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गुरु पूर्णिमा पर गादीपति महंत दयाराम जी महाराज का आह्वान: समग्र समाज विकास की गुरु दक्षिणा दें

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 30 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Two devotees pray before a garlanded deity in a colorful temple shrine, one holding a thali of offerings and lamps.

शिकारपुरा तीर्थधाम से कलबी समाज को सात ऐतिहासिक संकल्पों का संदेश, गुरुवाणी अपनाकर राष्ट्र व समाज निर्माण का आह्वान

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (जोधपुर) | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा 2026 के पावन अवसर पर जोधपुर जिले की लूणी तहसील स्थित पवित्र शिकारपुरा तीर्थधाम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशाल गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। देशभर से पहुंचे गुरु भक्तों, समाजबंधुओं और श्रद्धालुओं ने परम आराध्य श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय की मंगलकामना की। इस अवसर पर वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज ने गुरु दक्षिणा के रूप में धन-दौलत नहीं, बल्कि समग्र समाज विकास, संस्कार, नशामुक्ति और गुरुवाणी को जीवन में अपनाने का संकल्प मांगा।


अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में महंत श्री दयाराम जी महाराज ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सच्चे गुरु की पहचान और उनके बताए मार्ग पर चलना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मसंयम और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का भी अवसर है।


Large crowd of people in white robes and caps seated outdoors at night under bright lights in a park-like area.

उन्होंने कहा कि यदि समाज गुरुवाणी के सिद्धांतों को जीवन में उतार ले तो परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों का समग्र विकास संभव है। इसी भावना के साथ उन्होंने संपूर्ण कलबी समाज सहित सभी समाजों से सात महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आह्वान किया।


महंत श्री ने पहला संकल्प संस्कारयुक्त शिक्षा का दिलाते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति से युक्त शिक्षा दिलाए। दूसरा संकल्प नशामुक्त समाज का रहा, जिसमें युवाओं को नशे से दूर रखने तथा सामाजिक आयोजनों को भी नशामुक्त बनाने का संदेश दिया गया।


तीसरे संकल्प में उन्होंने मृत्युभोज (ओसर-मौसर) जैसी सामाजिक कुरीतियों का त्याग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्त कर शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।


Women in colorful saris raise hands behind a rail at a covered pavilion; men in white stand at right, with 8:33 AM on screen.

चौथे संकल्प के रूप में उन्होंने "एक समाज–श्रेष्ठ समाज" की अवधारणा को मजबूत करने का आह्वान किया तथा वर्ष 2027 की जातीय जनगणना में अपनी जाति "कलबी" अंकित कराने की अपील की, ताकि समाज की सशक्त पहचान स्थापित हो सके।


पांचवें संकल्प में परिवार और समाज में सहयोग एवं सहकारिता की भावना विकसित करने पर बल दिया गया। छठे संकल्प के तहत देशभर के सभी कलबी सामाजिक संगठनों में समन्वय, एकरूपता और निस्वार्थ सामाजिक सेवा को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।


सातवें एवं अंतिम संकल्प में महंत श्री ने समाज को दिखावटी बाबाओं, अंधविश्वास, नशे, साइबर अपराध, सामाजिक बुराइयों और असामाजिक तत्वों से दूर रहने की प्रेरणा देते हुए गुरुवाणी के आदर्शों—सरलता, शालीनता, सज्जनता, सहकारिता और आध्यात्मिकता—को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।


गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और सत्संग का लाभ प्राप्त किया तथा समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रार्थना की। कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और सामाजिक जागरूकता से ओत-प्रोत रहा।

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