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धार्मिक अनुष्ठान के साथ अमरसिंह राजपुरोहित का 13वां चातुर्मास प्रारंभ

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 30 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Seven men pose indoors against a yellow wall as elders garland a smiling man in a festive honor ceremony.

हवन, वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक संकल्प के बीच समाजसेवा, संस्कार और युवा जागरण का दिया प्रेरक संदेश

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 30 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। अमरसिंह राजपुरोहित का 13वां चातुर्मास धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक उत्साह के साथ बेंगलुरु में विधिवत प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर राजपुरोहित समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पूजा-अर्चना, हवन, वैदिक मंत्रोच्चार और समाज उत्थान के संकल्प के साथ आयोजित यह समारोह श्रद्धा, सेवा और संस्कारों का प्रेरक संदेश देने वाला रहा।


कार्यक्रम की शुरुआत राजपुरोहित समाज के कुलगुरु ब्रह्मलीन संत खेतेश्वर दाता की पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद विद्वान पंडितों के सान्निध्य में शुभ मुहूर्त पर वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन संपन्न कराया गया। समाज के वरिष्ठ समाजसेवी अमरसिंह राजपुरोहित ने अपनी धर्मपत्नी के साथ हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और मानव समाज की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।


वैदिक मंत्रों की गूंज और सुगंधित हवन सामग्री की आहुतियों से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता के लिए प्रार्थना की।


मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए अमरसिंह राजपुरोहित ने कहा कि वे स्वयं संत नहीं हैं, लेकिन पिछले 13 वर्षों से चातुर्मास काल में दो माह तक तप, त्याग, संयम और आध्यात्मिक साधना का संकल्प निभाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रेरणा उन्हें ब्रह्मसावित्री सिद्ध पीठ ब्रह्मधाम आसोतरा के गादीपति संत तुलसारामजी महाराज के सान्निध्य से प्राप्त हुई।


उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा है। युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाना, परिवारों में नैतिक मूल्यों को मजबूत करना और समाज को संगठित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


अमरसिंह राजपुरोहित ने समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज ने उन्हें सदैव सम्मान और सहयोग दिया। विभिन्न सामाजिक संगठनों में दायित्व निभाते हुए उन्हें समाजसेवा का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने सभी समाजबंधुओं से परिवार और समाज के सामूहिक विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।


समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके संस्कारवान और शिक्षित युवा होते हैं। प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने, शिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा सामाजिक एकता बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए।


इस अवसर पर अलंद विधायक बी.आर. पाटिल, दयानंद आर. (कोलार), राजपुरोहित समाज कर्नाटक-बेंगलुरु के अध्यक्ष नारायणसिंह राजपुरोहित, महेन्द्रसिंह बोरावड़, सोहनसिंह (हैदराबाद), दातारसिंह (चेन्नई), लक्ष्मणसिंह (हैदराबाद), प्रकाशसिंह (तिरुपति), मोतीसिंह (दावणगेरे) तथा बाबुसिंह नोरवा सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया।


कार्यक्रम में शिवसिंह राजपुरोहित, नटवरसिंह रियां, शंकरसिंह, गुमानसिंह, रामसिंह नरसाणा, किशोरसिंह बिकरलाई, ओमसिंह, कानसिंह, देवीसिंह सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। अंत में दीपकसिंह एवं रविसिंह ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।


चातुर्मास अवधि के दौरान प्रतिदिन सत्संग, धार्मिक आराधना, तपस्या, भजन, धर्मचर्चा और धार्मिक ग्रंथों के पाठ सहित अनेक आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रहेगी।

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