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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • अंतरिक्ष में भारत की नई ‘आंख’

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com श्रीहरिकोटा, 4 सितंबर 2026। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शुक्रवार तड़के GSLV-F17 रॉकेट के माध्यम से EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी निगरानी क्षमता को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण परिसर से सुबह 2:55 बजे GSLV-F17 ने उड़ान भरी। इसरो के अनुसार, रॉकेट ने EOS-05 को सफलतापूर्वक निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। जियोसिंक्रोनस कक्षा से भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान है। इसरो के अनुसार, यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की निगरानी के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इस प्रकार की कक्षा से उपग्रह किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र की अपेक्षाकृत निरंतर निगरानी करने की क्षमता प्रदान कर सकता है। इससे पृथ्वी अवलोकन और विभिन्न भौगोलिक गतिविधियों के अध्ययन में भारत की तकनीकी क्षमता को विस्तार मिलने की संभावना है। EOS-05 मिशन को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। 18 मिनट में तय की अंतरिक्ष यात्रा का अहम चरण प्रक्षेपण के बाद GSLV-F17 ने निर्धारित उड़ान क्रम के अनुसार उपग्रह को उसके लक्षित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह मिशन GSLV प्रक्षेपण यान की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 के सफल प्रक्षेपण के साथ इसरो ने एक बार फिर जटिल अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम देने की अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है। पृथ्वी निगरानी में मिलेगी नई मजबूती EOS-05 को पृथ्वी अवलोकन से जुड़े उद्देश्यों के लिए विकसित किया गया है। उपग्रह से प्राप्त आंकड़े भविष्य में मौसम, पर्यावरण, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य भू-आधारित गतिविधियों की निगरानी जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं। जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग की क्षमता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इससे किसी व्यापक क्षेत्र पर लगातार नजर रखने की संभावना बढ़ती है। हालांकि उपग्रह की विभिन्न सेवाओं और परिचालन उपयोग से संबंधित विस्तृत जानकारी मिशन के आगामी चरणों और इसरो की आधिकारिक घोषणाओं के बाद और स्पष्ट होगी। प्रधानमंत्री ने दी इसरो टीम को बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ते सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई मजबूती मिल रही है। आत्मनिर्भर भारत की अंतरिक्ष यात्रा में महत्वपूर्ण कदम EOS-05 मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता ऐसे समय में आई है, जब भारत अंतरिक्ष अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन, उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। GSLV-F17 और EOS-05 मिशन की सफलता ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। आने वाले समय में उपग्रह के परिचालन चरण और इससे मिलने वाले आंकड़ों की उपयोगिता पर वैज्ञानिक जगत की नजर रहेगी।

  • भारत-बेल्जियम रिश्तों में नई रफ्तार

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026। भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। वार्ता में दोनों देशों ने पारंपरिक आर्थिक संबंधों को नई तकनीकी साझेदारी से जोड़ने पर जोर दिया। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य भारत और बेल्जियम ने आने वाले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की महत्वाकांक्षा व्यक्त की है। दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने तथा कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया। भारत में बेल्जियम के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश संबंधी प्रक्रियाओं को तेज करने और दोनों देशों के कारोबारी समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी सहमति बनने की बात सामने आई है। सेमीकंडक्टर से स्वच्छ ऊर्जा तक साझेदारी बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर उच्च तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माने जाते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग से निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलने की संभावना है। भारत के लिए यूरोप के साथ तकनीकी एवं औद्योगिक साझेदारी महत्वपूर्ण है, वहीं बेल्जियम के लिए भारत का विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था नए कारोबारी अवसर उपलब्ध करा सकती है। रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर भी जोर द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग को मजबूत करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर दोनों पक्षों ने विचार किया। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का बढ़ता महत्व भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और प्रासंगिक बनाता है। ऐसे में रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता संवाद दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर सकता है। आर्थिक रिश्तों से रणनीतिक साझेदारी तक भारत-बेल्जियम संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं। तकनीक, ऊर्जा, निवेश, महत्वपूर्ण खनिज और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक आयाम दे रहा है। हालांकि व्यापार और निवेश के लक्ष्यों को वास्तविक उपलब्धियों में बदलने के लिए नीतिगत समन्वय, निवेश सुगमता और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यदि प्रस्तावित सहयोग को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाता है, तो भारत-बेल्जियम साझेदारी आने वाले वर्षों में व्यापार और तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

