विद्या सुरक्षा योजना: विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री, शिक्षा-संस्कार पर दिया जोर
- धन्नाराम चौधरी

- 31 जुल॰
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महेंद्र मुणोत बोले— बच्चे राष्ट्र का भविष्य, कोई भी नौनिहाल प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 31 जुलाई, 2026 शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने की आधारशिला है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए मारुति मेडिकल्स द्वारा संचालित 'विद्या सुरक्षा योजना' के तहत बेंगलुरु के विजयनगर स्थित भारतीय संस्कृत विद्यापीठ शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर समाजसेवी महेंद्र मुणोत ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। शिक्षण सामग्री प्राप्त कर विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना तथा समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना था।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में महेंद्र मुणोत ने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ श्रेष्ठ संस्कार दिए जाएं तो वे भविष्य में समाज और देश के लिए आदर्श नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज का यह नैतिक दायित्व है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव या अन्य किसी कारण से प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता, सेवा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का भी विकास होना चाहिए। यही मूल्य राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ऐसे अभियान शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने मारुति मेडिकल्स की इस सामाजिक पहल को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि यदि अधिक संस्थाएं इसी प्रकार आगे आएं तो अनेक जरूरतमंद विद्यार्थियों का भविष्य संवर सकता है।
विद्यार्थियों ने शिक्षण सामग्री प्राप्त करने के बाद आयोजनकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। अभिभावकों ने भी इस प्रकार के सामाजिक सहयोग को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षा में सहयोग ही वास्तविक समाज सेवा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और संस्कार का समन्वय ही विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकता है। ऐसे कार्यक्रम समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों में आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं। सामाजिक संगठनों, उद्योगों और सेवाभावी संस्थाओं की भागीदारी से शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव है।
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