FCRA बिल पर अमेरिका को भारत का स्पष्ट संदेश, विदेश मंत्रालय ने कहा—कानून बनाना संसद का अधिकार
- Ashok kumar Singh

- 8 अग॰
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भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली 07.08.2026, दिल्ली विदेशी चंदे और फंडिंग से जुड़े FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी सांसद राइली मूर द्वारा विधेयक पर की गई टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया है कि विदेशी फंडिंग के नियमन से संबंधित कानून बनाना भारत का आंतरिक और विधायी विषय है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय ने FCRA विधेयक को लेकर की गई टिप्पणियों को देखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के कानूनों पर निर्णय लेने का अधिकार भारत की संसद के पास है। किसी दूसरे देश को भारत की संसदीय प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
अमेरिका को भारत की दो-टूक बात
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करने की व्यवस्था केवल भारत में ही नहीं है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए कानून मौजूद हैं।
भारत का कहना है कि विदेशी योगदान से संबंधित नियमों का उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी धन की निगरानी, पारदर्शिता और उसके इस्तेमाल को निर्धारित कानूनी व्यवस्था के दायरे में रखना है।
राइली मूर ने क्या कहा था?
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित FCRA बदलावों को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने इसे ईसाई समुदाय और चर्चों को प्रभावित करने वाला कदम बताया और विधेयक को लेकर आपत्ति जताई।
उनकी इस टिप्पणी के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया सामने आई। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि FCRA जैसे कानूनों को लेकर अंतिम निर्णय भारत की लोकतांत्रिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत होगा।
क्या है FCRA?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेशों से मिलने वाले योगदान और फंड को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा है। इसके तहत विदेशी धन प्राप्त करने वाले पात्र संगठनों और संस्थाओं के लिए नियम निर्धारित किए जाते हैं।
FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं के बीच अलग-अलग मत सामने आ सकते हैं। ऐसे में इस विधेयक पर संसद में होने वाली चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
भारत का संदेश साफ
FCRA को लेकर उठे विवाद के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है—विदेशी फंडिंग से संबंधित कानून भारत का घरेलू विषय है और इस पर निर्णय भारत की संसद करेगी।
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