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मेट्रो के पास बनेंगे हाईराइज, FAR 500 तक

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 28 अग॰
  • 2 मिनट पठन
नीले आकाश में तीन ऊँची अपार्टमेंट इमारतें, सामने पेड़ और हरी घास, शांत आधुनिक शहरी दृश्य।

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। जमीन की सीमित उपलब्धता और तेजी से बढ़ती आबादी के बीच दिल्ली के शहरी विकास का स्वरूप बदलने की तैयारी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के नए मास्टर प्लान-2047 में सार्वजनिक परिवहन के आसपास घने और मिश्रित उपयोग वाले विकास को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत मेट्रो कॉरिडोर के आसपास बड़े पैमाने पर आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जा सकेगा।

DDA के अनुसार, दिल्ली की आबादी वर्तमान में करीब 2.4 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2047 तक लगभग 3.2 करोड़ होने का अनुमान है। ऐसे में सीमित जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए ऊंची और अधिक घनत्व वाली इमारतों के विकास पर जोर दिया जा रहा है।


मेट्रो कॉरिडोर के आसपास FAR 500


मास्टर प्लान-2047 के तहत ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) 500 तक रखने का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि भूखंड के आकार की तुलना में काफी अधिक कुल निर्मित क्षेत्र विकसित किया जा सकेगा। 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को मेट्रो कॉरिडोर के आसपास घने और हाईराइज विकास के लिए खोले जाने की जानकारी सामने आई है।


हालांकि, FAR 500 का अर्थ सीधे तौर पर हर स्थान पर 30 या 40 मंजिला इमारत बनना नहीं है। वास्तविक भवन की ऊंचाई भूखंड, सड़क की चौड़ाई, अग्नि सुरक्षा, विमानन और अन्य लागू भवन नियमों तथा संबंधित स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।


एक ही क्षेत्र में घर, दुकान और दफ्तर


TOD का उद्देश्य लोगों के घर, रोजगार, खरीदारी और सार्वजनिक परिवहन को एक-दूसरे के करीब लाना है। मेट्रो और अन्य प्रमुख परिवहन केंद्रों के आसपास मिश्रित उपयोग वाले विकास से लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम हो सकती है।


नई व्यवस्था में छोटे और किफायती आवासों पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार TOD भूखंडों में अनुमत निर्माण क्षेत्र का 65 प्रतिशत हिस्सा 60 वर्ग मीटर से कम कारपेट एरिया वाले फ्लैटों के लिए इस्तेमाल करने का प्रावधान है।


झुग्गी पुनर्वास में भी बढ़ेगा निर्माण अधिकार


मास्टर प्लान-2047 में इन-सिटू झुग्गी पुनर्वास योजनाओं के लिए भी FAR बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। पुनर्वास और व्यावसायिक, दोनों घटकों के लिए FAR को 500 तक करने की बात कही गई है। साथ ही ऐसे प्रोजेक्टों में पहले लागू अधिकतम घनत्व सीमा को हटाने का प्रस्ताव है।


इसका उद्देश्य झुग्गी क्षेत्रों के पुनर्विकास को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना और पात्र निवासियों के लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराना है।


जमीन के बजाय ऊंचाई पर जोर


दिल्ली की भौगोलिक सीमाओं और जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए नई नीति का मूल विचार शहर को अनियंत्रित तरीके से बाहर फैलाने के बजाय परिवहन गलियारों के आसपास अधिक सघन विकास करना है। इससे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने, आवागमन की दूरी घटाने और शहर में आवास की उपलब्धता बढ़ाने की उम्मीद है।


हालांकि, ऊंची इमारतों के बढ़ते विस्तार के साथ पानी, सीवर, बिजली, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, यातायात और हरित क्षेत्र जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका भी रहेगी। इसलिए योजना की सफलता केवल अधिक निर्माण की अनुमति पर नहीं, बल्कि उसके साथ जरूरी शहरी बुनियादी ढांचे के विकास पर भी निर्भर करेगी।


DDA की आधिकारिक वेबसाइट पर मास्टर प्लान-2041 से संबंधित दस्तावेज और योजना संबंधी जानकारी उपलब्ध है।

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