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बंगाल चुनाव 2026: तीसरी पूरक मतदाता सूची जारी, आंकड़ों की पारदर्शिता पर घमासान

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 29
  • 2 min read

Updated: Apr 18

Hand with pen reviewing Bengal voter list

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 294 सीटों पर होने वाले इस चुनाव के लिए राज्य में दो चरणों—23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को मतदान प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। इसी बीच, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और पूरक सूचियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।


निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को तीसरी पूरक मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद राजनीतिक दलों ने आंकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस सूची में कितने नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं और कितनों को हटाया गया है। इससे पहले आयोग ने शुक्रवार देर रात दूसरी पूरक सूची जारी की थी, जबकि सोमवार को ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की पहली सूची सामने आई थी। हालांकि, इन सूचियों में भी हटाए गए नामों या निपटाए गए दावों-आपत्तियों के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया गया, जिससे संशय और बढ़ गया है। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पूरक मतदाता सूची अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद जोड़ी जाने वाली अतिरिक्त सूची होती है। इसमें नए पंजीकृत मतदाता, संशोधित विवरण वाले नाम और सत्यापन के बाद बहाल किए गए मतदाता शामिल होते हैं। साथ ही, विलोपन सूची भी जारी की जाती है, जिसमें मृत्यु, स्थानांतरण या नामों के दोहराव के आधार पर हटाए गए मतदाताओं का विवरण रहता है।

राजनीतिक मुकाबला तेज

चुनावी मैदान में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने 291 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जबकि तीन सीटें सहयोगी दल भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ी गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, भाजपा ने अब तक करीब 274 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है और कई अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारा है। भाजपा ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर और उनकी पारंपरिक सीट नंदीग्राम, दोनों जगहों से उम्मीदवार बनाकर चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

पारदर्शिता बना प्रमुख मुद्दा

मतदाता सूची में संशोधन और आंकड़ों के खुलासे को लेकर उठे सवाल चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं। विपक्ष जहां इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रहा है, वहीं निर्वाचन आयोग का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार की जा रही हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ मतदाता सूची की विश्वसनीयता भी इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव का एक बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।

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