वोट के लिए घर वापसी: बंगाल में बढ़ी सियासी हलचल
- धन्ना राम चौधरी

- 20 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राज्य में मतदान को लेकर माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। चुनावी सरगर्मी के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार के लिए बसे हजारों प्रवासी मतदाता अब अपने गृह राज्य लौट रहे हैं। खासतौर पर मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में लौटने वालों की संख्या उल्लेखनीय बताई जा रही है।
मताधिकार को लेकर बढ़ी जागरूकता और चिंता
दिल्ली, मुंबई, केरल, चेन्नई और सूरत जैसे महानगरों से बड़ी संख्या में लोग ट्रेनों और अन्य साधनों से पश्चिम बंगाल की ओर रवाना हो रहे हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं की भागीदारी अधिक बताई जा रही है। कई प्रवासियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं। साथ ही, यह आशंका भी उनके बीच चर्चा का विषय बनी हुई है कि मतदान नहीं करने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
SIR प्रक्रिया को लेकर फैली भ्रम की स्थिति
चुनाव से पहले चल रही “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” प्रक्रिया ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों से फोन कॉल और सोशल मीडिया संदेशों के जरिए यह बात तेजी से फैल रही है कि वोट नहीं करने वालों के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इस तरह की किसी पुष्टि के अभाव में भी यह अफवाह प्रवासी मतदाताओं को घर लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।
रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी भीड़, व्यवस्था पर दबाव
बंगाल जाने वाली ट्रेनों में इन दिनों जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस और दिल्ली के प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की लंबी कतारें आम हो गई हैं। जनरल डिब्बों में जगह पाना मुश्किल हो गया है, जबकि आरक्षित सीटों के लिए भी भारी मांग बनी हुई है। स्थिति को देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है।
सूरत में बिगड़े हालात, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
गुजरात के सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर 19 अप्रैल 2026 को भीड़ ने अचानक उग्र रूप ले लिया। बैरिकेड पार करने की कोशिशों से भगदड़ जैसे हालात बन गए, जिसके बाद पुलिस को हल्का लाठीचार्ज कर स्थिति नियंत्रित करनी पड़ी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, करीब 21 हजार यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक भेजा गया और अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गईं।
विदेशों से भी लौट रहे मतदाता
दिलचस्प बात यह है कि केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे बंगाली भी मतदान के लिए वापस लौट रहे हैं। अमेरिका, बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए मतदाताओं का कहना है कि वे राज्य के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना अपना कर्तव्य मानते हैं।
लोकतंत्र का उत्सव या अफवाहों का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान एक ओर लोकतंत्र के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर अफवाहों के प्रभाव को भी उजागर करता है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भ्रम की स्थिति दूर हो सके। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच प्रवासी मतदाताओं की यह ‘घर वापसी’ न केवल राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत है, बल्कि यह लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व को भी रेखांकित करती है।
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