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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • पुस्तक समीक्षा -"इंद्रधनु मन के"

    समीक्षक -लालबहादुर चौरसिया लाल, कवि एवं साहित्यकार महामंत्री- विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई "इंद्रधनु मन के" काव्य-संग्रह आजमगढ़ के वरिष्ठ एवं श्रेष्ठ साहित्यकार श्री हरिहर प्रसाद पाठक जी की लंबी काव्य-यात्रा का एक वृहद दस्तावेज है। सैनिक शिक्षा कोर में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त श्री पाठक जी का रस-सिक्त हृदय रचनात्मकता से परिपूर्ण है। सामाजिक एवं प्रशासनिक भाग-दौड़ कभी उनकी रचनाशीलता पर अंकुश नहीं बन सकी। भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के साक्षी श्री पाठक आज अपने जीवन के 87वें वसंत की प्रतीक्षा में अपनी रचनाधर्मिता में मग्न हैं। "इंद्रधनु मन के" श्री पाठक जी का पहला प्रकाशित काव्य-संग्रह है। इसका प्रकाशन संकल्प प्रकाशन, दिल्ली द्वारा सन् 2023 में किया गया। दो सौ चौंसठ पृष्ठीय यह पुस्तक सिर्फ कविताओं का संकलन नहीं, वरन् एक रचनाकार की किशोरावस्था से लेकर जीवन के उत्तरार्ध तक के अनुभवों को समेटे हुए है। श्री पाठक जी ने इस पुस्तक को अपनी अर्धांगिनी स्वर्गीया दुर्गावती देवी जी की पावन स्मृति को समर्पित कर उनके न रहने पर भी अपने साथ होने का अहसास दिलाया है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, पंडित करुणापति त्रिपाठी जैसे नामचीन साहित्य-मनीषियों के अनुशंसा-पत्रों को शामिल करने से इस पुस्तक का साहित्यिक आभामंडल और भी दीप्त होता है। आजमगढ़ जनपद के साहित्य-पुरोधा प्रोफेसर प्रभुनाथ सिंह 'मयंक' द्वारा लिखा गया 'पूर्वाभास' हमें यह संग्रह पढ़ने के लिए सहज ही जिज्ञासु बना देता है। 'अपनी बात' शीर्षक के अंतर्गत श्री पाठक जी ने बहुत कुछ कह दिया है। लगभग 12 पृष्ठों में विस्तृत इस शीर्षक में उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र किया है तथा कविता के उद्देश्यों पर विधिवत प्रकाश डाला है। इस काव्य-संग्रह का शुभारंभ ज्ञान-विज्ञान की अधिष्ठात्री माँ शारदे की वंदना से हुआ है। कविवर पाठक जी को दीप, प्रकाश, भोर, बसंत इत्यादि बिंब बहुत प्रिय हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में सदैव आशावादी दृष्टिकोण को रेखांकित किया है। समाज को सचेत करने का कार्य एक आशावादी कवि ही कर सकता है। एक आशावादी व्यक्ति ही एक स्वस्थ समाज की स्थापना कर सकता है। श्री पाठक जी की कविताओं में मानवीयकरण की बेमिसाल झलक मिलती है। जैसे एक कविता देखें - सूरज ने हाथों से छू लिया पलाश-वन, धरती के आँगन में मधुबन हँसने लगा। एक और कविता देखें - जब छू देता रवि निज कर से, उषा के अरुण कपोल लोल। खग-कुल के माधुरिम कलरव से नादित हो जाता है खगोल।। कविवर हरिहर पाठक जी एक सेवानिवृत्त सैनिक होने के साथ-साथ एक श्रेष्ठ कवि भी हैं। आपकी कविताओं में एक सैनिक जैसा अनुशासन एवं संकल्प विद्यमान है। आज समाज में व्याप्त निराशा, स्वार्थ, भ्रष्टाचार और भ्रम के घने अंधकार की गोद में बैठकर कविवर पाठक जी स्वयं को एक जलते हुए दीप के रूप में देखते हैं और उनकी चाहत भी यही है कि सभी लोग एक दीपक की तरह जलें और घोर तम का दमन करें। सघन तम की गोद में, मैं एक दीपक जल रहा हूँ। साथ मेरे कोटि-कोटि दिए जलें, मैं चाहता हूँ, अलग हो तन, किंतु मन से मन मिले मैं चाहता हूँ।। ये पंक्तियाँ पूरी पुस्तक एवं रचनाकार की मनःस्थिति की भाव-भूमि का वर्णन करने के लिए पर्याप्त हैं। समाज में जाति, धर्म, भाषा, प्रांत या किसी भी प्रकार का जो विखंडन विद्यमान है, कवि ने उस समस्त विखंडन को समाप्त होने की पुनीत इच्छा व्यक्त की है, जो मानवता के लिए हितकारी है। अपनी कविताओं में श्री पाठक जी ने आजादी के जश्न, देश-प्रेम, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए लोगों से अपील भी की है और उसके परिणामों को भी व्याख्यायित किया है। श्री पाठक जी को किसी एक खास विधा या शैली में बाँधा नहीं जा सकता। आपकी रचनाओं में विरह-वेदना की टीस भी है, तो कहीं शृंगारिकता की तरलता है। कहीं नारी-सशक्तिकरण का शंखनाद करता हुआ मुक्तक है, तो कहीं ग्रामीण जीवन-शैली की दशा व दुर्दशा को परोसती हृदयस्पर्शी कविता। कहीं अतुकांत कविताओं का जखीरा है, तो कहीं मात्रिक छंदों की मर्यादा। कहीं भोजपुरी एवं ब्रजभाषा की मिठास है, कहीं दार्शनिक भाव का पुट है तो कहीं बाल मन को रिझाती बाल-कविताएँ। कविवर हरिहर पाठक जी ने भारत की पराधीनता से उत्पन्न दुर्दशा को भी देखा है और स्वतंत्र भारत का उत्सव भी मनाया है। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से वर्तमान समय के नेताओं को भी सचेत किया है। एक कविता देखें - स्वाधीन देश के नेता, तुम आजादी को तुम क्या जानो, धोती-कुर्ता-टोपी पहने, अपने को पहले पहचानो। हिंदी की गौरव गाथा गाती यह कविता बहुत ही महत्वपूर्ण है - हिंदी माथे का चंदन है मां के ललाट की बिंदी है। भारत की संपर्की भाषा यदि है कोई तो हिंदी है।। जब शृंगारिक रचनाओं पर कविवर पाठक जी की लेखनी चलती है तो लिखते हैं - घूंघट पट खोलो आज प्रिये। मैं तुमको अंगीकार करूँ।। मैं तेरे मन की मलय गंध, तुम मेरे मन की गंधवाह। मैं तेरे मन का विमल श्रोत, तुम मेरे मन का हो प्रवाह। तेरे कोमल संबंधों को कैसे न प्रिये स्वीकार करूँ।। "इंद्रधनु मन के" पुस्तक में सचमुच इंद्रधनुष के सप्तरंगी रंग विद्यमान हैं। बाल-कविताओं के साथ-साथ प्रौढ़ मुक्तकों की लड़ियों और दोहों से सुसज्जित यह संग्रह पठनीय है। पुस्तक के उत्तरार्ध में पृष्ठ संख्या 225 से 259 तक श्री पाठक जी ने हिंदी साहित्य जगत के सिरमौर कवियों के जीवन व उनकी रचनाओं का काव्यात्मक उल्लेख किया है, जो प्रणम्य है। संत कवि कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, पद्माकर, रहीम, रसखान, रत्नाकर, हरिऔध, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', रामधारी सिंह 'दिनकर' जैसे शीर्ष कवियों की रचनाओं को बड़ा ही रोचक एवं काव्यात्मकता से सजाया है। कुल मिलाकर श्री हरिहर प्रसाद पाठक जी ने अपने इस संग्रह को विविधवर्णी पुष्पों से सुसज्जित गुलदस्ते का रूप दिया है। यह पुस्तक अध्येताओं को एक अलग ही आनंदानुभूति प्रदान करेगी। यह पुस्तक एक रचनाकार की रचनाओं का संकलन ही नहीं, वरन् लोक-मंगल, लोक-रक्षण एवं लोक-रंजन की भावना से ओत-प्रोत एक सच्चे साहित्यकार का सच्चा दस्तावेज है। साहित्य जगत को 'इंद्रधनु मन के' नामक पुस्तक देने के लिए कविवर श्री हरिहर प्रसाद पाठक जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ तथा उनके सुदीर्घायु की ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ। आप से साहित्य जगत को और अपेक्षाएं हैं। -लालबहादुर चौरसिया लाल, कवि एवं साहित्यकार महामंत्री- विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई लालबहादुर चौरसिया (लाल) जी की अन्य रचना (1)ज्ञान का पिटारा व मन का सुकून है "देखा जब स्वप्न सबेरे (2)https://www.bhaarataarth.com/post/चुनमुनियाँ-कहानी

