top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

इस साइट पर खोजें

1911किसी भी खाली खोज के साथ परिणाम मिले

  • केरल में सियासी संग्राम: सतीशन पर आरएसएस से समर्थन मांगने का आरोप, कांग्रेस नेता ने किया खंडन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के दावे ने सियासी माहौल गरमा दिया है। संघ समर्थक संगठन ‘हिंदू ऐक्य वेदी’ के प्रदेश अध्यक्ष आर.वी. बाबू ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता और यूडीएफ चेयरमैन वी.डी. सतीशन ने वर्ष 2001 और 2006 के विधानसभा चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए आरएसएस नेताओं से संपर्क कर उनका समर्थन मांगा था। आर.वी. बाबू ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि सतीशन पहले 2006 में आरएसएस के एक कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार करते रहे, लेकिन बाद में उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। बाबू ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब वे इस बात को मान चुके हैं, तो भविष्य में यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि उन्होंने चुनाव जीतने के लिए आरएसएस की मदद मांगी थी।” बाबू ने आगे कहा कि 1996 के विधानसभा चुनाव में सतीशन को सीपीआई के उम्मीदवार पी. राजू से करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए आरएसएस का रुख किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्वयं सतीशन की हार चाहते हैं और यूडीएफ तथा एलडीएफ को एक ही सिक्के के दो पहलू मानते हैं। वहीं, इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वी.डी. सतीशन ने सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी आरएसएस या भाजपा से समर्थन नहीं मांगा। सतीशन ने आरोप लगाया कि बाबू व्यक्तिगत कारणों से कांग्रेस विरोधी रुख अपना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबू का यह बयान कि वे उन्हें हराना चाहते हैं, इस बात का प्रमाण है कि उनके और आरएसएस के बीच कोई समझौता नहीं है। सतीशन ने इस मौके पर सीपीआई(एम) और आरएसएस के बीच कथित सांठगांठ के अपने पुराने आरोपों को भी दोहराया। साथ ही उन्होंने पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सीपीआई(एम) को समर्थन देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए उसकी धर्मनिरपेक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। राज्य में चुनावी माहौल के बीच इस तरह के आरोपों ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं, जिससे यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

  • मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस पर बवाल, हिंसा से सुलगा बंगाल; ईसी ने ममता के बयान पर मांगी रिपोर्ट

    पथराव-आगजनी में कई घायल, रघुनाथगंज में धारा 144 लागू; चुनाव आयोग सख्त, इंस्पेक्टर निलंबित भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता/मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। मुर्शिदाबाद जिले में रामनवमी जुलूस के दौरान भड़की हिंसा ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक कथित बयान पर भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सख्त रुख अपनाते हुए रिपोर्ट तलब की है। जुलूस के दौरान भड़की हिंसा, कई घायल जानकारी के अनुसार, मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज क्षेत्र में शुक्रवार को रामनवमी जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। बताया जा रहा है कि सिसातला इलाके में तेज संगीत बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते उग्र हो गया। फूलतला क्रॉसिंग सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर पथराव, लूटपाट और दुकानों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए हैं, जिनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज जारी है। केंद्रीय बल तैनात, धारा 144 लागू स्थिति बिगड़ते देख स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और अन्य केंद्रीय बलों को तैनात किया गया। प्रशासन ने रघुनाथगंज में धारा 144 लागू कर दी है, जिसके तहत चार या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं और उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने हिंसा को “पूर्व नियोजित” बताते हुए राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है। ममता के बयान पर चुनाव आयोग सख्त इसी बीच, चुनाव आयोग ने 25 मार्च 2026 को दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दिए गए एक भाषण पर संज्ञान लिया है। आरोप है कि उन्होंने मतदान के दौरान महिलाओं से बड़ी संख्या में बूथ पर मौजूद रहने और आवश्यकता पड़ने पर “घरेलू उपकरणों” के इस्तेमाल की बात कही थी। आयोग ने इस कथित बयान के वीडियो की जांच शुरू कर दी है और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। लापरवाही पर पुलिस अधिकारी निलंबित चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाते हुए दक्षिण 24 परगना जिले के बासंती बाजार में चुनावी हिंसा के मामले में बासंती थाने के इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आयोग का कहना है कि पूर्व सूचना होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। निष्पक्ष चुनाव बड़ी चुनौती लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं और तीखी राजनीतिक बयानबाजी ने राज्य में चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना भारत का चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। आगामी मतदान और मतगणना से पहले प्रशासन और आयोग दोनों ही स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

  • बिहार में सीएम फेस पर सियासी संग्राम: ‘तय निशांत’ के नारे से गरमाई राजनीति, एनडीए में बढ़ी हलचल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नीतीश कुमार के बाद राज्य की कमान किसके हाथों में होगी, इस सवाल ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इसी बीच जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं द्वारा “तय निशांत” के नारे ने सत्ता समीकरणों में हलचल मचा दी है, जिससे सहयोगी दलभारतीय जनता पार्टी की रणनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि “निशांत कुमार ने बहुत लोगों को अशांत कर दिया है।” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और गठबंधन के घटक दलों का अधिकार है, लेकिन “भविष्य की उड़ान निशांत कुमार” है। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। दरअसल, जेडीयू के भीतर निशांत कुमार को संभावित नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रोजेक्ट करने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। नीरज कुमार ने बताया कि हाल ही में नालंदा दौरे के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से “तय निशांत-तीर निशांत” के समर्थन में आशीर्वाद मांगा, जिसे जनता ने हाथ उठाकर स्वीकार किया। इसे वे निशांत कुमार की बढ़ती स्वीकार्यता के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। नीरज कुमार के अनुसार, 2025 से 2030 तक जनता ने निशांत कुमार के नाम पर भरोसा जताया है और पार्टी उनके नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। साथ ही यह संकेत भी दिया गया कि भविष्य में उनकी भूमिका में बदलाव संभव है, लेकिन जो भी निर्णय होगा, वह पार्टी और गठबंधन के हित में होगा। इधर, बीजेपी लंबे समय से बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की मंशा जाहिर कर चुकी है। ऐसे में जेडीयू द्वारा निशांत कुमार को लेकर दिए जा रहे संकेत एनडीए के भीतर नई राजनीतिक खींचतान को जन्म दे सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जेडीयू इस मुद्दे को आगे बढ़ाती है, तो गठबंधन के समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल, बिहार की राजनीति में सीएम फेस को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन “तय निशांत” का नारा आने वाले दिनों में सियासी समीकरणों को नई दिशा दे सकता है।

  • असम में चुनावी घमासान: सीएम हिमंत के ‘मियां’ बयान से सियासत गरम, कांग्रेस का पलटवार

    हिंदू वोट बैंक, घुसपैठ और दल-बदल पर तीखे आरोप–प्रत्यारोप; चुनाव से पहले बयानबाजी चरम पर भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पार्टी के “99 प्रतिशत हिंदू सदस्य” उसे छोड़ना चाहते हैं। उनके इस बयान के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है, वहीं कांग्रेस ने इसे समाज को बांटने की कोशिश करार दिया है। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम में कांग्रेस के विघटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और चुनाव परिणामों के बाद पार्टी “एक समुदाय विशेष तक सीमित” रह जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार विकास के आधार पर दोबारा सत्ता में लौटेगी। कांग्रेस में टूट और दल-बदल तेज चुनाव से ठीक पहले असम में कांग्रेस को कई झटके लगे हैं। कई नेताओं ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इनमें प्रमुख नेताओं के साथ-साथ कई विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा इसे कांग्रेस की “कमजोरी” बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे “राजनीतिक दबाव और प्रलोभन” का परिणाम कह रही है। ‘मियां’ समुदाय पर बयान से विवाद मुख्यमंत्री सरमा का सबसे विवादित बयान उस समय सामने आया जब उन्होंने चुनावी सभा में कहा कि यदि भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो “बांग्लादेशी ‘मियां’ समुदाय की कमर तोड़ दी जाएगी।” ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसे कई लोग अपमानजनक मानते हैं। सरमा ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार “मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा” के लिए प्रतिबद्ध है और अवैध घुसपैठ को रोकना प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि पहले ही ऐसे तत्वों के “राजनीतिक प्रभाव को खत्म” किया जा चुका है। घुसपैठ और राष्ट्रवाद का मुद्दा मुख्यमंत्री ने असम में घुसपैठ को एक बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि राज्य में अवैध प्रवासियों की समस्या अभी भी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग कांग्रेस के समर्थन में वोट करते हैं। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस भारत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। विकास और रोजगार पर सरकार का दावा सरमा ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में 1.65 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं और राज्य में बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में व्यापक विकास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव “उत्सवी माहौल” में संपन्न होंगे और भाजपा रिकॉर्ड जीत हासिल करेगी। कांग्रेस का पलटवार मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने सरमा पर “ध्रुवीकरण की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के समर्थन में शिवकुमार ने कहा कि वे एक मजबूत नेता हैं और भाजपा उनसे राजनीतिक रूप से भयभीत है। चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी असम में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस सामाजिक सौहार्द और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर मुकाबला कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयान चुनावी ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं और मतदाताओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