  • बेंगलुरु में पेरेंटिंग शाला, बच्चों की परवरिश और संस्कारों पर विशेष जोर

    भारतार्थ खबर | Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 24 अगस्त 2026। आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में रविवार को बेंगलुरु में ‘पेरेंटिंग शाला’ का आयोजन किया गया। ‘साथ जुड़ें, साथ सीखें और साथ बढ़ें’ की भावना पर आधारित इस विशेष कार्यक्रम में अभिभावकों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आधुनिक जीवनशैली में बच्चों के पालन-पोषण, व्यक्तित्व निर्माण, पारिवारिक संवाद और संस्कारों को लेकर सामने आ रही चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी। इसका उद्देश्य केवल अभिभावकों को बच्चों की परवरिश से जुड़ी जानकारी देना नहीं, बल्कि परिवार में आपसी संवाद, समझ और विश्वास को मजबूत करना भी रहा। ‘सुधारने से पहले जुड़ें’ पर जोर कार्यक्रम की शुरुआत नाश्ता, पंजीकरण और स्वागत सामग्री वितरण से हुई। इसके बाद ‘सुधारने से पहले जुड़ें’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें बच्चों के व्यवहार में बदलाव लाने से पहले उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव, विश्वास और प्रभावी संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अभिभावकों को यह संदेश दिया गया कि बच्चों को केवल निर्देश देने या नियंत्रित करने के बजाय उनकी भावनाओं, आवश्यकताओं और दृष्टिकोण को समझना जरूरी है। संवाद और विश्वास को पारिवारिक संबंधों की मजबूत आधारशिला बताते हुए कहा गया कि सुधार से पहले संबंध और अनुशासन से पहले संवाद आवश्यक है। बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियां पेरेंटिंग शाला में बच्चों के लिए ‘रंगों की दुनिया’ नाम से विशेष चित्रकला गतिविधि आयोजित की गई। बच्चों ने रंगों के माध्यम से अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्त किया। इसके अलावा खेल एवं गतिविधि क्षेत्र में मनोरंजक खेल, रचनात्मक गतिविधियां तथा जैन कथाओं और जीवन-मूल्यों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों के लिए विशेष जैन फास्ट फूड की व्यवस्था भी की गई। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना रहा, जिसमें वे खेल-खेल में सीख सकें, रचनात्मक रूप से सोच सकें और अपने संस्कारों से जुड़े रहें। डॉ. रीना जैन ने किया मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण अभिभावकों के लिए आयोजित मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन सत्र रहा। मनोविज्ञान के क्षेत्र में 23 से अधिक वर्षों के अनुभव वाली डॉ. रीना जैन ने बच्चों के पालन-पोषण से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों के व्यवहार को समझने, उनकी भावनाओं को पहचानने, प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा बदलते पारिवारिक परिवेश में अभिभावकों की भूमिका जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी साझा की। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों की कई समस्याओं का समाधान केवल डांट, नियंत्रण या दबाव से नहीं, बल्कि धैर्य, समझ, संवाद और सकारात्मक व्यवहार से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। ‘जड़ें और पंख’ का संदेश इसके बाद माता-पिता और बच्चों का संयुक्त सत्र ‘जड़ें और पंख’ विषय पर आयोजित किया गया। ‘मजबूत जड़ें, स्वतंत्र पंख’ को सत्र का मूल संदेश बनाया गया। इसमें बच्चों को संस्कृति, परिवार और संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा, सोच और व्यक्तित्व के स्वतंत्र विकास के महत्व को रेखांकित किया गया। अभिभावकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बच्चों के प्रत्येक निर्णय को नियंत्रित करने के बजाय उन्हें इतना सक्षम बनाया जाना चाहिए कि वे भविष्य में विवेकपूर्ण निर्णय स्वयं ले सकें। संयुक्त सत्र ने परिवार में आपसी समझ और संवाद को बढ़ाने का संदेश दिया। करियर और व्यवहार परामर्श की भी व्यवस्था कार्यक्रम स्थल पर करियर एवं व्यवहार परामर्श केंद्र की व्यवस्था भी की गई। यहां बच्चों और अभिभावकों को करियर विकल्पों, बच्चों की रुचियों, व्यक्तित्व और व्यवहार से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। आज के प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में बच्चों के लिए केवल करियर का चयन ही नहीं, बल्कि उनकी रुचि, क्षमता और व्यक्तित्व को समझना भी महत्वपूर्ण है। इस पहल के माध्यम से बच्चों के वर्तमान व्यवहार से लेकर उनके भविष्य की दिशा तक विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में चित्र स्मृति एवं अभिव्यक्ति दीवार भी आकर्षण का केंद्र रही, जहां परिवारों को साथ समय बिताने और आयोजन से जुड़ी यादों को संजोने का अवसर मिला। पुण्यार्जक परिवारों का सहयोग आयोजन में पुण्यार्जक परिवारों एवं संस्थानों का भी सहयोग रहा। धीरज कलमकार, ज्ञानेश जैन (येलहांका), मोहित-प्रियंशी जैन तथा कनॉपी अर्ली ईयर्स प्री-स्कूल ने पेरेंटिंग शाला में पुण्यार्जक के रूप में सहभागिता की। आयोजन समिति एवं जैन समाज की ओर से सहयोगी परिवारों और संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 का पावन वर्षायोग (चातुर्मास) बेंगलुरु में आयोजित हो रहा है। इस दौरान धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ बच्चों, युवाओं, परिवारों, शिक्षा और संस्कार निर्माण से जुड़ी विभिन्न समाजोपयोगी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में पेरेंटिंग शाला को आधुनिक अभिभावकत्व की चुनौतियों को जैन जीवन-मूल्यों, संस्कारों और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने वाली पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बच्चों का बेहतर भविष्य केवल अच्छी शिक्षा और सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत पारिवारिक संबंधों, संस्कार, संवाद, विश्वास और सही मार्गदर्शन से भी निर्मित होता है। बच्चों को समय देना, उनकी बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें जीवन-मूल्यों से जोड़ना अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मजबूत संस्कारों की जड़ों के साथ स्वतंत्र सोच और आत्मविश्वास के पंख देना ही सार्थक अभिभावकत्व की दिशा है।

