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अमृत ज्ञान वर्षा महोत्सव: "दया भाव ही श्रेष्ठ मानव की पहचान" – आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 8 अग॰
  • 2 मिनट पठन
Man in yellow robes and turban speaks at a flower-decorated podium; banner reads विश्व जागृति मिशन बेंगलुरु मंडल.

बेंगलुरु में तीन दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव का शुभारंभ, रविवार को श्रीधाम आश्रम में सत्संग, अभिनंदन एवं महाआरती के साथ होगा समापन


भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु (कर्नाटक) | 07 अगस्त, 2026 अमृत ज्ञान वर्षा महोत्सव के प्रथम दिन विश्व जागृति मिशन, बेंगलुरु मण्डल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन में परम पूज्य आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को करुणा, भक्ति और संस्कारमय जीवन का अमूल्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "दया भाव ही श्रेष्ठ मानव की पहचान है।" जय नगर स्थित पूर्णिमा कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन एवं व्यासपीठ पूजन के साथ शुरू हुए इस महोत्सव में भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन और मानव जीवन के मूल्यों पर आधारित प्रेरक प्रवचनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मिशन के परमाध्यक्ष परम पूज्य आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। व्यासपीठ पूजन के उपरांत आदित्य टांटिया, प्रमोद टांटिया, श्याम सुंदर सुल्तानिया, सुभाष राजेंद्र गोयल सहित अनेक गणमान्य अतिथियों एवं अधिकारियों ने पूज्य महाराजश्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया।


अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि परमात्मा तक पहुंचने का सबसे सहज और मधुर मार्ग भक्ति है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने मन से बैर, द्वेष और अहंकार को समाप्त कर प्रेम, संयम और शांति को अपनाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है। उन्होंने भक्त और परमात्मा के संबंध को मां और शिशु के निश्छल प्रेम से जोड़ते हुए कहा कि जैसे मां अपने बच्चे को बिना किसी स्वार्थ के स्नेह देती है, उसी प्रकार सच्ची श्रद्धा और समर्पण से की गई ईश्वर भक्ति मनुष्य को जीवन की हर कठिनाई में शक्ति प्रदान करती है।


पूज्य महाराजश्री ने जीवन की अनिश्चितता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागदौड़ भरे जीवन में यह कोई नहीं जानता कि अगला क्षण क्या लेकर आएगा। इसलिए जब तक जीवन है, प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करते हुए ईश्वर की भक्ति, सेवा और सत्कर्मों में स्वयं को समर्पित करना चाहिए।


उन्होंने कहा कि माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केवल अपने बच्चों के लिए धन-संपत्ति एकत्र करना नहीं, बल्कि उन्हें धर्म, संस्कृति, नैतिकता और श्रेष्ठ संस्कारों का उत्तराधिकारी बनाना है। यही जीवन की वास्तविक पूंजी है, जो आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देती है।


प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि जिसके हृदय में दया, करुणा और परोपकार का भाव है, वही सच्चा और श्रेष्ठ मानव कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, सेवा और मानवता को सर्वोच्च स्थान दें।


विश्व जागृति मिशन, बेंगलुरु मण्डल के प्रधान आदित्य टांटिया ने बताया कि तीन दिवसीय अमृत ज्ञान वर्षा महोत्सव चार सत्रों में आयोजित किया जा रहा है। शनिवार को प्रातः एवं सायंकालीन दोनों सत्र पूर्णिमा कन्वेंशन सेंटर, जय नगर में आयोजित होंगे, जबकि रविवार को श्रीधाम आश्रम में सत्संग, नागरिक अभिनंदन एवं भव्य महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।


इस अवसर पर मिशन के पूर्व प्रधान स्वर्गीय के.के. टांटिया को भी परम पूज्य महाराजश्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके समाज एवं मिशन के प्रति योगदान को स्मरण किया।


श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीत "तेरी शरण प्रभु, तेरी शरण, तेरी शरण में आया हूं" का सामूहिक गायन कर वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और सेवा भावना का अनूठा संगम देखने को मिला।

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