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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • धारावाहिक उपन्यास मौन दान (भाग–01)

    वह आदमी जिसे कोई समझ न सका लेखक: अशोक कुमार सिंह नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। सावन की पहली बारिश के बाद... सावन की पहली बारिश थम चुकी थी। भीगी मिट्टी की सोंधी महक पूरे गाँव में फैल गई थी। पीपल के पुराने पेड़ से टपकती पानी की बूँदें मानो समय की धीमी चाल का संगीत रच रही थीं। दूर मंदिर की घंटी बजी और उसके साथ ही गाँव की सुबह ने आँखें खोल दीं। लेकिन उस दिन गाँव की हवा में एक अजीब-सी बेचैनी थी। लोग अपने-अपने घरों के बाहर खड़े होकर एक ही दिशा में देख रहे थे—गाँव के अंतिम छोर पर बने उस पुराने मकान की ओर, जहाँ वर्षों से अकेले रहने वाले शिवनारायण रहते थे। सुबह सूरज निकलने से पहले ही एक खबर पूरे गाँव में फैल चुकी थी— "शिवनारायण नहीं रहे।" यह समाचार सुनकर गाँव में शोक से अधिक सन्नाटा था। कुछ चेहरे गंभीर थे, कुछ बिल्कुल निर्विकार। चौपाल पर बैठे रामदीन ने लंबी साँस भरते हुए कहा— "अजीब आदमी था... न किसी से हँसकर मिला, न किसी के सुख-दुःख में दिखाई दिया।" पास बैठे हरिराम ने सहमति में सिर हिलाया। "इतनी ज़मीन... इतना धन... लेकिन अपने ऊपर भी एक पैसा खर्च नहीं किया।" एक युवक बोला— "मरते दम तक वही पुराना कुर्ता पहनता रहा।" बातों का सिलसिला बढ़ता गया। किसी ने उसे कंजूस कहा। किसी ने घमंडी। किसी ने पत्थरदिल। लेकिन उन्हीं आवाज़ों के बीच एक स्वर ऐसा भी था, जो अब तक शांत था। वह थीं जमुना दादी। उन्होंने धीमे लेकिन दृढ़ स्वर में कहा— "बेटा... किसी इंसान का हिसाब उसके जीते-जी मत लगाना। कई लोग अपनी पूरी ज़िंदगी का उत्तर अपने जाने के बाद देते हैं।" चौपाल पर कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा छा गया। उसी समय गाँव की पगडंडी पर धूल उड़ाती एक पुरानी जीप दिखाई दी। जीप आकर शिवनारायण के घर के सामने रुकी। उसमें से लगभग साठ वर्ष के एक सज्जन उतरे। सफ़ेद धोती-कुर्ता, कंधे पर पुराना चमड़े का बैग और चेहरे पर गंभीर संतुलन। उन्हें देखते ही किसी ने धीरे से कहा— "अरे... ये तो शहर वाले वकील दयानाथ त्रिपाठी हैं!" दयानाथ बिना कुछ बोले सीधे घर के भीतर चले गए। कुछ देर बाद वे बाहर आए और शांत स्वर में बोले— "शिवनारायण जी ने अपने निधन से पहले मेरे पास एक कानूनी निर्देश छोड़ा था।" सभी लोग उत्सुकता से उनकी ओर देखने लगे। उन्होंने अपने बैग से एक मोहरबंद लिफ़ाफ़ा निकाला। उस पर शिवनारायण की साफ़ लिखावट थी— "मेरे अंतिम संस्कार से पहले, पूरे गाँव की उपस्थिति में मेरा पुराना संदूक खोला जाए। उसके बिना मेरी अंतिम यात्रा शुरू न की जाए।" यह पढ़ते ही पूरे गाँव में कानाफूसी शुरू हो गई। "संदूक?" "क्या उसमें सोना-चाँदी है?" "या कोई वसीयत?" दयानाथ ने किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा— "इस संदूक में उनके जीवन का वह सच छिपा है, जिसे जाने बिना लोग उन्हें कभी समझ नहीं पाएँगे।" बरामदे के अँधेरे कोने में रखा वर्षों पुराना सागौन का संदूक अब सबकी निगाहों का केंद्र बन चुका था। उस पर जंग लगा भारी ताला लटका था। कमरे में ऐसी खामोशी थी कि छत से टपकती पानी की बूँदों की आवाज़ भी साफ़ सुनाई दे रही थी। दयानाथ ने अपनी जेब से एक छोटी-सी पीतल की चाबी निकाली... उन्होंने धीरे-धीरे संदूक की ओर कदम बढ़ाए... और पूरे गाँव की साँसें जैसे एक साथ थम गईं। अब आपकी बारी है! नीचे दिए गए कमेंट सेक्शन में इस कहानी पर अपने विचार ज़रूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें ऐसी और भी मनोरंजक कहानियाँ लिखने के लिए प्रेरित करती है। राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक समाचारों के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएँ—सभी महत्वपूर्ण समाचार सबसे पहले पाने के लिए हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें। ताज़ा अपडेट्स के लिए "भारतार्थ ख़बर" से जुड़े रहें। क्रमशः... अगला भाग: बंद संदूक और पहली दरार केवल भारतार्थ ख़बर पर।