  • बैलकनहली में नवरात्रि महोत्सव व राम जन्मोत्सव धूमधाम से संपन्न, भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। श्री मां दुर्गा पूजा समिति ट्रस्ट, बैलकनहली द्वारा मां दुर्गा देवी मंदिर परिसर में नवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य दुर्गा पूजा महोत्सव एवं राम जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। महोत्सव के दौरान स्थानीय कलाकारों ने मधुर और मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजन संध्या के दौरान श्रद्धालु झूम उठे और पूरा परिसर “जय माता दी” एवं “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महेंद्र मुणोत ने सभी श्रद्धालुओं को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन में कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम केवल आस्था ही नहीं, बल्कि भारतीयों के विचार, विश्वास और स्वाभिमान के आधार हैं, जिनके आदर्शों पर चलकर समाज में सद्भाव और नैतिकता को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों पी. के. सिंह, पी. एस. पांडे, राम प्रवेश, नारायण यादव एवं फेकू गुप्ता द्वारा मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

  • रामनवमी पर गुरुवाणी का संदेश: नशामुक्ति, शिक्षा और संस्कारों से ही होगा समाज का उत्थान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा तीर्थधाम। रामनवमी के पावन अवसर पर गुरुवाणी प्रचारक एवं सामाजिक विश्लेषक किशनाराम पटेल ने समाज को आत्ममंथन और आत्म उत्थान का संदेश देते हुए कहा कि गुरु महाराज श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी को जीवन में तुरंत आत्मसात करना ही सच्चे अर्थों में गुरु कृपा का महाप्रसाद है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने उत्थान के लिए स्वयं प्रयास करना होगा और गुरुवाणी को जीवन का मार्गदर्शक बनाना होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गुरुवाणी में नशे को “नाश की जड़” बताया गया है। समाज को नशे से दूर रहकर सात्विक जीवन अपनाना चाहिए, जिससे जीवन सरल और संतुलित बन सके। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को चेताते हुए कहा कि आज के केमिकलयुक्त नशे जैसे अफीम, शराब, स्मैक, एमडी और कोकीन न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक संरचना को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। पटेल ने शिक्षा और संस्कार को समाज उत्थान का मूल आधार बताते हुए कहा कि हर परिवार का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों के साथ शिक्षित करे। उन्होंने नारी शक्ति के सम्मान पर भी जोर देते हुए कहा कि आज की शिक्षित नारी घर-परिवार के हर कार्य में समान भागीदारी निभाते हुए समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने पंच-पंचायती प्रणाली को प्रभावी बताते हुए कहा कि छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान समाज स्तर पर ही समय रहते कर लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे जनजागृति और जनकल्याण के कार्यों के माध्यम से समाज को संगठित रखें और गुरुवाणी का निरंतर प्रचार-प्रसार करें। नशा मुक्ति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन के दबाव से अधिक प्रभावी तरीका गुरुवाणी, शिक्षा और संस्कार हैं, जो स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों, युवाशक्ति और मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे आगे आकर नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसके अलावा उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और रूढ़िवादी परंपराओं के उन्मूलन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग के अनुसार समाज को अपनी परंपराओं का संरक्षण करते हुए अनावश्यक रूढ़ियों को समाप्त करना चाहिए, ताकि समाज प्रगतिशील और सशक्त बन सके। रामनवमी के इस पावन अवसर पर उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, पंच परमेश्वरों, युवाओं, महिलाओं और पत्रकारिता क्षेत्र के प्रबुद्धजनों से आह्वान किया कि वे मिलकर समाज को नशामुक्त, शिक्षित और संस्कारित बनाने के लिए आगे आएं और गुरु महाराज के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाएं।

  • सीरवी समाज ट्रस्ट अतिबेले की नई कार्यकारिणी निर्विरोध गठित, मांगीलाल राठौड़ बने अध्यक्ष