  • पुस्तक समीक्षा -"प्रेम कलश" खण्डकाव्य

    समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया 'लाल' साहित्यकार एवं कवि महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई "प्रेम कलश" पुस्तक आज़मगढ़ जनपद के प्रतिष्ठित कवि श्री रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र' जी द्वारा रचित श्रृंगार रस से ओतप्रोत, मनमुग्ध कर देने वाला मनोहारी खण्डकाव्य है। जो कि 'कामायनी प्रकाशन' प्रयागराज से प्रकाशित है। खण्डकाव्य "प्रेम कलश" की विधिवत भूमिका श्रीराम तिवारी 'सहज' जी ने लिखी है, यह बड़े गौरव की बात है। पुस्तक के शीर्षक से ही हमें यह आभास होने लगता है कि यह पुस्तक पूर्ण रूप से श्रृंगारिक रचना होगी और ऐसा है भी। प्रश्न उठता है कि कवि रुद्रनाथ 'रुद्र' जी ने सिर्फ़ प्रेम और कलश को ही क्यों चुना? विषय तो और भी हो सकते थे। तो इसका एकमात्र उत्तर यही है कि कवि के मन में आदर्श और आध्यात्मिक प्रेम की अगाध भावना समाहित है। जिसके परिणामस्वरूप श्री 'रुद्र' जी ने अपनी लेखनी को प्रेम से अभिसिंचित करके "प्रेम कलश" जैसा मनोहारी खण्डकाव्य की रचना की। जो कि अपने आप में श्रेष्ठ है। कुल पाँच खण्डों में विभक्त खण्डकाव्य, प्रेम की व्यापकता से लबरेज़ है। इस खण्डकाव्य में कुल एक सौ छत्तीस पद हैं। अधिकांश पदों में प्रेम रूपी शब्द विद्यमान है। खण्डकाव्य के प्रथम सर्ग का प्रथम पद ही संपूर्ण पुस्तक की व्याख्या करने का भाव लिए परिलक्षित होता है। जो निम्न है - "प्रेम कलश की प्रेम भित्ति पर, प्रेम चिन्ह अंकित था। स्वास्तिक वंदनवारों से वह, पूरी तरह अलंकृत था।।" कविवर श्री 'रुद्र' जी ने प्रतीकों के माध्यम से प्रेम रस के सर्वोच्च शिखर पर आरूढ़ होकर पावन कलश की स्थापना को मूर्त रूप देने का सार्थक प्रयास किया है और इस प्रयास में उन्हें भरपूर सफलता भी अर्जित हुई है। वह भी ऐसा कलश जो एक मिट्टी का बना पात्र नहीं, बल्कि उन्होंने संपूर्ण ब्रह्माण्ड को एक कलश के रूप में स्वीकारा है। कलश शीतलता का प्रतीक है, सुख-समृद्धि का प्रतीक है, सकारात्मकता का प्रतीक है, शांति का प्रतीक है, विजय का प्रतीक है। जब इसी स्थूल कलश में प्रकृति और पुरुष का प्रेमालाप होगा तो निश्चित ही मानव मन अभिरंजित होगा। कविवर श्री 'रुद्र' जी ने शिव और शिवा जैसी दैवीय शक्तियों का मानवीकरण करते हुए "प्रेम कलश" खण्डकाव्य को और भी ऊँचाई प्रदान की है। "प्रेम ही ईश्वर है" इस कथन की व्यापकता "प्रेम कलश" में विस्तृत रूप में विद्यमान है। प्रेम अचानक नहीं होता। जिस प्रकार मिट्टी के अंदर छिपे बीज का एक परिपक्व वृक्ष बन जाने की प्रक्रिया अचानक नहीं होती। एक लंबा सफ़र तय करना पड़ता है। एक लंबा समय लगता है। इस लंबे समय के एक-एक सोपान में उस बीज की जीवन-गाथा समाई होती है। उसी प्रकार सुकवि श्री 'रुद्र' जी ने प्रथम सर्ग से लेकर पंचम सर्ग तक जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव का बखूबी वर्णन किया है। जिसमें अनेकों रसों का समावेश है। वे रस हमारे मन को हर समय आंदोलित करते रहते हैं। कविवर श्री 'रुद्र' जी ने शिव और शिवा के अलावा प्रकृति से जुड़े अनेक गौरवपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है। कलश और उसमें परिपूर्ण जल की पवित्रता पर अपनी सशक्त लेखनी का परिचय देते हुए कवि 'रुद्र' जी लिखते हैं - "नीर भरा था प्रेम कलश में, फूलों के मकरंद घुले। आनंद सुगंध सुवासित जल में, प्रेम शक्ति के छंद मिले।।" श्री रुद्रनाथ 'रुद्र' जी द्वारा रचित खण्डकाव्य "प्रेम कलश" के पाँचों सर्ग, श्रृंगार रस के विभिन्न बिंदुओं से होकर प्रवाहित होते हैं। प्रथम सर्ग में कवि ने प्रेम कलश व दो काल्पनिक पात्र शिव और शिवा का विधिवत परिचय कराया है। जोकि नितांत आवश्यक था। द्वितीय सर्ग में कवि ने प्रेम कलश रूपी संसार में शिव और शिवा नामक नायक व नायिका के सूक्ष्म मिलन का बड़ा ही रोचक विवरण प्रस्तुत किया है। जब दोनों के हृदय में प्रेम का अंकुर फूटा, तथा नायक और नायिका एक-दूसरे को पसंद करने लगे। इसी प्रकार तृतीय सर्ग में कविवर 'रुद्र' जी ने नायक और नायिका के बीच पनपे प्रेमांकुर को और प्रगाढ़ता की तरफ पहुँचाने का सफल प्रयास किया है। नायिका के सौंदर्य का वर्णन करते हुए 'रुद्र' जी लिखते हैं - "नई नवेली नूतन सी नायिका, बन सज के शिवा सँवरी थी। मानो रति श्रृंगार सजाकर, आज अवनि पर उतरी थी।।" चतुर्थ सर्ग में कवि ने नायक-नायिका के वियोग का वर्णन बड़े ही मार्मिक ढंग से किया है। जो पाठकों के दिलों को आंदोलित करता है, तथा इसी सर्ग में अंकित कई पद हमारे जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आने पर एक संबल प्रदान करने में सहायक भी हो सकते हैं। उसकी एक बानगी देखें - "तन से दूर भले जाऊँ पर, मन तेरे साथ रहेगा। पल-पल चिंतन होगा, तन आस लिए तड़पेगा।।" पंचम सर्ग जो 'प्रेम कलश' का अंतिम सर्ग है, जिसमें कविवर 'रुद्र' जी ने वियोग व वियोग के लंबे अंतराल के बाद नायक और नायिका का मिलन बड़े ही सराहनीय ढंग से दर्शाया है। इसी प्रेम कलश में शिवा और शिव जो कि इस खण्डकाव्य के काल्पनिक पात्र हैं, वे संसार रूपी कलश में विलीन हो जाते हैं। इस प्रकार खण्डकाव्य पूर्ण हो जाता है। अर्थात कविवर 'रुद्र' जी के हृदय में समग्र संसार को देखने, समझने व वर्णन करने का जो नज़रिया है, वह बिल्कुल सहज है। जिस प्रकार तुलसीदास जी महाराज ने संपूर्ण जगत को राममय मानते हुए कहा है - "सियाराम मय सब जग जानी, करहुँ प्रणाम जोरि जुग पानी।।" उसी प्रकार 'रुद्र' जी ने संपूर्ण जगत में यदि कहीं भी अपनी दृष्टि डाली है तो उन्हें सिर्फ़ प्रेम का दर्शन और प्रेम का ही आभास हुआ है, जो कि समाज और साहित्य के लिए बड़े गौरव की बात है। हालाँकि कविवर 'रुद्र' जी ने यह बताने में कुछ कोताही अवश्य की है कि नायक और नायिका का वियोग किस कारणवश हुआ। कौन-सी ऐसी परिस्थितियाँ आईं, जब शिव और शिवा अलगाव की स्थिति में जा पहुँचे। कौन-सी परिस्थितियाँ ऐसी आईं कि जब उनका पुनर्मिलन हुआ। फिर भी सब मिलाकर यह रससिक्त खंड काव्य मनोहारी है। अतः मैं लालबहादुर चौरसिया 'लाल' कविवर 'रुद्र' जी को उनकी इस प्रेम रस से अभिसिंचित पुस्तक की सर्जना के लिए बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ, तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आपका यह "प्रेम कलश" खण्डकाव्य साहित्य जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित करे। कविवर डॉ रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र' जी को अनंत शुभकामनाएँ... -लालबहादुर चौरसिया 'लाल' साहित्यकार एवं कवि महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई 9452088890