  • श्री उत्सव' बना महिला शक्ति का महाकुंभ, शिवमोग्गा में उमड़ा जनसैलाब

    तेरापंथ महिला मंडल की प्रदर्शनी में 26 स्टॉल, 1000 से अधिक आगंतुकों ने सराहा महिला उद्यमिता का अनूठा उत्सव शिवमोग्गा में आयोजित "श्री उत्सव" प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह एवं महिला उद्यमियों के स्टॉलों का भव्य दृश्य। भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिवमोग्गा (कर्नाटक) | 21 जुलाई 2026 श्री उत्सव प्रदर्शनी ने शिवमोग्गा में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता का प्रेरणादायी संदेश दिया। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय परियोजना "श्री उत्सव" के अंतर्गत श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महिला मंडल, शिवमोग्गा द्वारा आयोजित भव्य प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने समाज में महिलाओं की प्रतिभा, नेतृत्व और आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की। इस आयोजन में लगभग 900 से 1000 आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया। स्थानीय तेरापंथ सभा भवन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे णमोकार महामंत्र के मंगल उच्चारण से हुआ। उद्घाटन समारोह में डॉ. दीपा श्री एवं डॉ. शिल्पा श्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इसके साथ ही तेरापंथ सभा, तेरापंथ ट्रस्ट, युवक परिषद, स्थानीय मूर्तिपूजक संघ तथा समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल की सदस्यों द्वारा भावपूर्ण मंगलाचरण से हुई। मंडल की मंत्री श्रीमती छाया डोशी ने अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत किया, जबकि कोषाध्यक्ष श्रीमती आशा बाफना ने मुख्य अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। मंडल की अध्यक्षा श्रीमती हेमलता बाफना ने वर्षभर संचालित सेवा, संस्कार एवं सामाजिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि "श्री उत्सव" केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देकर समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. दीपा श्री ने महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज की प्रगति का आधार है। वहीं डॉ. शिल्पा श्री ने महिला स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता को समाज की उन्नति के लिए अनिवार्य बताते हुए ऐसे आयोजनों की सराहना की। कार्यक्रम में मूर्तिपूजक संघ के मंत्री मांगीलाल रमानी, तेरापंथ सभा एवं ट्रस्ट के मंत्री चंदनमल जी तथा युवक परिषद के अध्यक्ष निखिल कोठारी ने भी महिला नेतृत्व, सामाजिक समरसता और संगठन की शक्ति पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण महिला उद्यमियों द्वारा लगाए गए 26 आकर्षक स्टॉल रहे। शिवमोग्गा, चित्रदुर्ग, भद्रावती, चिक्कमगलूर सहित आसपास के क्षेत्रों से आई महिला उद्यमियों ने कॉस्मेटिक्स, साड़ियाँ, इलेक्ट्रॉनिक फोटो फ्रेम, आयुर्वेदिक उत्पाद, मसाले, हस्तनिर्मित कलात्मक वस्तुएँ तथा स्वादिष्ट खाद्य सामग्री का आकर्षक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में खरीदारी और अवलोकन के लिए शिवमोग्गा के अलावा लक्कवल्ली, भद्रावती, तरीकेरे एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुव्यवस्थित आयोजन, अनुशासन और सौहार्दपूर्ण वातावरण की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की। आयोजन के दौरान पाँच लकी ड्रॉ आयोजित किए गए, जिनमें विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती लता कोठारी ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि अंत में सहमंत्री श्रीमती वीणा भटेवरा ने सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं, महिला उद्यमियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब महिलाओं को अवसर और मंच मिलता है तो वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की अग्रदूत भी बनती हैं। "श्री उत्सव" महिला शक्ति, संगठन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।

  • VIDHRUTHI–YES WE CAN! सम्मेलन ने गढ़े भविष्य के CA, 1800 विद्यार्थियों ने रचा इतिहास

