केरल चुनाव से पहले सियासी वार तेज: किरण रिजिजू का कांग्रेस-लेफ्ट पर हमला, ‘लोगों को किया गुमराह’
- धन्ना राम चौधरी

- 3 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनावों से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस और कम्युनिस्ट दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों ने वर्षों तक राज्य के लोगों को गुमराह किया और केवल सत्ता के लिए राजनीति की।
मीडिया से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि केरल में लंबे समय से सत्ता का खेल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और वामपंथी दलों के गठबंधन एलडीएफ के बीच चलता रहा है, लेकिन दोनों ही जनता की वास्तविक समस्याओं को हल करने में विफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार जनता इन दोनों दलों की “हकीकत” समझ चुकी है।
रिजिजू ने कहा, “हर पांच साल में सत्ता बदलती रही, लेकिन आम लोगों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। पहली बार कांग्रेस और कम्युनिस्ट, दोनों ही जनता के सामने बेनकाब हो गए हैं।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा और एनडीए ने केरल के विकास के लिए स्पष्ट और ठोस नीति तैयार की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्य के समग्र विकास और सभी वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है।
एफसीआरए पर गुमराह करने का आरोप
रिजिजू ने कांग्रेस और वाम दलों पर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां जानबूझकर जनता को भ्रमित कर रही हैं, जबकि केंद्र सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
अल्पसंख्यकों को लेकर भी साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम समुदाय को केवल “वोट बैंक” के रूप में इस्तेमाल किया। इसके विपरीत उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में सभी छोटे-बड़े अल्पसंख्यक समुदायों को समान महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम समुदाय को किसी एक पार्टी का वोट बैंक बनकर नहीं रहना चाहिए। भाजपा सबके लिए काम करती है और हर समुदाय को समान अवसर देने में विश्वास रखती है।”
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
केरल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। एक ओर जहां भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। ऐसे में नेताओं के तीखे बयान चुनावी माहौल को और अधिक गरमा रहे हैं।
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