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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • रिश्तों की महक "आख़िरी रोटी' (भाग–2)

    दिल को छू लेने वाली मौलिक कहानियाँ लेखक: अशोक कुमार सिंह क्या वर्षों बाद लौटे बेटे अब भी वही थे, जिन्हें कभी माँ अपने हाथों से कौर खिलाकर बड़ा करती थी? बरईपुर गाँव की उस सुबह में जैसे वर्षों बाद फिर से उत्सव उतर आया था। सरस्वती देवी, जिन्हें पूरा गाँव "अम्मा" कहकर पुकारता था, सूरज निकलने से पहले ही जाग गई थीं। आज उनके तीनों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ घर आने वाले थे। उन्होंने सबसे पहले आँगन में झाड़ू लगाई। फिर गोबर और मिट्टी से आँगन लीपा। तुलसी चौरे पर जल चढ़ाया और हाथ जोड़कर बोलीं— "हे ठाकुर जी! आज मेरे आँगन की रौनक लौटा देना।" बरामदे में रखी पुरानी चारपाई की रस्सियाँ कस दी गईं। वर्षों से बंद पड़ा मिट्टी का चूल्हा साफ़ किया गया। पीतल की थालियाँ राख से माँजकर चमका दी गईं। पास की पड़ोसन कमला चाची मुस्कुराते हुए बोलीं— "अरी सरस्वती, इतनी तैयारी मत कर। शहर वाले बच्चे अब कहाँ चूल्हे की रोटी खाते हैं?" अम्मा ने मुस्कुराकर जवाब दिया— "रोटी का स्वाद आटे में नहीं होता बहन... माँ के हाथों में होता है।" कमला चाची कुछ पल तक उन्हें देखती रहीं। उन्हें लगा जैसे यह वाक्य किसी किताब का नहीं, बल्कि एक माँ के पूरे जीवन का सार था। दोपहर ढलने लगी। गाँव की कच्ची सड़क पर धूल उड़ाती तीन बड़ी गाड़ियाँ धीरे-धीरे घर के सामने आकर रुकीं। सबसे पहले बड़ा बेटा राघव उतरा। उसके पीछे उसकी पत्नी और दोनों बच्चे। फिर मोहन और सबसे आखिर में सुरेश। अम्मा की आँखें भर आईं। उन्होंने बिना कुछ सोचे तीनों बेटों के सिर पर हाथ रख दिया। "कैसे हो बेटा?" राघव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा— "ठीक हूँ अम्मा।" मोहन ने घड़ी देखते हुए पूछा— "खाना तैयार है न? हमें शाम तक वापस भी निकलना है।" अम्मा ने एक पल के लिए उसकी ओर देखा, फिर मुस्कुरा दीं। "हाँ बेटा... सब तैयार है।" सबसे छोटा सुरेश चुपचाप घर के भीतर चला गया। उसकी नज़र दीवार पर टँगी बाबूजी की तस्वीर पर पड़ी। उसने कुछ पल तक तस्वीर को देखा, फिर नज़रें झुका लीं। उधर पोते-पोतियाँ पूरे आँगन में दौड़ रहे थे। उन्हें गाँव का हर दृश्य नया लग रहा था। अम्मा की सबसे छोटी पोती गौरी धीरे-धीरे रसोई तक पहुँच गई। उसने मिट्टी के चूल्हे को हैरानी से देखा। "दादी... क्या आप सचमुच इसी पर खाना बनाती हैं?" अम्मा हँस पड़ीं। "हाँ बिटिया... इसी चूल्हे की आग में तुम्हारे पापा बड़े हुए हैं।" गौरी ने भोलेपन से पूछा— "तो आज मैं भी आपके साथ रोटी बनाऊँगी।" अम्मा ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा— "ज़रूर... लेकिन पहली रोटी बनाने से पहले हाथों में प्यार होना चाहिए। रोटी तो हर कोई बना लेता है।" यह सुनकर गौरी खिलखिलाकर हँस पड़ी। रसोई में आटा गूँथा जा चुका था। लकड़ियाँ सुलग रही थीं। तवे पर पहली रोटी पड़ने ही वाली थी। अम्मा के चेहरे पर वर्षों बाद वैसी चमक थी, जैसी किसी माँ के चेहरे पर तब आती है जब उसका बिछड़ा परिवार एक साथ बैठने वाला हो। लेकिन... उन्हें क्या पता था कि आज इसी रसोई में एक ऐसी आख़िरी रोटी सिकेगी, जो वर्षों से बिखरते रिश्तों की सच्चाई सबके सामने रख देगी। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए:"जब पूरे परिवार की थाली भर गई... लेकिन एक थाली अब भी खाली थी।" अन्य कहानी , मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी ज़रूर पढ़िए https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-1 https://www.bhaarataarth.com/post/माँ-की-आख-िरी-गुल्लक https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-सबसे-बड-ी-द-लत केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक एउपन्यास — मौन दान। एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • अमृत ज्ञान वर्षा महोत्सव: "दया भाव ही श्रेष्ठ मानव की पहचान" – आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज

    बेंगलुरु में तीन दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव का शुभारंभ, रविवार को श्रीधाम आश्रम में सत्संग, अभिनंदन एवं महाआरती के साथ होगा समापन भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु (कर्नाटक) | 07 अगस्त, 2026 अमृत ज्ञान वर्षा महोत्सव के प्रथम दिन विश्व जागृति मिशन, बेंगलुरु मण्डल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन में परम पूज्य आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को करुणा, भक्ति और संस्कारमय जीवन का अमूल्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "दया भाव ही श्रेष्ठ मानव की पहचान है।" जय नगर स्थित पूर्णिमा कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन एवं व्यासपीठ पूजन के साथ शुरू हुए इस महोत्सव में भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन और मानव जीवन के मूल्यों पर आधारित प्रेरक प्रवचनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मिशन के परमाध्यक्ष परम पूज्य आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। व्यासपीठ पूजन के उपरांत आदित्य टांटिया, प्रमोद टांटिया, श्याम सुंदर सुल्तानिया, सुभाष राजेंद्र गोयल सहित अनेक गणमान्य अतिथियों एवं अधिकारियों ने पूज्य महाराजश्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि परमात्मा तक पहुंचने का सबसे सहज और मधुर मार्ग भक्ति है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने मन से बैर, द्वेष और अहंकार को समाप्त कर प्रेम, संयम और शांति को अपनाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है। उन्होंने भक्त और परमात्मा के संबंध को मां और शिशु के निश्छल प्रेम से जोड़ते हुए कहा कि जैसे मां अपने बच्चे को बिना किसी स्वार्थ के स्नेह देती है, उसी प्रकार सच्ची श्रद्धा और समर्पण से की गई ईश्वर भक्ति मनुष्य को जीवन की हर कठिनाई में शक्ति प्रदान करती है। पूज्य महाराजश्री ने जीवन की अनिश्चितता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागदौड़ भरे जीवन में यह कोई नहीं जानता कि अगला क्षण क्या लेकर आएगा। इसलिए जब तक जीवन है, प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करते हुए ईश्वर की भक्ति, सेवा और सत्कर्मों में स्वयं को समर्पित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केवल अपने बच्चों के लिए धन-संपत्ति एकत्र करना नहीं, बल्कि उन्हें धर्म, संस्कृति, नैतिकता और श्रेष्ठ संस्कारों का उत्तराधिकारी बनाना है। यही जीवन की वास्तविक पूंजी है, जो आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देती है। प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि जिसके हृदय में दया, करुणा और परोपकार का भाव है, वही सच्चा और श्रेष्ठ मानव कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, सेवा और मानवता को सर्वोच्च स्थान दें। विश्व जागृति मिशन, बेंगलुरु मण्डल के प्रधान आदित्य टांटिया ने बताया कि तीन दिवसीय अमृत ज्ञान वर्षा महोत्सव चार सत्रों में आयोजित किया जा रहा है। शनिवार को प्रातः एवं सायंकालीन दोनों सत्र पूर्णिमा कन्वेंशन सेंटर, जय नगर में आयोजित होंगे, जबकि रविवार को श्रीधाम आश्रम में सत्संग, नागरिक अभिनंदन एवं भव्य महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। इस अवसर पर मिशन के पूर्व प्रधान स्वर्गीय के.के. टांटिया को भी परम पूज्य महाराजश्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके समाज एवं मिशन के प्रति योगदान को स्मरण किया। श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीत "तेरी शरण प्रभु, तेरी शरण, तेरी शरण में आया हूं" का सामूहिक गायन कर वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और सेवा भावना का अनूठा संगम देखने को मिला।

  • बेंगलूरू एयरपोर्ट पर पूज्य आचार्य सुधांशुजी का भव्य स्वागत, श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

    विश्व जागृति मिशन के पदाधिकारियों ने शॉल, पुष्पमाला और गुलदस्ता भेंट कर किया अभिनंदन भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 7 अगस्त 2026 बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार को आध्यात्मिक आस्था और श्रद्धा का मनोहारी दृश्य देखने को मिला, जब विश्व जागृति मिशन के अध्यक्ष आदित्य टांटिया के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने पूज्य आचार्य सुधांशुजी महाराज का भावपूर्ण स्वागत एवं अभिनंदन किया। शॉल ओढ़ाकर, पुष्पमाला पहनाकर और आकर्षक गुलदस्ता भेंट कर सभी ने आचार्यश्री का अभिनंदन किया तथा उनके पावन आशीर्वाद प्राप्त किए। आचार्य सुधांशुजी के बेंगलुरु आगमन पर विश्व जागृति मिशन के सदस्यों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। स्वागत के दौरान आध्यात्मिक वातावरण और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। इस अवसर पर विश्व जागृति मिशन के अध्यक्ष आदित्य टांटिया, प्रीति टांटिया, राजेंद्र गोयल, सुभाष गोयल, गुलशन खन्ना तथा महेश रहेजा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आचार्यश्री को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया, पुष्पमालाएं अर्पित कीं और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका हार्दिक स्वागत किया। स्वागत समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि आचार्य सुधांशुजी का जीवन मानवता, आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवनशैली का प्रेरणास्रोत है। उनके मार्गदर्शन से समाज में सद्भाव, संस्कार और सेवा की भावना निरंतर मजबूत हो रही है। कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने बताया कि आचार्यश्री के प्रवचन लाखों लोगों को आध्यात्मिक चेतना, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं। उनके विचार युवाओं को नैतिक जीवन, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश प्रदान करते हैं। बेंगलुरु में उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। एयरपोर्ट परिसर में उपस्थित लोगों ने भी इस गरिमामयी स्वागत समारोह को देखा और आचार्यश्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री से समाज में शांति, सद्भाव और मानव कल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन सभी के मंगलमय जीवन और राष्ट्र की उन्नति की प्रार्थना के साथ हुआ।