  • नेपाल में तबाही के बाद फिर बाढ़ का खतरा, तिब्बत की ओर जल-अवरोध टूटने की खबर से हाई अलर्ट

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) काठमांडू | 28 अगस्त 2026 नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के बीच एक बार फिर नए सैलाब का खतरा मंडरा रहा है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में पानी का स्तर बढ़ने की चेतावनी के बाद नेपाल प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। लोगों और राहत-बचाव दलों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने बताया है कि भीषण बाढ़ में अब तक 538 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। तिब्बत की ओर से फिर बढ़ा खतरा नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को जानकारी दी कि तिब्बत की ओर एक जल-अवरोध/डैम के फिर टूटने की सूचना मिली है। इसके बाद भोटेकोशी नदी क्षेत्र में पानी बढ़ने की आशंका के चलते प्रशासन ने लोगों को सतर्क किया और बचाव कार्यों को भी कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से रोककर सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए। इससे पहले चीन की ओर से भी सीमा क्षेत्र में बने नए जलाशय और बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक ग्लेशियर और मलबे के कारण बने जल-अवरोधों में पानी जमा होने से नीचे की ओर अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बचाव अभियान के बीच नई चुनौती बाढ़ से सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी कारण कई इलाकों तक राहत और बचाव दलों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है। NDRRMA के अनुसार हजारों सुरक्षाकर्मी खोज एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं और अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत के भी बड़ी संख्या में नागरिक नेपाल में फंसे या संपर्क से बाहर बताए गए हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में भारतीय नागरिकों की संख्या अलग-अलग समय पर बदलती रही है; इसलिए प्रकाशित समाचार में इसे “सैकड़ों भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया” लिखना अधिक सुरक्षित है। नेपाल में बुधवार को आई इस भीषण आपदा के बाद अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर लापता लोगों की तलाश और राहत-बचाव अभियान, तो दूसरी ओर संभावित नए सैलाब से प्रभावित आबादी को सुरक्षित रखना। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • रक्षाबंधन पर स्कूली छात्राओं ने प्रधानमंत्री मोदी को बांधी राखी