  • शिव महिमा के बीच गूंजा राम जन्मोत्सव

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 3 सितंबर 2026। फूलों की नगरी बेंगलुरु में प्रिंसेज श्राइन, पैलेस ग्राउंड के गेट नंबर-9 पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से भगवान शिव की महिमा और प्रभु श्रीराम के दिव्य जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य यजमान द्वारा व्यासपीठ के पूजन एवं आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात कथाव्यास ने गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के दोहों और चौपाइयों के माध्यम से भगवान शिव की महिमा तथा श्रीरामावतार के प्रसंगों का भावपूर्ण विवेचन किया। भक्ति से निर्मल होता है मन कथा के प्रथम सत्र में कथाव्यास ने भगवान शिव के अलौकिक स्वरूप और उनकी भक्ति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल से शरीर की बाहरी शुद्धि संभव है, लेकिन मन और अंतरात्मा की निर्मलता का मार्ग ईश्वर की सच्ची भक्ति से होकर गुजरता है। उन्होंने कैलास पर्वत पर भगवान शिव द्वारा माता पार्वती के संशय का समाधान करते हुए श्रीराम कथा के रहस्य का वर्णन किए जाने वाले प्रसंग का उल्लेख किया। कथाव्यास ने कहा कि परमात्मा एक ही है, जो निर्गुण-निराकार स्वरूप में भी है और भक्तों के प्रेम से सगुण-साकार रूप भी धारण करता है। धर्म की रक्षा और सज्जनों के कल्याण के लिए भगवान समय-समय पर विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। पुत्रकामेष्टि यज्ञ से राम जन्म तक का भावपूर्ण प्रसंग कथा के द्वितीय सत्र में अयोध्या नरेश राजा दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ का प्रसंग सुनाया गया। संतान प्राप्ति की कामना से गुरु वशिष्ठ की प्रेरणा पर ऋष्यशृंग ऋषि के आचार्यत्व में यज्ञ का आयोजन किया गया। कथा के अनुसार यज्ञ पूर्ण होने पर अग्निदेव दिव्य प्रसाद लेकर प्रकट हुए। राजा दशरथ ने प्रसाद स्वरूप प्राप्त चरु को माता कौशल्या, माता कैकेयी और माता सुमित्रा में श्रद्धापूर्वक वितरित किया। इसके बाद श्रीराम जन्म की कथा के साथ संपूर्ण पंडाल भक्ति और उल्लास के वातावरण में डूब गया। सोहर गीतों से गूंज उठा कथा पंडाल जैसे ही प्रभु श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, कथा स्थल भक्ति संगीत और मंगलध्वनियों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और सोहर गीतों की मधुर प्रस्तुतियों पर भक्तिमय उल्लास का वातावरण बन गया। अनेक श्रद्धालु भजन और मंगल गीतों की धुन पर झूमते नजर आए। सांस्कृतिक चेतना और मर्यादित जीवन का संदेश आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री शैलेश मिश्रा ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग की प्रेरणा देता है। युवाओं को इन आदर्शों से जोड़कर उन्हें जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से परिवार सहित कथा में शामिल होकर पुण्य लाभ लेने की अपील की। ट्रस्ट के सचिव श्री रोहित उपाध्याय ने बताया कि कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा श्रवण किया। उनके अनुसार, लगभग 2,000 भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह को दर्शाया। अगले दिनों में विवाह प्रसंगों की तैयारी आयोजकों के अनुसार कथा के आगामी सत्रों में भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। वहीं, श्रीराम कथा के चौथे दिन कथावाचक श्री प्रवीण पांडे जी द्वारा धनुष भंग एवं श्रीसीताराम विवाह प्रसंग का वर्णन किए जाने की जानकारी दी गई है। आयोजन की व्यवस्थाओं में श्री शैलेश मिश्रा, श्री रोहित उपाध्याय, श्री धीरज राज, श्री आदेश, श्रीमती गौरी मिश्रा, श्री प्रवीण पांडेय, श्री लाल बाबू पांडेय, श्री संजय सिंह उज्जैन, श्री प्रेम प्रकाश पांडे सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

  • दो दशक बाद बेल्जियम के पीएम भारत पहुंचे

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026।भारत और बेल्जियम के द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में गुरुवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा है और करीब दो दशक बाद किसी बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत दौरा हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर आज नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत-बेल्जियम संबंधों के विभिन्न आयामों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। रक्षा मंत्री भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल बार्ट डी वेवर के साथ बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन भी भारत आए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री डी वेवर ने फरवरी 2025 में पदभार संभाला था और इसके बाद भारत की उनकी यह पहली यात्रा है। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा तथा अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। व्यापार और निवेश पर रहेगा विशेष जोर भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के अवसरों पर वार्ता में विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। हीरा कारोबार भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का एक प्रमुख क्षेत्र है। बेल्जियम का एंटवर्प विश्व के प्रमुख हीरा व्यापार केंद्रों में शामिल है, जबकि भारत हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सहयोग पर नजर दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में रक्षा और सुरक्षा सहयोग के साथ प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। बेल्जियम के रक्षा मंत्री का इस यात्रा में शामिल होना रक्षा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को और महत्वपूर्ण बनाता है। भारत-ईयू एफटीए पर भी होगी चर्चा बेल्जियम के प्रधानमंत्री भारत यात्रा के दौरान भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के कारोबारी कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (इंडिया-ईयू एफटीए) से जुड़े मुद्दों और व्यापारिक संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों के बीच इस यात्रा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। मुंबई में हीरा, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स पर फोकस नई दिल्ली में आधिकारिक बैठकों के बाद बेल्जियम के प्रधानमंत्री के मुंबई जाने का कार्यक्रम है। वहां वे हीरा उद्योग, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कारोबारी और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। भारत-बेल्जियम रिश्तों को नई गति की उम्मीद भारत और बेल्जियम के बीच राजनयिक तथा आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, रक्षा और जनसंपर्क के क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग का दायरा लगातार विकसित हुआ है। करीब दो दशक बाद बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत यूरोप के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई गति देने पर जोर दे रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बार्ट डी वेवर के बीच होने वाली वार्ता के परिणामों पर दोनों देशों के कारोबारी और रणनीतिक जगत की विशेष नजर रहेगी। समाचार प्रेषक: अशोक कुमार सिंह, बेंगलुरु

  • पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर ढहाने पर भारत सख्त, जांच की मांग

    पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर ढहाने पर भारत सख्त, जांच की मांग भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में एक सौ वर्ष से अधिक पुराने हिंदू मंदिर के ढहाए जाने की खबरों पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारत ने पाकिस्तान सरकार से घटना की तत्काल जांच कराने और अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए नारोवाल के सिराज गांव स्थित ऐतिहासिक हिंदू पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत अल्पसंख्यक समुदाय के करीब एक सदी पुराने धार्मिक स्थल के साथ कथित तोड़फोड़ की स्पष्ट रूप से निंदा करता है। धार्मिक स्थल की सुरक्षा पर उठे सवाल जायसवाल के अनुसार, किसी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की सुरक्षा में स्थानीय प्रशासन की कथित विफलता गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने कहा कि ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और उनके पूजा स्थलों के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े करती हैं। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। मंदिर गिराने की वजह पर अलग-अलग दावे लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर सिराज गांव में स्थित यह मंदिर 21 अगस्त को ढहाए जाने की जानकारी सामने आई है। घटना को लेकर पाकिस्तान में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि धार्मिक कट्टरपंथियों ने मंदिर की जमीन को कथित तौर पर पास स्थित मदरसे के परिसर में शामिल करने के उद्देश्य से इसे निशाना बनाया। हालांकि, पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) का दावा है कि भारी बारिश के कारण मंदिर की इमारत ढह गई। इन परस्पर विरोधी दावों के कारण घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि मंदिर प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हुआ या उसे जानबूझकर गिराया गया। अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकार का मुद्दा भारत ने इस घटना को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों और पूजा स्थलों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक प्रश्न के रूप में उठाया है। नई दिल्ली का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा संबंधित सरकार की जिम्मेदारी है और ऐतिहासिक पूजा स्थलों को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया जाना चाहिए। फिलहाल घटना की परिस्थितियों और मंदिर के ढहने के कारणों को लेकर पाकिस्तान की ओर से सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। भारत ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा को लेकर वह अपनी चिंता पाकिस्तान के समक्ष उठाता रहेगा।

