top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

इस साइट पर खोजें

1908किसी भी खाली खोज के साथ परिणाम मिले

  • गुरु पूर्णिमा पर गुरुदेव भक्ति से गूंजा श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी

    गुरु महिमा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हुआ आयोजन, श्रद्धालुओं ने धर्म-संयम के मार्ग पर चलने का लिया संकल्प भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 31 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गई। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट के तत्वावधान में तथा श्री जिनदत्त कुशल सूरी जैन सेवा एवं संगीत मंडल, बसवनगुडी के सहयोग से आयोजित गुरुदेव भक्ति महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरुदेव के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरे आयोजन के दौरान आराधना भवन भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक उल्लास से गुंजायमान रहा। यह भव्य आयोजन परम पूज्य गुरुदेव श्री मलयप्रभ सागर जी म.सा. तथा परम पूज्य साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी म.सा. आदि ठाणा की पावन प्रेरणा से सम्पन्न हुआ। गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु के उपकारों का स्मरण करते हुए धर्म, संयम, सेवा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मंडल के अध्यक्ष ललित डाकलिया ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक संस्कारों को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम के दौरान संगीत मंडल के सनी रांका, नितेश बोहरा, सुरेश कोठारी, जीतू कवाड, पारस पारख, महावीर पारख, कुनाल मरलेचा, रेखा लोढ़ा और मनन बोहरा ने गुरु महिमा से ओत-प्रोत मधुर स्तवन, भजन एवं संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। इन भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया और पूरा वातावरण गुरु भक्ति के रंग में रंग गया। महामंत्री धर्मेन्द्र संकलेचा सहित उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु ही जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं। गुरु के बताए सिद्धांतों का पालन कर ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आज्ञापालन आत्मिक उन्नति तथा समाज के नैतिक विकास का आधार है। आयोजन की सफलता में मंडल के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों एवं सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के श्रीचरणों में वंदन कर विश्व शांति, धर्म प्रभावना और समस्त जीवों के कल्याण की मंगलकामना की।।

  • कावेरी पानी विवाद पर KRS में गरजे बी.वाई. विजयेंद्र, बोले— किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी

    KRS बांध पर भाजपा का जोरदार प्रदर्शन, सरकार पर किसानों की अनदेखी और राजनीतिक स्वार्थ का आरोप भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मांड्या (कर्नाटक) | 31 जुलाई, 2026 मांड्या। कावेरी पानी विवाद एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में आ गया है। के.आर.एस. (कृष्णराज सागर) बांध पर आयोजित भाजपा के विरोध प्रदर्शन में कर्नाटक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने और तमिलनाडु को पानी छोड़ने के निर्णय को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी और सरकार की कथित किसान-विरोधी नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी। अपने संबोधन में विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा संभावित सूखे के संकेत दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने समय रहते कोई ठोस एहतियाती कदम नहीं उठाए। उनका कहना था कि सरकार का पूरा ध्यान सत्ता की राजनीति और आंतरिक खींचतान में उलझा रहा, जबकि किसान भविष्य की सिंचाई और फसल सुरक्षा को लेकर चिंता में डूबे रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री और पूर्व सिंचाई मंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि कावेरी जल विवाद की पूरी जानकारी होने के बावजूद किसानों के हितों की पर्याप्त पैरवी नहीं की गई। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को पानी छोड़ने से पहले राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रयास नहीं किए गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि तमिलनाडु की ओर से औपचारिक मांग आने से पहले ही लगभग 3.5 टीएमसी पानी छोड़ा जा चुका था। ऐसे में उस समय सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाना सरकार की गंभीर चूक थी। उन्होंने वर्तमान में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि यह स्थिति "गांव लुटने के बाद किले के दरवाजे बंद करने" जैसी प्रतीत होती है। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता किसानों की सुरक्षा नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्पष्ट रूप से किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की घोषणा करते हैं, तो भाजपा सर्वदलीय बैठक में सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार है। उनका कहना था कि किसानों की आजीविका और सिंचाई के अधिकार से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि भाजपा एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। पार्टी भविष्य में भी कावेरी जल विवाद सहित किसानों से जुड़े सभी मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी और राज्य सरकार को जवाबदेह बनाएगी। अपने संबोधन के दौरान विजयेंद्र ने कन्नमबडी कट्टे (KRS बांध) के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मैसूर के तत्कालीन शासकों ने किसानों के हितों और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से इस ऐतिहासिक परियोजना के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनका आरोप था कि वर्तमान सरकार उस ऐतिहासिक विरासत की भावना के अनुरूप किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। कावेरी जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में मानसून, जल भंडारण और सिंचाई की स्थिति को लेकर किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच राजनीतिक दल भी अपने-अपने स्तर पर सरकार और विपक्ष की भूमिका को लेकर आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