    आईसीएआई के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में ज्ञान, नेतृत्व, नवाचार और करियर मार्गदर्शन का मिला अनूठा संगम VIDHRUTHI – YES WE CAN! राष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित आईसीएआई पदाधिकारी, अतिथि एवं देशभर से आए सीए विद्यार्थी। भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु (कर्नाटक) | 21 जुलाई 2026 VIDHRUTHI – YES WE CAN! राष्ट्रीय सम्मेलन ने देशभर के चार्टर्ड अकाउंटेंसी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, नेतृत्व और व्यावसायिक उत्कृष्टता का नया अध्याय लिख दिया। आईसीएआई बोर्ड ऑफ स्टडीज़ (अकादमिक) द्वारा आयोजित तथा आईसीएआई बेंगलुरु शाखा (एसआईआरसी) एवं सिकासा बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन हुआ। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 1,800 से अधिक सीए विद्यार्थियों ने भाग लेकर ज्ञान, नवाचार, नेतृत्व, नेटवर्किंग और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा अनुभव प्राप्त किया। सम्मेलन का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं था, बल्कि भावी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को बदलते वैश्विक वित्तीय परिवेश के अनुरूप नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्यों, तकनीकी दक्षता और नवाचार के लिए तैयार करना भी था। यही कारण रहा कि सम्मेलन में आयोजित प्रत्येक सत्र विद्यार्थियों के लिए सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर बन गया। उद्घाटन समारोह में कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट न्यायमूर्ति विभु बाखरू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी पेशे की वास्तविक पहचान उसकी ईमानदारी, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से होती है। उन्होंने युवा सीए विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर सीए राजेश शर्मा, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ स्टडीज़ (अकादमिक), सीए के. रघु, आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष एवं अपीलीय प्राधिकरण (सीए, सीएस एवं सीएमए), सीए मधुकर एन. हिरेगंगे, सम्मेलन निदेशक, सीए कविता परमेश, अध्यक्ष, आईसीएआई बेंगलुरु शाखा, सीए प्रमोद आर. हेगड़े, सीए पम्पन्ना, सीए विनोद गर्ग, अध्यक्ष, सिकासा बेंगलुरु तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। दो दिनों तक चले सम्मेलन में तकनीकी सत्र, नेतृत्व विकास व्याख्यान, करियर काउंसिलिंग, कौशल विकास कार्यशालाएँ, इंटरैक्टिव चर्चाएँ और उद्योग विशेषज्ञों के विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल फाइनेंस, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, टैक्सेशन, उद्यमिता, प्रोफेशनल एथिक्स और भविष्य की चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। सम्मेलन का सबसे आकर्षक आयोजन राष्ट्रीय छात्र शोध-पत्र प्रस्तुति (National Student Paper Presentation) रहा। देशभर से आए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने समसामयिक आर्थिक एवं व्यावसायिक विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने उनके विश्लेषण, शोध क्षमता और व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के प्रोफेशनल लीडर्स बताया। सीए राजेश शर्मा ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने और नई तकनीकों को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि जो विद्यार्थी बदलते समय के साथ स्वयं को विकसित करते हैं, वही भविष्य के सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट बनते हैं। सीए के. रघु ने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन बनाए रखने और पेशे की गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया। सीए विनोद गर्ग ने सम्मेलन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि "VIDHRUTHI – YES WE CAN!" केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि एक प्रेरक आंदोलन है, जो प्रत्येक सीए विद्यार्थी को अपनी क्षमता पहचानने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों को देशभर के प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के साथ संवाद और नेटवर्किंग का अवसर भी मिला। साथ ही आयोजित सांस्कृतिक संध्या में संगीत, नृत्य और रचनात्मक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया। समापन अवसर पर आयोजकों ने यह संकल्प दोहराया कि आईसीएआई भविष्य के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को विश्वस्तरीय शिक्षा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक कौशल से सशक्त बनाने के लिए निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। सम्मेलन का समापन "विकसित भारत 2047" के निर्माण में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे की सक्रिय भूमिका के संकल्प के साथ हुआ।

  • चातुर्मास 2026 का शुभारंभ: द्वारका में साध्वी श्री भगवती बाई माताजी का आध्यात्मिक प्रवास शुरू

    25 जुलाई से 26 सितंबर तक चलेगा चातुर्मास, श्रद्धालुओं के लिए सत्संग, धर्मचर्चा और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) द्वारका (गुजरात) | 21 जुलाई, 2026 चातुर्मास 2026 के शुभ अवसर पर धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम गुजरात के पावन तीर्थ द्वारका में होने जा रहा है। पीठाधीश्वर परम तपस्विनी श्री श्री 1008 साध्वी श्री भगवती बाई (माताजी) का इस वर्ष का चातुर्मास श्री राजेश्वर भगवान अंजणी माता धाम, सुभद्रा माता आश्रम, चरकला रोड, एनएच-947, जामनगर हाईवे, द्वारका (गुजरात) में आयोजित होगा। पोस्टर के अनुसार यह आध्यात्मिक आयोजन 25 जुलाई 2026 से 26 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, सत्संग, भक्ति, साधना, जप, तप तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक जागरण से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चातुर्मास भारतीय सनातन परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान संत-महात्मा एक स्थान पर निवास कर धर्मोपदेश, शास्त्र चर्चा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इससे श्रद्धालुओं को सत्संग का लाभ मिलता है और समाज में नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रसार होता है। आयोजकों ने देशभर के श्रद्धालुओं, धर्मप्रेमियों एवं समाजबंधुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं ताकि सभी भक्तगण सहज रूप से कार्यक्रमों में भाग ले सकें। धार्मिक जानकारों का कहना है कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, संयम, सेवा, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर भी है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

  • राजोर में आँजणा समाज का शक्ति प्रदर्शन, स्नेह मिलन सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब

    एकता, संस्कार और युवा शक्ति का दिखा अद्भुत संगम, शिक्षा-स्वास्थ्य व सामाजिक उत्थान का लिया संकल्प राजोर गांव में आयोजित अखिल भारतीय आँजणा युवा महासभा के स्नेह मिलन सम्मेलन का भव्य दृश्य। भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) राजोर, लूणी (जोधपुर, राजस्थान) | 21 जुलाई 2026 आँजणा समाज स्नेह मिलन सम्मेलन ने एक बार फिर समाज की एकजुटता, संगठन शक्ति और युवा ऊर्जा का प्रभावशाली संदेश दिया। लूणी विधानसभा क्षेत्र के राजोर गांव में अखिल भारतीय आँजणा युवा महासभा द्वारा आयोजित भव्य स्नेह मिलन सम्मेलन में समाज के वरिष्ठ नेतृत्व, युवाओं और गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। पूरे आयोजन में सामाजिक समरसता, संस्कार, संगठन और विकास का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। सम्मेलन का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने एक-दूसरे से संवाद स्थापित कर सामाजिक एकता को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला अध्यक्ष महेंद्र पटेल एवं उनकी पूरी टीम की सभी अतिथियों और समाजजनों ने सराहना की। अतिथियों ने आयोजकों द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत और सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष सोहनलाल आँजणा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भीयाराम पटेल, राष्ट्रीय महामंत्री भेराराम चौधरी तथा आँजणा समाज दर्पण के संपादक सांवलराम चौधरी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने समाज को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, शिक्षा, संस्कार और युवा नेतृत्व में निहित है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, सामाजिक सेवा, रोजगार, स्वास्थ्य जागरूकता और संगठन को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने आधुनिक शिक्षा, युवाओं के कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज तभी प्रगति करेगा जब हर परिवार शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनी प्राथमिकता बनाएगा। स्नेह मिलन सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी संवाद, सहयोग और विश्वास को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बना। बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं ने समाज सेवा और विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प दोहराया। आयोजन के अंत में समाज के वरिष्ठजनों ने जिला अध्यक्ष महेंद्र पटेल और पूरी आयोजन समिति को सफल कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज को संगठित रखने का आह्वान किया। सम्मेलन में उपस्थित लोगों ने सामाजिक एकता को बनाए रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

  • सातरवाड़ा नशामुक्ति का ऐतिहासिक संकल्प, भूरिया परिवार बना मिसाल

    की प्रेरणा से रेंन्डड़ी के भूरिया परिवार ने लिया साहसिक फैसला, पूरे कलबी समाज को दिया सामाजिक जागरण का संदेश रेंन्डड़ी ग्राम में आयोजित सामाजिक बैठक एवं भूरिया परिवार का सांकेतिक चित्र। भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) रेंन्डड़ी, जोधपुर (राजस्थान) | 21 जुलाई 2026 सातरवाड़ा नशामुक्ति अभियान की दिशा में राजस्थान के जोधपुर जिले के लूणी पटेल पट्टी स्थित ग्राम रेंन्डड़ी से समाज सुधार की एक प्रेरणादायी पहल सामने आई है। गुरुवाणी की पावन प्रेरणा को आत्मसात करते हुए भूरिया परिवार ने संपूर्ण सातरवाड़ा क्षेत्र को नशामुक्त रखने का ऐतिहासिक और साहसिक संकल्प लिया है। इस निर्णय को समाज के विभिन्न वर्गों ने न केवल सराहा, बल्कि इसे पूरे कलबी समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण बताया। 17 जुलाई 2026 को स्वर्गीय भेराराम जी पुत्र स्व. बुद्धराम जी भूरिया के देवलोक गमन के पश्चात आयोजित सामाजिक बैठक में परिवार ने शोक की घड़ी को समाजहित के संकल्प में बदल दिया। परिवार के सदस्यों ने गुरुवाणी को शिरोधार्य करते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण का प्रस्ताव समाज के बंधु-बांधवों, ग्रामवासियों और गिनायतों के समक्ष रखा। उपस्थित सभी लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया। स्वर्गीय भेराराम जी के पुत्र वेनाराम जी, पुनाराम जी, अणदाराम जी तथा भाई दुर्गाराम जी, नेमाराम जी, चेनाराम जी, लुंबाराम जी, भतीजे खिमाराम जी, हाड़मानराम जी, सोनाराम जी, लालाराम जी एवं समस्त भूरिया परिवार ने यह संदेश दिया कि समाज की सच्ची सेवा केवल परंपराओं के निर्वहन तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाना भी उतना ही आवश्यक है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में नशा समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे दौर में किसी परिवार द्वारा सार्वजनिक रूप से नशामुक्ति का संकल्प लेना समाज सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह पहल सामाजिक चेतना, संस्कार और सामूहिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। सामाजिक प्रबुद्धजनों ने कहा कि पावन तीर्थ धाम शिकारपुरा स्थित गुरु समाधि और गुरुगादी से प्राप्त मार्गदर्शन को समाज जीवन में अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने वीर युवाओं, पंच-पटेलों, महिला शक्ति, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, पत्रकारों एवं जनप्रतिनिधियों से सामाजिक जन-जागरण के ऐसे अभियानों को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि स्वर्गीय भेराराम जी को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति दें। साथ ही गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान से प्रार्थना की गई कि वे परिवार को समाज सेवा, जन-जागरण और गुरुवाणी के अनुरूप सत्कर्मों का मार्ग प्रशस्त करने की शक्ति प्रदान करें। भूरिया परिवार का यह निर्णय केवल एक पारिवारिक संकल्प नहीं, बल्कि पूरे सातरवाड़ा और कलबी समाज के लिए सामाजिक परिवर्तन की नई शुरुआत माना जा रहा है। समाज के अनेक गणमान्य लोगों ने इस पहल को भविष्य के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए अन्य गांवों और परिवारों से भी इसी प्रकार नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प लेने की अपील की।

  • मदुरै में उमड़ा आस्था का सैलाब, साध्वी आज्ञानिधि श्रीजी का भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश

    भक्ति, श्रद्धा और जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने किया भावभीना स्वागत, धर्मसभा में संयम, तप और आत्मकल्याण का मिला संदेश साध्वी आज्ञानिधि श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-6 के चातुर्मास मंगल प्रवेश की शोभायात्रा एवं धर्मसभा। भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मदुरै (तमिलनाडु) | 20 जुलाई 2026 मदुरै में सोमवार को धार्मिक आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब साध्वी आज्ञानिधि श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-6 का चातुर्मास मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। श्री साँचा सुमतिनाथ भगवान राजेन्द्र सुरी ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित "सदगुरू समर्पणम चातुर्मास–2026" के इस ऐतिहासिक आयोजन ने पूरे शहर को धर्ममय वातावरण से सराबोर कर दिया। प्रातःकाल आराधना भवन से गाजे-बाजे, मंगलध्वनि और जयघोष के साथ निकली भव्य शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं के मन में अद्भुत उत्साह भर दिया। शोभायात्रा सोना-चाँदी बाजार, श्री साँचा सुमतिनाथ मंदिर और साउथ मासी स्ट्रीट से होती हुई यतीन्द्र भवन पहुँची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने अक्षत, श्रीफल और पुष्पवर्षा कर साध्वी भगवंत का भावपूर्ण स्वागत किया। जयकारों और मंगलगान से वातावरण भक्तिमय बना रहा। यतीन्द्र भवन में आयोजित विशाल धर्मसभा में साध्वी आज्ञानिधि श्रीजी म.सा. ने धर्म, संयम, तप, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश देते हुए कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से स्वाध्याय, तपस्या, सेवा और धार्मिक आराधना में अधिकाधिक भाग लेने का आह्वान किया। उनके प्रेरणादायी और ओजस्वी प्रवचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। बड़ी संख्या में उपस्थित महिला-पुरुष, युवा और बच्चों ने धर्मसभा में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। शोभायात्रा और पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं में श्री महावीर जैन सेवा मंडल, विभिन्न महिला मंडलों, बालिका मंडलों तथा श्री आदिनाथ जैन मंडल का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन विजयराज गुलेच्छा ने किया। चातुर्मास मंगल प्रवेश के अवसर पर श्री सुमतिनाथ जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट की ओर से दिनेश सालेचा तथा श्री सुमतिनाथ नया मंदिर ट्रस्ट की ओर से सुमेरमल गुलेच्छा, डूंगरचंद गुलेच्छा, हड़मान जैन सहित अनेक वक्ताओं ने साध्वी भगवंत का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर ट्रस्टी मीठालाल संखलेचा, बगदावरमल हरण, शिवराज भंडारी, मनोहरमल, रतनचंद संखलेचा, मूलचंद श्रीश्रीमाल, मीठालाल सालेचा, सुरेशकुमार पटियाट, सुरेशकुमार कटारिया सिंघवी, रमेशकुमार संखलेचा, नरपतराज बागरेचा, खीमराज पटवारी, दाड़मचंद जैन, हेमराज शाहजी, लकमीचंद बाफना, विजयराज गुलेच्छा, पदमराज भंडारी, राजेन्द्र चौपड़ा, पी. रमेशकुमार संखलेचा, किशोर संखलेचा, हरीश गुलेच्छा और हितेश सदानी सहित अनेक गणमान्य श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में चेन्नई, विजापुर, मायावरम, इंदौर और तिरुचिरापल्ली सहित कई शहरों से आए श्रद्धालुओं ने भी सहभागिता निभाई। आयोजन के समापन पर ट्रस्ट ने सभी सहयोगी संस्थाओं, कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए चातुर्मास के दौरान आयोजित धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान किया।

  • मेरठ सांप कांड: पत्नी-प्रेमी पर पति की हत्या की साजिश का आरोप, चार आरोपी गिरफ्तार

    नींद की गोलियां, करैत सांप और बीमा राशि की कथित साजिश; पुलिस जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य भारतार्थ खबर | संवाददाता: अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) मेरठ (उत्तर प्रदेश) | 20 जुलाई, 2026 मेरठ सांप कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हस्तिनापुर थाना क्षेत्र में एक स्कूल संचालक की मौत के मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी, उसके कथित प्रेमी और दो कथित सपेरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह मामला सुनियोजित हत्या की साजिश का प्रतीत होता है। आरोप है कि मृतक की पत्नी ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई और घटना को सांप के प्राकृतिक डसने का रूप देने का प्रयास किया। मृतक की पहचान अतुल कुमार (32) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पत्नी दामिनी (30) ने कथित तौर पर पहले पति को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर पिलाईं। इसके बाद देर रात कथित प्रेमी और दो सपेरों की मदद से कमरे में करैत सांप छोड़ा गया। पुलिस का कहना है कि करैत भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है और इसी के डसने से अतुल की मौत हुई। घटना के बाद पत्नी ने कथित रूप से दूसरे कमरे में जाकर रात बिताई। सुबह उसने परिजनों को बताया कि उसके पति को सांप ने काट लिया है। कमरे में सांप मौजूद होने और मृतक के पैर पर डसने जैसे निशान मिलने से शुरुआती तौर पर मामला प्राकृतिक दुर्घटना जैसा प्रतीत हुआ। हालांकि, पुलिस जांच के दौरान घटनाक्रम में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे संदेह गहरा गया। पूछताछ में पत्नी के बयानों में कथित विरोधाभास पाए गए। उसने बताया कि गर्मी के कारण वह बेटे के साथ दूसरे कमरे में सो गई थी। इस बयान के बाद परिजनों ने भी आशंका जताई और पुलिस से विस्तृत जांच की मांग की। जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की पड़ताल की, जिसमें पत्नी और एक वैन चालक तुषार पायला के बीच लगातार संपर्क होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने तुषार को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने कथित साजिश की जानकारी दी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने यह योजना इसलिए बनाई क्योंकि मृतक उनके रिश्ते में बाधा बन रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि मृतक ने लगभग 20 लाख रुपये का जीवन बीमा कराया हुआ था। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद बीमा राशि प्राप्त कर दोनों नई जिंदगी शुरू करने की कथित योजना बना रहे थे। आरोप है कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए दो सपेरों को 5 लाख रुपये देने की बात तय की गई थी। पुलिस ने मामले में पत्नी, उसके कथित प्रेमी और दोनों कथित सपेरों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की विवेचना जारी है और पुलिस वैज्ञानिक एवं फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र तैयार कर रही है। यह उल्लेखनीय है कि आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर ही होगा। अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है। राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें। Support करें – Like | Share | Follow। ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • बेंगलुरु में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश, 5 किमी अगवानी में उमड़ा जनसैलाब