  • अंतरिक्ष से धरती तक नई नजर

    भारतार्थ खबर अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com भारत की अंतरिक्ष यात्रा को यदि केवल रॉकेटों की उड़ान और उपग्रहों की संख्या के आधार पर देखा जाए, तो उसकी वास्तविक कहानी अधूरी रह जाएगी। अंतरिक्ष विज्ञान की सबसे बड़ी सफलता तब होती है, जब आकाश में स्थापित तकनीक धरती पर रहने वाले सामान्य नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक बने। मौसम की सटीक जानकारी हो, बाढ़ और चक्रवात की निगरानी हो, कृषि योजनाओं का निर्माण हो, जंगलों और जल संसाधनों का अध्ययन हो अथवा प्राकृतिक आपदा के समय त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता—आज अंतरिक्ष से प्राप्त आंकड़े आधुनिक शासन और विकास व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनते जा रहे हैं। इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का आगामी GSLV-F17/EOS-05 मिशन विशेष महत्व रखता है। इसरो के अनुसार, मिशन का प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण परिसर से निर्धारित है। GSLV-F17, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान होगी और इसे EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। लेकिन इस मिशन का महत्व केवल एक निर्धारित प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है। यह भारत की पृथ्वी-अवलोकन क्षमता के विकास में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है। जब अंतरिक्ष की नजर धरती के काम आए EOS-05 को इसरो ने अत्याधुनिक पृथ्वी-अवलोकन अंतरिक्षयान बताया है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह भारत का जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की इमेजिंग करने वाला पहला उपग्रह होगा। यह तकनीकी उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पृथ्वी की निगरानी केवल तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका संबंध समय पर सूचना, बेहतर विश्लेषण और अधिक प्रभावी निर्णयों से होता है। भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश में मौसम और पर्यावरण की परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा हो सकता है, मैदानी इलाकों में नदियां उफान पर आ सकती हैं, समुद्री तटों पर चक्रवात की चुनौती उत्पन्न हो सकती है और कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति विकसित हो सकती है। इन सभी परिस्थितियों में समय पर और विश्वसनीय जानकारी सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। यहीं से अंतरिक्ष तकनीक का वास्तविक महत्व शुरू होता है। एक उपग्रह अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर दूर हो सकता है, लेकिन उससे प्राप्त आंकड़ों का उपयोग अंततः धरती पर ही होता है। किसी नदी के फैलाव का आकलन करना हो, बादलों की गतिविधि को समझना हो, पर्यावरणीय बदलावों का अध्ययन करना हो अथवा बड़े भूभाग में परिवर्तन की निगरानी करनी हो—अंतरिक्ष आधारित अवलोकन प्रणालियां प्रशासन और वैज्ञानिक संस्थाओं के लिए उपयोगी साधन बन सकती हैं। इस अर्थ में EOS-05 केवल एक वैज्ञानिक उपकरण नहीं, बल्कि भविष्य की सूचना-आधारित निर्णय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। आपदा प्रबंधन में समय ही सबसे बड़ी पूंजी भारत हर वर्ष अनेक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, अत्यधिक वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियां केवल प्राकृतिक घटनाएं नहीं रहतीं; इनका सीधा असर लोगों के जीवन, कृषि, सड़क और रेल नेटवर्क, बिजली व्यवस्था तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आपदा प्रबंधन में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न होता है—स्थिति की जानकारी कितनी जल्दी और कितनी स्पष्टता से मिलती है? यदि किसी क्षेत्र में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है, तो प्रशासन को प्रभावित इलाकों का आकलन शीघ्रता से करना होता है। यदि किसी समुद्री क्षेत्र में चक्रवात विकसित हो रहा है, तो समय रहते चेतावनी और तैयारी आवश्यक होती है। यदि किसी पर्वतीय क्षेत्र में लगातार भारी वर्षा हो रही है, तो सड़क और बस्तियों की सुरक्षा पर तुरंत ध्यान देना पड़ सकता है। ऐसे समय में जमीन से प्राप्त जानकारी और अंतरिक्ष आधारित अवलोकन एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। हालांकि यह समझना भी आवश्यक है कि कोई एक उपग्रह सभी समस्याओं का समाधान नहीं होता। अंतरिक्ष से प्राप्त आंकड़ों को मौसम विज्ञान, भूगर्भीय अध्ययन, जमीनी सर्वेक्षण, प्रशासनिक तंत्र और स्थानीय चेतावनी प्रणाली के साथ जोड़ना पड़ता है। तकनीक तभी प्रभावी होती है, जब उसके आधार पर समय पर और सही निर्णय लिए जाएं। इसलिए EOS-05 जैसे मिशन की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन केवल सफल प्रक्षेपण से नहीं, बल्कि भविष्य में उससे मिलने वाली उपयोगी सेवाओं और उनके सामाजिक प्रभाव से किया जाना चाहिए। जियोसिंक्रोनस इमेजिंग की नई दिशा पारंपरिक पृथ्वी-अवलोकन उपग्रहों और जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग की अवधारणा में अंतर को समझना भी आवश्यक है। पृथ्वी की निगरानी करने वाले अलग-अलग उपग्रह विभिन्न कक्षाओं और उद्देश्यों के अनुसार कार्य करते हैं। जियोसिंक्रोनस कक्षा से किसी बड़े क्षेत्र को बार-बार देखने की क्षमता भारत के लिए पृथ्वी-अवलोकन के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है। इसरो के अनुसार EOS-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग उपग्रह होगा, जो जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी का अवलोकन करेगा। इसका उद्देश्य भारत की पृथ्वी-अवलोकन क्षमताओं को मजबूत करना और संबंधित सेवाओं की उपलब्धता में सुधार करना है। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अंतरिक्ष विज्ञान में हर नई क्षमता केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं होती। उसके साथ डेटा प्रबंधन, वैज्ञानिक विश्लेषण, संस्थागत समन्वय और आम उपयोगकर्ताओं तक सेवाओं की पहुंच की चुनौती भी जुड़ी होती है। उपग्रह जितना उन्नत होगा, उतना ही आवश्यक होगा कि उससे मिलने वाली जानकारी को समझने और उपयोग में लाने की व्यवस्था भी मजबूत हो। कृषि और जल संसाधनों के लिए संभावनाएं भारत की बड़ी आबादी आज भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। मौसम की अनिश्चितता और बदलती जलवायु परिस्थितियां खेती के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। किस क्षेत्र में वर्षा की स्थिति कैसी है, भूमि उपयोग में क्या परिवर्तन हो रहा है, जल संसाधनों की स्थिति क्या है और पर्यावरण में दीर्घकालिक बदलाव किस दिशा में जा रहे हैं—ऐसे प्रश्नों के उत्तर खोजने में पृथ्वी-अवलोकन तकनीक की भूमिका बढ़ती जा रही है। उपग्रह से प्राप्त आंकड़े अपने आप में अंतिम समाधान नहीं होते, लेकिन वे वैज्ञानिक और प्रशासनिक निर्णयों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि अंतरिक्ष आधारित आंकड़ों को जमीनी आंकड़ों और स्थानीय विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाए, तो कृषि योजना, जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी अधिक वैज्ञानिक तरीके से की जा सकती है। यही वह दिशा है जिसमें भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों को आम जनजीवन से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। GSLV-F17: केवल प्रक्षेपण यान नहीं EOS-05 मिशन की चर्चा उपग्रह तक सीमित नहीं रह सकती। उसे अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा तक पहुंचाने वाले प्रक्षेपण यान की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान है। इसरो ने इसे चार मीटर व्यास वाले ओजाइव कंपोजिट पेलोड फेयरिंग विन्यास के साथ तैयार किए गए मिशन के रूप में सूचीबद्ध किया है। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सेकंड लॉन्च पैड से होना निर्धारित है। किसी अंतरिक्ष मिशन की सफलता अनेक चरणों पर निर्भर करती है। प्रक्षेपण यान की तकनीकी विश्वसनीयता, उपग्रह का प्रदर्शन, कक्षा में स्थापित होने की प्रक्रिया और उसके बाद दीर्घकालिक संचालन—हर चरण महत्वपूर्ण होता है। इसलिए 4 सितंबर की सुबह केवल EOS-05 की परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उस वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवस्था की भी परीक्षा होगी जिसने वर्षों की मेहनत से इस मिशन को प्रक्षेपण तक पहुंचाया है। अंतरिक्ष विज्ञान में असफलता भी एक पाठ है भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम सफलता की सीधी और आसान कहानी नहीं रहा है। हर वैज्ञानिक यात्रा की तरह इसमें भी चुनौतियां, विलंब और कुछ असफल मिशन रहे हैं। GSLV के इतिहास में भी तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसरो के आधिकारिक रिकॉर्ड में GSLV-F10/EOS-03 मिशन को 2021 में असफल बताया गया था। ऐसे अनुभव अंतरिक्ष विज्ञान की कठिन प्रकृति को स्पष्ट करते हैं। लेकिन विज्ञान की असली शक्ति यही है कि वह असफलता को अंतिम परिणाम नहीं मानता। हर तकनीकी चुनौती के बाद कारणों की जांच होती है। आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। प्रणालियों में सुधार किए जाते हैं और फिर अगला प्रयास अधिक तैयारी के साथ किया जाता है। किसी अंतरिक्ष एजेंसी की परिपक्वता का मूल्यांकन केवल उसकी सफल उड़ानों से नहीं होना चाहिए, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि वह कठिन परिस्थितियों से क्या सीखती है। EOS-05 मिशन इसी व्यापक वैज्ञानिक यात्रा का हिस्सा है। सात महीने बाद एक महत्वपूर्ण उड़ान इस मिशन का महत्व इसरो की 2026 की प्रक्षेपण गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हाल के महीनों के अंतराल के बाद यह मिशन अंतरिक्ष एजेंसी की प्रक्षेपण गतिविधियों में महत्वपूर्ण वापसी के रूप में सामने आया है। इससे यह संदेश भी मिलता है कि अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल लगातार प्रक्षेपणों की दौड़ नहीं है। कभी-कभी तकनीकी समीक्षा, परीक्षण, विश्लेषण और तैयारी के लिए समय देना भी उतना ही आवश्यक होता है। अंतरिक्ष विज्ञान में जल्दबाजी की तुलना में विश्वसनीयता अधिक महत्वपूर्ण है। भारत के लिए आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। निजी कंपनियों की भागीदारी, स्टार्टअप, अंतरिक्ष आधारित सेवाएं और वैज्ञानिक अनुसंधान इस क्षेत्र को नई दिशा दे रहे हैं। ऐसे समय में इसरो की प्रत्येक महत्वपूर्ण उड़ान देश की समग्र अंतरिक्ष क्षमता के लिए एक आधार तैयार करती है। अंतरिक्ष और राष्ट्रीय विकास का नया संबंध कभी अंतरिक्ष कार्यक्रमों को केवल राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और वैज्ञानिक गौरव से जोड़कर देखा जाता था। वह दृष्टिकोण आज भी महत्वपूर्ण है, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज अंतरिक्ष तकनीक का संबंध संचार, नेविगेशन, मौसम, कृषि, मत्स्य पालन, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों से है। इसलिए यह प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि अंतरिक्ष में निवेश का सामाजिक और आर्थिक लाभ कितना व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचता है। यदि उपग्रह से प्राप्त आंकड़े केवल वैज्ञानिक रिपोर्टों तक सीमित रह जाएं, तो उनकी क्षमता अधूरी रह जाएगी। लेकिन यदि यही जानकारी किसी किसान तक बेहतर सलाह के रूप में पहुंचे, किसी आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्य को तेज करे, किसी राज्य को जल संसाधन प्रबंधन में सहायता दे या किसी शहर को पर्यावरणीय योजना बनाने में मदद करे, तभी अंतरिक्ष तकनीक का वास्तविक लोकतंत्रीकरण होगा। भारत को अब इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा। डेटा होगा, तो जिम्मेदारी भी होगी EOS-05 जैसे मिशनों के साथ एक नई चुनौती डेटा के उपयोग और प्रबंधन की भी है। अधिक जानकारी का अर्थ हमेशा बेहतर निर्णय नहीं होता। जानकारी को सही तरीके से पढ़ना, उसकी सीमाओं को समझना और उसे विश्वसनीय जमीनी आंकड़ों के साथ मिलाना आवश्यक है। भविष्य में भारत के सामने केवल उपग्रह बनाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने की भी आवश्यकता होगी। डेटा वैज्ञानिक, मौसम विशेषज्ञ, भूगोलवेत्ता, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी—सभी को आधुनिक अंतरिक्ष आधारित जानकारी का प्रभावी उपयोग सीखना होगा। अंतरिक्ष तकनीक तभी उपयोगी होगी, जब उसके और धरती पर निर्णय लेने वाली संस्थाओं के बीच मजबूत सेतु बनेगा। सुबह 2:55 बजे केवल एक रॉकेट नहीं उड़ेगा 4 सितंबर की सुबह 2:55 बजे जब श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 के उड़ान भरने का निर्धारित समय आएगा, तब देश की निगाहें स्वाभाविक रूप से इसरो के मिशन पर होंगी। इसरो ने मिशन के लाइव प्रसारण की व्यवस्था भी की है। लेकिन उस क्षण को केवल एक रॉकेट लॉन्च के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। वह भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षा और व्यावहारिक विकास आवश्यकताओं के मिलन का क्षण भी होगा। रॉकेट का लक्ष्य अंतरिक्ष है, लेकिन उसका उद्देश्य धरती से जुड़ा हुआ है। विज्ञान की यही सबसे बड़ी खूबसूरती है—मनुष्य अपनी नजर आकाश तक पहुंचाता है, ताकि वह अपनी धरती को अधिक अच्छी तरह समझ सके। सफलता की असली कसौटी क्या होगी? EOS-05 मिशन की सफलता की पहली कसौटी निश्चित रूप से सुरक्षित और सफल प्रक्षेपण होगी। इसके बाद उपग्रह को निर्धारित कक्षा और परिचालन क्षमता तक पहुंचना होगा। लेकिन संपादकीय दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी कसौटी इससे भी आगे है। क्या यह मिशन भारत की पृथ्वी-अवलोकन क्षमता को वास्तव में मजबूत करेगा? क्या इससे मिलने वाले आंकड़े आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोगी सिद्ध होंगे? क्या इन सेवाओं का लाभ राज्यों, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों तक पहुंच सकेगा? क्या भारत अंतरिक्ष से प्राप्त विशाल डेटा को समयबद्ध और प्रभावी निर्णयों में बदल पाएगा? इन प्रश्नों के उत्तर आने वाले वर्षों में मिलेंगे। अंतरिक्ष की उपलब्धि, धरती की जिम्मेदारी भारत आज अंतरिक्ष विज्ञान के उस चरण में पहुंच चुका है, जहां उसे केवल नई ऊंचाइयों को छूने से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। अब चुनौती यह है कि अंतरिक्ष से मिलने वाली शक्ति को धरती पर बेहतर जीवन में कैसे बदला जाए। EOS-05 मिशन इसी परिवर्तनशील सोच का प्रतीक है। भारत के लिए अंतरिक्ष अब केवल गौरव का विषय नहीं है। यह विकास की योजना बनाने, प्राकृतिक संसाधनों को समझने, आपदाओं से निपटने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। फिर भी, वैज्ञानिक उपलब्धियों को लेकर उत्साह के साथ यथार्थवादी दृष्टिकोण भी आवश्यक है। एक उपग्रह से सभी समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। तकनीक के साथ मजबूत संस्थाएं, प्रशिक्षित मानव संसाधन, जमीनी व्यवस्था और प्रभावी प्रशासन भी चाहिए। अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी तभी सार्थक होगी, जब वह सही समय पर सही व्यक्ति और सही निर्णय तक पहुंचे। नई उड़ान, नई जिम्मेदारी श्रीहरिकोटा से होने वाला GSLV-F17/EOS-05 प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसरो के अनुसार यह भारत का पहला जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की इमेजिंग करने वाला उपग्रह होगा और इससे देश की पृथ्वी-अवलोकन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में नई संभावना जुड़ेगी। देश को इस मिशन से वैज्ञानिक सफलता की उम्मीद है, लेकिन उससे भी बड़ी उम्मीद यह है कि भारत की अंतरिक्ष क्षमता भविष्य में आम नागरिकों की सुरक्षा, विकास और बेहतर जीवन के लिए अधिक प्रभावी रूप से उपयोग की जाएगी। 4 सितंबर की सुबह जब GSLV-F17 आकाश की ओर बढ़ेगा, तो उसके साथ केवल EOS-05 ही नहीं जाएगा। उसके साथ भारत की एक नई सोच भी आगे बढ़ेगी—अंतरिक्ष को जीतने की नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की शक्ति से धरती को बेहतर समझने और संवारने की सोच। यही किसी भी अंतरिक्ष कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है और शायद यही EOS-05 मिशन का सबसे व्यापक अर्थ भी।

