रीय मंत्री ने बताया कि समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणाओं के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में 2809 किसानों की मौत चिंताजनक है। इसके अलावा उन्होंने राज्य में 2.5 लाख से अधिक सरकारी पद खाली होने का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर रोजगार सृजन में विफल रहने का आरोप लगाया। उत्तर कर्नाटक में हालात बदतर सोमन्ना ने उत्तर कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लिए पर्याप्त राहत राशि जारी नहीं की गई है और कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। केंद्र-राज्य वित्तीय विवाद जल जीवन मिशन के तहत फंड को लेकर भी उन्होंने राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, राज्य ने 28 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान दिखाया, लेकिन उपयोग प्रमाण पत्र के आधार पर केवल 11 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। लोगों को गुमराह करने का आरोप सोमन्ना ने सरकार पर समाज को विभाजित करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई सरकारी योजनाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें फर्जी कार्ड और गलत तरीके से भुगतान के मामले शामिल हैं। अंत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य को विकास के लिए पर्याप्त धनराशि दी जा रही है, लेकिन राज्य सरकार उसे सही तरीके से उपयोग करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है।

  • “गारंटी पर झूठ का पुलिंदा खोल रही सरकार”—सिद्धारमैया पर आर. अशोक का तीखा हमला

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) दावणगेरे (कर्नाटक)। राज्य की सियासत में गारंटी योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार “गारंटी के मुद्दे पर झूठ का पुलिंदा फोड़ रही है” और वित्तीय अनुशासन का दावा केवल दिखावा है। मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक ने कहा कि 16 बजट पेश करने वाले सिद्धारमैया अब “जुगाड़ की राजनीति” में माहिर हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विकास कार्य ठप पड़े हैं और सरकार केवल गारंटी योजनाओं के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। “तीन साल में एक भी ठोस विकास कार्य नहीं हुआ, सिर्फ झूठ बोला गया,” उन्होंने कहा। गारंटी योजनाओं पर सवाल भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी गारंटी योजनाओं के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनका सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गारंटी के नाम पर जनता के साथ धोखा किया है। अन्नभाग्य योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस योजना के लिए चावल केंद्र सरकार दे रही है, जबकि श्रेय राज्य सरकार ले रही है। पिछड़े वर्गों और निगमों पर आरोप अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय कर रही है। तीन साल बीतने के बावजूद आठ पिछड़ा वर्ग निगमों में अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हुई और न ही उन्हें पर्याप्त अनुदान मिला। उन्होंने वाल्मीकि निगम में वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। रोजगार और वित्तीय स्थिति पर घेरा उन्होंने कहा कि हजारों युवा नौकरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन 56 हजार पदों को भरने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए अशोक ने कहा कि आय घट रही है, टैक्स कलेक्शन कम हो रहा है, फिर भी बजट का आकार बढ़ाया जा रहा है। “राज्य कर्ज चुकाने के लिए फिर से कर्ज ले रहा है, यह वित्तीय कुप्रबंधन का संकेत है,” उन्होंने कहा। कांग्रेस नेताओं के बयान का हवाला अशोक ने कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं—आर.वी. देशपांडे, बी.आर. पाटिल, राजू कागे और बसवराज रायरेड्डी—के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि खुद कांग्रेस के भीतर से विकास कार्यों के लिए धन की कमी की बात सामने आ चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि भाजपा की आलोचना छोड़कर अपनी पार्टी के नेताओं पर कार्रवाई करें। केंद्र-राज्य संबंधों पर भी टिप्पणी टैक्स वितरण को लेकर केंद्र पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए अशोक ने कहा कि भाजपा शासन के दौरान कर्नाटक को पर्याप्त फंड मिला, जबकि कांग्रेस के समय ऐसा नहीं था। चुनावी अपील दावणगेरे के विकास कार्यों का श्रेय भाजपा सरकार को देते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना, पार्कों का निर्माण और अन्य आधारभूत सुविधाएं भाजपा शासन में आईं। अंत में उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे कांग्रेस के “विफल शासन” से सबक लें और आगामी चुनावों में भाजपा को समर्थन देकर बदलाव लाएं।

  • केरल चुनाव से पहले सियासी वार तेज: किरण रिजिजू का कांग्रेस-लेफ्ट पर हमला, ‘लोगों को किया गुमराह’

