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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • मोदी को भायी बंगाल की झालमुड़ी, सड़क किनारे लिया स्वाद

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) झाड़ग्राम/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच रविवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच कुछ पल निकालकर आम लोगों के बीच पहुंचकर मशहूर बंगाली स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ का स्वाद लिया। झाड़ग्राम में उनका काफिला अचानक सड़क किनारे रुका और वे एक छोटे से ठेले पर पहुंच गए। प्रधानमंत्री को इस अंदाज में अपने बीच पाकर स्थानीय लोग उत्साहित हो उठे और देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि चार जनसभाओं की भागदौड़ के बीच उन्हें झाड़ग्राम में इस तीखे और चटपटे स्नैक का आनंद लेने का अवसर मिला, जो उनके लिए खास रहा। क्या है ‘झालमुड़ी’ का खास स्वाद पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता की गलियों में मिलने वाली ‘झालमुड़ी’ एक लोकप्रिय और सुलभ स्ट्रीट फूड है। ‘झाल’ का अर्थ है तीखा और ‘मुड़ी’ यानी मुरमुरा। मुरमुरे में सरसों का कच्चा तेल, हरी मिर्च, प्याज, मसाले, भुनी मूंगफली और नमकीन मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज खुशबू और कुरकुरापन है, जो सीधे बंगाल की सड़कों का एहसास कराता है। वेंडर इसे बड़े कौशल के साथ स्टील के डिब्बों में मिलाते हैं और कागज के कोन में परोसते हैं। यह न केवल स्वाद में दमदार है, बल्कि सस्ता और तुरंत तैयार होने वाला स्नैक भी है। भेलपुरी से अलग पहचान देश के अन्य हिस्सों में मिलने वाली भेलपुरी से झालमुड़ी की तुलना अक्सर की जाती है, लेकिन स्वाद के मामले में दोनों बिल्कुल अलग हैं। जहां भेलपुरी में मीठी चटनी का हल्का स्वाद होता है, वहीं झालमुड़ी पूरी तरह से तीखी और मसालेदार होती है। इसमें इस्तेमाल होने वाला सरसों का तेल इसे एक विशिष्ट पहचान देता है। हर राज्य में अलग अंदाज भारत में मुरमुरे से बनने वाले स्नैक्स की विविधता भी कम नहीं है। बेंगलुरु की ‘चुरुमुरी’ में नारियल का स्वाद मिलता है, जबकि ओडिशा की ‘मसाला मुड़ी’ अपने सादे लेकिन तीखे फ्लेवर के लिए जानी जाती है। इन सबके बीच झालमुड़ी अपनी अनोखी खुशबू और चटपटेपन के कारण अलग मुकाम रखती है। बदलते दौर में नए प्रयोग समय के साथ झालमुड़ी के नए-नए रूप भी सामने आ रहे हैं। हेल्थ कॉन्शियस लोग इसमें स्प्राउट्स, कम तेल और मूंगफली का उपयोग पसंद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर इसे आधुनिक ट्विस्ट देते हुए एवोकाडो और चीज के साथ भी परोसा जा रहा है। हालांकि, असली स्वाद आज भी सड़क किनारे ठेले पर बनने वाली पारंपरिक झालमुड़ी में ही माना जाता है। सादगी ने जीता दिल प्रधानमंत्री का यह सहज और सरल अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनावी व्यस्तता के बीच आम जनजीवन से जुड़ने का उनका यह प्रयास न केवल लोगों को प्रभावित कर गया, बल्कि बंगाल की इस पारंपरिक डिश को भी एक बार फिर सुर्खियों में ले आया। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • बापूजी नगर में अंबेडकर जयंती उत्साह से मनाई

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। बापूजी नगर क्षेत्र में भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की 135वीं जयंती हर्षोल्लास और सामाजिक एकता के वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए बाबासाहेब के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महेंद्र मुणोत ने बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्ष, समानता और सामाजिक न्याय की प्रेरणा देता है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त और समरस समाज का निर्माण संभव है। इस दौरान आयोजित अन्नदान कार्यक्रम में भी मुणोत ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए जरूरतमंदों की सेवा की। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का वातावरण और भी गरिमामय बन गया। कार्यक्रम के अंत में भाजपा कार्यकर्ता नारायण एवं पापाणा ने महेंद्र मुणोत का सम्मान कर आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता और एकजुटता को बढ़ावा देते हैं तथा नई पीढ़ी को महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने का कार्य करते हैं। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • प्रतापगढ़ में नवनिर्मित छात्रावास लोकार्पण एवं 15वां सामूहिक विवाह सम्मेलन भव्य आयोजन के साथ संपन्न