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 28 अगस्त 2026 रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री आवास में स्कूली छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी बांधी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने छात्राओं के साथ आत्मीयता से बातचीत की और उनके साथ खुशियों के पल साझा किए। रक्षाबंधन के अवसर पर बड़ी संख्या में स्कूली छात्राएं प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचीं। छात्राओं ने प्रधानमंत्री की कलाई पर राखी बांधी। प्रधानमंत्री ने भी बच्चों के साथ सहज अंदाज में संवाद किया और उनके साथ हाई-फाइव करते हुए उत्साह बढ़ाया। इस अवसर की तस्वीरों में प्रधानमंत्री मोदी बच्चों के बीच मुस्कुराते और उनसे बातचीत करते नजर आए। छात्राओं ने भी प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात के दौरान उत्साह और खुशी व्यक्त की। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है। प्रधानमंत्री के साथ छात्राओं का यह संवाद इसी आत्मीय भावना को दर्शाता है। भारतार्थ खबर — खबर नहीं, उसका अर्थ।

  • 33 उपवास की तपस्या, पूजा नाहर का हुआ अभिनंदन

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 28 अगस्त 2026। अलसूर स्थित सुब्रह्मण्यम स्वामी कल्याण मंडप में शुक्रवार को श्रीमती पूजा नाहर की 33 उपवास की दीर्घ तपस्या के उपलक्ष्य में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। तपस्या महोत्सव का आयोजन आत्मकल्याण, आत्मशुद्धि एवं कर्मनिर्जरा की भावना के साथ किया गया। श्रीमती पूजा नाहर ने गुरुदेव के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण भाव रखते हुए 33 उपवास की दीर्घ तपस्या आराधित की। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तपस्विनी की तपस्या के प्रति अनुमोदना व्यक्त की और उनके आत्मिक कल्याण की मंगलकामना की। कार्यक्रम में आचार्य भगवंत एवं साधु-साध्वियों के पावन सान्निध्य में प्रवचन एवं प्रत्याख्यान का आयोजन रखा गया। धार्मिक विधि-विधान के बाद मंगलगीत प्रस्तुत किए गए, जिससे कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय बना रहा। परिवार की ओर से सभी साधर्मिक बंधुओं से इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर तपस्विनी की तपस्या की अनुमोदना करने का आग्रह किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर तपस्या के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। समाचार प्रेषक: किशोर जैन दफतरी

  • मेट्रो के पास बनेंगे हाईराइज, FAR 500 तक

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। जमीन की सीमित उपलब्धता और तेजी से बढ़ती आबादी के बीच दिल्ली के शहरी विकास का स्वरूप बदलने की तैयारी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के नए मास्टर प्लान-2047 में सार्वजनिक परिवहन के आसपास घने और मिश्रित उपयोग वाले विकास को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत मेट्रो कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जा सकेगा। DDA के अनुसार, दिल्ली की आबादी वर्तमान में करीब 2.4 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2047 तक लगभग 3.2 करोड़ होने का अनुमान है। ऐसे में सीमित जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए ऊंची और अधिक घनत्व वाली इमारतों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास FAR 500 मास्टर प्लान-2047 के तहत ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) 500 तक रखने का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि भूखंड के आकार की तुलना में काफी अधिक कुल निर्मित क्षेत्र विकसित किया जा सकेगा। 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को मेट्रो कॉरिडोर के आसपास घने और हाईराइज विकास के लिए खोले जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, FAR 500 का अर्थ सीधे तौर पर हर स्थान पर 30 या 40 मंजिला इमारत बनना नहीं है। वास्तविक भवन की ऊंचाई भूखंड, सड़क की चौड़ाई, अग्नि सुरक्षा, विमानन और अन्य लागू भवन नियमों तथा संबंधित स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी। एक ही क्षेत्र में घर, दुकान और दफ्तर TOD का उद्देश्य लोगों के घर, रोजगार, खरीदारी और सार्वजनिक परिवहन को एक-दूसरे के करीब लाना है। मेट्रो और अन्य प्रमुख परिवहन केंद्रों के आसपास मिश्रित उपयोग वाले विकास से लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम हो सकती है। नई व्यवस्था में छोटे और किफायती आवासों पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार TOD भूखंडों में अनुमत निर्माण क्षेत्र का 65 प्रतिशत हिस्सा 60 वर्ग मीटर से कम कारपेट एरिया वाले फ्लैटों के लिए इस्तेमाल करने का प्रावधान है। झुग्गी पुनर्वास में भी बढ़ेगा निर्माण अधिकार मास्टर प्लान-2047 में इन-सिटू झुग्गी पुनर्वास योजनाओं के लिए भी FAR बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। पुनर्वास और व्यावसायिक, दोनों घटकों के लिए FAR को 500 तक करने की बात कही गई है। साथ ही ऐसे प्रोजेक्टों में पहले लागू अधिकतम घनत्व सीमा को हटाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य झुग्गी क्षेत्रों के पुनर्विकास को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना और पात्र निवासियों के लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराना है। जमीन के बजाय ऊंचाई पर जोर दिल्ली की भौगोलिक सीमाओं और जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए नई नीति का मूल विचार शहर को अनियंत्रित तरीके से बाहर फैलाने के बजाय परिवहन गलियारों के आसपास अधिक सघन विकास करना है। इससे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने, आवागमन की दूरी घटाने और शहर में आवास की उपलब्धता बढ़ाने की उम्मीद है। हालांकि, ऊंची इमारतों के बढ़ते विस्तार के साथ पानी, सीवर, बिजली, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, यातायात और हरित क्षेत्र जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका भी रहेगी। इसलिए योजना की सफलता केवल अधिक निर्माण की अनुमति पर नहीं, बल्कि उसके साथ जरूरी शहरी बुनियादी ढांचे के विकास पर भी निर्भर करेगी। DDA की आधिकारिक वेबसाइट पर मास्टर प्लान-2041 से संबंधित दस्तावेज और योजना संबंधी जानकारी उपलब्ध है।

