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समुद्र में भारत की ताकत बढ़ेगी: तीसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस ‘अरिदमन’ जल्द होगी नौसेना में शामिल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 3
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

विशाखापत्तनम। भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन के जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल होने के संकेत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिए हैं।


रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रभावशाली संदेश साझा करते हुए लिखा-“यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, इसका मतलब है शक्ति—‘अरिदमन’!” उनके इस संदेश को पनडुब्बी के आसन्न कमीशनिंग का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।


समुद्री शक्ति में बड़ा इजाफा

आईएनएस अरिदमन के शामिल होने से भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत होगी। यह पनडुब्बी देश की ‘नो-फर्स्ट यूज़’ नीति के अनुरूप दूसरी स्ट्राइक क्षमता को और विश्वसनीय बनाएगी।

करीब 7,000 टन विस्थापन वाली यह पनडुब्बी अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों—

आईएनएस अरिहंत (2016) और

आईएनएस अरिघाट (2024)

से अधिक उन्नत और शक्तिशाली मानी जा रही है।


अत्याधुनिक तकनीक और मारक क्षमता

आईएनएस अरिदमन में बेहतर स्टील्थ तकनीक और उन्नत ध्वनिक डिजाइन दिया गया है, जिससे यह दुश्मन की नजरों से बचकर लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रह सकती है। यह पनडुब्बी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर से संचालित है।

सबसे बड़ी खासियत इसकी मिसाइल क्षमता है—

8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब (पहले की तुलना में दोगुनी)

3,500 किमी रेंज वाली K-4 मिसाइलें

या 750 किमी रेंज वाली 24 K-15 मिसाइलें ले जाने में सक्षम


‘निरंतर प्रतिरोधक क्षमता’ को मजबूती

आईएनएस अरिदमन के बेड़े में शामिल होने के बाद भारत की नौसेना ‘‘समुद्र में निरंतर निवारण’’ यानी समुद्र में हर समय एक परमाणु पनडुब्बी की मौजूदगी सुनिश्चित कर सकेगी। यह किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ मजबूत जवाबी क्षमता प्रदान करेगा।


विशाखापत्तनम बना रणनीतिक केंद्र

रक्षा मंत्री का यह बयान उनके विशाखापत्तनम दौरे के दौरान आया, जो भारत की परमाणु पनडुब्बियों का प्रमुख निर्माण और संचालन केंद्र है। इसी दौरान वे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ को भी नौसेना में शामिल करने जा रहे हैं।


अंतिम चरण में परीक्षण

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आईएनएस अरिदमन अपने समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है और अप्रैल-मई के बीच इसे औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जा सकता है। आईएनएस अरिदमन का शामिल होना न केवल भारत की नौसैनिक ताकत को नई धार देगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक पकड़ को भी मजबूत करेगा। यह कदम भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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