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) प्रतापगढ़, 20 अप्रैल 2026। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मालवा मेवाड़ आंजना समाज सेवा संस्थान, प्रतापगढ़ द्वारा आयोजित 15वां आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन एवं नवनिर्मित छात्रावास लोकार्पण समारोह सोमवार को बाहुबली कॉलोनी, नीमच रोड स्थित परिसर में भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता, संस्कृति और सेवा भावना का सशक्त संदेश दिया। समारोह का शुभारंभ आंजना समाज के आराध्य देव भगवान श्री राजेश्वर जी की तस्वीर पर अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय आंजना समाज, माउंट आबू के संरक्षक सेठ हरिभाई चौधरी ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में सामूहिक विवाह सम्मेलनों को सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का कार्य करते हैं। मुख्य अतिथि एवं राजस्थान सरकार के पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि सामूहिक विवाह भारतीय संस्कृति की सादगी, समानता और सहयोग की परंपरा के प्रतीक हैं। उन्होंने “सेवा, शिक्षा और संस्कार” को समाज की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को संबल प्रदान करते हैं। उन्होंने नवनिर्मित छात्रावास को शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। दानदाताओं के सहयोग से बना छात्रावास समारोह में छात्रावास निर्माण में समाज के भामाशाहों के योगदान को विशेष रूप से सराहा गया। इस कार्य हेतु उदयलाल आंजना द्वारा ₹11,55,555, स्वर्गीय पृथ्वीराज आंजना की ओर से ₹10,11,111 तथा सेठ हरिभाई चौधरी द्वारा ₹5,11,000 का सहयोग प्रदान किया गया। सभी दानदाताओं का साफा बंधवाकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में सांचौर विधायक जीवाराम चौधरी, अखिल भारतीय आंजना समाज के पूर्व अध्यक्ष वीरजी भाई चौधरी तथा मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक रणछोड़लाल आंजना सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अतिथियों का पारंपरिक मेवाड़ी पगड़ी एवं पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया। संस्थान के अध्यक्ष मनोहरलाल आंजना, उपाध्यक्ष गणपतलाल आंजना, गोपाललाल आंजना, कोषाध्यक्ष विजय सिंह आंजना एवं मंत्री हीरालाल आंजना सहित पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत भाषण गोपाललाल आंजना ने दिया, जबकि आभार प्रदर्शन मनोहरलाल आंजना द्वारा किया गया। 15 जोड़ों ने रचाया दांपत्य जीवन का शुभारंभ सामूहिक विवाह सम्मेलन में 15 नवयुगलों ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संस्कार संपन्न कर अपने नए जीवन की शुरुआत की। आर्योदय गुरुकुलम, जयपुर के सत्यम आर्य द्वारा विधि-विधान से विवाह संपन्न कराए गए। शहनाई की मधुर ध्वनि और मंगल गीतों ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन अनिल आंजना एवं कमल आर्य ने प्रभावशाली ढंग से किया। समारोह में उपस्थित अतिथियों एवं समाजजनों ने नवदम्पत्तियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर अतिथियों के करकमलों से नवनिर्मित छात्रावास का विधिवत लोकार्पण भी किया गया, जो भविष्य में समाज के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। प्रेरणादायी बना आयोजन भारी जनसमूह की उपस्थिति में संपन्न यह आयोजन सामाजिक समरसता, सहयोग, शिक्षा और संस्कारों के संदेश को मजबूती से स्थापित करने में सफल रहा। निस्संदेह, यह सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनकर भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • मैन्युफैक्चरिंग को नई धार देने की तैयारी, HMT और CMTI पर केंद्र की बड़ी समीक्षा

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। HMT Machine Tools Limited और Central Manufacturing Technology Institute (CMTI) के कामकाज और क्षमताओं को लेकर हाल ही में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें संस्थानों को मजबूत बनाने और टेक्नोलॉजिकल क्षमताओं के विस्तार पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि देश के ये प्रमुख संस्थान बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप खुद को तेजी से ढालें। इसके लिए टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को बढ़ाने, अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने और वैश्विक स्तर के सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने माना कि आधुनिक मशीन टूल्स और उन्नत विनिर्माण तकनीकों के बिना भारत का औद्योगिक विकास अधूरा है। समीक्षा के दौरान मॉडर्नाइजेशन को लेकर ठोस रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा हुई। इसमें उत्पादन प्रक्रियाओं को अपग्रेड करना, डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाना और रिसर्च एवं डेवलपमेंट को मजबूत करना शामिल है। साथ ही, संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय (इंस्टीट्यूशनल कोऑर्डिनेशन) स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया गया, ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके और परिणाम बेहतर मिलें। बैठक में ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के उपायों पर भी फोकस किया गया। इसमें कार्यप्रणाली को सरल बनाना, निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुधारों से न केवल संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि उद्योग जगत को भी सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। Ministry of Heavy Industries ने स्पष्ट किया कि इन पहलों का उद्देश्य देश के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना और उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। मंत्रालय ने दोहराया कि सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के तहत इन संस्थानों को अधिक सक्षम, आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन रणनीतिक कदमों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू सकता है और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज करा सकता है। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • पंजाब में ISI की नई चाल: पैसों के दम पर युवाओं को बना रहा मोहरा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चंडीगढ़। पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई और गंभीर चुनौती उभरकर सामने आई है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब बड़े आतंकी हमलों के बजाय छोटे-छोटे हमलों, टारगेट किलिंग और ड्रग्स नेटवर्क के जरिए राज्य में अस्थिरता फैलाने की साजिश रची है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रणनीति धीमी लेकिन बेहद खतरनाक है, जिसका उद्देश्य बिना ज्यादा शोर-शराबे के पंजाब का माहौल बिगाड़ना है। छोटे हमलों के पीछे बड़ा मकसद पिछले कुछ महीनों में पंजाब के विभिन्न इलाकों में हुए छोटे ब्लास्ट और ग्रेनेड हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन हमलों का मकसद बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाना है। असल खेल इसके पीछे चल रहा है—हथियारों की तस्करी, ड्रग्स नेटवर्क का विस्तार और चुनिंदा लोगों की हत्या। 4 लाख में ‘डील’: युवाओं को बनाया जा रहा हथियार खुफिया सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई अब स्थानीय युवाओं को लालच देकर अपने जाल में फंसा रही है। छोटे हमलों को अंजाम देने के लिए युवकों को 3 से 4 लाख रुपये तक की रकम ऑफर की जा रही है। बेरोजगारी, तेजी से पैसा कमाने की चाहत और राज्य में पहले से मौजूद नशे की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं को भर्ती किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब खालिस्तान जैसे पुराने मुद्दों का प्रभाव कम होने के कारण आईएसआई ने पैसों को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। बड़े हमलों से दूरी, ‘सॉफ्ट टारगेट’ पर नजर सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आईएसआई अब बड़े फिदायीन हमलों या सीरियल ब्लास्ट से बच रही है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता है। इसके बजाय अब सॉफ्ट टारगेट—यानी कमजोर और आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले लोगों—को टारगेट किया जा रहा है। टारगेट किलिंग के जरिए कम जोखिम में ज्यादा डर फैलाने की कोशिश की जा रही है। ड्रोन बना तस्करी का नया हथियार भारत-पाक सीमा पर बढ़ी सुरक्षा के बावजूद ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी लगातार जारी है। पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे हथियारों और नशे की खेप आसानी से पहुंचाई जा रही है। यह नेटवर्क न सिर्फ पंजाब बल्कि जम्मू-कश्मीर तक सक्रिय किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, चुनौती बड़ी पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। अब उनका फोकस सिर्फ बड़े हमलों को रोकने तक सीमित नहीं, बल्कि छोटे-छोटे घटनाक्रमों की कड़ी निगरानी, ड्रग्स नेटवर्क पर लगाम और युवाओं को भटकने से रोकने पर भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ‘लो-इंटेंसिटी वॉरफेयर’ की रणनीति है, जिसमें दुश्मन धीरे-धीरे माहौल को अस्थिर करता है। आईएसआई की यह नई चाल पारंपरिक आतंकवाद से अलग और ज्यादा जटिल है। इसमें सीधे टकराव के बजाय अंदर ही अंदर समाज को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ समाज और परिवारों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे युवाओं को इस जाल में फंसने से बचाएं। * ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ। *