  • 5 अगस्त से पहले दिल्ली में बढ़ी रणनीतिक हलचल, उच्चस्तरीय बैठकों ने बढ़ाई चर्चा

    NSA अजीत डोभाल की संसद में मौजूदगी और लगातार सुरक्षा बैठकों के बीच कई सवाल, सरकार ने एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 31 जुलाई, 2026 नई दिल्ली। 5 अगस्त सुरक्षा बैठक और राष्ट्रीय राजधानी में लगातार हो रही उच्चस्तरीय बैठकों ने राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। संसद सत्र के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की संसद परिसर में मौजूदगी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक तथा कई केंद्रीय मंत्रियों की उच्चस्तरीय चर्चा के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या केंद्र सरकार किसी महत्वपूर्ण रणनीतिक, सुरक्षा या नीतिगत निर्णय की तैयारी कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इन बैठकों के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संसद में जारी राजनीतिक गतिविधियों के समानांतर सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार बैठकों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। आधिकारिक सूत्रों ने NSA अजीत डोभाल की संसद यात्रा को नियमित सरकारी कार्य बताया है, लेकिन बैठक के विषय को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संसद परिसर में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शीर्ष पदाधिकारी शामिल रहे। बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं होने के कारण इसके उद्देश्य को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक और रणनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। भारतार्थ खबर इन कयासों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। इसी बीच हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों, कानून-व्यवस्था और संवेदनशील सुरक्षा परिस्थितियों के मद्देनज़र केंद्र सरकार लगातार समीक्षा बैठकों का आयोजन कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा और खुफिया समन्वय जैसे विषयों पर नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होती है। दिल्ली पुलिस में हालिया प्रशासनिक बदलावों के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर चर्चा तेज हुई है। राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रही है। संसद, सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रपति भवन, दूतावासों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा को देखते हुए समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य, साइबर खतरों, सीमा सुरक्षा, संवेदनशील आयोजनों और आंतरिक सुरक्षा संबंधी विषयों को देखते हुए शीर्ष स्तर पर समीक्षा होना असामान्य नहीं है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावों—जैसे कि "5 अगस्त को बड़ा ऑपरेशन", "गेम पलटने वाली गुप्त कार्रवाई" या "विशेष मिशन"—की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसी प्रकार सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी या विदेशी फंडिंग से जुड़े कई दावे भी विभिन्न रिपोर्टों और चर्चाओं का हिस्सा हैं। यदि किसी मामले में जांच एजेंसियां कार्रवाई करती हैं तो उसका आधार संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक दस्तावेज होते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना आवश्यक है। सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अधिकांश उच्चस्तरीय बैठकों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता। इसका उद्देश्य संवेदनशील सूचनाओं की गोपनीयता बनाए रखना होता है। इसलिए किसी भी बैठक की सीमित जानकारी के आधार पर बड़े निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता। फिलहाल देश की नजर केंद्र सरकार की आगामी घोषणाओं और संसद की कार्यवाही पर बनी हुई है। यदि सरकार किसी महत्वपूर्ण नीति, सुरक्षा निर्णय या प्रशासनिक कदम की घोषणा करती है तो उसकी आधिकारिक जानकारी संबंधित मंत्रालयों द्वारा सार्वजनिक की जाएगी।

  • LPG New Rules: गैस सिलेंडर बुकिंग में ये 4 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, जानिए जरूरी नियम