  • सही रास्ता

    लेखक: अशोक कुमार सिंह "रिपोर्टर/मल्टीमीडिया' डायरेक्टर "भारतर्थ खबर' (बंगलुरु कर्नाटक) एक छोटे से गाँव में विवेक नाम का युवक रहता था। वह मेहनती और समझदार था, लेकिन उसे हमेशा लगता था कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उसे सही दिशा दिखाए। वह अक्सर गाँव के बाहर बैठकर सोचता कि आखिर कुछ लोग कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफल कैसे हो जाते हैं, जबकि कई लोग अवसर मिलने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाते। एक दिन विवेक गाँव के बुजुर्ग और विद्वान माधव बाबा के पास पहुँचा। उसने कहा, “बाबा, मैं जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता हूँ, लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि सही रास्ता कौन-सा है।” माधव बाबा मुस्कुराए और बोले, “अगर सच में रास्ता जानना चाहते हो तो कल सुबह मेरे साथ चलना।” अगली सुबह दोनों जंगल की ओर निकल पड़े। कुछ दूर जाने के बाद उन्हें तीन रास्ते दिखाई दिए। पहला रास्ता चौड़ा और सुंदर था। दूसरा रास्ता संकरा और कठिन था, लेकिन उस पर लोगों के पैरों के निशान दिखाई दे रहे थे। तीसरा रास्ता झाड़ियों से ढका हुआ था और लगभग दिखाई ही नहीं देता था। विवेक ने कहा, “बाबा, पहला रास्ता सबसे अच्छा लगता है। इतना चौड़ा और सुंदर रास्ता है, जरूर सही होगा।” बाबा ने कुछ नहीं कहा और उसके साथ उसी रास्ते पर चल पड़े। थोड़ी दूर जाने के बाद रास्ता एक दलदल में जाकर समाप्त हो गया। विवेक परेशान हो गया। बाबा ने पूछा, “रास्ता सुंदर था?” विवेक ने कहा, “हाँ।” बाबा बोले, “लेकिन क्या वह तुम्हें मंजिल तक ले गया?” विवेक के पास कोई उत्तर नहीं था। दोनों वापस लौटे और दूसरे रास्ते पर चलने लगे। रास्ता कठिन था। कहीं पत्थर थे, कहीं चढ़ाई थी और कई जगह उन्हें संभलकर आगे बढ़ना पड़ा। लेकिन कुछ दूर जाने के बाद उन्हें साफ पानी की एक नदी मिली। उसके किनारे हरे-भरे पेड़ थे। विवेक खुश हुआ, लेकिन बाबा ने कहा, “अभी सीख पूरी नहीं हुई है।” इसके बाद दोनों तीसरे रास्ते के सामने पहुँचे। विवेक ने कहा, “यह तो रास्ता ही नहीं लगता।” माधव बाबा बोले, “कभी-कभी जीवन के सबसे अच्छे रास्ते शुरुआत में दिखाई नहीं देते। उन्हें खोजने और बनाने के लिए साहस चाहिए।” विवेक ने झाड़ियाँ हटाईं और दोनों आगे बढ़े। रास्ता कठिन था, लेकिन कुछ समय बाद वे पहाड़ी की चोटी पर पहुँच गए। वहाँ से पूरा गाँव दिखाई दे रहा था। विवेक की आँखों में आश्चर्य था। बाबा ने पूछा, “अब बताओ, सबसे अच्छा रास्ता कौन-सा था?” विवेक ने कहा, “तीसरा रास्ता, क्योंकि वह कठिन था, लेकिन हमें सबसे ऊँची जगह तक ले गया।” माधव बाबा मुस्कुराए और बोले, “यही जीवन की सबसे बड़ी सीख है। जो रास्ता आसान दिखाई देता है, वह हमेशा सही नहीं होता और जो रास्ता कठिन होता है, वह हमेशा गलत नहीं होता। जीवन में रास्ते की कठिनाई से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी दिशा होती है।” विवेक ने पूछा, “लेकिन बाबा, सही दिशा कैसे पहचानी जाए?” बाबा ने कहा, “अपने निर्णय भीड़ को देखकर मत लेना। अपने उद्देश्य को समझो, अपनी क्षमता को पहचानो और निर्णय लेने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचो। अगर कभी गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करो और रास्ता बदलने से मत डरो।” उन्होंने आगे कहा, “ज्ञान केवल किताबें पढ़ने से नहीं मिलता। ज्ञान अनुभव से मिलता है, प्रश्न पूछने से मिलता है और अपनी गलतियों से सीखने से मिलता है। लेकिन ज्ञान की सबसे बड़ी पहचान तब होती है, जब इंसान अपने ज्ञान का उपयोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों की मदद के लिए करता है।” उस दिन विवेक गाँव वापस लौटा तो उसके सोचने का तरीका बदल चुका था। पहले वह अवसर का इंतजार करता था, अब वह अवसर खोजने लगा। पहले अपनी असफलता के लिए परिस्थितियों को दोष देता था, अब वह अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेने लगा। धीरे-धीरे उसने गाँव के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और जरूरतमंद बच्चों के लिए किताबें जुटाकर एक छोटी-सी पुस्तकालय भी बना दी। कुछ वर्षों बाद वही विवेक गाँव के युवाओं का मार्गदर्शक बन गया। एक दिन एक बच्चा उसके पास आया और बोला, “गुरुजी, मुझे समझ नहीं आता कि बड़ा होकर क्या बनूँ।” विवेक मुस्कुराया और बोला, “अभी यह तय करने की जल्दी मत करो कि तुम्हें क्या बनना है। पहले यह समझो कि तुम्हें कैसा इंसान बनना है। ईमानदार, मेहनती, जिम्मेदार और दूसरों के काम आने वाला इंसान बनोगे तो जीवन में सही दिशा अपने आप दिखाई देने लगेगी।” बच्चे ने पूछा, “अगर मैंने गलत रास्ता चुन लिया तो?” विवेक ने कहा, “तो वापस लौट आना। गलत रास्ते से लौटना असफलता नहीं है। गलत रास्ता पहचान लेने के बाद भी उसी पर चलते रहना असली असफलता है।” उस दिन विवेक को समझ आया कि माधव बाबा ने उसे केवल एक रास्ता नहीं दिखाया था, बल्कि सोचने का तरीका सिखाया था। यही सच्चे मार्गदर्शन की पहचान है। सीख: जीवन में सफलता केवल तेज चलने से नहीं मिलती, बल्कि सही दिशा में चलने से मिलती है। दूसरों की भीड़ का अनुसरण करने के बजाय अपने विवेक, अनुभव और उद्देश्य के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। सच्चा मार्गदर्शक वह नहीं जो हमारे लिए रास्ता चुन दे, बल्कि वह है जो हमें इतना सक्षम बना दे कि हम स्वयं सही रास्ता चुन सकें। ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह अन्य कहानी , मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी ज़रूर पढ़िए रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-1,रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-2,रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-3,रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-4,रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-5 कहानी माँ-की-आख-िरी-गुल्लक कहानी रिश्तों-की-सबसे-बड-ी-द-लत एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि भाग 01 ,भाग 02,भाग 03,भाग 4,भाग 5,भाग 6,भाग 7,भाग 8,भाग 9,भाग 10,भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; 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  • ज्ञान का पिटारा व मन का सुकून है "देखा जब स्वप्न सबेरे"----