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनावों से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस और कम्युनिस्ट दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों ने वर्षों तक राज्य के लोगों को गुमराह किया और केवल सत्ता के लिए राजनीति की। मीडिया से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि केरल में लंबे समय से सत्ता का खेल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और वामपंथी दलों के गठबंधन एलडीएफ के बीच चलता रहा है, लेकिन दोनों ही जनता की वास्तविक समस्याओं को हल करने में विफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार जनता इन दोनों दलों की “हकीकत” समझ चुकी है। रिजिजू ने कहा, “हर पांच साल में सत्ता बदलती रही, लेकिन आम लोगों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। पहली बार कांग्रेस और कम्युनिस्ट, दोनों ही जनता के सामने बेनकाब हो गए हैं।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा और एनडीए ने केरल के विकास के लिए स्पष्ट और ठोस नीति तैयार की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्य के समग्र विकास और सभी वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। एफसीआरए पर गुमराह करने का आरोप रिजिजू ने कांग्रेस और वाम दलों पर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां जानबूझकर जनता को भ्रमित कर रही हैं, जबकि केंद्र सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। अल्पसंख्यकों को लेकर भी साधा निशाना केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम समुदाय को केवल “वोट बैंक” के रूप में इस्तेमाल किया। इसके विपरीत उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में सभी छोटे-बड़े अल्पसंख्यक समुदायों को समान महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम समुदाय को किसी एक पार्टी का वोट बैंक बनकर नहीं रहना चाहिए। भाजपा सबके लिए काम करती है और हर समुदाय को समान अवसर देने में विश्वास रखती है।” चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्माहट केरल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। एक ओर जहां भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। ऐसे में नेताओं के तीखे बयान चुनावी माहौल को और अधिक गरमा रहे हैं।

  • मतदान दिवस पर पेड हॉलिडे अनिवार्य, सैलरी कटौती पर सख्त रोक

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश में आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दिन सभी कर्मचारियों—चाहे वे स्थायी हों, दिहाड़ी मजदूर हों या कैज़ुअल कर्मचारी—को सवैतनिक अवकाश (पेड हॉलिडे) दिया जाएगा। इस दौरान यदि कोई कर्मचारी मतदान करने के लिए छुट्टी लेता है तो उसकी सैलरी में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जा सकेगी। चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक प्रेस नोट में बताया कि यह प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत लागू होता है। इसके अनुसार, किसी भी व्यवसाय, उद्योग, दुकान या अन्य संस्थान में कार्यरत प्रत्येक पात्र मतदाता को मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश देना नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी है। आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई नियोक्ता इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा। यह व्यवस्था कर्मचारियों को बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग करने के उद्देश्य से की गई है। इन राज्यों में लागू होगा नियम यह निर्णय पांच राज्यों—असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल—में होने वाले विधानसभा चुनावों पर लागू होगा। इसके अलावा गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा की आठ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों में भी यही नियम प्रभावी रहेगा| मतदान की तिथियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार: 9 अप्रैल 2026: असम, केरल, पुडुचेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा 23 अप्रैल 2026: तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल: 23 अप्रैल 2026 (पहला चरण) और 29 अप्रैल 2026 (दूसरा चरण) बाहर काम करने वाले मतदाताओं को भी राहत आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर कार्यरत हैं, लेकिन वहां मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं, उन्हें भी मतदान के दिन पेड हॉलिडे का अधिकार मिलेगा ताकि वे अपने गृह क्षेत्र जाकर मतदान कर सकें। राज्य सरकारों को निर्देश चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं कि इस नियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है ताकि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रह जाए। 4 मई को आएंगे नतीजे इन सभी चुनावों और उपचुनावों के परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस फैसले को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक लोग बिना किसी आर्थिक दबाव के मतदान प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