    OTP, e-KYC, समय से पहले बुकिंग और PNG-LPG नियमों को लेकर सतर्क रहें, नहीं तो डिलीवरी और सब्सिडी पर पड़ सकता है असर भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 31 जुलाई, 2026 नई दिल्ली। LPG New Rules और गैस सिलेंडर बुकिंग से जुड़े नियमों को लेकर उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। यदि आप इंडेन (Indane), भारत गैस (Bharat Gas) या एचपी गैस (HP Gas) के ग्राहक हैं, तो सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी, OTP सत्यापन (DAC), आधार e-KYC और PNG-LPG कनेक्शन से जुड़े नियमों की जानकारी रखना जरूरी है। छोटी-सी लापरवाही भी डिलीवरी में देरी, सब्सिडी रुकने या अन्य प्रशासनिक समस्याओं का कारण बन सकती है। गैस कंपनियां अब उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए Delivery Authentication Code (DAC) प्रणाली का उपयोग कर रही हैं। ऑनलाइन बुकिंग के बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा गया OTP डिलीवरी के समय आवश्यक होता है। यदि सही DAC साझा नहीं किया जाता, तो कई मामलों में डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाती। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे OTP केवल अधिकृत डिलीवरी कर्मी को ही दें। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू समय से पहले रिफिल बुकिंग का है। तेल विपणन कंपनियां कुछ परिस्थितियों में न्यूनतम अंतराल (Lock-in Period) के आधार पर अगली बुकिंग स्वीकार करती हैं। इसलिए निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले बुकिंग करने पर अनुरोध अस्वीकार हो सकता है। उपभोक्ताओं को अपने वितरक या संबंधित गैस कंपनी की शर्तें अवश्य देखनी चाहिए। यदि आप प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी हैं, तो आधार आधारित e-KYC समय पर पूरा करना अत्यंत आवश्यक है। e-KYC अधूरी रहने पर DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से मिलने वाली LPG सब्सिडी प्रभावित हो सकती है। तेल कंपनियां समय-समय पर उपभोक्ताओं को e-KYC अपडेट करने की सलाह देती रहती हैं। एक और महत्वपूर्ण बदलाव PNG (Piped Natural Gas) और LPG कनेक्शन से जुड़ा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं ने PNG कनेक्शन ले लिया है, वे निर्धारित अवधि के भीतर LPG कनेक्शन समाप्त करने या भविष्य में पुनर्स्थापना के लिए Transfer Voucher का विकल्प चुन सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो भविष्य में गैर-PNG क्षेत्र में स्थानांतरित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस उपभोक्ताओं को किसी भी वायरल सोशल मीडिया संदेश पर भरोसा करने के बजाय अपनी गैस कंपनी या सरकारी सूचना पर ही विश्वास करना चाहिए। समय-समय पर नियमों में संशोधन होते रहते हैं, इसलिए आधिकारिक सूचना सबसे विश्वसनीय स्रोत होती है।

  • विद्या सुरक्षा योजना: विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री, शिक्षा-संस्कार पर दिया जोर

    महेंद्र मुणोत बोले— बच्चे राष्ट्र का भविष्य, कोई भी नौनिहाल प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 31 जुलाई, 2026 शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने की आधारशिला है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए मारुति मेडिकल्स द्वारा संचालित 'विद्या सुरक्षा योजना' के तहत बेंगलुरु के विजयनगर स्थित भारतीय संस्कृत विद्यापीठ शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर समाजसेवी महेंद्र मुणोत ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। शिक्षण सामग्री प्राप्त कर विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना तथा समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना था। अपने प्रेरणादायी संबोधन में महेंद्र मुणोत ने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ श्रेष्ठ संस्कार दिए जाएं तो वे भविष्य में समाज और देश के लिए आदर्श नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज का यह नैतिक दायित्व है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव या अन्य किसी कारण से प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता, सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का भी विकास होना चाहिए। यही मूल्य राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ऐसे अभियान शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने मारुति मेडिकल्स की इस सामाजिक पहल को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि यदि अधिक संस्थाएं इसी प्रकार आगे आएं तो अनेक जरूरतमंद विद्यार्थियों का भविष्य संवर सकता है। विद्यार्थियों ने शिक्षण सामग्री प्राप्त करने के बाद आयोजनकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। अभिभावकों ने भी इस प्रकार के सामाजिक सहयोग को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षा में सहयोग ही वास्तविक समाज सेवा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और संस्कार का समन्वय ही विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकता है। ऐसे कार्यक्रम समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों में आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं। सामाजिक संगठनों, उद्योगों और सेवाभावी संस्थाओं की भागीदारी से शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव है।

  • Subconscious Mind परिवर्तन का अचूक उपाय: मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने बताया आत्मपरिवर्तन का आध्यात्मिक सूत्र