    पुस्तक समीक्षा - समीक्षक लालबहादुर चौरसिया लाल 'साहित्य' शब्दों का मकड़जाल नहीं वरन विचारों का एक विशाल मंथन है। साहित्यकार जब हृदय को अध्ययन,स्वविवेक व यथार्थ की मथनी से मथता है तो आए दिन नवीनतम साहित्य निकाल कर बाहर आते हैं। जो धरा धाम को युगों युगों तक अपनी स्वर्णिम आभा, मधुरिम पराग व मनहर सुगंध से भरते रहते हैं। हिंदी साहित्य की दो विधाए हैं। गद्य साहित्य व पद्य साहित्य। गद्य साहित्य की अनेकों शाखाएं हैं। उन्ही शाखाओं में एक शाखा है 'यात्रा वृत्त' । यात्रा वृत्त गद्य की बड़ी ही रोचक विधा है। पाठक को यह बिल्कुल चलचित्र की अनुभूति प्रदान करती है। अभी हाल में ही मैंने ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ जितेंद्र पांडेय जी की पुस्तक "देखा जब स्वप्न सवेरे" पढ़ी। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'काका कालेलकर' पुरस्कार से पुरस्कृत तथा यात्रावृत्त के पैमाने पर सोरहो आने खरी उतरने वाली यह पुस्तक विशिष्ट है। डॉ जितेंद्र पांडेय जी ने भारत के विभिन्न स्थलों की अपने यात्रा के दौरान अलग-अलग शीर्षकों से ऐसा खाका तैयार किया है जो मन को आह्लादित ही नहीं सुकून व ज्ञान से भर देता है। पुस्तक पढ़ने पर ऐसा प्रतीत होता है कि पाठक पढ़ नहीं, वर्णित स्थलों को देख रहा हो। यह डॉ जितेंद्र पांडेय के उत्कृष्ट लेखन शैली का परिचय है। चाहे धार्मिक स्थल हो, पौराणिक स्थल हो, ऐतिहासिक स्थल हो, या किसी व्यक्ति विशेष से मुलाकात का वर्णन हो, सभी बेजोड़ है। यात्रा वृत्त "देखा जब स्वप्न सवेरे" का प्रथम पाठ "भय बिनु होय न प्रीति" से प्रारंभ होता है। इसमें दक्षिण भारत के पौराणिक स्थल रामेश्वरम के साथ-साथ वहां के अनेकों दर्शनीय व धार्मिक स्थलों का वृतांत समाहित है। लेखक डॉ जितेंद्र पांडेय जी ने यात्रा वृत्त के दौरान स्थलों का वर्णन ही नहीं किया अपितु पाठकों को पौराणिक, ऐतिहासिक व आस्था की चासनी से पगी हुई ज्ञान सलिला में डुबकी लगाने पर भी विवश किया है। विराट स्वरूप से लेकर सूक्ष्म जानकारी को भी साझा किया है, जो लेखक के साहित्य साधना का प्रमाण है। कहीं कहीं अपनी पीड़ा को भी प्रकट किया है।एक बानगी देखें- (पुस्तक- देखा जब स्वप्न सवेरे- पृष्ठ संख्या 13) "मंदिर की परिक्रमा करते समय चौबीस कुंडों के जल से स्नान करना पुण्य माना जाता है। कुछ कुंड सुख भी गए हैं। इनके जल औषधीय गुणों से युक्त हैं। इन कुंडों में स्नान करते हुए हम आगे बढ़ रहे थे किंतु इनकी गंदगी आस्था पर भारी पड़ने लगी। हरी काई और फंगस के बीच तैरती छोटी-छोटी मछलियां मंदिर प्रशासन की लापरवाही बयां कर रही थीं।" पुस्तक "देखा जब स्वप्न सवेरे" में "एक गुलशन था जलवा नुमा इस जगह" शीर्षक में डॉ. जितेंद्र पांडेय जी ने बीजापुर के गोलकुंडा का वर्णन बड़े ही व्यवस्थित ढंग से किया है। लगभग 2000 एकड़ में फैले इस विस्तृत भूखंड को साहित्यकार ने अपने यात्रा वृत्तांत के दौरान सन् 1364 से लेकर अब तक की तमाम गतिविधियों पर प्रकाश डाला है। चाहे सन् 1518 का कुतुबशाही शासन रहा हो, चाहे 1627 का औरंगजेब का अधिपत्य रहा हो या गोलकुंडा किले पर अंग्रेजी शासन रहा हो तथा अंग्रेजी शासन के बाद हिंदू राजा शिवाजी का आधिपत्य रहा हो। डॉ जितेंद्र पांडेय जी ने अनेकों ऐतिहासिक जानकारी पर प्रकाश डाला है । गोलकुंडा के वास्तु शैली, विभिन्न बेगमों के स्थापित महल, रोमांटिक प्रेम कथाओ एवं वहां के हीरे या अन्य वस्तुओं के वैश्विक बाजार का भी वर्णन बड़े ही संजीदगी से किया है। डॉ जितेंद्र पांडेय ने तात्कालिक दृश्य पर ऐसा प्रकाश डाला है जो वास्तव में पाठक को आनंद प्रदान करता