आधुनिक हिंदी काव्यधारा-1 का भव्य लोकार्पण, देशभर के 11 रचनाकार एक मंच पर
- धन्नाराम चौधरी

- 20 जुल॰
- 3 मिनट पठन
आभासी साहित्यिक परिचर्चा में हिंदी साहित्य के विस्तार, विश्वविद्यालयों तक पुस्तक पहुंचाने और नए काव्य संग्रहों पर बनी सहमति

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली/बेंगलुरु | 20 जुलाई, 2026 आधुनिक हिंदी काव्यधारा-1 का भव्य आभासी लोकार्पण और साहित्यिक परिचर्चा रविवार, 19 जुलाई 2026 को गूगल मीट के माध्यम से अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम हिंदी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। कार्यक्रम में न केवल पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण हुआ, बल्कि हिंदी साहित्य के भविष्य, पुस्तक के व्यापक प्रचार-प्रसार और इसे विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीर मंथन किया गया।
इस बहुचर्चित काव्य संग्रह के संपादक डॉ. सुनील परिट (कर्नाटक) एवं सह-संपादक डॉ. बी. जे. पटेल 'ब्रिजेश' (गुजरात) ने देशभर के 11 चयनित रचनाकारों की उत्कृष्ट रचनाओं को एक ही मंच पर संकलित कर हिंदी साहित्य को एक अनमोल साहित्यिक धरोहर प्रदान की है। पुस्तक में समकालीन विषयों, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और जीवन दर्शन पर आधारित 90 कविताओं का समावेश किया गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुनील परिट द्वारा सभी साहित्यकारों एवं अतिथियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुआ। इसके बाद पुस्तक की विशेषताओं, संपादन प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। सह-संपादक डॉ. बी. जे. पटेल 'ब्रिजेश' ने पुस्तक के सेटअप, प्रूफ रीडिंग तथा संपादन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि यह पुस्तक विभिन्न विश्वविद्यालयों की हिंदी अभ्यास समितियों तक पहुंचती है और भविष्य में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनती है, तो यह हिंदी साहित्य के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
कार्यक्रम में शामिल सभी रचनाकारों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। श्री कृष्ण कुमार गुप्ता ने विद्यालयों एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तक इस पुस्तक को पहुंचाने का सुझाव दिया, जबकि श्री गंगा प्रसाद यादव 'आत्रेय' ने अपने प्रभावशाली कविता पाठ से कार्यक्रम को साहित्यिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
स्वास्थ्य कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित न हो सके डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई एवं डॉ. विनय कुमार सिंघल 'निश्छल' के शुभकामना संदेशों का वाचन डॉ. बी. जे. पटेल 'ब्रिजेश' ने किया। डॉ. शारदा प्रसाद ने प्रूफ रीडिंग के अनुभव साझा करते हुए पुस्तक को अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री चंद्र किशोर चौधरी ने इस साझा साहित्यिक यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए विश्वविद्यालयों में पुस्तक भेजने की पहल का समर्थन किया। वहीं डॉ. सुरेंद्र लाल साहू 'निर्विकार' ने सुझाव दिया कि संपादक मंडल स्वयं विश्वविद्यालयों से संपर्क स्थापित करे। उन्होंने आगामी 26 जनवरी 2027 तक "देशभक्ति" विषय पर एक नए काव्य संग्रह के प्रकाशन का प्रस्ताव भी रखा, जिसे सभी साहित्यकारों ने सकारात्मक रूप से सराहा।
डॉ. अमीना पट्टेवाले (सौदागर) ने अपनी रचनाओं के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे अपने साहित्यिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी रचनाकारों ने एक स्वर में इस काव्य संग्रह को हिंदी साहित्य की समृद्धि की दिशा में सार्थक प्रयास बताया।
संपादक मंडल ने विश्वास दिलाया कि पुस्तक के प्रचार-प्रसार, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों एवं साहित्यिक संस्थानों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों एवं रचनाकारों को डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। लगभग दो घंटे तक चले इस साहित्यिक आयोजन का समापन डॉ. सुनील परिट के आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।
आयोजन समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी। संपादक मंडल एवं कार्यक्रम में साझा किए गए विवरण।
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