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KR Market Bengaluru: फुटपाथ हटाओ अभियान में 220 दुकानें ध्वस्त, दशकों पुरानी रोज़ी-रोटी पर चला बुलडोज़र

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 6 अग॰
  • 3 मिनट पठन

केआर मार्केट के सामने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई, दुकानदारों में आक्रोश; निगम ने कहा—अदालत के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चला अभियान।


People clear debris and damaged structures beside a truck under a bridge, with trees overhead; file photo text visible.

बेंगलुरु के केआर मार्केट के सामने फुटपाथ अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानों को हटाती भारी मशीनें।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com ) बेंगलुरु | 6 अगस्त, 2026 KR Market Bengaluru एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल केआर मार्केट के सामने बुधवार को फुटपाथ अतिक्रमण हटाने का अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई में करीब 220 अस्थायी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। बुलडोज़र चलते ही वर्षों से कारोबार कर रहे सैकड़ों दुकानदारों की आंखों के सामने उनकी आजीविका मलबे में बदल गई। किसी ने सामान बचाने की कोशिश की तो कोई दशकों पुराने दस्तावेज लेकर अधिकारियों के सामने गुहार लगाता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं रुकी।


बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉर्पोरेशन और संबंधित एजेंसियों ने भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अभियान चलाया। जैसे ही जेसीबी और अन्य मशीनें मौके पर पहुंचीं, पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। किराना, मसाला,छली, फल-सब्जी और अन्य छोटे व्यवसाय करने वाले दुकानदार अपने सामान को बचाने के लिए दौड़ते नजर आए।


सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब लगभग 60 वर्षीय मसाला व्यापारी अपनी दुकान को टूटते हुए देख भावुक हो गया। उसने वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया कारोबार कुछ ही मिनटों में बिखरते देखा। कई दुकानदारों का कहना था कि वे पिछले 30 से 40 वर्षों से इसी स्थान पर व्यवसाय कर रहे थे और उनके पास पुराने दस्तावेज भी मौजूद हैं।


अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई कर्नाटक हाई कोर्ट के 17 जुलाई के आदेश के अनुपालन में की गई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को परिसर खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद निगम को बिना अतिरिक्त नोटिस कार्रवाई करने की अनुमति दी गई थी।


अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इसके अलावा लगभग 60 इंजीनियर, 60 बीएसडब्ल्यूएमएल कर्मचारी तथा 20 स्वास्थ्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ खाली कराने और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के उद्देश्य से की गई।


केंद्रीय निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन दुकानों को हटाया गया, वे अधिकृत वेंडिंग ज़ोन का हिस्सा नहीं थीं।


केंद्रीय निगम के आयुक्त जी. जगदीश ने कहा कि संबंधित क्षेत्र को कभी भी आधिकारिक वेंडिंग ज़ोन घोषित नहीं किया गया और न ही वहां कारोबार करने वाले लोगों को निगम की ओर से कोई वैध वेंडिंग पहचान पत्र जारी किया गया था। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।


हालांकि दुकानदारों ने निगम के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे वर्षों से यहीं व्यवसाय कर रहे थे और स्थानीय प्रशासन उनकी मौजूदगी से भली-भांति परिचित था। उनका आरोप है कि उन्हें पुनर्वास या वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए बिना उनकी दुकानें तोड़ दी गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है।


नगर निगम के अनुसार उसके अधिकार क्षेत्र में अब तक करीब 200 किलोमीटर फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त कराए जा चुके हैं, जबकि लगभग 50 किलोमीटर फुटपाथ पर अभी भी कार्रवाई बाकी है। आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के अभियान जारी रहने की संभावना है।


इस कार्रवाई ने एक बार फिर विकास, सार्वजनिक सुविधाओं और छोटे व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां प्रशासन इसे कानून के पालन की कार्रवाई बता रहा है, वहीं प्रभावित दुकानदार पुनर्वास और राहत की मांग कर रहे हैं।

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