  • सूखे पर विशेष सत्र बुलाए सरकार : विजयेंद्र

    5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने और नवली समानांतर जलाशय को प्राथमिकता देने की मांग भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com गुडादुर, 3 सितंबर 2026। कर्नाटक में सूखे और किसानों की समस्याओं को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति, किसानों की आत्महत्याओं और कृषि क्षेत्र की समस्याओं पर सदन में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। विजयेंद्र ने सूखा प्रभावित किसानों के 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने की मांग भी सरकार के सामने रखी। बेल्लारी चलो पदयात्रा के तीसरे दिन गुडादुर से यात्रा शुरू होने के बाद मीडिया से बातचीत में विजयेंद्र ने कहा कि सरकार को किसानों की मौजूदा स्थिति को प्राथमिकता के आधार पर देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पांच गारंटी योजनाओं को ही विकास का पर्याय मानकर चल रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आर्थिक और मौसम संबंधी संकट से जूझ रहे हैं। 190 से अधिक तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग विजयेंद्र ने राज्य के 190 से अधिक तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सूखे की गंभीरता को देखते हुए किसानों को तत्काल राहत और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कृषि ऋण माफी के साथ सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। विजयेंद्र ने नवली समानांतर जलाशय परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में सिंचाई और जल उपलब्धता की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है। जलाशयों में गाद का मुद्दा उठाया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तुंगभद्रा क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि होस्पेट बांध में बड़ी मात्रा में गाद जमा होने से उसकी जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के कार्यकाल में नवली समानांतर जलाशय के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की दिशा में धन उपलब्ध कराया गया था। विजयेंद्र ने सरकार से इस परियोजना को आगे बढ़ाने और क्षेत्र के किसानों के लिए दीर्घकालिक सिंचाई समाधान तैयार करने की मांग की। डी.के. शिवकुमार पर भी साधा निशाना विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर किसानों की समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की वास्तविक परेशानियों को समझने के लिए सरकार को उनके बीच जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूखे जैसी गंभीर परिस्थिति में सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को अपना अधिक समय किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए देना चाहिए। हालांकि, मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार पर लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का उल्लेख इस वक्तव्य में नहीं है। किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों का किया उल्लेख विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि कर्नाटक में करीब 3,655 किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 937, कलबुर्गी में करीब 294, रायचूर में 160 से अधिक, बीदर में 220 से अधिक और कोप्पल में 80 से अधिक किसानों की आत्महत्या का दावा किया। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और अवधि के संदर्भ को संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से देखना आवश्यक है। विजयेंद्र ने इन आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सरकार से किसान संकट पर तत्काल गंभीर कदम उठाने की मांग की। ज्वार उत्पादकों के भुगतान का मुद्दा भाजपा नेता ने रायचूर क्षेत्र में खरीदे गए ज्वार के किसानों के कथित बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने रायथा मोर्चा के अध्यक्ष नादहल्ली के बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि किसानों का करीब 145 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार के दौरान डेयरी फार्मिंग के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार किसानों को अपेक्षित सहायता उपलब्ध नहीं करा रही है। एससीपी-टीएसपी निधि के इस्तेमाल पर सवाल विजयेंद्र ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए निर्धारित एससीपी और टीएसपी निधि के इस्तेमाल को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन निधियों का उपयोग अन्य विभागों की योजनाओं में किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इन निधियों को उनके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप खर्च करने की मांग की। बेल्लारी चलो पदयात्रा में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक, सांसद, विधान परिषद सदस्य, प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा का मुख्य मुद्दा सूखा, किसान संकट और राज्य सरकार की कृषि नीतियों को लेकर विपक्ष का विरोध है। विजयेंद्र की मांगों के केंद्र में फिलहाल तीन प्रमुख मुद्दे हैं—सूखे पर विधानसभा का विशेष सत्र, किसानों के 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण की माफी और सिंचाई परियोजनाओं को गति देना। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और किसानों को राहत देने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है।