  • समुद्र में भारत की ताकत बढ़ेगी: तीसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस ‘अरिदमन’ जल्द होगी नौसेना में शामिल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) विशाखापत्तनम। भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन के जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल होने के संकेत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिए हैं। रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रभावशाली संदेश साझा करते हुए लिखा-“यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, इसका मतलब है शक्ति—‘अरिदमन’!” उनके इस संदेश को पनडुब्बी के आसन्न कमीशनिंग का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। समुद्री शक्ति में बड़ा इजाफा आईएनएस अरिदमन के शामिल होने से भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत होगी। यह पनडुब्बी देश की ‘नो-फर्स्ट यूज़’ नीति के अनुरूप दूसरी स्ट्राइक क्षमता को और विश्वसनीय बनाएगी। करीब 7,000 टन विस्थापन वाली यह पनडुब्बी अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों— आईएनएस अरिहंत (2016) और आईएनएस अरिघाट (2024) से अधिक उन्नत और शक्तिशाली मानी जा रही है। अत्याधुनिक तकनीक और मारक क्षमता आईएनएस अरिदमन में बेहतर स्टील्थ तकनीक और उन्नत ध्वनिक डिजाइन दिया गया है, जिससे यह दुश्मन की नजरों से बचकर लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रह सकती है। यह पनडुब्बी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर से संचालित है। सबसे बड़ी खासियत इसकी मिसाइल क्षमता है— 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब (पहले की तुलना में दोगुनी) 3,500 किमी रेंज वाली K-4 मिसाइलें या 750 किमी रेंज वाली 24 K-15 मिसाइलें ले जाने में सक्षम ‘निरंतर प्रतिरोधक क्षमता’ को मजबूती आईएनएस अरिदमन के बेड़े में शामिल होने के बाद भारत की नौसेना ‘‘समुद्र में निरंतर निवारण’’ यानी समुद्र में हर समय एक परमाणु पनडुब्बी की मौजूदगी सुनिश्चित कर सकेगी। यह किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ मजबूत जवाबी क्षमता प्रदान करेगा। विशाखापत्तनम बना रणनीतिक केंद्र रक्षा मंत्री का यह बयान उनके विशाखापत्तनम दौरे के दौरान आया, जो भारत की परमाणु पनडुब्बियों का प्रमुख निर्माण और संचालन केंद्र है। इसी दौरान वे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ को भी नौसेना में शामिल करने जा रहे हैं। अंतिम चरण में परीक्षण नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आईएनएस अरिदमन अपने समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है और अप्रैल-मई के बीच इसे औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जा सकता है। आईएनएस अरिदमन का शामिल होना न केवल भारत की नौसैनिक ताकत को नई धार देगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक पकड़ को भी मजबूत करेगा। यह कदम भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