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। सीरवी समाज ट्रस्ट, अतिबेले की आम सभा का आयोजन उत्साह एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के विकास, संगठन की मजबूती और आगामी योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस दौरान आगामी कार्यकाल के लिए नई कार्यकारिणी का गठन सर्वसम्मति से निर्विरोध रूप में किया गया। सभा में लिए गए निर्णय के अनुसार मांगीलाल राठौड़ को ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके साथ बाबूलाल सतपरा को उपाध्यक्ष, दिलीप गहलोत को सचिव तथा माधुराम सेणचा को सह-सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। वित्तीय व्यवस्थाओं के संचालन हेतु हेमसिंह हाम्बड को कोषाध्यक्ष एवं मोहनलाल सोलंकी को सह-कोषाध्यक्ष चुना गया। युवा वर्ग को संगठित एवं सक्रिय करने के उद्देश्य से नवयुवक मंडल का भी गठन किया गया, जिसमें माधुराम राठौड़ को अध्यक्ष तथा मनोहरलाल काग को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके अतिरिक्त, गैर मंडल के अध्यक्ष पद पर डवरलाल राठौड़ एवं सचिव पद पर देवाराम सोलंकी को मनोनीत किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज के वरिष्ठ एवं गणमान्य नागरिकों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि नई कार्यकारिणी समाज के उत्थान, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित भाव से कार्य करेगी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आभार एवं शुभकामनाओं के साथ हुआ। उपरोक्त जानकारी जितेंद्र राठौर ने दी।

  • त्रिशूर में पीएम मोदी का रोड शो आज, केरल चुनाव में एनडीए का शक्ति प्रदर्शन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) त्रिशूर। केरल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र आज नरेंद्र मोदी त्रिशूर में भव्य रोड शो कर चुनावी अभियान का आगाज़ करेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के लिए अहम माना जा रहा है, जहां वे न केवल जनता से संवाद करेंगे बल्कि पार्टी उम्मीदवारों और नेताओं के साथ रणनीतिक बैठक भी करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री पालक्काड में चुनावी कार्यक्रमों को संबोधित करने के बाद शाम करीब 4 बजे त्रिशूर पहुंचेंगे। उनका हेलीकॉप्टर कुट्टनेल्लूर स्थित सी. अच्युत मेनन सरकारी कॉलेज के हेलीपैड पर उतरेगा, जहां केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और भारतीय जनता पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री का लगभग 900 मीटर लंबा रोड शो स्वराज राउंड क्षेत्र में आयोजित होगा, जिसे लेकर शहर में व्यापक तैयारियां की गई हैं। रोड शो के जरिए प्रधानमंत्री आम जनता से सीधा संपर्क स्थापित करेंगे और एनडीए के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। दौरे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक संदेश में दावा किया कि केरल में एनडीए के पक्ष में जनभावना मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के शासन से निराश है और परिवर्तन चाहती है। प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने त्रिशूर शहर में सुरक्षा और यातायात को लेकर विशेष व्यवस्था की है। शनिवार सुबह से रविवार शाम तक स्वराज राउंड और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग पर प्रतिबंध लागू किया गया है। वहीं, रविवार दोपहर 2 बजे से शाम 6:30 बजे तक प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित रहेगा। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। सुरक्षा के मद्देनज़र प्रधानमंत्री के आगमन से एक घंटे पहले ट्रेलर और मल्टी-एक्सल वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक रहेगी। उन्हें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। गौरतलब है कि केरल सहित असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल तथा पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान संपन्न होगा। इन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।

  • तमिलनाडु चुनाव: एआईएडीएमके की अंतिम सूची जारी, स्टालिन के खिलाफ संथानकृष्णन मैदान में

