मोदी कैबिनेट में फेरबदल की आहट, 12 पद खाली; दावेदारों की लंबी सूची
- धन्नाराम चौधरी

- 27 अग॰
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भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। भारतीय जनता पार्टी की नई केंद्रीय टीम के गठन के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संभावित बदलाव को आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 सदस्यीय लोकसभा के आधार पर यह अधिकतम 81 मंत्री बैठती है। दिए गए विवरण के अनुसार फिलहाल मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं, जिससे 12 पदों की गुंजाइश बताई जा रही है।
कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग
संभावित फेरबदल की एक वजह मंत्रालयों के कामकाज का संतुलन भी माना जा रहा है। वर्तमान में कई केंद्रीय मंत्री एक से अधिक मंत्रालयों या विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर मंत्रालयों का बोझ कम करने की संभावना जताई जा रही है।
किन नेताओं के पद पर उठ रहे सवाल?
भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद कुछ नेताओं के संभावित रूप से सरकार से संगठन में जाने की चर्चा है। इनमें पीयूष गोयल का नाम भी शामिल है, जिन्हें पार्टी की नई केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को क्रमशः दिल्ली और उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं।
वहीं, हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा के राज्यसभा कार्यकाल की आगामी समाप्ति को देखते हुए भी मंत्रिपरिषद में संभावित बदलाव की चर्चा हो रही है। भाजपा में सामान्य तौर पर ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति को संगठनात्मक फैसलों में महत्व दिया जाता है।
युवा और महिला चेहरों पर नजर
संभावित विस्तार में युवाओं और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की अटकलें भी हैं। मंत्रिपरिषद में वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों का संतुलन बनाने पर पार्टी का जोर रह सकता है।
इसी क्रम में पंजाब की राजनीति से हरसिमरत कौर बादल का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में है। हालांकि, अकाली दल और भाजपा के बीच राजनीतिक समीकरणों तथा किसी संभावित गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।
आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए राज्यसभा सांसदों के समूह से भी किसी नेता को केंद्र में जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर भी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
सहयोगी दलों को मिल सकता है प्रतिनिधित्व
महाराष्ट्र में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के साथ गठबंधन के समीकरणों को देखते हुए श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित मंत्रियों में चर्चा में है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए और एनडीए का समर्थन कर रहे नेताओं को भी केंद्रीय सरकार में प्रतिनिधित्व देने की संभावना पर राजनीतिक हलकों में चर्चा है।
विधानसभा चुनावों का दिख सकता है असर
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से नए चेहरों को केंद्र में स्थान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा विपक्षी दलों की सरकार वाले कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राजनीतिक समीकरण भी संभावित फेरबदल में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व को करना है। इसलिए संभावित नामों को लेकर चल रही चर्चाओं को अभी राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक सरकार की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं हो जाती।
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