  • अहंकार बनाता है गुलाम, आत्मसम्मान देता है आत्मबल: निर्यापक मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज

    'दूसरों की प्रशंसा पर निर्भर जीवन कभी स्वतंत्र नहीं होता', तुबरहल्ली में आध्यात्म और मनोविज्ञान का प्रेरक संगम भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 7 अगस्त 2026 अहंकार और आत्मसम्मान के बीच का अंतर यदि व्यक्ति समझ ले, तो जीवन की अधिकांश मानसिक समस्याओं से मुक्ति संभव है। यही प्रेरक संदेश दिया निर्यापक मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर, तुबरहल्ली में आयोजित अपने दैनिक प्रवचन में। "अहंकार और आत्मसम्मान का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण" विषय पर आधारित यह प्रवचन आध्यात्म, आधुनिक मनोविज्ञान और आत्मविकास का अनूठा संगम बनकर सामने आया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के विचारों को गंभीरता से सुना और आत्मचिंतन का संकल्प लिया। प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने कहा कि आज अधिकांश लोग अपने सुख-दुःख का नियंत्रण स्वयं के पास रखने के बजाय दूसरों की राय, प्रशंसा और स्वीकृति पर छोड़ देते हैं। यही मानसिक तनाव, असंतोष और अशांति का सबसे बड़ा कारण बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति का आत्मविश्वास दूसरों की सराहना पर टिका हो, वह वास्तव में स्वतंत्र नहीं बल्कि मानसिक रूप से दूसरों का गुलाम बन जाता है। उन्होंने कहा कि अहंकार (मान) और आत्मसम्मान देखने में समान लग सकते हैं, लेकिन दोनों की जड़ें पूरी तरह अलग हैं। अहंकार बाहरी सम्मान, प्रशंसा और मान्यता पर आधारित होता है, जबकि आत्मसम्मान व्यक्ति के भीतर के सत्य, आत्मविश्वास और आत्मबोध से उत्पन्न होता है। आत्मसम्मान व्यक्ति को परिस्थितियों में भी स्थिर रखता है, जबकि अहंकार छोटी-सी आलोचना से भी विचलित हो जाता है। मुनिश्री ने आधुनिक डिजिटल जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर लाइक, फॉलोअर्स और प्रशंसा पाने की निरंतर इच्छा भी अहंकार का आधुनिक रूप है। जब व्यक्ति अपनी तुलना दूसरों से करने लगता है और अपनी पहचान बाहरी स्वीकृति में खोजता है, तब मानसिक तनाव, असंतोष और अवसाद जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान अरिहंत और तीर्थंकर समभाव में इसलिए स्थित रहते हैं क्योंकि उनका आनंद किसी बाहरी प्रशंसा या निंदा पर आधारित नहीं होता। उनका आत्मबल अनन्त ज्ञान, अनन्त दर्शन, अनन्त सुख और अनन्त वीर्य से परिपूर्ण होता है। यही कारण है कि वे हर परिस्थिति में शांत, अडोल और निर्विकार बने रहते हैं। मुनिश्री ने कहा कि यदि व्यक्ति स्वयं को पहचान ले, अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव करे और आत्मसम्मान को विकसित करे, तो न प्रशंसा उसे अहंकारी बना सकती है और न आलोचना उसे कमजोर कर सकती है। आत्मबल ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो व्यक्ति को हर परिस्थिति में संतुलित बनाए रखती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे तुलना, प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या और बाहरी मान्यता की अपेक्षा से ऊपर उठकर आत्मचिंतन, विनम्रता, ध्यान और आत्मजागरण का मार्ग अपनाएं। यही मार्ग मानसिक शांति, सफल व्यक्तित्व और आध्यात्मिक उन्नति का आधार बनता है। प्रवचन के अंत में श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में आत्मसम्मान, सकारात्मक सोच और विनम्रता को अपनाकर मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

