कावेरी पानी विवाद पर KRS में गरजे बी.वाई. विजयेंद्र, बोले— किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी
- धन्नाराम चौधरी

- 31 जुल॰
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KRS बांध पर भाजपा का जोरदार प्रदर्शन, सरकार पर किसानों की अनदेखी और राजनीतिक स्वार्थ का आरोप
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मांड्या (कर्नाटक) | 31 जुलाई, 2026 मांड्या। कावेरी पानी विवाद एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में आ गया है। के.आर.एस. (कृष्णराज सागर) बांध पर आयोजित भाजपा के विरोध प्रदर्शन में कर्नाटक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने और तमिलनाडु को पानी छोड़ने के निर्णय को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी और सरकार की कथित किसान-विरोधी नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी।
अपने संबोधन में विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा संभावित सूखे के संकेत दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने समय रहते कोई ठोस एहतियाती कदम नहीं उठाए। उनका कहना था कि सरकार का पूरा ध्यान सत्ता की राजनीति और आंतरिक खींचतान में उलझा रहा, जबकि किसान भविष्य की सिंचाई और फसल सुरक्षा को लेकर चिंता में डूबे रहे।
उन्होंने मुख्यमंत्री और पूर्व सिंचाई मंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि कावेरी जल विवाद की पूरी जानकारी होने के बावजूद किसानों के हितों की पर्याप्त पैरवी नहीं की गई। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु को पानी छोड़ने से पहले राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रयास नहीं किए गए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि तमिलनाडु की ओर से औपचारिक मांग आने से पहले ही लगभग 3.5 टीएमसी पानी छोड़ा जा चुका था। ऐसे में उस समय सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाना सरकार की गंभीर चूक थी। उन्होंने वर्तमान में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि यह स्थिति "गांव लुटने के बाद किले के दरवाजे बंद करने" जैसी प्रतीत होती है।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता किसानों की सुरक्षा नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्पष्ट रूप से किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की घोषणा करते हैं, तो भाजपा सर्वदलीय बैठक में सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार है। उनका कहना था कि किसानों की आजीविका और सिंचाई के अधिकार से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दोहराया कि भाजपा एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। पार्टी भविष्य में भी कावेरी जल विवाद सहित किसानों से जुड़े सभी मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी और राज्य सरकार को जवाबदेह बनाएगी।
अपने संबोधन के दौरान विजयेंद्र ने कन्नमबडी कट्टे (KRS बांध) के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मैसूर के तत्कालीन शासकों ने किसानों के हितों और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से इस ऐतिहासिक परियोजना के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनका आरोप था कि वर्तमान सरकार उस ऐतिहासिक विरासत की भावना के अनुरूप किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है।
कावेरी जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में मानसून, जल भंडारण और सिंचाई की स्थिति को लेकर किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच राजनीतिक दल भी अपने-अपने स्तर पर सरकार और विपक्ष की भूमिका को लेकर आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
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