    Psychology of Transformation' प्रवचन श्रृंखला में जैन दर्शन और आधुनिक मनोविज्ञान का अद्भुत समन्वय, सकारात्मक सोच और मानसिक शांति का दिया व्यावहारिक मार्ग भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 31 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में हर व्यक्ति मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और जीवन में स्थायी परिवर्तन की तलाश कर रहा है। ऐसे समय में Subconscious Mind परिवर्तन का विषय लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन रहा है। तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर (इनर रिफ्लेक्शन सेंटर) में आयोजित "Psychology of Transformation" प्रवचन श्रृंखला के अंतर्गत पूज्य मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने "Subconscious Mind को Transform करने का अचूक उपाय" विषय पर अत्यंत प्रेरणादायी, वैज्ञानिक और जीवनोपयोगी प्रवचन प्रदान किया। अपने उद्बोधन में मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य का अवचेतन मन (Subconscious Mind) उसके व्यक्तित्व, विचार, व्यवहार, भावनाओं और जीवन के लगभग प्रत्येक निर्णय को प्रभावित करता है। यदि व्यक्ति अपने अवचेतन मन में सकारात्मक संस्कारों का निर्माण कर ले, तो उसके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक परिवर्तन बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि अपने भीतर की सोच, दृष्टिकोण और संस्कारों में परिवर्तन से प्रारंभ होता है। मुनि श्री ने कहा कि अधिकांश लोग जीवन की समस्याओं का समाधान बाहर खोजते हैं, जबकि समाधान उनके अपने मन के भीतर छिपा होता है। आत्मचिंतन, संयम, स्वाध्याय, ध्यान और सकारात्मक चिंतन जैसी आध्यात्मिक साधनाएं व्यक्ति के अवचेतन मन को शुद्ध एवं सशक्त बनाती हैं। जब मन शुद्ध होता है, तब जीवन की दिशा भी स्वतः बदलने लगती है। उन्होंने जैन दर्शन के शाश्वत सिद्धांतों को आधुनिक मनोविज्ञान के साथ जोड़ते हुए बताया कि आज बढ़ते तनाव, चिंता, अवसाद, असंतोष और भावनात्मक संघर्षों से मुक्ति का सबसे प्रभावी मार्ग आध्यात्मिकता है। व्यक्ति यदि प्रतिदिन अपने विचारों का निरीक्षण करे, नकारात्मक भावनाओं को त्यागे और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाए, तो उसका अवचेतन मन नई ऊर्जा और नई दिशा प्राप्त करता है। प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने सरल उदाहरणों के माध्यम से बताया कि मनुष्य का वर्तमान जीवन उसके पूर्व संस्कारों और वर्तमान विचारों का परिणाम है। इसलिए यदि भविष्य बदलना है तो सबसे पहले अपने विचारों और मानसिक आदतों को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचार केवल प्रेरक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन की वास्तविक शक्ति हैं। "Psychology of Transformation" प्रवचन श्रृंखला का उद्देश्य जैन दर्शन को सरल, वैज्ञानिक और व्यवहारिक रूप में समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है, ताकि लोग केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास और आत्मजागरण का अनुभव कर सकें। प्रवचन के अंत में मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से अपने विचारों, भावनाओं और संस्कारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने Subconscious Mind को सही दिशा में प्रशिक्षित कर लेता है, उसके लिए सफलता, आत्मविकास और आंतरिक शांति का मार्ग स्वतः खुल जाता है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचन को अत्यंत प्रेरणादायी बताते हुए इसे जीवन परिवर्तन का प्रभावी संदेश बताया।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–10)