  • चेन्नई से निकली बाबा रामदेवरा साइकिल यात्रा का बेंगलुरु में भव्य स्वागत, जयकारों से गूंजा माहौल

    राजस्थानी समाज ने पुष्पवर्षा, तिलक और प्रसादी से किया अभिनंदन, सेवा और आस्था का दिया संदेश भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 7 अगस्त 2026 बेंगलुरु में शुक्रवार सुबह आस्था, सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब चेन्नई से राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ रामदेवरा धाम के लिए निकले साइकिल यात्रियों का तुमकुर रोड स्थित अरसीना कुंटे में राजस्थानी समाज ने भव्य स्वागत किया। बाबा रामदेवजी के जयकारों, पुष्पमालाओं, तिलक और मंगल गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने यात्रियों का सम्मान करते हुए उनकी सफल एवं मंगलमय यात्रा की कामना की तथा सेवा और समर्पण को जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताया। चेन्नई से रामदेवरा धाम की ओर प्रस्थान कर रहे साइकिल यात्रियों का विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजस्थानी समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाया गया, पुष्पमालाओं से उनका अभिनंदन किया गया तथा उनके लिए भोजन प्रसादी की विशेष व्यवस्था की गई। कार्यक्रम के दौरान "बाबा रामदेवजी की जय" के उद्घोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, अनुशासन और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यात्रियों ने भी सभी स्वागतकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज का यह प्रेम उनकी यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करता है। वक्ताओं ने बताया कि प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष में राजस्थान के रामदेवरा धाम में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा रामदेवजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हजारों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा एवं साइकिल यात्रा कर बाबा के दरबार में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना बाबा रामदेवजी अवश्य स्वीकार करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि धार्मिक यात्राएं केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देतीं, बल्कि समाज में भाईचारे, सहयोग और मानव सेवा की भावना भी मजबूत करती हैं। उन्होंने युवाओं से भी ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर बाबूलाल चौधरी, नेमाराम प्रजापत, मामा जी शर्मा, ओमप्रकाश माली, दीपकराम जालौर, उदयराम गुर्जर, हनुमान चौधरी, हनुमानराम देवासी, माणकराम प्रजापति, माताजी हार्डवेयर दसमपुरा, अनिलराम जैन सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे और यात्रियों का उत्साहवर्धन किया। धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने वाले इस आयोजन ने समाज में सेवा, समर्पण और एकता का प्रेरणादायी संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि बाबा रामदेवजी की कृपा से सभी यात्रियों की यात्रा सफल और मंगलमय होगी।

  • FCRA बिल पर अमेरिका को भारत का स्पष्ट संदेश, विदेश मंत्रालय ने कहा—कानून बनाना संसद का अधिकार

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली 07.08.2026, दिल्ली विदेशी चंदे और फंडिंग से जुड़े FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी सांसद राइली मूर द्वारा विधेयक पर की गई टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया है कि विदेशी फंडिंग के नियमन से संबंधित कानून बनाना भारत का आंतरिक और विधायी विषय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय ने FCRA विधेयक को लेकर की गई टिप्पणियों को देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के कानूनों पर निर्णय लेने का अधिकार भारत की संसद के पास है। किसी दूसरे देश को भारत की संसदीय प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। अमेरिका को भारत की दो-टूक बात विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करने की व्यवस्था केवल भारत में ही नहीं है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए कानून मौजूद हैं। भारत का कहना है कि विदेशी योगदान से संबंधित नियमों का उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी धन की निगरानी, पारदर्शिता और उसके इस्तेमाल को निर्धारित कानूनी व्यवस्था के दायरे में रखना है। राइली मूर ने क्या कहा था? अमेरिकी सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित FCRA बदलावों को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने इसे ईसाई समुदाय और चर्चों को प्रभावित करने वाला कदम बताया और विधेयक को लेकर आपत्ति जताई। उनकी इस टिप्पणी के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया सामने आई। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि FCRA जैसे कानूनों को लेकर अंतिम निर्णय भारत की लोकतांत्रिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत होगा। क्या है FCRA? FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशों से मिलने वाले योगदान और फंड को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा है। इसके तहत विदेशी धन प्राप्त करने वाले पात्र संगठनों और संस्थाओं के लिए नियम निर्धारित किए जाते हैं। FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं के बीच अलग-अलग मत सामने आ सकते हैं। ऐसे में इस विधेयक पर संसद में होने वाली चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। भारत का संदेश साफ FCRA को लेकर उठे विवाद के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है—विदेशी फंडिंग से संबंधित कानून भारत का घरेलू विषय है और इस पर निर्णय भारत की संसद करेगी। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ। पढ़िए: Bhaarataarth.com | YouTube: @bhaarataarthlive

  • Bengaluru Voter List SIR: SIR सर्वे में बेंगलुरु के 17.93 लाख मतदाता ASDDO श्रेणी में, क्या कट जाएगा आपका नाम?