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में एआईएडीएमके ने रविवार को अपने उम्मीदवारों की तीसरी और अंतिम सूची जारी कर दी। इस सूची के साथ ही पार्टी ने सभी 167 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का चयन पूरा कर लिया है, जिससे चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी द्वारा जारी इस सूची में शेष 17 सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। खास बात यह है कि इस सूची में चेन्नई के कई महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, जहां कड़े मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है। सबसे चर्चित मुकाबला कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिलेगा, जहां पी. संथानकृष्णन को मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के खिलाफ मैदान में उतारा गया है। यह सीट पहले से ही राज्य की राजनीति का केंद्र रही है, ऐसे में यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। वहीं, चेपॉक-ट्रिप्लिकेन सीट पर भी सियासी मुकाबला सुर्खियों में है। यहां एआईएडीएमके ने आदि राजाराम को उम्मीदवार बनाया है, जिनका सामना उदयनिधि स्टालिन से होगा। उल्लेखनीय है कि पिछली बार 2021 के चुनाव में आदि राजाराम को एम.के. स्टालिन से हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, पार्टी ने पूर्व मंत्री बी. वलरमाथी को थाउजेंड लाइट्स सीट से और एस. गोकुला इंदिरा को अन्ना नगर से चुनावी मैदान में उतारा है। चेन्नई की अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर भी पार्टी ने अपने दिग्गज नेताओं को मौका दिया है। इस सूची की एक और प्रमुख बात यह है कि एआईएडीएमके ने पोर्कोडी आर्मस्ट्रांग को थिरु वी. का. नगर सीट से टिकट दिया है। पोर्कोडी, दिवंगत बीएसपी नेता आर्मस्ट्रांग की पत्नी हैं, जिनकी पिछले वर्ष हत्या कर दी गई थी। इस फैसले को सहानुभूति और राजनीतिक रणनीति दोनों के रूप में देखा जा रहा है। अन्य सीटों में विरुगम्बाक्कम से विरुगई रवि, वेलाचेरी से एम.के. अशोक, टी. नगर से सत्या और आर.के. नगर से आर.एस. राजेश को उम्मीदवार बनाया गया है। इससे पहले पार्टी दो चरणों में 150 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। गौरतलब है कि एआईएडीएमके इस चुनाव में कुल 167 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है। अंतिम सूची में खास तौर पर शहरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां विपक्षी दल डीएमके के साथ सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चेन्नई समेत प्रमुख शहरी सीटों पर होने वाले ये हाई-प्रोफाइल मुकाबले तमिलनाडु की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

  • बंगाल चुनाव 2026: तीसरी पूरक मतदाता सूची जारी, आंकड़ों की पारदर्शिता पर घमासान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 294 सीटों पर होने वाले इस चुनाव के लिए राज्य में दो चरणों—23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को मतदान प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। इसी बीच, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और पूरक सूचियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को तीसरी पूरक मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद राजनीतिक दलों ने आंकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस सूची में कितने नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं और कितनों को हटाया गया है। इससे पहले आयोग ने शुक्रवार देर रात दूसरी पूरक सूची जारी की थी, जबकि सोमवार को ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की पहली सूची सामने आई थी। हालांकि, इन सूचियों में भी हटाए गए नामों या निपटाए गए दावों-आपत्तियों के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया गया, जिससे संशय और बढ़ गया है। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पूरक मतदाता सूची अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद जोड़ी जाने वाली अतिरिक्त सूची होती है। इसमें नए पंजीकृत मतदाता, संशोधित विवरण वाले नाम और सत्यापन के बाद बहाल किए गए मतदाता शामिल होते हैं। साथ ही, विलोपन सूची भी जारी की जाती है, जिसमें मृत्यु, स्थानांतरण या नामों के दोहराव के आधार पर हटाए गए मतदाताओं का विवरण रहता है। राजनीतिक मुकाबला तेज चुनावी मैदान में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने 291 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जबकि तीन सीटें सहयोगी दल भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ी गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, भाजपा ने अब तक करीब 274 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है और कई अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारा है। भाजपा ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर और उनकी पारंपरिक सीट नंदीग्राम, दोनों जगहों से उम्मीदवार बनाकर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। पारदर्शिता बना प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में संशोधन और आंकड़ों के खुलासे को लेकर उठे सवाल चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं। विपक्ष जहां इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रहा है, वहीं निर्वाचन आयोग का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार की जा रही हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ मतदाता सूची की विश्वसनीयता भी इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव का एक बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।

  • बंगाल चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 173 थानों के इंचार्ज बदले