    माधव के नाम अंतिम पत्र ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह क्या एक पिता का प्रेम शब्दों से बड़ा हो सकता है? पढ़िए "मौन दान" का सबसे भावुक अध्याय। विशेष नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। वर्षों से सीलबंद पत्र खुला, पिता के मौन ने बेटे के जीवन को नई दिशा दे दी शाम ढल चुकी थी। पंचायत भवन के बरामदे में रखा पीतल का दीपक शांत लौ के साथ जल रहा था। उसकी रोशनी के बीच एक सीलबंद लिफ़ाफ़ा मेज़ पर रखा था। उसी लिफ़ाफ़े पर लिखा था— "मेरे बेटे माधव के लिए।" माधव कुछ क्षण तक उसे निहारता रहा। उसके हाथ काँप रहे थे। दयानाथ त्रिपाठी ने धीमे स्वर में कहा— "इसे खोलने का अधिकार केवल तुम्हारा है।" माधव ने काँपते हाथों से मुहर तोड़ी। अंदर चार पन्नों का एक पत्र था। उसने पहला पन्ना खोला। शिवनारायण ने लिखा था— "प्रिय माधव, जब तुम यह पत्र पढ़ रहे होगे, तब मैं इस संसार में नहीं रहूँगा। हो सकता है तुम मुझसे नाराज़ हो। हो सकता है तुम मुझे पहचानते भी न हो। और यह भी हो सकता है कि तुम मुझे कभी पिता मान ही न पाओ। मैं तुम्हें दोष नहीं दूँगा... क्योंकि सबसे बड़ा दोषी मैं स्वयं हूँ।" बरामदे में गहरा सन्नाटा छा गया। माधव की आँखें नम हो चुकी थीं। उसने आगे पढ़ना जारी रखा— "जिस दिन नदी ने हमें अलग किया, उसी दिन मेरा जीवन दो हिस्सों में बँट गया।" "एक हिस्सा दुनिया के सामने जीता रहा..." "दूसरा हिस्सा हर दिन तुम्हें खोजता रहा।" पत्र में आगे लिखा था— "मैंने तुम्हें दूर से कई बार देखा।" "तुम्हारे स्कूल का पहला दिन..." "तुम्हारी पहली साइकिल..." "तुम्हारी नौकरी..." "तुम्हारी शादी..." "हर खुशी देखी, लेकिन हर बार एक कदम आगे बढ़ाकर फिर रुक गया।" "मुझे डर था कि कहीं मेरा सच तुम्हारे जीवन की शांति न छीन ले।" माधव अब आँसू रोक नहीं पा रहा था। बरामदे में बैठे लोगों की आँखें भी भर आई थीं। पत्र में आगे लिखा था— "तुम सोचोगे कि मैंने तुम्हें अपना नाम क्यों नहीं दिया।" "बेटा... नाम देने से पहले मैंने तुम्हें जीवन देना चुना।" "जिस परिवार ने तुम्हें अपनाया, उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि तुम उनके अपने नहीं हो।" "यदि मैं तुम्हें वापस ले आता, तो शायद चार ज़िंदगियाँ टूट जातीं।" "मैंने अपना सुख खोया... लेकिन तुम्हारी मुस्कान बची रही।" "आज भी मुझे अपने निर्णय पर गर्व नहीं... पर पछतावा भी नहीं।" पत्र के अंतिम पन्ने पर शिवनारायण की तीन अंतिम इच्छाएँ लिखी थीं— पहली इच्छा "यदि कभी मेरे लिए रोना, तो केवल उतनी देर रोना जितनी देर किसी दीपक की लौ काँपती है। उसके बाद किसी ज़रूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना।" दूसरी इच्छा "मेरी कोई प्रतिमा मत बनवाना। यदि लोग मेरा नाम भूल जाएँ और मेरा विचार याद रखें, तो वही मेरी सबसे बड़ी जीत होगी।" तीसरी और अंतिम इच्छा "यदि कभी तुम मुझे सचमुच अपना पिता मानो, तो हर वर्ष कम-से-कम एक ऐसे बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाना, जिसके सपने केवल गरीबी की वजह से रुक रहे हों। उस दिन मुझे लगेगा कि मेरा जीवन अधूरा नहीं था।" पत्र समाप्त हो चुका था। बरामदे में केवल सिसकियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। माधव धीरे-धीरे उठा। वह शिवनारायण की तस्वीर के सामने पहुँचा। कुछ पल तक निहारता रहा। फिर भर्राए स्वर में बोला— "बाबा... मैंने आपको बहुत देर से पाया..." "...लेकिन अब कभी खोने नहीं दूँगा।" उसने गाँव वालों की ओर देखा। आँखों में आँसू थे, लेकिन आवाज़ दृढ़ थी। "आज से इस गाँव में कोई बच्चा केवल पैसों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं छोड़ेगा।" "यह मेरी नहीं..." "...मेरे पिता की पहली विरासत होगी।" तभी दयानाथ ने अपने बैग से एक छोटी-सी पुरानी चाबी निकाली। उन्होंने माधव के हाथों में रखते हुए कहा— "शिवनारायण ने तुम्हारे लिए एक और जिम्मेदारी छोड़ी है।" "यह किसी तिजोरी की नहीं..." "...उस पुराने विद्यालय के बंद पुस्तकालय की चाबी है, जिसे उन्होंने वर्षों पहले अपने पैसों से बनवाया था।" माधव ने चाबी को दोनों हाथों से थाम लिया। उसे लगा... आज पहली बार उसे कोई संपत्ति नहीं... एक उत्तरदायित्व मिला है। क्रमशः... अगले और अंतिम भाग में पढ़िए — "विरासत" क्या शिवनारायण का सपना पूरा होगा? क्या "मौन दान" एक व्यक्ति की कहानी से आगे बढ़कर पूरे गाँव का आंदोलन बन जाएगा? केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक उपन्यास — मौन दान सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01, भाग 02, भाग 03, भाग 4, भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • गुरु पूर्णिमा पर गादीपति महंत दयाराम जी महाराज का आह्वान: समग्र समाज विकास की गुरु दक्षिणा दें

