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बेंगलुरु में गुरु पूर्णिमा महोत्सव: गुरु भक्ति, गौसेवा और सनातन संस्कृति का भव्य संगम

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 29 जुल॰
  • 3 मिनट पठन

स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज के सान्निध्य में दो दिवसीय महोत्सव सम्पन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने हवन, नौ चंडी पाठ, भजन संध्या और महाप्रसादी में लिया भाग; गौशाला अग्निकांड के बाद सेवा एवं सहयोग का दिया प्रेरक संदेश।


Musicians seated on stage with dholak, harmonium, and keyboard before a Krishna gau seva ashram mahotsav banner.

बेंगलुरु में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान हवन, गुरु वंदना एवं विशाल भजन संध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 29 जुलाई, 2026 गुरु पूर्णिमा महोत्सव बेंगलुरु इस वर्ष श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। श्री मातेश्वरी भक्त मंडल ट्रस्ट (रजि.), बेंगलुरु एवं श्री कृष्ण गौ सेवा आश्रम गौशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भव्य धार्मिक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरु वंदना, वैदिक हवन, नौ चंडी पाठ, विशाल भजन संध्या, प्रवचन और महाप्रसादी का पुण्य लाभ प्राप्त किया। स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न इस आयोजन ने गुरु परंपरा, गौसेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, ज्ञान, सेवा और आत्मिक उन्नति का महापर्व माना जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए आयोजित इस महोत्सव में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। परिवारों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर गुरु कृपा प्राप्त की और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।

पहले दिन भक्ति से सराबोर रही विशाल भजन संध्या महोत्सव के पहले दिन 28 जुलाई को शाम 7:15 बजे महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद 8:15 बजे विशाल भजन संध्या का

आयोजन किया गया, जिसमें भक्ति संगीत की मधुर

प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।


प्रसिद्ध भजन गायक डॉ. रमेश माली (पाली), राजू भाई कुमावत (मैसूर) तथा कैलाश पंवार (गागुड़ा) ने गुरु महिमा, गौसेवा और भक्ति पर आधारित भजनों की शानदार प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर "जय गुरुदेव" और भक्ति गीतों से गूंज उठा। श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे।


कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन मोहन सीरवी, बेंगलुरु ने किया।


दूसरे दिन हवन, नौ चंडी पाठ और प्रवचनों का आयोजन


महोत्सव के दूसरे दिन 29 जुलाई को प्रातः 5:15 बजे वैदिक हवन एवं नौ चंडी पाठ के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की दिव्य सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।


इसके पश्चात 10:15 बजे प्रवचन एवं भजन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज ने गुरु की महिमा, सेवा, संस्कार, आत्मज्ञान, गौ संरक्षण और समाज में नैतिक मूल्यों के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।


उन्होंने कहा कि गुरु ही वह शक्ति है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। गुरु का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की सबसे महान परंपराओं में से एक है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने जीवन में सेवा, त्याग, अनुशासन और सदाचार को अपनाने की प्रेरणा देती है।


दोपहर 12:15 बजे महाप्रसादी के साथ दो दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया।


गौसेवा और समाज सेवा का दिया प्रेरक संदेश

Smiling group on a decorated indoor stage, two boys and adults in traditional dress with garlands, hands folded in greeting.

कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति ने हाल ही में श्री कृष्ण गौ सेवा आश्रम गौशाला में हुए अग्निकांड का उल्लेख करते हुए समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिले सहयोग के लिए सभी दानदाताओं, स्वयंसेवकों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।


समिति ने कहा कि संकट की इस घड़ी में समाज ने जिस प्रकार गौसेवा के लिए सहयोग दिया, वह भारतीय संस्कृति की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से भविष्य में भी गौ संरक्षण, गौसेवा और सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

गुरु परंपरा और भारतीय संस्कृति का संदेश


स्वामी श्री पुष्कर दासजी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि गुरु केवल व्यक्ति नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाली दिव्य चेतना हैं। गुरु पूर्णिमा हमें यह स्मरण कराती है कि जीवन में सफलता, संस्कार और आत्मिक उन्नति गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव है।


उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और गौसेवा के महत्व को समझे तथा आधुनिक जीवनशैली के साथ अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भी अपनाए। यही भारत की आध्यात्मिक पहचान और सामाजिक शक्ति है।


श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह


मित्तगनहल्ली मेन रोड, बिदराहल्ली होबली, होसुरु भड़े, कन्नूर पोस्ट, बेंगलुरु स्थित आयोजन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया।


श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक सोच, भाईचारा, सेवा भावना और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देते हैं। गुरु पूर्णिमा महोत्सव ने सभी को गुरु के प्रति श्रद्धा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।

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