    11 हाथी, 31 अश्व, 21 बग्गियाँ, 108 फीट धर्मध्वज और हजारों श्रद्धालुओं की भव्य शोभायात्रा बनी आस्था, संस्कृति और अनुशासन का अनुपम संगम भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 20 जुलाई, 2026। बेंगलुरु में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज का मंगल प्रवेश रविवार, 19 जुलाई 2026 को राजधानी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का ऐतिहासिक उत्सव बन गया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ससंघ के नगर आगमन पर सकल जैन समाज ने ऐसा भव्य स्वागत किया, जिसने श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। महादेवपुरा गौशाला से श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर, तुबरहल्ली तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी मंगल अगवानी में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे शहर को धर्ममय वातावरण में रंग दिया। शोभायात्रा का प्रत्येक दृश्य श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत कर रहा था। मार्ग भर श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों, मंगलाचरण, जयघोष और पुष्पवर्षा से मुनि संघ का स्वागत किया। कई स्थानों पर आकर्षक रंगोलियाँ बनाई गईं, जिनसे संपूर्ण मार्ग आध्यात्मिक आभा से आलोकित दिखाई दिया। इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विराट व्यवस्था और सांस्कृतिक वैभव रहा। शोभायात्रा में 11 हाथी, 31 अश्व, 21 सुसज्जित बग्गियाँ, ढोल-ताशा एवं बैंड दल, पारंपरिक झाँकियाँ, सैकड़ों जैन धर्मध्वज तथा 108 फीट लंबी तीन विशाल धर्मध्वजाएँ श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। इन धर्मध्वजाओं ने पूरे मार्ग में अहिंसा, संयम और भारतीय संस्कृति का संदेश प्रसारित किया। कार्यक्रम में समाज के युवाओं और मातृशक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक कर्नाटक वेशभूषा में सजे युवा, विभिन्न रंगों की पारंपरिक साड़ियों में सुसज्जित महिला मंडल, आरती थाल, मंगल कलश, चँवर तथा अष्टमंगल धारण किए श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा को अत्यंत दिव्य स्वरूप प्रदान किया। केरल की प्रसिद्ध कथकली सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को अखिल भारतीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना दिया। शोभायात्रा में 32 चँवरधारी सेवकों एवं 11 निष्कलंक देवों की उपस्थिति ने धार्मिक गरिमा को और अधिक प्रभावशाली बनाया। पूरे मार्ग में श्रद्धालु "वीर सागर महाराज की जय" और "जय जिनेन्द्र" के उद्घोष करते हुए धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते रहे। हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद पूरे आयोजन में अनुशासन और उत्कृष्ट प्रबंधन की मिसाल देखने को मिली। वीर सेवा दल, स्वयंसेवकों और पुलिस प्रशासन ने पूरे मार्ग में यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखा। व्हाइटफ़ील्ड के एसीपी श्री सुधाकर ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, जबकि स्थानीय पुलिस ने यातायात संचालन में सराहनीय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में बेंगलुरु सेंट्रल के सांसद श्री पी.सी. मोहन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मुनि श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक एकजुटता की सराहना की। इस अवसर पर श्री महेश काला, श्री अनिल सेठी, श्री आदिश्वर जी, श्री आदिनाथ नरडे, श्री मनोज वेल सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन जबलपुर से पधारे श्री सुधांशु जैन ने किया। श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने भगवान संभवनाथ के दर्शन एवं वंदन किए। इसके बाद संघ का भव्य पंडाल में मंगल प्रवेश हुआ। गोम्मटेश बाहुबली की थीम पर सुसज्जित विशाल मंच तथा श्रद्धालुओं से खचाखच भरा पंडाल आयोजन की भव्यता का सजीव प्रमाण बना। स्वागत समारोह में मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री राकेश बरया ने समाज, स्वयंसेवकों एवं आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की एकता, सेवा और संस्कारों का विराट उत्सव है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के सान्निध्य में आयोजित होने वाले प्रवचनों, स्वाध्याय, धर्मचर्चा एवं अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रमों में नियमित सहभागिता का संकल्प लिया। समाज के वरिष्ठजनों ने इसे बेंगलुरु के धार्मिक इतिहास की एक अविस्मरणीय घटना बताया। धर्म, अनुशासन, संस्कृति और सेवा का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करने वाला यह ऐतिहासिक मंगल प्रवेश आने वाले वर्षों तक बेंगलुरु की धार्मिक स्मृतियों में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। आयोजन समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी। श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर, तुबरहल्ली। प्रत्यक्ष आयोजन विवरण। अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है। राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें। Support करें – Like | Share | Follow। ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • आधुनिक हिंदी काव्यधारा-1 का भव्य लोकार्पण, देशभर के 11 रचनाकार एक मंच पर