    शिकारपुरा तीर्थधाम से कलबी समाज को सात ऐतिहासिक संकल्पों का संदेश, गुरुवाणी अपनाकर राष्ट्र व समाज निर्माण का आह्वान भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (जोधपुर) | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा 2026 के पावन अवसर पर जोधपुर जिले की लूणी तहसील स्थित पवित्र शिकारपुरा तीर्थधाम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशाल गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। देशभर से पहुंचे गुरु भक्तों, समाजबंधुओं और श्रद्धालुओं ने परम आराध्य श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय की मंगलकामना की। इस अवसर पर वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज ने गुरु दक्षिणा के रूप में धन-दौलत नहीं, बल्कि समग्र समाज विकास, संस्कार, नशामुक्ति और गुरुवाणी को जीवन में अपनाने का संकल्प मांगा। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में महंत श्री दयाराम जी महाराज ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सच्चे गुरु की पहचान और उनके बताए मार्ग पर चलना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मसंयम और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि यदि समाज गुरुवाणी के सिद्धांतों को जीवन में उतार ले तो परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों का समग्र विकास संभव है। इसी भावना के साथ उन्होंने संपूर्ण कलबी समाज सहित सभी समाजों से सात महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आह्वान किया। महंत श्री ने पहला संकल्प संस्कारयुक्त शिक्षा का दिलाते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति से युक्त शिक्षा दिलाए। दूसरा संकल्प नशामुक्त समाज का रहा, जिसमें युवाओं को नशे से दूर रखने तथा सामाजिक आयोजनों को भी नशामुक्त बनाने का संदेश दिया गया। तीसरे संकल्प में उन्होंने मृत्युभोज (ओसर-मौसर) जैसी सामाजिक कुरीतियों का त्याग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्त कर शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। चौथे संकल्प के रूप में उन्होंने "एक समाज–श्रेष्ठ समाज" की अवधारणा को मजबूत करने का आह्वान किया तथा वर्ष 2027 की जातीय जनगणना में अपनी जाति "कलबी" अंकित कराने की अपील की, ताकि समाज की सशक्त पहचान स्थापित हो सके। पांचवें संकल्प में परिवार और समाज में सहयोग एवं सहकारिता की भावना विकसित करने पर बल दिया गया। छठे संकल्प के तहत देशभर के सभी कलबी सामाजिक संगठनों में समन्वय, एकरूपता और निस्वार्थ सामाजिक सेवा को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। सातवें एवं अंतिम संकल्प में महंत श्री ने समाज को दिखावटी बाबाओं, अंधविश्वास, नशे, साइबर अपराध, सामाजिक बुराइयों और असामाजिक तत्वों से दूर रहने की प्रेरणा देते हुए गुरुवाणी के आदर्शों—सरलता, शालीनता, सज्जनता, सहकारिता और आध्यात्मिकता—को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और सत्संग का लाभ प्राप्त किया तथा समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रार्थना की। कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और सामाजिक जागरूकता से ओत-प्रोत रहा।

  • महेंद्र मुणोत ने साध्वी सुमंगल प्रभा से लिया आशीर्वाद, गौसेवा व शिक्षा सेवा की सराहना

    चातुर्मास प्रवचन के दौरान साध्वीजी ने स्वास्थ्य लाभ का दिया आशीर्वाद, जैन संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। महेंद्र मुणोत ने विजयनगर स्थानक भवन में चातुर्मास हेतु विराजित प्रवर्तनी प्रभावीका प्रतिभा पुंज साध्वी रत्न पूज्य डॉ. श्री सुमंगल प्रभा महाराज साहब आदि ठाणा-5 के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान आध्यात्मिक वातावरण, सेवा, संस्कार और समाजहित की प्रेरणाओं से ओत-प्रोत यह भेंट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। चातुर्मास के पावन अवसर पर साध्वी श्री सुमंगल प्रभा महाराज साहब ने समाजसेवी महेंद्र मुणोत द्वारा गौसेवा, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। उन्होंने मुणोत के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए मंगलकामनाएं करते हुए विशेष आशीर्वाद प्रदान किया। साध्वीजी ने कहा कि सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बनता है। इस अवसर पर महेंद्र मुणोत ने भावुक होकर कहा कि उनके लिए यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि उनका जन्म जैन परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्हें अहिंसा, सेवा, संयम और संस्कारों की अमूल्य विरासत मिली, जिसने उनके व्यक्तित्व का निर्माण किया। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा विद्या नगरी राणावास स्थित मरुधर केसरी शिक्षण संस्थान में हुई, जहां केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं बल्कि जैन धर्म के नैतिक एवं आध्यात्मिक संस्कार भी प्रदान किए गए। यही संस्कार आज उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। महेंद्र मुणोत ने कहा कि महान जैन संत मरुधर केसरी मिश्रीमल महाराज उनके आदर्श हैं। उनके जीवन दर्शन "कम खाना, गम खाना, नम जाना" को उन्होंने अपने जीवन में अपनाया, जिससे उनके सोचने, जीने और समाज के प्रति कार्य करने की दिशा पूरी तरह बदल गई। उन्होंने कहा कि जैन धर्म केवल किसी जाति या संप्रदाय का नाम नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ चरित्र, अनुशासन, करुणा, सहिष्णुता और मानवीय संस्कारों का जीवन दर्शन है। प्रत्येक व्यक्ति यदि इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार ले तो समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता का वातावरण स्वतः स्थापित हो सकता है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उन्हें जैन होने पर गर्व है और वे जीवनभर सेवा एवं संस्कारों के मार्ग पर चलते रहेंगे। इस अवसर पर विजयनगर जैन संघ के सहमंत्री सुनील लोढ़ा तथा प्रचार-प्रसार समिति के सदस्य रिखब लोढ़ा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने साध्वीजी के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक भागीदारी का संकल्प लिया।

