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बेंगलुरु में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश, 5 किमी अगवानी में उमड़ा जनसैलाब

  • Writer: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 2 days ago
  • 3 min read

11 हाथी, 31 अश्व, 21 बग्गियाँ, 108 फीट धर्मध्वज और हजारों श्रद्धालुओं की भव्य शोभायात्रा बनी आस्था, संस्कृति और अनुशासन का अनुपम संगम

Shirtless men in a Hindu procession stand beneath red-and-gold canopies, faces solemn in a crowded outdoor setting.

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 20 जुलाई, 2026। बेंगलुरु में मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज का मंगल प्रवेश रविवार, 19 जुलाई 2026 को राजधानी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का ऐतिहासिक उत्सव बन गया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ससंघ के नगर आगमन पर सकल जैन समाज ने ऐसा भव्य स्वागत किया, जिसने श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। महादेवपुरा गौशाला से श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर, तुबरहल्ली तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी मंगल अगवानी में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे शहर को धर्ममय वातावरण में रंग दिया।


Group of women in pink sarees march outdoors, smiling and waving rainbow flags and Hindi placards in a festive city procession.

शोभायात्रा का प्रत्येक दृश्य श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत कर रहा था। मार्ग भर श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों, मंगलाचरण, जयघोष और पुष्पवर्षा से मुनि संघ का स्वागत किया। कई स्थानों पर आकर्षक रंगोलियाँ बनाई गईं, जिनसे संपूर्ण मार्ग आध्यात्मिक आभा से आलोकित दिखाई दिया।


इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विराट व्यवस्था और सांस्कृतिक वैभव रहा। शोभायात्रा में 11 हाथी, 31 अश्व, 21 सुसज्जित बग्गियाँ, ढोल-ताशा एवं बैंड दल, पारंपरिक झाँकियाँ, सैकड़ों जैन धर्मध्वज तथा 108 फीट लंबी तीन विशाल धर्मध्वजाएँ श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। इन धर्मध्वजाओं ने पूरे मार्ग में अहिंसा, संयम और भारतीय संस्कृति का संदेश प्रसारित किया।


Men in white and saffron dance and drum in a street procession, waving rainbow flags; festive, joyful crowd outdoors.

कार्यक्रम में समाज के युवाओं और मातृशक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक कर्नाटक वेशभूषा में सजे युवा, विभिन्न रंगों की पारंपरिक साड़ियों में सुसज्जित महिला मंडल, आरती थाल, मंगल कलश, चँवर तथा अष्टमंगल धारण किए श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा को अत्यंत दिव्य स्वरूप प्रदान किया। केरल की प्रसिद्ध कथकली सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को अखिल भारतीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना दिया।


शोभायात्रा में 32 चँवरधारी सेवकों एवं 11 निष्कलंक देवों की उपस्थिति ने धार्मिक गरिमा को और अधिक प्रभावशाली बनाया। पूरे मार्ग में श्रद्धालु "वीर सागर महाराज की जय" और "जय जिनेन्द्र" के उद्घोष करते हुए धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते रहे।


हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद पूरे आयोजन में अनुशासन और उत्कृष्ट प्रबंधन की मिसाल देखने को मिली। वीर सेवा दल, स्वयंसेवकों और पुलिस प्रशासन ने पूरे मार्ग में यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखा। व्हाइटफ़ील्ड के एसीपी श्री सुधाकर ने स्वयं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, जबकि स्थानीय पुलिस ने यातायात संचालन में सराहनीय भूमिका निभाई।


Men light a ceremonial brass lamp on a stage draped in purple and white, with a formal gathering of smiling attendees

कार्यक्रम में बेंगलुरु सेंट्रल के सांसद श्री पी.सी. मोहन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मुनि श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक एकजुटता की सराहना की। इस अवसर पर श्री महेश काला, श्री अनिल सेठी, श्री आदिश्वर जी, श्री आदिनाथ नरडे, श्री मनोज वेल सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन जबलपुर से पधारे श्री सुधांशु जैन ने किया।


श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने भगवान संभवनाथ के दर्शन एवं वंदन किए। इसके बाद संघ का भव्य पंडाल में मंगल प्रवेश हुआ। गोम्मटेश बाहुबली की थीम पर सुसज्जित विशाल मंच तथा श्रद्धालुओं से खचाखच भरा पंडाल आयोजन की भव्यता का सजीव प्रमाण बना।


Bare-chested monks sit on stage facing a huge seated crowd in a pink-lit tented hall, with festive drapes and chandeliers.

स्वागत समारोह में मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री राकेश बरया ने समाज, स्वयंसेवकों एवं आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की एकता, सेवा और संस्कारों का विराट उत्सव है।


इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के सान्निध्य में आयोजित होने वाले प्रवचनों, स्वाध्याय, धर्मचर्चा एवं अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रमों में नियमित सहभागिता का संकल्प लिया। समाज के वरिष्ठजनों ने इसे बेंगलुरु के धार्मिक इतिहास की एक अविस्मरणीय घटना बताया।


धर्म, अनुशासन, संस्कृति और सेवा का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करने वाला यह ऐतिहासिक मंगल प्रवेश आने वाले वर्षों तक बेंगलुरु की धार्मिक स्मृतियों में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।


आयोजन समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी। श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर, तुबरहल्ली। प्रत्यक्ष आयोजन विवरण।


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