महेंद्र मुणोत ने साध्वी सुमंगल प्रभा से लिया आशीर्वाद, गौसेवा व शिक्षा सेवा की सराहना
- धन्नाराम चौधरी

- 30 जुल॰
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चातुर्मास प्रवचन के दौरान साध्वीजी ने स्वास्थ्य लाभ का दिया आशीर्वाद, जैन संस्कारों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। महेंद्र मुणोत ने विजयनगर स्थानक भवन में चातुर्मास हेतु विराजित प्रवर्तनी प्रभावीका प्रतिभा पुंज साध्वी रत्न पूज्य डॉ. श्री सुमंगल प्रभा महाराज साहब आदि ठाणा-5 के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान आध्यात्मिक वातावरण, सेवा, संस्कार और समाजहित की प्रेरणाओं से ओत-प्रोत यह भेंट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।
चातुर्मास के पावन अवसर पर साध्वी श्री सुमंगल प्रभा महाराज साहब ने समाजसेवी महेंद्र मुणोत द्वारा गौसेवा, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। उन्होंने मुणोत के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए मंगलकामनाएं करते हुए विशेष आशीर्वाद प्रदान किया। साध्वीजी ने कहा कि सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बनता है।
इस अवसर पर महेंद्र मुणोत ने भावुक होकर कहा कि उनके लिए यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि उनका जन्म जैन परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्हें अहिंसा, सेवा, संयम और संस्कारों की अमूल्य विरासत मिली, जिसने उनके व्यक्तित्व का निर्माण किया।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा विद्या नगरी राणावास स्थित मरुधर केसरी शिक्षण संस्थान में हुई, जहां केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं बल्कि जैन धर्म के नैतिक एवं आध्यात्मिक संस्कार भी प्रदान किए गए। यही संस्कार आज उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
महेंद्र मुणोत ने कहा कि महान जैन संत मरुधर केसरी मिश्रीमल महाराज उनके आदर्श हैं। उनके जीवन दर्शन "कम खाना, गम खाना, नम जाना" को उन्होंने अपने जीवन में अपनाया, जिससे उनके सोचने, जीने और समाज के प्रति कार्य करने की दिशा पूरी तरह बदल गई।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म केवल किसी जाति या संप्रदाय का नाम नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ चरित्र, अनुशासन, करुणा, सहिष्णुता और मानवीय संस्कारों का जीवन दर्शन है। प्रत्येक व्यक्ति यदि इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार ले तो समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता का वातावरण स्वतः स्थापित हो सकता है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उन्हें जैन होने पर गर्व है और वे जीवनभर सेवा एवं संस्कारों के मार्ग पर चलते रहेंगे।
इस अवसर पर विजयनगर जैन संघ के सहमंत्री सुनील लोढ़ा तथा प्रचार-प्रसार समिति के सदस्य रिखब लोढ़ा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने साध्वीजी के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक भागीदारी का संकल्प लिया।
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