है। जिसका एक उदाहरण देखें- (पुस्तक -देखा जब सपना सवेरे -पृष्ठ संख्या 18) "संगीत संवाद और प्रकाश के समवेत मिश्रण में गोलकुंडा का इतिहास उतरने लगा। सोते हुए इतिहास का स्रोत रिस रिस कर टलमल कर रहा था। तारों भरे आकाश के नीचे सदियां बोल रही थीं। ध्वनि और प्रकाश के सम्मिलित प्रभाव से हम जान पाए कि चार मील के दायरे में फैले गोलकुंडा फोर्ट की गाथा सन् 1364 से शुरू होती है।.............................................. लगभग डेढ़ घंटे तक हम गोलकुंडा के प्रांगण में बैठे इतिहास के वैभव और पतन के महानगर में डूबते उतरते रहे।" गोलकुंडा के विभिन्न दृश्यों का वर्णन करते-करते देश के बड़े चिड़ियाघर "नेहरू प्राणी उद्यान" देखने के उपरांत लेखक डॉक्टर जितेंद्र पांडे द्रवित हो उठते हैं। यात्रा वृत्त से कुछ हटकर अपने मन की पीड़ा को स्थान देना उन्होंने उपर्युक्त समझा और होना भी चाहिए। पीड़ा कहीं की हो उसका उद्गार तो होना ही चाहिए। यही कलमकार को श्रेष्ठता की तरफ ले जाती है। (देखें पुस्तक देखा जब स्वप्न सवेरे -पृष्ठ 23) "मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है। मनोरंजन के नाम पर जीवों को कैद करना कितना उचित है। काश!इन बेजुबानों के दर्द की एक लिपि होती। यह भी न्याय की फरियाद कर पाते। मनुष्य ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कचहरियां तो बना ली है किंतु इनका क्या? कुछ सौभाग्यशाली पशु पक्षियों के अलावा बाकी न्याय की प्रतीक्षा में रत। दूसरी तरफ विलुप्तप्राय प्राणियों का संरक्षण करता मानव देव तुल्य लगा।इन्हीं विचारों में डूबता उतराता मैं चिड़ियाघर से बाहर निकल आया।" "देखा जब स्वप्न सवेरे" पुस्तक में एक शीर्षक है "योगियों मनीषियों की ज़मीं पर" जिसमें लेखक ने साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी से मुलाकात का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया है। साथ ही साथ गोरखपुर के तपोवन व अनेकों तपस्वीयों का व्यापक वर्णन करते हुए गोरखनाथ मंदिर का सजीव चित्रण उकेरा है। देखें- ("देखा जब स्वप्न सवेरे"- पृष्ठ27) "भीतरी कक्ष के मुख्य वेदी पर गोरखनाथ की दिव्य मूर्ति है। पास में ही इनकी चरण पादुका भी है। गोरखनाथ हठ योगी थे। माना जाता है त्रेता में इस योगी ने यहां पर धुनी रमई थी। जिसकी अखंड ज्योति आज भी जल रही है। यह ज्ञान ज्योति अखंडता और एकता की प्रतीक है। महाभारत काल के पांडवों ने राजसूय यज्ञ किया था।पांडवों की तरफ से भीम गोरखनाथ के लिए निमंत्रण पत्र लेकर आए थे। उस समय वे ध्यानस्थ थे।अतः भीम को महीनों मठ के बाहर इंतजार करना पड़ा। आज भी मंदिर के बाहर भीम की विशालकाय प्रतिमा विश्राम की मुद्रा में लेटी है। प्राचीन काल से यह यौगिक साधना का प्रसिद्ध केंद्र रहा है। इसी कारण मुगल सम्राटों ने इस मठ को मटिया मेट करने की कई बार कोशिशें की।" इसी प्रकार "देखा जब स्वप्न सवेरे" यात्रा वृत्त में डॉ जितेंद्र पांडेय जी ने 'गंगा का मौन हाहाकार' 'देखा जब स्वप्न सवेरे' 'को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ' 'उत्तर दिसि सरयू बह पावन' 'जल में कुंभ' 'झरती आस्थाएं' जैसे अनेकों शीर्षक रूपी पुष्पों का ऐसा गुलदस्ता तैयार किया है जो साहित्याकाश में दीप्तिमान सितारों के समान प्रतीत होता है। लेखक डॉ जितेंद्र पांडेय जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। यदि आपको अवसर मिले तो डॉ जितेंद्र जी की पुस्तक "देखा जब स्वप्न सवेरे" यात्रा वृत्त अवश्य पढ़िएगा। धन्यवाद, -लालबहादुर चौरसिया 'लाल' महामंत्री ( विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़)