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में बेंगलुरु के लाखों मतदाता ASDDO श्रेणी में चिन्हित, चुनाव आयोग ने कहा—सुधार और बहाली का मिलेगा पूरा अवसर। मतदाता सूची सत्यापन के दौरान घर-घर सर्वे करते बूथ लेवल अधिकारी अथवा मतदान केंद्र की सांकेतिक तस्वीर भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) | बेंगलुरु | 7 अगस्त, 2026 Bengaluru Voter List SIR के तहत चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियान ने राजधानी के लाखों मतदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। चुनाव आयोग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार शहर के 17.93 लाख से अधिक मतदाता ASDDO (Absent, Shifted, Duplicate, Dead & Others) श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि ASDDO श्रेणी में दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता का नाम स्वतः मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बेंगलुरु शहरी जिले में कुल 40.21 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 55.39 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जबकि 44.61 प्रतिशत यानी 17.93 लाख मतदाता फिलहाल ASDDO अथवा असंगठित श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार यह केवल प्रारंभिक वर्गीकरण है। जिन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लिकेट, मृत अथवा अन्य श्रेणी में दर्ज किया गया है, उन्हें अपने रिकॉर्ड का सत्यापन कराने और आवश्यक सुधार कराने का पूरा अवसर मिलेगा। बीबीएमपी के तीनों प्रमुख जोनों में भी स्थिति चिंताजनक दिखाई दे रही है। बीबीएमपी दक्षिण में सबसे अधिक 51.18 प्रतिशत (10.97 लाख) मतदाता ASDDO श्रेणी में चिन्हित हुए हैं। वहीं बीबीएमपी मध्य में 47.85 प्रतिशत (9.04 लाख) तथा बीबीएमपी उत्तर में 46.95 प्रतिशत (10.95 लाख) मतदाता इस श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में लगातार पलायन, किरायेदारों का स्थान परिवर्तन, डुप्लिकेट पंजीकरण तथा मृत्यु के बाद नाम नहीं हटने जैसी वजहों से ऐसे आंकड़े सामने आते हैं। यही कारण है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यापक अभियान चला रहा है। राज्य स्तर पर भी स्थिति कम महत्वपूर्ण नहीं है। कर्नाटक में कुल 5.54 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 1.10 करोड़ (19.93 प्रतिशत) मतदाता फिलहाल ASDDO अथवा असंगठित श्रेणी में वर्गीकृत किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार राज्य में सबसे अधिक 66.43 लाख मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए हैं। इसके अलावा 16.32 लाख मृत, 16.12 लाख अनुपस्थित, 6.93 लाख डुप्लिकेट पंजीकरण तथा 4.67 लाख अन्य कारणों से चिन्हित किए गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) 8 अगस्त तक गलत मार्किंग में सुधार कर सकते हैं। यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से ASDDO श्रेणी में दर्ज हुआ है तो उसका रिकॉर्ड सुधारा जाएगा। नए मतदाताओं के पंजीकरण को आसान बनाने के लिए आयोग ने बीबीएमपी एवं ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में फॉर्म-6 की 10 लाख प्रतियां उपलब्ध कराई हैं। इसके माध्यम से पात्र नागरिक अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार 16 जून से 5 अगस्त के बीच राज्यभर में फॉर्म-6, 6A, 7 और 8 के तहत 12.32 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और विवरण संशोधन के आवेदन शामिल हैं। निर्वाचन अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने नाम को लेकर किसी प्रकार की शंका हो तो वे समय रहते अपने बूथ लेवल अधिकारी अथवा संबंधित निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना रिकॉर्ड सही कराएं। आयोग का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं बल्कि मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।

  • FKCCI–राजस्थान उद्योग संवाद: परिधान उद्योग को नई उड़ान देने पर मंथन, अंतरराज्यीय सहयोग होगा मजबूत

