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OBC पंचायतीराज प्रतिनिधित्व: शालादर्पण-यूडाईस डेटा के आधार पर आरक्षण की मांग तेज

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 30 जुल॰
  • 3 मिनट पठन

Five men stand outside a doorway, center man holding a paper with a logo, all in shirts and glasses, serious expressions.

जालौर में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भैराराम चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, मुख्यमंत्री और आयोग अध्यक्ष से वैज्ञानिक व प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग।


भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जालौर | 29 जुलाई, 2026

जालौर: OBC पंचायतीराज प्रतिनिधित्व को लेकर राजस्थान में नई बहस तेज हो गई है। जालौर में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भैराराम चौधरी के नेतृत्व में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रमुख नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग (पंचायतीराज में जनप्रतिनिधित्व) के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर शिक्षा विभाग के शालादर्पण, पीएसपी पोर्टल एवं भारत सरकार के यूडाईस (UDISE+) डेटा के आधार पर पंचायत राज संस्थाओं में OBC को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई है।


प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि वर्तमान में OBC सर्वे के लिए जनआधार कार्ड को आधार बनाए जाने से वास्तविक आबादी का सही आकलन संभव नहीं है। अनेक परिवारों के जनआधार कार्ड आज भी अधूरे हैं, कई परिवारों के नए सदस्यों के नाम वर्षों से अपडेट नहीं हुए हैं, जबकि ग्रामीण राजस्थान में संयुक्त परिवारों की संख्या अधिक होने के कारण एक परिवार में 10 से 15 सदस्य तक रहते हैं। ऐसे में केवल जनआधार आधारित गणना से OBC की वास्तविक जनसंख्या सामने नहीं आ सकेगी।


ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2014 में भामाशाह कार्ड तथा वर्ष 2018 में जनआधार कार्ड लागू किए गए थे, लेकिन समय पर अद्यतन नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में परिवारों के सदस्य अब भी दर्ज नहीं हैं। वहीं, कई ग्रामीण और शहरी परिवार ऐसे भी हैं जिनके जनआधार कार्ड अभी तक नहीं बने हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आशंका जताई कि ग्रामीण क्षेत्रों की ढाणियों में रहने वाले अनेक किसान परिवार सर्वे से वंचित रह सकते हैं।


ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल OBC परिवारों का सर्वे कर उनकी जनसंख्या का प्रतिशत निर्धारित करना वैज्ञानिक नहीं माना जा सकता। जब तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य एवं अन्य सभी वर्गों की समान रूप से गणना नहीं होगी, तब तक किसी भी वर्ग का वास्तविक प्रतिशत निर्धारित नहीं किया जा सकता।


प्रतिनिधिमंडल ने अपने पक्ष को मजबूत करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकृत आंकड़ों का हवाला दिया। ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2002-03 से संचालित सर्व शिक्षा अभियान तथा वर्ष 2009-10 से लागू शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के कारण राज्य के लगभग प्रत्येक बच्चे का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित हुआ है। वर्तमान में सरकारी विद्यालयों का संपूर्ण रिकॉर्ड शालादर्पण, निजी विद्यालयों का डेटा पीएसपी पोर्टल तथा कक्षा 3 से 12 तक का प्रमाणित वर्गवार डेटा यूडाईस (UDISE+) पोर्टल पर उपलब्ध है।


ज्ञापन में कहा गया कि यह डेटा राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक उपलब्ध होने के कारण इसे सबसे अधिक प्रमाणिक एवं वैज्ञानिक आधार माना जा सकता है। उदाहरण के रूप में जालौर जिले के यूडाईस आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में OBC विद्यार्थियों का नामांकन 52.23 प्रतिशत तथा 2025-26 में 51.64 प्रतिशत दर्ज किया गया है।


प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि शिक्षा विभाग के सचिव से अधिकृत रूप से शालादर्पण, पीएसपी और यूडाईस का वर्गवार डेटा प्राप्त कर उसी के आधार पर पंचायत राज संस्थाओं में वर्गवार आरक्षण का प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि अन्य पिछड़ा वर्ग को वास्तविक जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सके।


ज्ञापन सौंपने वालों में एसबीआई के पूर्व प्रबंधक उम्मेद सुथार, दलपत सिंह आर्य, अंबालाल माली, एडवोकेट ओमप्रकाश चौधरी, एडवोकेट मुकेश कुमार तंवर, जीतू सिंह केशवाना तथा भीमाराम माली सहित अन्य प्रमुख नागरिक शामिल रहे। कारण इसे सबसे अधिक प्रमाणिक एवं वैज्ञानिक आधार माना जा सकता है। उदाहरण के रूप में जालौर जिले के यूडाईस आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में OBC विद्यार्थियों का नामांकन 52.23 प्रतिशत तथा 2025-26 में 51.64 प्रतिशत दर्ज किया गया है।


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