  • बेंगलुरु में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर भव्य सत्संग, श्रद्धा और भक्ति से गुंजायमान हुआ

    बाबूलाल भायल के निवास पर आयोजित सत्संग में गुरु महिमा, आध्यात्मिक चिंतन और मानव सेवा का दिया गया प्रेरक संदेश गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर कम्मनहल्ली, बेंगलुरु में आयोजित सत्संग का सामूहिक दृश्य। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर बेंगलुरु के कम्मनहल्ली स्थित बाबूलाल भायल के निवास पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत भव्य सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की तथा आध्यात्मिक जीवन को अपनाने का संकल्प लिया। सत्संग के दौरान गुरु की महिमा, भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत तथा नैतिक मूल्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सफल, सार्थक और समाजोपयोगी बना सकता है। कार्यक्रम का वातावरण भक्ति गीतों, गुरु वंदना और आध्यात्मिक प्रवचनों से पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना कर विश्व शांति, समाज में सद्भाव और मानव कल्याण की कामना की। सत्संग के दौरान सेवा, संस्कार, संयम और परोपकार जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने का संदेश भी दिया गया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे आत्मिक शांति और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी माध्यम बताया। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, सौहार्द और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने भविष्य में भी ऐसे सत्संगों का नियमित आयोजन करने का संकल्प व्यक्त किया।

  • धार्मिक अनुष्ठान के साथ अमरसिंह राजपुरोहित का 13वां चातुर्मास प्रारंभ

    हवन, वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक संकल्प के बीच समाजसेवा, संस्कार और युवा जागरण का दिया प्रेरक संदेश भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। अमरसिंह राजपुरोहित का 13वां चातुर्मास धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक उत्साह के साथ बेंगलुरु में विधिवत प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर राजपुरोहित समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पूजा-अर्चना, हवन, वैदिक मंत्रोच्चार और समाज उत्थान के संकल्प के साथ आयोजित यह समारोह श्रद्धा, सेवा और संस्कारों का प्रेरक संदेश देने वाला रहा। कार्यक्रम की शुरुआत राजपुरोहित समाज के कुलगुरु ब्रह्मलीन संत खेतेश्वर दाता की पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद विद्वान पंडितों के सान्निध्य में शुभ मुहूर्त पर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन संपन्न कराया गया। समाज के वरिष्ठ समाजसेवी अमरसिंह राजपुरोहित ने अपनी धर्मपत्नी के साथ हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और मानव समाज की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। वैदिक मंत्रों की गूंज और सुगंधित हवन सामग्री की आहुतियों से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता के लिए प्रार्थना की। मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए अमरसिंह राजपुरोहित ने कहा कि वे स्वयं संत नहीं हैं, लेकिन पिछले 13 वर्षों से चातुर्मास काल में दो माह तक तप, त्याग, संयम और आध्यात्मिक साधना का संकल्प निभाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा उन्हें ब्रह्मसावित्री सिद्ध पीठ ब्रह्मधाम आसोतरा के गादीपति संत तुलसारामजी महाराज के सान्निध्य से प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है। युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाना, परिवारों में नैतिक मूल्यों को मजबूत करना और समाज को संगठित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अमरसिंह राजपुरोहित ने समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज ने उन्हें सदैव सम्मान और सहयोग दिया। विभिन्न सामाजिक संगठनों में दायित्व निभाते हुए उन्हें समाजसेवा का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने सभी समाजबंधुओं से परिवार और समाज के सामूहिक विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके संस्कारवान और शिक्षित युवा होते हैं। प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने, शिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा सामाजिक एकता बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए। इस अवसर पर अलंद विधायक बी.आर. पाटिल, दयानंद आर. (कोलार), राजपुरोहित समाज कर्नाटक-बेंगलुरु के अध्यक्ष नारायणसिंह राजपुरोहित, महेन्द्रसिंह बोरावड़, सोहनसिंह (हैदराबाद), दातारसिंह (चेन्नई), लक्ष्मणसिंह (हैदराबाद), प्रकाशसिंह (तिरुपति), मोतीसिंह (दावणगेरे) तथा बाबुसिंह नोरवा सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में शिवसिंह राजपुरोहित, नटवरसिंह रियां, शंकरसिंह, गुमानसिंह, रामसिंह नरसाणा, किशोरसिंह बिकरलाई, ओमसिंह, कानसिंह, देवीसिंह सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। अंत में दीपकसिंह एवं रविसिंह ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। चातुर्मास अवधि के दौरान प्रतिदिन सत्संग, धार्मिक आराधना, तपस्या, भजन, धर्मचर्चा और धार्मिक ग्रंथों के पाठ सहित अनेक आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहेगी।