    एफकेसीसीआई में राजस्थान सरकार के प्रतिनिधिमंडल और उद्योग जगत के बीच संवादात्मक सत्र, निवेश, नवाचार और परिधान उद्योग के विकास को लेकर साझा रणनीति पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा। एफकेसीसीआई में राजस्थान सरकार के प्रतिनिधिमंडल, उद्योगपतियों एवं पदाधिकारियों के सम्मान समारोह और संवाद सत्र भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 7 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। कर्नाटक और राजस्थान के बीच औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने की पहल के तहत फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FKCCI) ने राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सहायक आयुक्त श्री पंकज राव और उनके प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर आयोजित संवादात्मक सत्र में दोनों राज्यों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने परिधान उद्योग के विकास, निवेश, तकनीकी नवाचार तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक के परिधान उद्योग की सफलता के मॉडल को समझना और राजस्थान में उसके प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाओं पर विचार करना था। चर्चा के दौरान उद्योग विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीक, कुशल मानव संसाधन, मजबूत सप्लाई चेन और उद्योग-अनुकूल नीतियां कर्नाटक के परिधान उद्योग की सफलता की प्रमुख आधारशिला हैं। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि बदलते वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए राज्यों के बीच ज्ञान, अनुभव और संसाधनों का आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है। उद्योग प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि कौशल विकास, डिजिटलीकरण, निर्यात संवर्धन और एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन देकर दोनों राज्यों के उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। संवाद के दौरान निवेशकों को आकर्षित करने, उत्पादन लागत कम करने, वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने जैसे विषयों पर भी गंभीर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार की अंतरराज्यीय बैठकों से उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। एफकेसीसीआई की अध्यक्ष श्रीमती उमा रेड्डी ने कहा कि राज्यों के बीच सहयोग से उद्योग जगत को नई दिशा मिलेगी तथा निवेश और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे। अध्यक्ष-निर्वाचित श्री टी. साईराम प्रसाद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष-निर्वाचित श्री बी. पी. शशिधर, पूर्व अध्यक्ष एवं सलाहकार श्री आर. शिवकुमार तथा अंतरराज्यीय चैंबर समन्वय समिति के चेयरमैन पहाड़ सिंह राजपुरोहित ने भी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए साझा विकास की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में उपस्थित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि कर्नाटक और राजस्थान मिलकर परिधान उद्योग के लिए संयुक्त निवेश, प्रशिक्षण कार्यक्रम, निर्यात प्रोत्साहन और तकनीकी सहयोग के नए मॉडल विकसित कर सकते हैं। इससे दोनों राज्यों के उद्योगों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संवाद उद्योग जगत में विश्वास बढ़ाने के साथ-साथ निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। भविष्य में दोनों राज्यों के बीच और अधिक औद्योगिक साझेदारी विकसित होने की संभावना भी व्यक्त की गई। कार्यक्रम का समापन आपसी सहयोग, नवाचार और साझा विकास के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित उद्योगपतियों ने विश्वास जताया कि यह पहल आने वाले समय में आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन के नए द्वार खोलेगी।

  • बांकीपुर का जनादेश: बदले राजनीतिक समीकरण, अब जनता की उम्मीदों की परीक्षा

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) पटना | 06/08/2026 बिहार पटना। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है। जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत ने यह संकेत दिया है कि मतदाता अब पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से अलग होकर भी अपना निर्णय लेने के लिए तैयार हैं। इस परिणाम को केवल एक सीट की जीत या हार के रूप में देखने के बजाय बदलती राजनीतिक सोच और जनता की अपेक्षाओं के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बांकीपुर लंबे समय से बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां का चुनाव परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जन सुराज ने जनता के बीच अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रशांत किशोर की जीत से संगठन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर स्थापित राजनीतिक दलों के लिए भी यह परिणाम विचार करने का विषय बन गया है। जनता ने दिया अपना फैसला चुनाव लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपना प्रतिनिधि चुना है। अब चुनावी मैदान की राजनीति समाप्त होकर जनप्रतिनिधित्व की वास्तविक जिम्मेदारी शुरू होती है। जनता की अपेक्षाएं केवल भाषणों और वादों तक सीमित नहीं रहतीं। क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, यातायात, साफ-सफाई, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दे सीधे लोगों के जीवन से जुड़े हैं। जीत के बाद असली चुनौती प्रशांत किशोर और जन सुराज के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जनता के भरोसे को कायम रखने की होगी। चुनाव के दौरान जिस बदलाव और बेहतर व्यवस्था की उम्मीद जगाई गई, उसे जमीन पर उतारना ही इस जनादेश की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। जनता यह देखना चाहेगी कि क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा और प्रशासनिक स्तर पर कितनी मजबूती से उठाया जाता है तथा उनके समाधान के लिए कितने प्रभावी प्रयास किए जाते हैं। पुरानी राजनीति के लिए भी संदेश बांकीपुर का परिणाम पारंपरिक राजनीतिक दलों के लिए भी एक संदेश माना जा सकता है। मतदाता किसी भी दल या नेता को स्थायी रूप से अपना मानकर चलने के बजाय परिस्थितियों, मुद्दों और उम्मीदवार के आधार पर फैसला कर सकते हैं। यह परिणाम बताता है कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति है। कोई भी राजनीतिक दल कितना मजबूत है, इसका अंतिम फैसला चुनाव के समय मतदाता ही करता है। आगे की राजनीति पर रहेगी नजर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बांकीपुर की जीत को जन सुराज किस तरह आगे बढ़ाता है। क्या यह जीत बिहार के दूसरे क्षेत्रों में भी संगठन को मजबूत करने में मदद करेगी? क्या जनता की स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता देकर जन सुराज अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत कर पाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे। फिलहाल बांकीपुर ने अपना फैसला सुना दिया है। जनता ने अपना प्रतिनिधि चुन लिया है और अब प्रतिनिधि की बारी है कि वह जनता के भरोसे को काम, जवाबदेही और विकास में बदलकर दिखाए। लोकतंत्र में असली जीत किसी दल की नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और जनहित की होती है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • आत्मविश्वास से भरे युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव: युवा शक्ति को अवसर देने पर जोर