  • वोट के लिए घर वापसी: बंगाल में बढ़ी सियासी हलचल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राज्य में मतदान को लेकर माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। चुनावी सरगर्मी के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार के लिए बसे हजारों प्रवासी मतदाता अब अपने गृह राज्य लौट रहे हैं। खासतौर पर मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में लौटने वालों की संख्या उल्लेखनीय बताई जा रही है। मताधिकार को लेकर बढ़ी जागरूकता और चिंता दिल्ली, मुंबई, केरल, चेन्नई और सूरत जैसे महानगरों से बड़ी संख्या में लोग ट्रेनों और अन्य साधनों से पश्चिम बंगाल की ओर रवाना हो रहे हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं की भागीदारी अधिक बताई जा रही है। कई प्रवासियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं। साथ ही, यह आशंका भी उनके बीच चर्चा का विषय बनी हुई है कि मतदान नहीं करने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। SIR प्रक्रिया को लेकर फैली भ्रम की स्थिति चुनाव से पहले चल रही “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” प्रक्रिया ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों से फोन कॉल और सोशल मीडिया संदेशों के जरिए यह बात तेजी से फैल रही है कि वोट नहीं करने वालों के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इस तरह की किसी पुष्टि के अभाव में भी यह अफवाह प्रवासी मतदाताओं को घर लौटने के लिए प्रेरित कर रही है। रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी भीड़, व्यवस्था पर दबाव बंगाल जाने वाली ट्रेनों में इन दिनों जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस और दिल्ली के प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की लंबी कतारें आम हो गई हैं। जनरल डिब्बों में जगह पाना मुश्किल हो गया है, जबकि आरक्षित सीटों के लिए भी भारी मांग बनी हुई है। स्थिति को देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। सूरत में बिगड़े हालात, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप गुजरात के सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर 19 अप्रैल 2026 को भीड़ ने अचानक उग्र रूप ले लिया। बैरिकेड पार करने की कोशिशों से भगदड़ जैसे हालात बन गए, जिसके बाद पुलिस को हल्का लाठीचार्ज कर स्थिति नियंत्रित करनी पड़ी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, करीब 21 हजार यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक भेजा गया और अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गईं। विदेशों से भी लौट रहे मतदाता दिलचस्प बात यह है कि केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे बंगाली भी मतदान के लिए वापस लौट रहे हैं। अमेरिका, बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए मतदाताओं का कहना है कि वे राज्य के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना अपना कर्तव्य मानते हैं। लोकतंत्र का उत्सव या अफवाहों का असर? विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान एक ओर लोकतंत्र के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर अफवाहों के प्रभाव को भी उजागर करता है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भ्रम की स्थिति दूर हो सके। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच प्रवासी मतदाताओं की यह ‘घर वापसी’ न केवल राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत है, बल्कि यह लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व को भी रेखांकित करती है। * ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ। *

  • सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन की 5वीं वार्षिक बैठक सम्पन्न, सेवा कार्यों का व्यापक लेखा-जोखा पेश

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु, आरटी नगर। सेवा और समर्पण की मिसाल बन चुकी सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन की 5वीं वार्षिक बैठक 19 अप्रैल 2026 ने रविवार शाम आरटी नगर स्थित परिसर में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुई। शाम 7 से 8 बजे के बीच आयोजित इस बैठक में संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए बीते वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा की और आगामी योजनाओं की रूपरेखा पर चर्चा की। बैठक के दौरान संस्था के पूर्व अध्यक्ष राजमणि कुमार सिन्हा और सीईओ राम मोहन पाठक ने वर्षभर में किए गए सेवा कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर, वस्त्र