  • वीर शासन जयंती पर मुनि श्री वीर सागर जी महाराज का प्रेरक संदेश: "जो स्वयं को जीतकर लोककल्याण में समर्पित हो, वही सच्चा शासक"

    ज्ञानोदय परिसर में विशेष धर्मसभा, भगवान महावीर के आत्मविजय, अहिंसा और लोककल्याण आधारित शासन का बताया वास्तविक स्वरूप भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। वीर शासन जयंती के पावन अवसर पर ज्ञानोदय परिसर (इनर रिफ्लेक्शन सेंटर), तुबरहल्ली में परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में आयोजित विशेष धर्मसभा श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणादायी विचारों से ओत-प्रोत रही। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के शासन, आत्मविजय और लोककल्याण के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया। वीर शासन जयंती का यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना, नैतिक नेतृत्व और मानवीय मूल्यों का प्रेरक केंद्र बन गया। अपने उद्बोधन में मुनि श्री वीर सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर का शासन किसी राजसत्ता, भय, हिंसा या बल पर आधारित नहीं था, बल्कि आत्मसंयम, अहिंसा, करुणा, निस्वार्थ सेवा और लोककल्याण पर आधारित था। उन्होंने कहा कि सामान्य शासक दूसरों पर अधिकार स्थापित करके शासन करते हैं, जबकि भगवान महावीर ने अपने भीतर के अहंकार, लोभ, क्रोध और भय पर विजय प्राप्त कर समस्त जीवों के हृदय में स्थान बनाया। यही वास्तविक विजय है और यही सच्चा शासन है। मुनि श्री ने कहा कि ढाई हजार वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भगवान महावीर का जिनशासन आज भी मानवता को सत्य, संयम और मोक्षमार्ग की दिशा दिखा रहा है। यह शासन किसी सीमित भूभाग का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के नैतिक और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक नेतृत्व वह नहीं है जो लोगों को भयभीत कर अपनी बात मनवाए, बल्कि वह है जिसे लोग उसके श्रेष्ठ आचरण, त्याग, सेवा और करुणा के कारण स्वेच्छा से स्वीकार करें। परिवार, समाज, संस्था या राष्ट्र—हर स्तर पर नेतृत्व करने वाले व्यक्ति को पहले स्वयं को अनुशासित बनाना होगा। आत्मविजय के बिना नेतृत्व अधूरा है। धर्मसभा में मुनि श्री ने तीर्थंकर भगवान और सामान्य केवलियों के बीच का अंतर भी सरल शब्दों में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि केवल आत्मकल्याण प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। तीर्थंकर भगवान सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए धर्म, देव, गुरु और शास्त्र की ऐसी परंपरा स्थापित करते हैं, जिससे अनंत जीवों को मोक्षमार्ग प्राप्त होता है। भगवान महावीर की दिव्यध्वनि और उनके द्वारा स्थापित जिनशासन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुनि श्री ने कहा कि वीर शासन जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का अवसर है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अहिंसा, आत्मसंयम, सत्य, निस्वार्थ सेवा और परोपकार को अपनाए, तभी भगवान महावीर के शासन की वास्तविक भावना जीवंत रह सकेगी। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच भी यदि व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त कर ले, तो वह स्वयं, परिवार और समाज—तीनों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यही भगवान महावीर के शासन का मूल संदेश है। धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के आदर्शों को जीवन में अपनाने, अहिंसा एवं करुणा का प्रचार-प्रसार करने तथा समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

bottom of page