Karnataka Congress: विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरट्टी के इस्तीफे का ऐलान, सियासत गरमाई
- धन्नाराम चौधरी

- 6 अग॰
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14 अगस्त को इस्तीफा सौंपेंगे बसवराज होरट्टी, कांग्रेस के फैसले पर उठे सवाल; संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर छिड़ी नई बहस।
कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरट्टी से मुलाकात के दौरान कांग्रेस नेताओं की बैठक
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 6 अगस्त, 2026 Karnataka Congress की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरट्टी ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 14 अगस्त 2026 को वे आधिकारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप देंगे। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस द्वारा वरिष्ठ नेता सलीम अहमद का नाम अध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने इसे संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बसवराज होरट्टी ने बताया कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से प्रारंभ होगा। पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद दूसरे दिन उपाध्यक्ष पद का चुनाव प्रस्तावित है। इसके तुरंत बाद, यानी 14 अगस्त, वे अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे।
इस बीच केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने बेंगलुरु स्थित सरकारी आवास पर बसवराज होरट्टी से मुलाकात कर चर्चा की। मुलाकात के बाद होरट्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें जानकारी दी कि अध्यक्ष पद को लेकर लिया गया निर्णय कांग्रेस हाईकमान का अंतिम फैसला है। मुख्यमंत्री ने उनसे पद छोड़ने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम से होरट्टी ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद की गरिमा को इस प्रकार प्रभावित करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, अध्यक्ष पद राजनीतिक दलों से ऊपर होता है और उसकी निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में बताया कि यह कांग्रेस हाईकमान का निर्देश है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस विषय पर किसी प्रकार की चर्चा से इनकार किया। इन परिस्थितियों में उन्होंने स्वयं पद छोड़ने का निर्णय लिया।
बसवराज होरट्टी नेकहा कि पद से इस्तीफा देने के बाद भी वे विधान परिषद के सदस्य के रूप में सदन की कार्यवाही में सक्रिय रहेंगे और जनता के मुद्दों को पहले की तरह उठाते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में उन पर अविश्वास जताने वाली टिप्पणियों से वे व्यक्तिगत रूप से आहत हुए हैं और ऐसे वातावरण में संवैधानिक दायित्व निभाना उचित नहीं समझते।
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अध्यक्ष पद पर बैठे व्यक्ति के रहते नए उम्मीदवार का नाम घोषित करना संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संवैधानिक पदों को भी राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस पहले से ही आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। ऐसे में विधान परिषद अध्यक्ष के इस्तीफे ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक निर्णयों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अब सभी की निगाहें 14 अगस्त पर टिकी हैं, जब बसवराज होरट्टी औपचारिक रूप से इस्तीफा देंगे। इसके बाद नए अध्यक्ष के चुनाव और विपक्ष की रणनीति पर भी सबकी नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
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