वितरण, रक्तदान अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम और कॉलेजों में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान जैसे कई जनहितकारी कार्य सफलतापूर्वक संचालित किए गए। वहीं पूर्व कोषाध्यक्ष ने संस्था की वित्तीय पारदर्शिता को रेखांकित करते हुए वर्षभर के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया और बैंक स्टेटमेंट साझा किया। निदेशक मनोज गुप्ता ने आगामी वर्ष 2026-27 के लिए संस्था के विजन, नई योजनाओं और विस्तार की रणनीति पर प्रकाश डाला। संस्था के संस्थापक प्रवीण कुमार पांडेय ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले पांच वर्षों में सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन ने समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि संस्था अब तक 15,000 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य जांच सुविधा प्रदान कर चुकी है। इसके अलावा 10,000 से अधिक सैनिटरी पैड, 8,000 से अधिक वस्त्र वितरित किए गए हैं और 2,000 यूनिट रक्तदान कराया गया है। उन्होंने आगे बताया कि संस्था ने 1,000 से अधिक पौधारोपण, 50 से अधिक जागरूकता अभियान, 2,000 स्कूली किट वितरण और सरकारी स्कूलों में 16 ब्लैकबोर्ड लगाने जैसे कार्य भी किए हैं। विशेष रूप से 20 से अधिक जरूरतमंद मजदूरों के अंतिम संस्कार में सहयोग देकर संस्था ने मानवता की मिसाल पेश की है। बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 के लिए नई कार्यकारिणी की घोषणा भी की गई। जिसमें प्रवीण पांडेय को चेयरमैन, मनोज गुप्ता को निदेशक, नितीन शर्मा को अध्यक्ष, राजमणि कुमार सिन्हा को उपाध्यक्ष और राजीव रंजन को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा कमलेश यादव सचिव, धर्मवीर संयुक्त सचिव, राजेश कुमार कोषाध्यक्ष, रोशन कुमार संयुक्त कोषाध्यक्ष, धनंजय कुमार प्रवक्ता, अमित कुमार मीडिया प्रभारी, अधिवक्ता विनय सिंह सलाहकार, राम मोहन पाठक सीईओ, नीरज कुमार शर्मा सीओओ, अंकित मिश्रा सीआईओ और डी.के. मिश्रा सीएफओ नियुक्त किए गए। अंत में संस्थापक प्रवीण पांडेय ने सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाज सेवा के इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने का संकल्प दोहराया। बैठक का समापन सेवा, सहयोग और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • लोकार्पण से पहले पचपदरा रिफाइनरी में आग, गहलोत ने जताई चिंता

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बालोतरा। राजस्थान के बालोतरा जिले स्थित पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार दोपहर लगी भीषण आग ने प्रदेशभर में चिंता और हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित लोकार्पण से महज 24 घंटे पहले हुए इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर लिखा, “बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी में आग लगने की खबर सुनकर चिंता हुई। यह रिफाइनरी हम सभी राजस्थानियों के लिए गर्व का विषय है और ऐसे समय पर यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” गहलोत का यह बयान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रदेशहित को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है। राजनीति से ऊपर उठी संवेदना पिछले कुछ दिनों से रिफाइनरी परियोजना के श्रेय को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी चल रही थी। गहलोत ने जहां पहले लागत वृद्धि और देरी को लेकर राज्य सरकार को घेरा था, वहीं इस हादसे के बाद उन्होंने संयमित और संवेदनशील प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेशवासियों की सुरक्षा की कामना की। उनके इस रुख को व्यापक स्तर पर सराहना मिल रही है। CDU-VDU यूनिट में हादसा, जांच जारी प्राप्त जानकारी के अनुसार आग रिफाइनरी की महत्वपूर्ण CDU-VDU यूनिट में लगी, जिसे लोकार्पण कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा था। दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पा लिया है। फिलहाल ‘कूलिंग ऑपरेशन’ जारी है और विशेषज्ञ टीमें तकनीकी कारणों की जांच में जुटी हैं। लोकार्पण पर संशय के बादल हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या निर्धारित समय पर लोकार्पण समारोह आयोजित हो पाएगा। सुरक्षा एजेंसियां, विशेषकर एसपीजी और तकनीकी विशेषज्ञ, रिफाइनरी परिसर का गहन सुरक्षा ऑडिट कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपकरणों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन अलर्ट, मुख्यमंत्री का संभावित दौरा घटना के बाद राज्य सरकार भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की संभावना जताई जा रही है। जिला प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रदेश में चिंता का माहौल इस अप्रत्याशित हादसे ने न केवल प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया है, बल्कि आमजन के बीच भी चिंता का माहौल बना दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्थिति कितनी जल्दी सामान्य होती है और क्या देश की इस महत्वपूर्ण परियोजना का लोकार्पण तय कार्यक्रम के अनुसार संभव हो पाएगा। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • पचपदरा रिफाइनरी में आग, लोकार्पण से पहले हड़कंप