  • केपीसीसी में उत्तर कर्नाटक पर मंथन, चार जिलों के नेता जुटे

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 2 सितंबर 2026। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) कार्यालय में उत्तर कर्नाटक के चार जिलों-रायचूर, कोप्पल, बेल्लारी और विजयनगर—के कांग्रेस प्रतिनिधियों, जिला अध्यक्षों एवं वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता KPCC अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने की। बैठक में संबंधित जिलों में पार्टी संगठन को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों तथा आगामी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े संगठनात्मक विषयों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों की जानकारी प्रदेश नेतृत्व के समक्ष रखी। बैठक में AICC सचिव गोपीनाथन पलानियप्पन, KPCC कार्यकारी अध्यक्ष वसंत कुमार, पूर्व मंत्री एच. अंजनेया, पूर्व सांसद वी.एस. उग्रप्पा, विधायक हंपनगौड़ा बदरली, विधायक अन्नपूर्णा, तुकाराम, विधायक बसवनगौड़ा दद्दल, हंपय्या नायक, बसवनगौड़ा थुरुविहाल तथा विधान परिषद सदस्य एन.एस. भोसराज सहित कई नेता शामिल हुए। इसके अलावा पूर्व विधायक डी.एस. हुलागेरी समेत विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के विधायक एवं कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। जिला संगठन पर विशेष चर्चा बैठक में बेल्लारी ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवयोगी, बेल्लारी शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष आलम प्रशांत, विजयनगर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिराज शेख, कोप्पल जिला कांग्रेस अध्यक्ष अमरेगौड़ा बय्यापुरा तथा रायचूर सहित अन्य जिलों के कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान जिला एवं विधानसभा स्तर पर संगठन को अधिक सक्रिय बनाने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने तथा स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने पर चर्चा होने की जानकारी दी गई। उत्तर कर्नाटक के चार महत्वपूर्ण जिलों के पार्टी नेताओं की इस बैठक को क्षेत्र में कांग्रेस संगठन की गतिविधियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण बैठक के रूप में देखा जा रहा है।

  • दलित मुद्दों पर विजयेंद्र का सरकार पर हमला, पदयात्रा का ऐलान

    भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 2 सितंबर 2026। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने दलित समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दलित समुदाय के नेताओं के साथ संवाद के दौरान उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों, एससीपी/टीएसपी निधि, आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े विषयों को लेकर सरकार को घेरा। विजयेंद्र ने दावा किया कि भाजपा की प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर राज्य सरकार दबाव में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों का समय पर दौरा नहीं किया। साथ ही उन्होंने कहा कि पदयात्रा के दूसरे चरण में और अधिक तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने की मांग उठाई जाएगी। दलित कल्याण निधि को लेकर सवाल विजयेंद्र ने दावा किया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में दलित समुदाय के कल्याण के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। उनके अनुसार वर्तमान कांग्रेस सरकार ने विभिन्न विकास निगमों और बोर्डों को अपेक्षित राशि का पूरा हिस्सा जारी नहीं किया। उन्होंने देवराज उर्स विकास निगम, अंबिगे चौधरी विकास निगम, डॉ. बी.आर. अंबेडकर विकास निगम सहित अन्य संस्थाओं के लिए धन आवंटन और वास्तविक जारी राशि में अंतर होने का आरोप लगाया। विजयेंद्र ने कहा कि बजट में घोषित राशि और वास्तविक रूप से जारी धनराशि के बीच अंतर की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। गारंटी योजनाओं में एससीपी-टीएसपी राशि के इस्तेमाल का आरोप भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए निर्धारित एससीपी/टीएसपी निधि का इस्तेमाल गारंटी योजनाओं के लिए किया। उन्होंने इसे दलित समुदाय के हितों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से निधि के उपयोग पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। विजयेंद्र ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर दलित समुदाय में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है और भाजपा अपनी प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस विषय को प्रमुखता से उठाएगी। आरक्षण को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार के रोजगार और आरक्षण संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ढाई लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के मामले में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और घुमंतू समुदायों से संबंधित आरक्षण व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि आरक्षण से जुड़े मामलों में सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष प्रभावी पक्ष नहीं रखा। पदयात्रा में उठेंगे जनहित के मुद्दे विजयेंद्र ने कहा कि भाजपा की पदयात्रा के दौरान दलितों, पिछड़े वर्गों और अन्य प्रभावित समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी शोषित एवं प्रभावित लोगों की आवाज बनने का प्रयास करेगी और सरकार से जवाब मांगेगी। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दलित एवं पिछड़े समुदायों के लिए किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्रियों बी.एस. येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई के कार्यकाल में विभिन्न समुदायों के लिए लागू की गई योजनाओं का हवाला दिया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक प्रताप गौड़ा पाटिल सहित दलित समुदाय के नेता एवं अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

  • SCO में PM मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश: बोले- आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक हथियार नहीं बन सकता

    भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) बिश्केक | 2 सितंबर 2026 शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख एक बार फिर मजबूती से रखा। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री का यह संदेश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत अन्य वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद केवल कार्रवाई और प्रतिक्रिया तक सीमित रहने वाला विषय नहीं है। इसके पीछे मौजूद आतंकवादी वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे नेटवर्क को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने उन देशों के खिलाफ कड़ा संदेश देने की जरूरत बताई, जो आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं या आतंकवादियों को संरक्षण और समर्थन देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी देश के लिए रणनीतिक लाभ का साधन नहीं माना जा सकता। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय सुरक्षा को विकास और प्रगति की बुनियादी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में किसी एक क्षेत्र का संघर्ष केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय संवाद और कूटनीति के माध्यम से किए जाने पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने SCO के माध्यम से सुरक्षा, संपर्क और अवसर के क्षेत्रों में ठोस सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। SCO के बिश्केक घोषणापत्र में भी आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार्य बताया गया। सदस्य देशों ने सीमा-पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के विभिन्न रूपों से मिलकर मुकाबला करने पर जोर दिया। भारत के लिए यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SCO में भारत और पाकिस्तान दोनों सदस्य हैं और इस मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आतंकवाद जैसे मुद्दे प्रमुख विषयों में शामिल रहे हैं।

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