  • भीड़, मैच और मासूम: मोबाइल चोरी के पीछे नाबालिगों का संगठित नेटवर्क उजागर

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। आईपीएल जैसे हाई-वोल्टेज मैचों के दौरान जहां एक ओर चौकों-छक्कों की गूंज और दर्शकों का उत्साह चरम पर होता है, वहीं दूसरी ओर इसी भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी करने वाले संगठित गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। ताजा मामला बेंगलूरु से सामने आया है, जहां मैच के दौरान हुई मोबाइल चोरी की घटनाओं ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है—जिसमें नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैच के रोमांच में गायब हुआ मोबाइल एक दर्शक मैच के दौरान हर शॉट पर खुशी मना रहा था। इसी बीच जब वह अपनी सीट पर लौटा, तो उसका मोबाइल गायब हो चुका था। पास में बैठा 12-13 साल का एक लड़का, जो आरसीबी की जर्सी पहने उसी की तरह मैच का आनंद ले रहा था—संदेह के दायरे से बाहर था। यही मासूमियत इन गिरोहों का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है। 29 में से 21 मोबाइल बरामद, 8 नाबालिग हिरासत में पुलिस के अनुसार, पहले ही मैच में चोरी हुए 29 मोबाइलों में से 21 बरामद कर लिए गए हैं। इस मामले में 8 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि गिरोह का मुख्य संचालक शुभम गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि शुभम इन बच्चों से मोबाइल चोरी करवाता था और हर डिवाइस के बदले 2 से 3 हजार रुपये तक देता था। महंगे स्मार्टफोन, खासकर आईफोन, पर ज्यादा कमीशन मिलने के कारण इन्हें निशाना बनाया जाता था। क्यों चुने जाते हैं नाबालिग? विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल चोरी अब एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है, जिसमें चोरी से लेकर तस्करी तक का पूरा नेटवर्क सक्रिय है। कई मामलों में चोरी किए गए मोबाइल नेपाल और बांग्लादेश तक भेजे जाने की बात भी सामने आई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि नाबालिगों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि वे कानून के तहत अपेक्षाकृत कम सजा के दायरे में आते हैं। अगर कोई बच्चा पकड़ा जाता है, तो उसे आसानी से जमानत मिल जाती है और अभिभावकों को सौंप दिया जाता है। इसके विपरीत, बालिग अपराधियों पर सख्त धाराएं लगती हैं और उन्हें जेल व जुर्माने का सामना करना पड़ता है। किस कानून के तहत होती है कार्रवाई नाबालिगों के खिलाफ ऐसे मामलों में जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 के तहत कार्रवाई होती है। इस कानून के अनुसार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड मामले की जांच करता है और चार महीने के भीतर फैसला सुनाता है। इस दौरान बच्चे को अभिभावकों की देखरेख में रखा जाता है या जरूरत पड़ने पर ऑब्जर्वेशन होम और काउंसलिंग के लिए भेजा जा सकता है। कैसे फंसाए जाते हैं बच्चे जानकारों के मुताबिक, इस नेटवर्क में ज्यादातर गरीब और मजदूर वर्ग के बच्चे शामिल किए जाते हैं। खासकर झारखंड जैसे राज्यों के ग्रामीण इलाकों से बच्चों को बहला-फुसलाकर बड़े शहरों में लाया जाता है। उन्हें आईपीएल मैच दिखाने या घूमाने का लालच दिया जाता है और फिर प्रति मोबाइल कमीशन का प्रलोभन देकर अपराध में धकेल दिया जाता है। स्थानीय दलाल इस कड़ी का अहम हिस्सा होते हैं, जो बच्चों को गिरोह तक पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे ये बच्चे इस अपराध की दुनिया में पूरी तरह फंस जाते हैं। चुनौती बनी मासूमियत की आड़ भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में नाबालिगों की मौजूदगी सामान्य लगती है, जिससे उन पर शक करना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि ये गिरोह लगातार ऐसे बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं और कानून की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। मोबाइल चोरी की ये घटनाएं केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि समाज के एक संवेदनशील वर्ग—बच्चों—के अपराध की दुनिया में फंसने की गंभीर चेतावनी हैं। जरूरत है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मासूमों को अपराध के जाल से बाहर निकाला जा सके।

  • हावेरी बस स्टैंड पर बेकाबू बस का कहर, मासूम समेत चार घायल; चालक फरार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हावेरी। कर्नाटक के हावेरी स्थित केंद्रीय बस स्टैंड पर बुधवार सुबह एक तेज रफ्तार बस ने अचानक नियंत्रण खो दिया और प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों को कुचलते हुए अंदर घुस गई। इस दर्दनाक हादसे में एक दो वर्षीय मासूम सहित चार लोग घायल हो गए, जिनमें बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना सुबह करीब 7 बजे की है। उस समय बड़ी संख्या में यात्री बस का इंतजार कर रहे थे और अपने गंतव्य की जानकारी देख रहे थे। इसी दौरान हावेरी से लक्ष्मेश्वर की ओर जा रही एक नॉन-स्टॉप बस तेज गति से बस स्टैंड में दाखिल हुई। बताया जा रहा है कि चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका, जिससे बस सीधे प्लेटफॉर्म पर चढ़ गई और वहां मौजूद लोगों को टक्कर मारते हुए आगे बढ़ गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बस को यात्रियों को कुचलते हुए साफ देखा जा सकता है। हादसे में घायल लोगों की पहचान वासुदेव (44), हर्षा (6), कव्यांजलि (39) और एक दो वर्षीय बच्चे के रूप में हुई है। मासूम के घुटने में गंभीर चोट आई है और प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए हुबली के अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। अन्य घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। हादसे के बाद बस स्टैंड पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और एंबुलेंस की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। घटना से नाराज लोगों ने बस स्टैंड की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पुलिस के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। मामले की जांच हावेरी टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज कर ली गई है। अधिकारी सीसीटीवी फुटेज और बस की तकनीकी जांच के आधार पर यह पता लगाने में जुटे हैं कि दुर्घटना चालक की लापरवाही का परिणाम है या फिर किसी तकनीकी खराबी के कारण हुई। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और फरार चालक की तलाश जारी है।

