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असम में चुनावी घमासान: सीएम हिमंत के ‘मियां’ बयान से सियासत गरम, कांग्रेस का पलटवार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 days ago
  • 3 min read

हिंदू वोट बैंक, घुसपैठ और दल-बदल पर तीखे आरोप–प्रत्यारोप; चुनाव से पहले बयानबाजी चरम पर



भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पार्टी के “99 प्रतिशत हिंदू सदस्य” उसे छोड़ना चाहते हैं। उनके इस बयान के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है, वहीं कांग्रेस ने इसे समाज को बांटने की कोशिश करार दिया है।


मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम में कांग्रेस के विघटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और चुनाव परिणामों के बाद पार्टी “एक समुदाय विशेष तक सीमित” रह जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार विकास के आधार पर दोबारा सत्ता में लौटेगी।


कांग्रेस में टूट और दल-बदल तेज

चुनाव से ठीक पहले असम में कांग्रेस को कई झटके लगे हैं। कई नेताओं ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इनमें प्रमुख नेताओं के साथ-साथ कई विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा इसे कांग्रेस की “कमजोरी” बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे “राजनीतिक दबाव और प्रलोभन” का परिणाम कह रही है।


‘मियां’ समुदाय पर बयान से विवाद

मुख्यमंत्री सरमा का सबसे विवादित बयान उस समय सामने आया जब उन्होंने चुनावी सभा में कहा कि यदि भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो “बांग्लादेशी ‘मियां’ समुदाय की कमर तोड़ दी जाएगी।” ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसे कई लोग अपमानजनक मानते हैं।

सरमा ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार “मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा” के लिए प्रतिबद्ध है और अवैध घुसपैठ को रोकना प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि पहले ही ऐसे तत्वों के “राजनीतिक प्रभाव को खत्म” किया जा चुका है।


घुसपैठ और राष्ट्रवाद का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने असम में घुसपैठ को एक बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि राज्य में अवैध प्रवासियों की समस्या अभी भी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग कांग्रेस के समर्थन में वोट करते हैं। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस भारत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।


विकास और रोजगार पर सरकार का दावा

सरमा ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में 1.65 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं और राज्य में बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में व्यापक विकास हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव “उत्सवी माहौल” में संपन्न होंगे और भाजपा रिकॉर्ड जीत हासिल करेगी।


कांग्रेस का पलटवार

मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने सरमा पर “ध्रुवीकरण की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के समर्थन में शिवकुमार ने कहा कि वे एक मजबूत नेता हैं और भाजपा उनसे राजनीतिक रूप से भयभीत है।


चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी

असम में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस सामाजिक सौहार्द और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर मुकाबला कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे बयान चुनावी ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं और मतदाताओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

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