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बालोतरा (राजस्थान)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित लोकार्पण कार्यक्रम से महज 24 घंटे पहले पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है। सोमवार दोपहर रिफाइनरी परिसर की एक यूनिट में अचानक आग भड़क उठी, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की लपटों के साथ उठता काला धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा गया। तैयारियों के बीच अचानक हादसा जानकारी के अनुसार, रिफाइनरी में अंतिम चरण की तैयारियां चल रही थीं और मंगलवार को होने वाले भव्य लोकार्पण कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इसी दौरान एक यूनिट में अचानक स्पार्किंग या अन्य तकनीकी कारणों से आग लग गई। घटना के बाद वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों में हलचल मच गई। तुरंत सक्रिय हुआ फायर सेफ्टी सिस्टम घटना की सूचना मिलते ही रिफाइनरी का इन-हाउस फायर सेफ्टी सिस्टम तुरंत सक्रिय कर दिया गया। दमकल की कई गाड़ियां, हाइड्रेंट सिस्टम और विशेष अग्निशमन दल मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गए। अधिकारियों के अनुसार आग पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं ताकि इसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोका जा सके। उच्च अधिकारी मौके पर, स्थिति पर नजर घटना की गंभीरता को देखते हुए रिफाइनरी के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। पूरी स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है, हालांकि मशीनरी को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा और प्रबंधन पर उठे सवाल लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज तकनीकी खामी का परिणाम है या सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई है? रिफाइनरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। कार्यक्रम पर संशय, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंगलवार को होने वाला लोकार्पण कार्यक्रम तय समय पर होगा या उसमें बदलाव किया जाएगा। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जांच के आदेश संभव सूत्रों के अनुसार, आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच कराई जा सकती है। एचपीसीएल और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर डैमेज कंट्रोल के साथ-साथ कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। (समाचार जारी…) ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन की तैयारियां तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पचपदरा, बाड़मेर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित 21 अप्रैल 2026 के पचपदरा HPCL रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इसी क्रम में आज रिफाइनरी परिसर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया गया तथा कार्यक्रम को सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। निरीक्षण के दौरान यज्ञशाला, क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) तथा मुख्य नियंत्रण कक्ष (Main Control Room) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन किया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं समयबद्ध एवं उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण की जाएं, ताकि उद्घाटन कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श आयोजन के रूप में स्थापित हो सके। इसके पश्चात जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की रूपरेखा, सुरक्षा व्यवस्था, आमजन की सुविधाएं, यातायात प्रबंधन तथा भीड़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए समुचित प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल, सुमेरपुर विधायक एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत, भाजपा प्रदेश महामंत्री भूपेन्द्र सैनी, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, प्रदेश मंत्री सीताराम पोसवाल, प्रदेश प्रवक्ता एवं कार्यक्रम प्रभारी महेश मीणा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गणपत बांठिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही बायतु विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रत्याशी बालाराम मूंढ, रिफाइनरी के वरिष्ठ अधिकारी, उपखंड अधिकारी एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि पचपदरा रिफाइनरी परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इसके शुरू होने से न केवल बाड़मेर जिले बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • पीएम संबोधन पर सियासी संग्राम, आयोग पहुंची शिकायत

