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पतंजलि में विशेष अग्निहोत्र के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव, गुरु परंपरा का दिया प्रेरक संदेश

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 30 जुल॰
  • 2 मिनट पठन


भवरलाल आर्य बोले— गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन को मिलती है सही दिशा, युवाओं से भारतीय संस्कृति और गुरु वंदना अपनाने का आह्वान।

Group in white and colorful clothes sits in prayer around a fire altar indoors, before a Kannada Patanjali banner.

पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक द्वारा हुबली में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं विशेष अग्निहोत्र का दृश्य।


भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक द्वारा हुबली के केशवपुर स्थित पतंजलि स्टेट ऑफिस में वैदिक परंपरा के अनुसार विशेष अग्निहोत्र एवं गुरु वंदना महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इंटरनेशनल योग गुरु एवं पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक के सीनियर स्टेट इंचार्ज श्री भवरलाल आर्य के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा, वैदिक मंत्रोच्चार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश देखने को मिला। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए अग्निहोत्र में सहभागिता निभाई और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।


अग्निहोत्र संस्कार सम्पन्न होने के बाद श्री भवरलाल आर्य ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को सफल, सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहता है तो उसे किसी श्रेष्ठ गुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता हमारे प्रथम गुरु हैं और जीवन में आगे चलकर सद्गुरु हमें सत्य, सेवा, संस्कार और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का पावन अवसर है।


उन्होंने कहा कि गुरु में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। गुरु समस्त मानवता को समान दृष्टि से देखता है और समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है। गुरु पूर्णिमा हमें अपनी कमजोरियों और बुराइयों को त्यागकर सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देती है। यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है।


भवरलाल आर्य ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में अपनी सनातन परंपराओं और गुरु-शिष्य संस्कृति से दूर होती जा रही है। गुरु के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कारों में विश्वास कम होना समाज के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार और समाज गुरु पूर्णिमा जैसे पर्वों को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाएंगे तो बच्चे और युवा भी अपने माता-पिता एवं गुरुओं का सम्मान करना सीखेंगे और भारतीय संस्कृति की अमूल्य विरासत सुरक्षित रहेगी।


Bअनुशासन, सेवा, संयम और संस्कारों को अपनाने का संकल्प लें। यही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और समाज को सकारात्मक दिशा मिलेगी।


कार्यक्रम में किरण गुरुजी, बाबूलाल, मनोज साहू, मंजुला, संगीता, दिव्या, गीता, सविता, भारती, बसवराज, वीरेश, अक्षय, रूपा सहित बड़ी संख्या में योग साधक, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने वैदिक परंपरा के अनुरूप अग्निहोत्र में भाग लेकर विश्व शांति, स्वस्थ समाज और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की कामना की।

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