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | नई दिल्ली। भारत के विकास की दिशा और भविष्य की तस्वीर में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश की बड़ी युवा आबादी को शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार के बेहतर अवसर मिलें तो युवा शक्ति भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की मजबूत आधारशिला बन सकती है। इसी सोच के साथ आत्मविश्वास से भरे और जिम्मेदार युवाओं को विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। युवा शक्ति में बदलाव लाने की क्षमता आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला वर्ग नहीं है, बल्कि वह नए विचारों, तकनीक, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से रोजगार पैदा करने की क्षमता भी रखता है। छोटे शहरों और गांवों से निकलकर युवा डिजिटल माध्यमों, स्टार्टअप, कृषि, तकनीकी क्षेत्र, खेल और विभिन्न व्यवसायों में अपनी पहचान बना रहे हैं। युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावहारिक कौशल का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पढ़ाई के साथ यदि युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण मिले, तो वे अपने लिए बेहतर भविष्य बनाने के साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे सकते हैं। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका विकसित भारत का लक्ष्य केवल बड़े शहरों और आधुनिक इमारतों तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ ऐसा देश है जहां नागरिकों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, तकनीकी सुविधाएं और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोग, स्वरोजगार, नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक कार्यों में युवाओं की भागीदारी देश की विकास यात्रा को गति दे सकती है। रोजगार के साथ कौशल पर भी ध्यान जरूरी बढ़ती युवा आबादी के बीच रोजगार एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में केवल सरकारी या पारंपरिक नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय कौशल विकास और स्वरोजगार के रास्तों को भी मजबूत करना जरूरी है। युवाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाओं, कृषि आधारित व्यवसाय, लघु उद्योग और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयास रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण तथा बाजार तक पहुंच की सुविधाएं बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा। आत्मविश्वास के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी युवा शक्ति को मजबूत बनाने के लिए केवल अवसर पर्याप्त नहीं हैं। युवाओं में जिम्मेदारी, अनुशासन, मेहनत, संवेदनशीलता और देश के प्रति सकारात्मक सोच भी जरूरी है। सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के दौर में युवाओं के सामने अवसरों के साथ चुनौतियां भी हैं। सही जानकारी की पहचान, गलत सूचनाओं से सावधानी और तकनीक का रचनात्मक उपयोग युवा पीढ़ी को मजबूत बना सकता है। महिलाओं और ग्रामीण युवाओं की भागीदारी भी अहम विकसित भारत की कल्पना तभी सार्थक होगी जब विकास की प्रक्रिया में शहरों के साथ गांवों और महिलाओं की युवा शक्ति को भी समान अवसर मिले। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को शिक्षा, इंटरनेट, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। युवा महिलाओं की शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना भी देश की आर्थिक क्षमता को मजबूत कर सकता है। भारतार्थ खबर की नजर से युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं, लेकिन यह ताकत तभी परिणाम देती है जब उसे सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें। भारत के युवाओं में प्रतिभा और ऊर्जा की कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी क्षमता को शिक्षा, कौशल, रोजगार और नवाचार के माध्यम से सही मंच मिले। विकसित भारत का सपना केवल सरकार की योजनाओं से पूरा नहीं होगा। इसमें युवाओं, किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक होगी। आज का आत्मविश्वासी युवा यदि अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करता है, तो आने वाला भारत अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरपूर बन सकता है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • KR Market Bengaluru: फुटपाथ हटाओ अभियान में 220 दुकानें ध्वस्त, दशकों पुरानी रोज़ी-रोटी पर चला बुलडोज़र