  • हनुमान भक्ति से गूंजा श्रीराम कथा का आठवां दिन

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलूरु, 26 अगस्त 2026। होसूर बंडे स्थित श्री कृष्णा गोसेवा आश्रम गोशाला में मातेश्वरी भक्त मंडल के तत्वावधान में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर भगवान श्रीराम के उत्तर चरित्र, रामराज्य के आदर्शों और हनुमान जी की अनन्य भक्ति का श्रवण किया। कथा वाचक संत किशोरचन्द रामायणी ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, न्याय और प्रजा के प्रति समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल शासन व्यवस्था का नाम नहीं है, बल्कि ऐसा आदर्श है, जिसमें न्याय, सेवा, समानता, धर्म और लोककल्याण की भावना सर्वोपरि रहती है। संत किशोरचन्द रामायणी ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए मनुष्य अपने आचरण से परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। कथा के दौरान वीर हनुमान जी की भव्य जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हनुमान भक्ति का महत्व बताते हुए संत ने कहा कि हनुमान जी की भक्ति निष्काम सेवा, पूर्ण समर्पण और अहंकार रहित आचरण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा, बल्कि भगवान श्रीराम की सेवा को ही अपना परम सौभाग्य माना। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अहंकार का त्याग कर श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना से जीवन जीने का प्रयास करे तो उसका जीवन अधिक सार्थक और समाजोपयोगी बन सकता है। इस अवसर पर स्वामी पुष्करदास महाराज ने बताया कि गुरुवार को नौ दिवसीय श्रीराम कथा की भव्य पूर्णाहुति आयोजित की जाएगी। पूर्णाहुति के बाद रात्रि में विशेष भजन संध्या का आयोजन होगा। भजन संध्या में गोभक्त डॉ. ओम मुडेल अपने भजनों की प्रस्तुति देंगे। Focus Keyword: श्रीराम कथा, हनुमान भक्ति, रामराज्य, संत किशोरचन्द रामायणी, बेंगलूरु श्रीराम कथा

  • काजिया लिज मेजो बनीं मिस यूनिवर्स इंडिया 2026

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com जयपुर, 26 अगस्त 2026। केरल के मावेलिक्कारा की 19 वर्षीय काजिया लिज मेजो ने मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का खिताब जीत लिया है। जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में काजिया ने अन्य प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए प्रतिष्ठित ताज अपने नाम किया। काजिया कानून की छात्रा होने के साथ मॉडल और शास्त्रीय नृत्यांगना भी हैं। इससे पहले वह वर्ष 2025 में मिस टीन इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर फर्स्ट रनर-अप रह चुकी हैं। वर्ष 2026 में उन्होंने मिस यूनिवर्स केरल का खिताब भी जीता था। राष्ट्रीय स्तर पर मिस यूनिवर्स इंडिया का ताज हासिल करने के बाद काजिया अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नवंबर 2026 में प्यूर्टो रिको में आयोजित होने वाली 75वीं मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में वह भारत की प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लेंगी। काजिया की उपलब्धि को केरल सहित देश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कानून की पढ़ाई के साथ मॉडलिंग और शास्त्रीय नृत्य में सक्रिय काजिया ने सौंदर्य प्रतियोगिताओं के मंच पर लगातार अपनी पहचान बनाई है। उनकी सफलता युवा प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। शिक्षा के साथ कला और अन्य क्षेत्रों में निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और अनुशासन के जरिए युवा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। काजिया लिज मेजो मिस यूनिवर्स इंडिया 2026

  • IIT दिल्ली छात्र की मौत, अज्ञात पर केस

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई छात्र की मौत के बाद परिसर में लगातार दो दिन हुए प्रदर्शन के बीच हुई है। पुलिस के अनुसार, घटना 22 अगस्त को हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ऋषिकेश कुमार लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से नीचे गिर गए थे। संस्थान के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की सूचना के बाद पुलिस ने उसी दिन मामले में प्राथमिकी दर्ज की। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत कार्रवाई पुलिस अधिकारी के मुताबिक, प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई वाली नेशनल टास्क फोर्स (NTF) की सिफारिशों के अनुरूप की गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की घटनाओं को लेकर गठित NTF ने ऐसी घटनाओं पर संस्थानों और पुलिस की जवाबदेही को लेकर कई सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में किसी भी अप्राकृतिक मौत या आत्महत्या की घटना की तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना देने और मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस जांच के दौरान पुलिस ने संस्थान में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में लेकर उसकी पड़ताल शुरू की है। प्रारंभिक तौर पर फुटेज में ऋषिकेश कुमार घटना से कुछ समय पहले अकेले परिसर में चलते दिखाई दिए। इसके बाद वह लिफ्ट के जरिए लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल की ओर जाते नजर आए। पुलिस अब CCTV फुटेज के अलावा घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकी फिलहाल अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्रों ने किया प्रदर्शन छात्र की मौत के बाद IIT दिल्ली परिसर में विद्यार्थियों ने लगातार दो दिनों तक प्रदर्शन किया। छात्रों ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच तथा संस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर कदम उठाने की मांग की। संस्थान प्रशासन की ओर से भी पुलिस को शिकायत देकर मामले की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। इस साल दूसरी ऐसी घटना पुलिस के अनुसार, इस वर्ष IIT दिल्ली में किसी छात्र की कथित आत्महत्या से जुड़ी यह दूसरी घटना है। इससे पहले मार्च में 19 वर्षीय BTech छात्र हर्षित स्वामी हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। उस मामले में भी संस्थान के सुरक्षा अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हर्षित स्वामी मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। वहीं, ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले में पुलिस फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि ऋषिकेश कुमार की मौत के वास्तविक कारण और किसी व्यक्ति की संभावित भूमिका का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल मामले में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