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के संसद में पारित न होने पर विपक्ष पर तीखा हमला करने वाले इस संबोधन के खिलाफ अब चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि यह भाषण ‘आदर्श आचार संहिता’ का उल्लंघन करता है और सरकारी मंच का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री के संबोधन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संबोधन निष्पक्ष सरकारी संवाद न होकर राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित था। पत्र में मांग की गई है कि चुनाव आयोग मामले की निष्पक्ष जांच करे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस मुद्दे पर कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक आधिकारिक संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया गया, जिसका उद्देश्य केवल विपक्ष पर आरोप लगाना था। खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस का बार-बार उल्लेख किया, जबकि महिलाओं से जुड़े मूल मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। दरअसल, अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों—कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी—पर निशाना साधते हुए कहा था कि “दलहित को देशहित से ऊपर रखा गया है।” उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने को ‘नारी शक्ति के सम्मान पर चोट’ करार देते हुए विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। प्रधानमंत्री ने भावुक लहजे में कहा कि संसद में प्रस्ताव गिरने पर कुछ दलों का व्यवहार महिलाओं के आत्मसम्मान के खिलाफ था। विपक्ष का तर्क है कि जब आचार संहिता लागू हो, तब इस प्रकार का संबोधन सरकारी माध्यमों से प्रसारित करना चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत बताया जा रहा है। अब निगाहें भारत निर्वाचन आयोग पर टिक गई हैं। आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल राजनीतिक बहस को और तेज करेगा, बल्कि चुनावी आचार संहिता के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल भी बन सकता है।

  • अजहरुद्दीन के एमएलसी नामांकन पर मंजूरी की मांग तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हैदराबाद। तेलंगाना की सियासत में विधान परिषद (एमएलसी) नामांकन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला से मुलाकात कर लंबित नामांकनों को जल्द मंजूरी देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन और टीजेएस अध्यक्ष एम. कोडंडाराम के एमएलसी नामांकन को स्वीकृति देने का आग्रह किया। इस दौरान उनके साथ विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू और राज्यसभा सांसद वेम नरेंद्र रेड्डी भी मौजूद रहे। लोक भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान राज्य के विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी मुद्दों पर भी चर्चा हुई। लेकिन सबसे अहम मुद्दा अजहरुद्दीन का नामांकन रहा, क्योंकि मंत्री पद संभालने के लगभग छह महीने बाद भी वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, उन्हें 30 अप्रैल 2026 तक विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है, अन्यथा उनका मंत्री पद खतरे में पड़ सकता है। गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल ने 30 अगस्त 2025 को राज्यपाल कोटे के तहत अजहरुद्दीन और कोडंडाराम के नामों की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया है कि राज्यपाल जल्द ही इन नामांकनों को मंजूरी देंगे। इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप भी महत्वपूर्ण रहा है। अदालत ने पहले राज्यपाल कोटे से किए गए कुछ नामांकनों पर अंतरिम रोक लगाई थी और स्पष्ट किया था कि इस तरह की नियुक्तियां न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यदि समय रहते मंजूरी नहीं मिलती है, तो यह मुद्दा न केवल संवैधानिक संकट का रूप ले सकता है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें राज्यपाल के फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।

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