  • उत्तर प्रदेश में ओपीडी में अब आधार जरूरी: डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के लिए लागू हुई आभा आईडी व्यवस्था

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गाजियाबाद। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अब जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। शासन के निर्देशों के बाद पंजीकरण काउंटरों पर बिना आधार कार्ड के मरीजों की पर्ची नहीं बनाई जा रही है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक मरीज का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे इलाज की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बन सके। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजना के तहत मरीजों के लिए आभा आईडी बनाई जा रही है, जो उनके स्वास्थ्य संबंधी सभी रिकॉर्ड को एकीकृत रूप से संग्रहीत करेगी। कैसे काम करेगी यह व्यवस्था अस्पताल में ओपीडी पंजीकरण के दौरान मरीज से आधार कार्ड लिया जाएगा। आधार नंबर दर्ज करते ही संबंधित मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद मरीज की पर्ची के साथ ही उसकी आभा आईडी भी जनरेट हो जाएगी। यह आईडी मरीज अपने पास सुरक्षित रख सकता है और भविष्य में किसी भी अस्पताल में उपयोग कर सकता है। मरीजों और डॉक्टरों को होगा लाभ आभा आईडी बनने के बाद मरीज को बार-बार अपनी बीमारी का विवरण बताने की आवश्यकता नहीं होगी। डॉक्टर मरीज की अनुमति से उसके पुराने इलाज, जांच रिपोर्ट और दवाइयों का पूरा रिकॉर्ड कंप्यूटर स्क्रीन पर देख सकेंगे। इससे सटीक और त्वरित उपचार संभव हो सकेगा। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में लागू गाजियाबाद के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि धीरे-धीरे इसे निजी अस्पतालों में भी प्रभावी किया जाएगा। अधिकारियों की अपील जिला एमएमजी अस्पताल के आभा आईडी नोडल अधिकारी डॉ. अनिल विश्वकर्मा ने मरीजों से अपील की है कि वे अस्पताल आते समय अपना आधार कार्ड अवश्य साथ लाएं, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो। डिजिटल हेल्थ मिशन की ओर बड़ा कदम यह पहल देश में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे भविष्य में “वन नेशन, वन हेल्थ रिकॉर्ड” की अवधारणा को साकार किया जा सकेगा।

  • धर्मेंद्र प्रधान का ममता सरकार पर हमला—“सिस्टम पूरी तरह फेल”; सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग ने उठाया बड़ा कदम

    मालदा बंधक कांड पर सियासत गरम: 7 अधिकारी 9 घंटे तक बंधक, एनआईए जांच के आदेश भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए जाने की सनसनीखेज घटना ने देशभर में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, वहीं न्यायपालिका ने भी सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह घटना राज्य की प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था के पूरी तरह चरमराने का संकेत है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मालदा की घटना कोई अलग मामला नहीं, बल्कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के शासन में व्यवस्था के पतन का उदाहरण है। प्रधान ने आरोप लगाया कि बंधक बनाए गए अधिकारियों को घंटों तक भोजन और पानी तक नहीं दिया गया, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने राज्य में बढ़ती हिंसा, पलायन और हालिया हत्याओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि “जवाबदेही तय होना जरूरी है।” घटना का विवरण यह घटना बुधवार को मालदा जिले के कालियाचक स्थित एक ब्लॉक कार्यालय में हुई, जहां सात न्यायिक अधिकारियों—जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं—को स्थानीय लोगों की भीड़ ने घेर लिया और बंधक बना लिया। बताया जा रहा है कि ये लोग चुनावी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से नाराज थे। ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तहत नाम हटने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अधिकारियों को कई घंटों तक बाहर नहीं निकलने दिया। सुप्रीम कोर्ट सख्त, एनआईए को जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। इसके बाद चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम जल्द ही घटनास्थल का दौरा कर सकती है। राजनीतिक बयानबाजी तेज घटना के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े करती हैं और प्रशासनिक सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। देशभर में आक्रोश न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने जैसी घटना ने आमजन और विधि समुदाय में भी चिंता पैदा की है। कई संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मालदा की यह घटना केवल एक कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक वातावरण—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर एनआईए जांच और न्यायिक कार्रवाई पर टिकी है, जिससे सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।

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