    आभासी साहित्यिक परिचर्चा में हिंदी साहित्य के विस्तार, विश्वविद्यालयों तक पुस्तक पहुंचाने और नए काव्य संग्रहों पर बनी सहमति भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली/बेंगलुरु | 20 जुलाई, 2026 आधुनिक हिंदी काव्यधारा-1 का भव्य आभासी लोकार्पण और साहित्यिक परिचर्चा रविवार, 19 जुलाई 2026 को गूगल मीट के माध्यम से अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम हिंदी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। कार्यक्रम में न केवल पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण हुआ, बल्कि हिंदी साहित्य के भविष्य, पुस्तक के व्यापक प्रचार-प्रसार और इसे विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीर मंथन किया गया। इस बहुचर्चित काव्य संग्रह के संपादक डॉ. सुनील परिट (कर्नाटक) एवं सह-संपादक डॉ. बी. जे. पटेल 'ब्रिजेश' (गुजरात) ने देशभर के 11 चयनित रचनाकारों की उत्कृष्ट रचनाओं को एक ही मंच पर संकलित कर हिंदी साहित्य को एक अनमोल साहित्यिक धरोहर प्रदान की है। पुस्तक में समकालीन विषयों, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और जीवन दर्शन पर आधारित 90 कविताओं का समावेश किया गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुनील परिट द्वारा सभी साहित्यकारों एवं अतिथियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। इसके बाद पुस्तक की विशेषताओं, संपादन प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। सह-संपादक डॉ. बी. जे. पटेल 'ब्रिजेश' ने पुस्तक के सेटअप, प्रूफ रीडिंग तथा संपादन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि यह पुस्तक विभिन्न विश्वविद्यालयों की हिंदी अभ्यास समितियों तक पहुंचती है और भविष्य में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनती है, तो यह हिंदी साहित्य के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। कार्यक्रम में शामिल सभी रचनाकारों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। श्री कृष्ण कुमार गुप्ता ने विद्यालयों एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तक इस पुस्तक को पहुंचाने का सुझाव दिया, जबकि श्री गंगा प्रसाद यादव 'आत्रेय' ने अपने प्रभावशाली कविता पाठ से कार्यक्रम को साहित्यिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया। स्वास्थ्य कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित न हो सके डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई एवं डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' के शुभकामना संदेशों का वाचन डॉ. बी. जे. पटेल 'ब्रिजेश' ने किया। डॉ. शारदा प्रसाद ने प्रूफ रीडिंग के अनुभव साझा करते हुए पुस्तक को अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री चंद्र किशोर चौधरी ने इस साझा साहित्यिक यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए विश्वविद्यालयों में पुस्तक भेजने की पहल का समर्थन किया। वहीं डॉ. सुरेंद्र लाल साहू 'निर्विकार' ने सुझाव दिया कि संपादक मंडल स्वयं विश्वविद्यालयों से संपर्क स्थापित करे। उन्होंने आगामी 26 जनवरी 2027 तक "देशभक्ति" विषय पर एक नए काव्य संग्रह के प्रकाशन का प्रस्ताव भी रखा, जिसे सभी साहित्यकारों ने सकारात्मक रूप से सराहा। डॉ. अमीना पट्टेवाले (सौदागर) ने अपनी रचनाओं के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे अपने साहित्यिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी रचनाकारों ने एक स्वर में इस काव्य संग्रह को हिंदी साहित्य की समृद्धि की दिशा में सार्थक प्रयास बताया। संपादक मंडल ने विश्वास दिलाया कि पुस्तक के प्रचार-प्रसार, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों एवं साहित्यिक संस्थानों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों एवं रचनाकारों को डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। लगभग दो घंटे तक चले इस साहित्यिक आयोजन का समापन डॉ. सुनील परिट के आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। आयोजन समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी। संपादक मंडल एवं कार्यक्रम में साझा किए गए विवरण। अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है। राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें। Support करें – Like | Share | Follow। ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

  • जंतर-मंतर स्याहीकांड: महिला ने खुद लिया जिम्मेदारी का दावा, पुलिस की पुष्टि बाकी