  • जापान में पीयूष गोयल का बड़ा संकेत, आसान होंगे BIS नियम

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com टोक्यो, 26 अगस्त 2026। भारत में सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार नियामकीय प्रक्रियाओं को और सरल बनाने पर काम कर रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के दौरान सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में कारोबार सुगमता और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने पर जोर दिया। भारत सरकार के अनुसार, जापान भारत के सेमीकंडक्टर, एआई, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है। बैठक में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से जुड़े प्रमाणन और अनुपालन आवश्यकताओं को लेकर जापानी कंपनियों की चिंताओं पर चर्चा हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों के लिए जरूरी उपकरणों और कलपुर्जों की आपूर्ति में नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों का मुद्दा उठाया गया। प्रमाणन प्रक्रिया आसान करने पर जोर पीयूष गोयल ने उद्योग की ओर से सामने रखी गई चिंताओं को गंभीरता से लेने की बात कही। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में नई विनिर्माण परियोजनाएं शुरू करने वाली कंपनियों को जरूरी मशीनरी, उपकरण और कलपुर्जों की उपलब्धता में अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े। हालांकि, यह स्पष्ट है कि BIS मानकों को खत्म करने के बजाय प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और निवेश-अनुकूल बनाने पर जोर है। किसी विशेष उत्पाद, परियोजना या श्रेणी के लिए छूट अथवा अलग व्यवस्था लागू करने का अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही होगा। सेमीकंडक्टर और AI पर भारत की नजर भारत सरकार सेमीकंडक्टर और एआई को भविष्य के औद्योगिक विकास के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देख रही है। सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उन्नत तकनीकों की आधारभूत जरूरत है। भारत में चिप निर्माण से लेकर डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला तक क्षमता विकसित करने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन पर काम चल रहा है। पीयूष गोयल ने हाल में भी कहा है कि एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्र भारत के औद्योगिक विकास की अगली दिशा तय करेंगे। सरकार ने इन क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल की हैं। जापान को अहम साझेदार मान रहा भारत पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं और 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधियों वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, वाहन, वित्तीय सेवाओं और स्टार्टअप सहित कई क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं। जापानी निवेशकों के साथ बातचीत में भारत ने सेमीकंडक्टर, एआई, डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया है। सरकार जापानी कंपनियों को भारत में उत्पादन और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। निवेश बढ़ाने की रणनीति सरकार का व्यापक लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके लिए एक ओर घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विदेशी कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करने और उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की जा रही है। भारत-जापान सहयोग में सेमीकंडक्टर और एआई को रणनीतिक महत्व भी मिल रहा है। जुलाई 2026 में दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के तहत सेमीकंडक्टर और एआई समेत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। ऐसे में BIS प्रमाणन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने की पहल सफल होती है तो इससे भारत में नई इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की स्थापना को गति मिलने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव प्रस्तावित बदलावों के लागू होने और उनके दायरे पर निर्भर करेगा।

  • मोदी कैबिनेट में फेरबदल की आहट, 12 पद खाली; दावेदारों की लंबी सूची

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। भारतीय जनता पार्टी की नई केंद्रीय टीम के गठन के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संभावित बदलाव को आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 सदस्यीय लोकसभा के आधार पर यह अधिकतम 81 मंत्री बैठती है। दिए गए विवरण के अनुसार फिलहाल मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं, जिससे 12 पदों की गुंजाइश बताई जा रही है। कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग संभावित फेरबदल की एक वजह मंत्रालयों के कामकाज का संतुलन भी माना जा रहा है। वर्तमान में कई केंद्रीय मंत्री एक से अधिक मंत्रालयों या विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर मंत्रालयों का बोझ कम करने की संभावना जताई जा रही है। किन नेताओं के पद पर उठ रहे सवाल? भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद कुछ नेताओं के संभावित रूप से सरकार से संगठन में जाने की चर्चा है। इनमें पीयूष गोयल का नाम भी शामिल है, जिन्हें पार्टी की नई केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को क्रमशः दिल्ली और उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं। वहीं, हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा के राज्यसभा कार्यकाल की आगामी समाप्ति को देखते हुए भी मंत्रिपरिषद में संभावित बदलाव की चर्चा हो रही है। भाजपा में सामान्य तौर पर ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति को संगठनात्मक फैसलों में महत्व दिया जाता है। युवा और महिला चेहरों पर नजर संभावित विस्तार में युवाओं और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की अटकलें भी हैं। मंत्रिपरिषद में वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों का संतुलन बनाने पर पार्टी का जोर रह सकता है। इसी क्रम में पंजाब की राजनीति से हरसिमरत कौर बादल का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में है। हालांकि, अकाली दल और भाजपा के बीच राजनीतिक समीकरणों तथा किसी संभावित गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए राज्यसभा सांसदों के समूह से भी किसी नेता को केंद्र में जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर भी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। सहयोगी दलों को मिल सकता है प्रतिनिधित्व महाराष्ट्र में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के साथ गठबंधन के समीकरणों को देखते हुए श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित मंत्रियों में चर्चा में है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए और एनडीए का समर्थन कर रहे नेताओं को भी केंद्रीय सरकार में प्रतिनिधित्व देने की संभावना पर राजनीतिक हलकों में चर्चा है। विधानसभा चुनावों का दिख सकता है असर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से नए चेहरों को केंद्र में स्थान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा विपक्षी दलों की सरकार वाले कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राजनीतिक समीकरण भी संभावित फेरबदल में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व को करना है। इसलिए संभावित नामों को लेकर चल रही चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक सरकार की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं हो जाती।

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