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने रविवार को राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 173 पुलिस थानों के इंचार्ज अधिकारियों और इंस्पेक्टरों का तबादला कर दिया। इस व्यापक कार्रवाई में कोलकाता पुलिस के अधीन आने वाले 31 थाने भी शामिल हैं। खास बात यह है कि जिन क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है, वहां तैनात अधिकारियों को भी बदला गया है। इनमें भवानीपुर और नंदीग्राम जैसे वीआईपी निर्वाचन क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। संवेदनशील इलाकों में विशेष ध्यान आयोग द्वारा किए गए इस फेरबदल में कूच बिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों के कई पुलिस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विभिन्न थानों में तैनात इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को हटाकर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आदेश के अनुसार, स्पेशल टास्क फोर्स में कार्यरत रहे सौमित्र बसु को भवानीपुर थाने का नया प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा अलीपुर, इकबालपुर, हरिदेवपुर, एंटाली, जोड़ासांको, गरियाहाट, न्यू मार्केट, बोबाजार, टॉलीगंज, एमहर्स्ट स्ट्रीट, तारातला और बेहाला जैसे महत्वपूर्ण थानों के अधिकारियों का भी तबादला किया गया है। वीआईपी सीट पर सियासी मुकाबला भवानीपुर सीट इस बार हाई-प्रोफाइल मानी जा रही है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके पूर्व सहयोगी से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बने सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। इसी कारण इस क्षेत्र में प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। बीडीओ स्तर पर भी बड़ा फेरबदल पुलिस प्रशासन के साथ-साथ आयोग ने प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव करते हुए पूर्व मेदिनीपुर जिले में 14 ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारियों (बीडीओ) का तबादला किया है। इनमें नंदीग्राम-I और नंदीग्राम-II ब्लॉक के अधिकारी भी शामिल हैं। इससे पहले आयोग 18 जिलों में 83 बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों का भी तबादला कर चुका है। इन जिलों में कूच बिहार से लेकर दक्षिण 24 परगना तक के कई संवेदनशील ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें रामनगर, नंदीग्राम, नानूर, लाभपुर, सूरी, इलामबाजार और मयूरेश्वर जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की कवायद आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रभाव को कम करना और कानून-व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखना है, ताकि सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिल सके। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच पहले से ही तनातनी बनी हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार आरोप लगाया है कि इस प्रकार के तबादले राजनीतिक रूप से प्रेरित होते हैं। दो चरणों में मतदान 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को कराया जाएगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी। चुनाव आयोग की यह सख्ती साफ संकेत देती है कि इस बार चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

  • असम चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘5 गारंटी’ का ऐलान, खरगे ने साधा भाजपा पर निशाना

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी/लखीमपुर। असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मतदाताओं को साधने के लिए बड़ी घोषणाएं करते हुए ‘5 गारंटी’ का ऐलान किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को लखीमपुर जिले के नाओबोइचा में आयोजित एक विशाल जनसभा में महिला कल्याण, स्वास्थ्य, भूमि अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े वादों को प्रमुखता से रखा। खरगे ने अपने संबोधन में राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जनता के बजाय अपने नेताओं और उनके परिवारों को लाभ पहुंचाने में लगी हुई है। महिलाओं और गरीबों पर फोकस कांग्रेस की घोषणाओं में महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का वादा शामिल है। इसके साथ ही व्यवसाय शुरू करने या विस्तार करने की इच्छुक महिलाओं को 50,000 रुपये की अतिरिक्त मदद दी जाएगी। खरगे ने स्पष्ट किया कि यह सहायता बिना किसी शर्त के दी जाएगी। स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी कांग्रेस ने प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा देने का वादा किया है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को 1,250 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने तथा उनके मामलों के लिए एक अलग विभाग स्थापित करने की भी घोषणा की गई। भूमि अधिकार और आदिवासी हित खरगे ने कहा कि राज्य के 10 लाख आदिवासी लोगों को स्थायी भूमि पट्टे दिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर जमीन घोटाले हुए हैं और सरकारी जमीन को निजी हाथों में सौंपा गया है। जुबिन गर्ग मामले में न्याय का वादा सभा में खरगे ने लोकप्रिय असमिया गायक जुबिन गर्ग की कथित मौत के मामले में 100 दिनों के भीतर न्याय सुनिश्चित करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर इस मामले की प्राथमिकता से जांच कराई जाएगी। भाजपा और प्रधानमंत्री पर हमला खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में विफल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अली बाबा दिल्ली में बैठा है और उसके 40 चोर देशभर में फैले हैं।” मुख्यमंत्री सरमा पर सीधा प्रहार असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर हमला करते हुए खरगे ने उन्हें “नकली मुख्यमंत्री” बताया। उन्होंने कहा कि 2021 का चुनाव सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में लड़ा गया था, लेकिन बाद में सरमा ने सत्ता संभाल ली। कांग्रेस का भरोसा और दावा खरगे ने दावा किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में अपने चुनावी वादों को पूरा किया है और असम में भी सत्ता में आने पर सभी गारंटियों को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी युवाओं, किसानों, चाय बागान श्रमिकों और छोटे उद्यमियों सहित समाज के हर वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। असम में चुनावी सरगर्मी के बीच कांग्रेस की इन घोषणाओं ने राजनीतिक मुकाबले को और तीखा बना दिया है।

bottom of page