    केआर मार्केट के सामने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई, दुकानदारों में आक्रोश; निगम ने कहा—अदालत के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चला अभियान। बेंगलुरु के केआर मार्केट के सामने फुटपाथ अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानों को हटाती भारी मशीनें। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com ) बेंगलुरु | 6 अगस्त, 2026 KR Market Bengaluru एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल केआर मार्केट के सामने बुधवार को फुटपाथ अतिक्रमण हटाने का अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई में करीब 220 अस्थायी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। बुलडोज़र चलते ही वर्षों से कारोबार कर रहे सैकड़ों दुकानदारों की आंखों के सामने उनकी आजीविका मलबे में बदल गई। किसी ने सामान बचाने की कोशिश की तो कोई दशकों पुराने दस्तावेज लेकर अधिकारियों के सामने गुहार लगाता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं रुकी। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉर्पोरेशन और संबंधित एजेंसियों ने भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अभियान चलाया। जैसे ही जेसीबी और अन्य मशीनें मौके पर पहुंचीं, पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। किराना, मसाला, मछली, फल-सब्जी और अन्य छोटे व्यवसाय करने वाले दुकानदार अपने सामान को बचाने के लिए दौड़ते नजर आए। सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब लगभग 60 वर्षीय मसाला व्यापारी अपनी दुकान को टूटते हुए देख भावुक हो गया। उसने वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया कारोबार कुछ ही मिनटों में बिखरते देखा। कई दुकानदारों का कहना था कि वे पिछले 30 से 40 वर्षों से इसी स्थान पर व्यवसाय कर रहे थे और उनके पास पुराने दस्तावेज भी मौजूद हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई कर्नाटक हाई कोर्ट के 17 जुलाई के आदेश के अनुपालन में की गई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को परिसर खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद निगम को बिना अतिरिक्त नोटिस कार्रवाई करने की अनुमति दी गई थी। अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इसके अलावा लगभग 60 इंजीनियर, 60 बीएसडब्ल्यूएमएल कर्मचारी तथा 20 स्वास्थ्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ खाली कराने और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के उद्देश्य से की गई। केंद्रीय निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन दुकानों को हटाया गया, वे अधिकृत वेंडिंग ज़ोन का हिस्सा नहीं थीं। केंद्रीय निगम के आयुक्त जी. जगदीश ने कहा कि संबंधित क्षेत्र को कभी भी आधिकारिक वेंडिंग ज़ोन घोषित नहीं किया गया और न ही वहां कारोबार करने वाले लोगों को निगम की ओर से कोई वैध वेंडिंग पहचान पत्र जारी किया गया था। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। हालांकि दुकानदारों ने निगम के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे वर्षों से यहीं व्यवसाय कर रहे थे और स्थानीय प्रशासन उनकी मौजूदगी से भली-भांति परिचित था। उनका आरोप है कि उन्हें पुनर्वास या वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए बिना उनकी दुकानें तोड़ दी गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है। नगर निगम के अनुसार उसके अधिकार क्षेत्र में अब तक करीब 200 किलोमीटर फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त कराए जा चुके हैं, जबकि लगभग 50 किलोमीटर फुटपाथ पर अभी भी कार्रवाई बाकी है। आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के अभियान जारी रहने की संभावना है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर विकास, सार्वजनिक सुविधाओं और छोटे व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां प्रशासन इसे कानून के पालन की कार्रवाई बता रहा है, वहीं प्रभावित दुकानदार पुनर्वास और राहत की मांग कर रहे हैं।

  • Karnataka Congress: विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरट्टी के इस्तीफे का ऐलान, सियासत गरमाई

    14 अगस्त को इस्तीफा सौंपेंगे बसवराज होरट्टी, कांग्रेस के फैसले पर उठे सवाल; संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर छिड़ी नई बहस। कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरट्टी से मुलाकात के दौरान कांग्रेस नेताओं की बैठक भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 6 अगस्त, 2026 Karnataka Congress की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरट्टी ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 14 अगस्त 2026 को वे आधिकारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप देंगे। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस द्वारा वरिष्ठ नेता सलीम अहमद का नाम अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने इसे संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बसवराज होरट्टी ने बताया कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से प्रारंभ होगा। पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद दूसरे दिन उपाध्यक्ष पद का चुनाव प्रस्तावित है। इसके तुरंत बाद, यानी 14 अगस्त, वे अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। इस बीच केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने बेंगलुरु स्थित सरकारी आवास पर बसवराज होरट्टी से मुलाकात कर चर्चा की। मुलाकात के बाद होरट्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें जानकारी दी कि अध्यक्ष पद को लेकर लिया गया निर्णय कांग्रेस हाईकमान का अंतिम फैसला है। मुख्यमंत्री ने उनसे पद छोड़ने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम से होरट्टी ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद की गरिमा को इस प्रकार प्रभावित करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, अध्यक्ष पद राजनीतिक दलों से ऊपर होता है और उसकी निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में बताया कि यह कांग्रेस हाईकमान का निर्देश है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस विषय पर किसी प्रकार की चर्चा से इनकार किया। इन परिस्थितियों में उन्होंने स्वयं पद छोड़ने का निर्णय लिया। बसवराज होरट्टी नेकहा कि पद से इस्तीफा देने के बाद भी वे विधान परिषद के सदस्य के रूप में सदन की कार्यवाही में सक्रिय रहेंगे और जनता के मुद्दों को पहले की तरह उठाते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में उन पर अविश्वास जताने वाली टिप्पणियों से वे व्यक्तिगत रूप से आहत हुए हैं और ऐसे वातावरण में संवैधानिक दायित्व निभाना उचित नहीं समझते। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अध्यक्ष पद पर बैठे व्यक्ति के रहते नए उम्मीदवार का नाम घोषित करना संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संवैधानिक पदों को भी राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस पहले से ही आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। ऐसे में विधान परिषद अध्यक्ष के इस्तीफे ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक निर्णयों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें 14 अगस्त पर टिकी हैं, जब बसवराज होरट्टी औपचारिक रूप से इस्तीफा देंगे। इसके बाद नए अध्यक्ष के चुनाव और विपक्ष की रणनीति पर भी सबकी नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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