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जापान में पीयूष गोयल का बड़ा संकेत, आसान होंगे BIS नियम

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 27 अग॰
  • 3 मिनट पठन
मंच पर माइक के सामने चश्मा पहने व्यक्ति बोलते हुए, उंगली उठाए; हल्की पृष्ठभूमि में गंभीर माहौल।

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com टोक्यो, 26 अगस्त 2026। भारत में सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार नियामकीय प्रक्रियाओं को और सरल बनाने पर काम कर रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के दौरान सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में कारोबार सुगमता और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने पर जोर दिया। भारत सरकार के अनुसार, जापान भारत के सेमीकंडक्टर, एआई, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है।


बैठक में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से जुड़े प्रमाणन और अनुपालन आवश्यकताओं को लेकर जापानी कंपनियों की चिंताओं पर चर्चा हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों के लिए जरूरी उपकरणों और कलपुर्जों की आपूर्ति में नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों का मुद्दा उठाया गया।


प्रमाणन प्रक्रिया आसान करने पर जोर


पीयूष गोयल ने उद्योग की ओर से सामने रखी गई चिंताओं को गंभीरता से लेने की बात कही। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में नई विनिर्माण परियोजनाएं शुरू करने वाली कंपनियों को जरूरी मशीनरी, उपकरण और कलपुर्जों की उपलब्धता में अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े।


हालांकि, यह स्पष्ट है कि BIS मानकों को खत्म करने के बजाय प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और निवेश-अनुकूल बनाने पर जोर है। किसी विशेष उत्पाद, परियोजना या श्रेणी के लिए छूट अथवा अलग व्यवस्था लागू करने का अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।


सेमीकंडक्टर और AI पर भारत की नजर


भारत सरकार सेमीकंडक्टर और एआई को भविष्य के औद्योगिक विकास के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देख रही है। सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उन्नत तकनीकों की आधारभूत जरूरत है। भारत में चिप निर्माण से लेकर डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला तक क्षमता विकसित करने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन पर काम चल रहा है।


पीयूष गोयल ने हाल में भी कहा है कि एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्र भारत के औद्योगिक विकास की अगली दिशा तय करेंगे। सरकार ने इन क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल की हैं।


जापान को अहम साझेदार मान रहा भारत


पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं और 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधियों वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, वाहन, वित्तीय सेवाओं और स्टार्टअप सहित कई क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं।


जापानी निवेशकों के साथ बातचीत में भारत ने सेमीकंडक्टर, एआई, डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया है। सरकार जापानी कंपनियों को भारत में उत्पादन और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।


निवेश बढ़ाने की रणनीति


सरकार का व्यापक लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके लिए एक ओर घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विदेशी कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करने और उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की जा रही है।


भारत-जापान सहयोग में सेमीकंडक्टर और एआई को रणनीतिक महत्व भी मिल रहा है। जुलाई 2026 में दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के तहत सेमीकंडक्टर और एआई समेत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।


ऐसे में BIS प्रमाणन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने की पहल सफल होती है तो इससे भारत में नई इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की स्थापना को गति मिलने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव प्रस्तावित बदलावों के लागू होने और उनके दायरे पर निर्भर करेगा।

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