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पंजाब में ISI की नई चाल: पैसों के दम पर युवाओं को बना रहा मोहरा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 20
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चंडीगढ़। पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई और गंभीर चुनौती उभरकर सामने आई है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब बड़े आतंकी हमलों के बजाय छोटे-छोटे हमलों, टारगेट किलिंग और ड्रग्स नेटवर्क के जरिए राज्य में अस्थिरता फैलाने की साजिश रची है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रणनीति धीमी लेकिन बेहद खतरनाक है, जिसका उद्देश्य बिना ज्यादा शोर-शराबे के पंजाब का माहौल बिगाड़ना है।

छोटे हमलों के पीछे बड़ा मकसद

पिछले कुछ महीनों में पंजाब के विभिन्न इलाकों में हुए छोटे ब्लास्ट और ग्रेनेड हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन हमलों का मकसद बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाना है। असल खेल इसके पीछे चल रहा है—हथियारों की तस्करी, ड्रग्स नेटवर्क का विस्तार और चुनिंदा लोगों की हत्या।

4 लाख में ‘डील’: युवाओं को बनाया जा रहा हथियार

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई अब स्थानीय युवाओं को लालच देकर अपने जाल में फंसा रही है। छोटे हमलों को अंजाम देने के लिए युवकों को 3 से 4 लाख रुपये तक की रकम ऑफर की जा रही है। बेरोजगारी, तेजी से पैसा कमाने की चाहत और राज्य में पहले से मौजूद नशे की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं को भर्ती किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब खालिस्तान जैसे पुराने मुद्दों का प्रभाव कम होने के कारण आईएसआई ने पैसों को अपना मुख्य हथियार बना लिया है।

बड़े हमलों से दूरी, ‘सॉफ्ट टारगेट’ पर नजर

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आईएसआई अब बड़े फिदायीन हमलों या सीरियल ब्लास्ट से बच रही है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता है। इसके बजाय अब सॉफ्ट टारगेट—यानी कमजोर और आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले लोगों—को टारगेट किया जा रहा है। टारगेट किलिंग के जरिए कम जोखिम में ज्यादा डर फैलाने की कोशिश की जा रही है।

ड्रोन बना तस्करी का नया हथियार

भारत-पाक सीमा पर बढ़ी सुरक्षा के बावजूद ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी लगातार जारी है। पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे हथियारों और नशे की खेप आसानी से पहुंचाई जा रही है। यह नेटवर्क न सिर्फ पंजाब बल्कि जम्मू-कश्मीर तक सक्रिय किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो गई हैं।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, चुनौती बड़ी

पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। अब उनका फोकस सिर्फ बड़े हमलों को रोकने तक सीमित नहीं, बल्कि छोटे-छोटे घटनाक्रमों की कड़ी निगरानी, ड्रग्स नेटवर्क पर लगाम और युवाओं को भटकने से रोकने पर भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ‘लो-इंटेंसिटी वॉरफेयर’ की रणनीति है, जिसमें दुश्मन धीरे-धीरे माहौल को अस्थिर करता है। आईएसआई की यह नई चाल पारंपरिक आतंकवाद से अलग और ज्यादा जटिल है। इसमें सीधे टकराव के बजाय अंदर ही अंदर समाज को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ समाज और परिवारों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे युवाओं को इस जाल में फंसने से बचाएं।


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