    सोशल मीडिया पस्ट में खुद को ताया 'कट्टर हिंदू', घटना के पीछे धार्मिक भावनाएं आहत होने का किया दावा; दिल्ली पुलिस जांच में जुटी भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)नई दिल्ली | 20 जुलाई, 2026 दिल्ली के जंतर-मंतर स्याहीकांड ने अब नया मोड़ ले लिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद एक महिला ने सोशल मीडिया पर स्वयं इस घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अभी तक न तो महिला के दावे की पुष्टि की है और न ही उसके द्वारा बताए गए कारणों को आधिकारिक रूप से सही ठहराया है। मामले की जांच जारी है। सोशल मीडिया पर स्वयं को बरखा त्रेहन बताने वाली महिला ने दावा किया कि CJP के मंच से भगवान श्रीराम का अपमान किया गया था और उस दौरान अभिजीत दीपके हंस रहे थे। महिला ने स्वयं को "कट्टर हिंदू" बताते हुए लिखा कि उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और इसी कारण उसने विरोध स्वरूप स्याही फेंकी। महिला ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उसने यह कदम भगवान श्रीराम के सम्मान की भावना से उठाया और उसे अपने इस कार्य पर गर्व है। पोस्ट के अंत में उसने "जय हिंद" और "जय श्रीराम" के नारे भी लिखे। घटना के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग महिला के दावे का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर सवाल उठा रहा है। इस बीच पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और घटना के वास्तविक कारणों, वीडियो फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि सोशल मीडिया पोस्ट वास्तव में उसी महिला का है जिसने स्याही फेंकी थी। न ही पुलिस ने घटना के पीछे बताए गए धार्मिक कारणों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष केवल जांच पूरी होने और पुलिस के आधिकारिक बयान के बाद ही सामने आएगा। इसलिए किसी भी दावे या सोशल मीडिया पोस्ट को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना आवश्यक है। सोशल मीडिया पोस्ट में खुद को बताया 'कट्टर हिंदू', घटना के पीछे धार्मिक भावनाएं आहत होने का किया दावा; दिल्ली पुलिस जांच में जुटी

  • FIFA World Cup 2026 Final: स्पेन बना विश्व विजेता, अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर रचा इतिहास

    फेरन टोरेस के निर्णायक गोल से स्पेन ने दूसरी बार जीता फीफा विश्व कप, एक्स्ट्रा टाइम में टूटा अर्जेंटीना का सपना। FIFA World Cup 2026 Final में ट्रॉफी के साथ जश्न मनाती स्पेन की टीम। भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) न्यूजर्सी (अमेरिका) | 20 जुलाई, 2026। FIFA World Cup 2026 Final फुटबॉल प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। अमेरिका के न्यूजर्सी स्टेडियम में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में फेरन टोरेस द्वारा किया गया शानदार गोल स्पेन की जीत का आधार बना। इस ऐतिहासिक जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद फिर से विश्व फुटबॉल की सबसे बड़ी ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। मैच की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक तेवर दिखाए। युवा स्टार लामिन यमाल ने शुरुआती मिनटों में ही अर्जेंटीना की रक्षा पंक्ति पर लगातार दबाव बनाया। दानी ओल्मो और यमाल की शानदार साझेदारी ने कई अवसर बनाए, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर ने बेहतरीन बचाव करते हुए शुरुआती गोल नहीं होने दिया। पहले हाफ में स्पेन ने लगभग 63 प्रतिशत गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण किए। वहीं अर्जेंटीना ने काउंटर अटैक के जरिए वापसी की कोशिश की, लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर प्रयास को विफल कर दिया। 41वें मिनट में लिसैंड्रो मार्टिनेज को येलो कार्ड भी दिखाया गया। दूसरे हाफ में अर्जेंटीना ने कुछ समय तक मैच में वापसी की कोशिश की, लेकिन स्पेन ने लगातार दबाव बनाए रखा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कोई गोल नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया। 106वें मिनट में आया निर्णायक पल। स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरन टोरेस ने शानदार मूव को गोल में बदलते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद अर्जेंटीना ने बराबरी करने के लिए पूरी ताकत लगा दी, लेकिन स्पेन के अनुशासित डिफेंस ने कोई मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ स्पेन ने न केवल दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की, बल्कि 1966 में अर्जेंटीना से मिली हार का प्रतीकात्मक हिसाब भी बराबर कर लिया। पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने संतुलित खेल, बेहतरीन टीमवर्क और अनुशासित रणनीति का शानदार प्रदर्शन किया। विश्वभर के फुटबॉल प्रशंसकों ने स्पेन की इस ऐतिहासिक जीत का स्वागत किया। खिलाड़ियों और समर्थकों ने ट्रॉफी जीतने के बाद मैदान पर उत्साहपूर्वक जश्न मनाया। यह फाइनल मुकाबला आने वाले वर्षों तक फीफा विश्व कप के सबसे यादगार मुकाबलों में गिना जाएगा। FIFA World Cup 2026 Final ने साबित कर दिया कि अनुशासन, आक्रामक रणनीति और टीमवर्क किसी भी बड़े मुकाबले की जीत की कुंजी होते हैं। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व फुटबॉल के शिखर पर दोबारा अपना नाम दर्ज करा दिया। अब आपकी बारी! क्या स्पेन की यह टीम हाल के वर्षों की सबसे मजबूत विश्व चैंपियन है? क्या फेरन टोरेस फाइनल के सबसे बड़े हीरो साबित हुए? इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है। राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार। सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए भारतार्थ खबर से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें। Support करें – Like | Share | Follow। ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे। ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।

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